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बनारस के नेशनल शूटर विशाल सिंह पर हमले के 11 आरोपी दोषी, 15 सितंबर को कोर्ट सुनाएगी होगी

बनारस के नेशनल शूटर विशाल सिंह पर हमले के 11 आरोपी दोषी, 15 सितंबर को कोर्ट सुनाएगी होगी
Sep 13, 2025, 01:25 PM
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Posted By Gaandiv



वाराणसी: चार साल पहले हुए नेशनल लेवल शूटर विशाल सिंह पर जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया. स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट ने 11 आरोपियों को दोषी करार दिया है. अब सभी दोषियों की सजा 15 सितंबर को सुनाई जाएगी. इस फैसले के बाद पूरे शहर में उस सनसनीखेज गोलीकांड की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है, जिसने न सिर्फ एक खिलाड़ी की जिंदगी खतरे में डाली थी बल्कि इलाके में दहशत भी फैला दी थी.



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अचानक चली गोली, दहशत में डूबा इलाका


मामला सितंबर 2021 का है. इंग्लिशिया लाइन निवासी नेशनल शूटर विशाल कुमार सिंह उस दिन दूध डेयरी के बाहर खड़े होकर एक परिचित से बातचीत कर रहे थे. तभी नकाबपोश बदमाश पीछे से आया और पिस्टल सटाकर उनके पेट में गोली दाग दी. गोली लगते ही विशाल वहीं गिर पड़े और तड़पने लगे. हमलावर ने दूसरी गोली चलाने की भी कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद एक युवक ने उसे पकड़ लिया. किसी तरह हाथ छुड़ाकर हमलावर भाग निकला. अचानक हुई वारदात से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और खुली दुकानें तुरंत बंद हो गईं.


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इलाज और परिजनों की शिकायत


गंभीर रूप से घायल विशाल को पहले सिंह मेडिकल अस्पताल ले जाया गया. हालत बिगड़ने पर उन्हें वेदांता गुड़गांव रेफर किया गया, जहां उनका ऑपरेशन और लंबा इलाज चला. घटना के बाद उनके पिता अशोक कुमार सिंह ने 12 लोगों के खिलाफ हत्या का प्रयास, लूट और साजिश रचने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था.


होटल कारोबारियों से विवाद


पुलिस की जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आईं पता चला कि विशाल सिंह विजयनगरम मार्केट स्थित कुछ होटलों में चल रही अवैध गतिविधियों का विरोध करते थे. उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत भी की थी. यही बात होटल कारोबारियों को नागवार गुजरी और उन्होंने साजिश रचकर उसपर हमला करवाया.

हत्या के प्रयास का मुख्य आरोप सरफराज, वसीम, परवेज, शाहजहां, नुसरत नूरानी, जैनुलहक, अनुज, अनूप, रतन, रवि, तौफीक और पंकज गुप्ता पर लगा. जांच में यह भी सामने आया कि पंकज गुप्ता ने विशाल को धमकी दी थी और उसी के इशारे पर गोली चलाई गई.


कोर्ट की सुनवाई और फैसला


चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की ट्रायल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. अभियोजन की ओर से कुल 12 गवाह पेश किए गए. गवाहों के बयान, पुलिस रिपोर्ट और साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने सभी 11 आरोपितों को दोषी ठहराया. गौरतलब है कि आरोपित अनूप गुप्ता उर्फ चंकी की विचारण के दौरान मौत हो गई थी, इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा समाप्त हो गया.


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अगला कदम: 15 सितंबर को सजा


अब अदालत 15 सितंबर को इन 11 दोषियों को सजा सुनाएगी. इस ऐतिहासिक फैसले का लोगों को बेसब्री से इंतजार है. लोग जानना चाहते हैं कि आखिरकार जिन लोगों ने एक खिलाड़ी की जान लेने की साजिश रची, उन्हें अदालत किस हद तक सख्त सजा सुनाती है.

