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रातों-रात 40 IAS अफसरों का ट्रांसफर, 15 जिलों के बदल गए DM

रातों-रात 40 IAS अफसरों का ट्रांसफर, 15 जिलों के बदल गए DM
Apr 20, 2026, 10:21 AM
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Posted By Preeti Kumari

40 IAS officers transferred overnight, DMs of 15 districts changed


उत्तर-प्रदेश में तबादले का सिलसिला अक्सर देखने को मिलता है. कुछ ऐसा ही मामला एक बार फिर से देखने को मिला है. जहां यूपी की योगी सरकार ने रातो रात 40 IAS अफसरों का ट्रांसफर कर दिया है. इसी के साथ ही 15 जिलों के डीएम भी बदले गए हैं, इनमें से 8 डीएम को एक जिले से हटाकर दूसरे जिले का डीएम बनाया गया है.


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रातों-रात हुए ट्रांसफर का जानें कारण


आईएएस अफसरों का ट्रांसफर कर दिया गया है. इसी के साथ ही 15 जिलों के डीएम भी बदले गए हैं. वहीं 2008 बैच की आईएएस अधिकारी किंजल सिंह ने 16 सितंबर 2025 से परिवहन आयुक्त के पद पर कार्यभार संभाला था, जिन्हें इस पद से हटाकर अप्रैल 2026 में माध्यमिक शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है. इसके अलावा कुछ दिन पहले केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे 2010 बैच के IAS आशुतोष निरंजन को नया परिवहन आयुक्त नियुक्त किया गया है.


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लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल को पदोन्नति के बाद देवीपाटन मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया है. आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मल्लपा बांगरी को सीएम योगी आदित्यनाथ का विशेष सचिव बनाया गया है. योगी सरकार रातों-रात किया गया तबादले के पीछे की वजह यह है कि, यूपी सीएम का यह प्रशासनिक कदम एक सर्जरी का हिस्सा है, जो प्रशासनिक कामकाज को अधिक सुचारू बनाना से लेकर पारदर्शी और तेज बनाना है. जिसके लिए अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं.


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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 कलेक्टरों का ट्रांसफर दूसरे जिले में कर दिया है. जबकि, 7 अफसरों को पहली बार डीएम के रूप में जिम्मेदारी दी गई है. जिन अफसरों को पहली बार डीएम बनाया गया है, उनमें- ब्रजेश कुमार (ओरैया), आलोक यादव (शामली), अभिषेक गोयल (हमीरपुर), इंद्रजीत सिंह (सुल्तानपुर), अन्नपूर्णा गर्ग (श्रावस्ती), नितिन गौड़ (अमरोहा) और सरनजीत कौर (रायबरेली) शामिल हैं.


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जानिए किन अफसरों का हुआ ट्रांसफर


गौरांग राठी जिलाधिकारी झांसी बने

इंद्रजीत सिंह जिलाधिकारी सुल्तानपुर बने

कुमार हर्ष जिलाधिकारी बुलंदशहर बने