यह मामला सिर्फ एक खिलाड़ी पर हमले का नहीं था, बल्कि कानून-व्यवस्था और समाज में अपराधियों के हौसले पर भी सवाल उठता था. अब कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिण परिसर, बरकच्छा (मिर्जापुर) स्थित चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2025 की एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है।डॉ. मिश्र को यह प्रतिष्ठित उपलब्धि उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचारपूर्ण कार्यों और उच्च स्तरीय शैक्षणिक योगदान के आधार पर प्राप्त हुई है। एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री की यह वैश्विक रैंकिंग शोध की गुणवत्ता, प्रकाशित शोधपत्रों के प्रभाव, उद्धरण (साइटेशन) और अन्य शैक्षणिक मानकों के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित होती है। इसमें एससीआई जर्नल और कंट्री रैंक (SCR) जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों का उपयोग किया जाता है, जो स्कोपस डाटा के आधार पर तैयार किए जाते हैं।ALSO READ: नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंतविश्वविद्यालय ने डॉ. मिश्र की इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया है। यह सम्मान न केवल बीएचयू की शोध परंपरा को नई पहचान देता है, बल्कि देश के युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. मिश्र की सफलता वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में समर्पण, गुणवत्ता और उत्कृष्टता का उदाहरण मानी जा रही है।
नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंत
नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंत
वाराणसी : सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे के खिलाफ नगर निगम का अभियान जारी है. इस क्रम में सोमवार को बीएलडब्ल्यू रोड ( ककरमत्ता ) में करीब एक बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को निगम ने पूरी अतिक्रमण मुक्त करा लिया है. बाजार दर इस भूमि की कुल कीमत करीब 100 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. दरअसल ​यह प्रकरण मौजा ककरमत्ता (परगना देहात अमानत) स्थित अराजी नंबर 411 का है, जिसके संबंध में रामनरायन पुत्र स्व. गज्जन द्वारा वर्ष 1988 में धारा 229(ख) के तहत उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य को विपक्षी बनाते हुए भूमिधरी अधिकार का दावा योजित किया गया था.वादी पक्ष का कहना था कि उनके दादा पुनवासी वर्ष 1356 व 1359 फसली से उक्त भूमि पर काबिज चले आ रहे हैं, इसलिए उन्हें स्थायी भूमिधर दर्ज किया जाए. लंबे समय से चल रहे इस कानूनी विवाद में कई बार अपील और निगरानी याचिकाएं भी दाखिल की गईं. महापौर अशोक कुमार तिवारी के निर्देश पर निगम की ओर से इस प्रकरण की प्रभावी पैरवी की गई. मामले की विस्तृत सुनवाई करते हुए न्यायालय अतिरिक्त उपजिलाधिकारी सदर (प्रज्ञा सिंह) की पीठ ने वाद संख्या 1987/2025 में पत्रावली व राजस्व अभिलेखों का गहन अवलोकन किया.अदालत ने पाया कि फसली वर्ष 1356 व 1359 खसरे के कॉलम आठ में सिंघाडा तथा कॉलम 19 में 'पोखरी दर्ज है. उप्र जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 132 के अनुसार पोखरी व तालाब सार्वजनिक उपयोग की भूमि की श्रेणी में आते हैं. ​अदालत ने धारा 132 में वर्णित सार्वजनिक उपयोग की पोखरी भूमि पर किसी असामी को पांच वर्ष से अधिक अवधि के लिए पट्टे का अधिकार नहीं दिया जा सकता और न ही उसे संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जा सकता है. अदालत ने वादी के दावे को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया तथा अराजी संख्या 411 से समस्त खातों के नाम निरस्त कर राजस्व अभिलेखों में पुनः 'पोखरी' दर्ज करने का आदेश सुनाया.ALSO READ: वाराणसी में हवाई फायरिंग करने वाले को पब्लिक ने पुलिस को सौंपा, पिस्‍टल और कारतूस बरामद...तीन जेसीबी लगाकर खुदाई शुरून्यायिक आदेश का पालन कराते हुए महापौर के निर्देश पर निगम सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी. जिस तालाब को भू-माफिया द्वारा कूड़े से पाट दिया गया था, वहां निगम ने मौके पर ही तीन जेसीबी लगाकर तालाब खोदवाना शुरू करा दिया है, ताकि पोखरे को पुनः उसके वास्तविक अस्तित्व में लाया जा सके.कब्जामुक्त कराई गई इस जमीन पर स्थित पोखरे को उसके मूल स्वरूप में सौंदर्यीकरण कर आकर्षक ढंग से विकसित किया जाएगा. पोखरे के पुनरुद्धार से क्षेत्र का भू-गर्भ जलस्रोत का स्तर (ग्राउंड वॉटर लेवल) बेहतर होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.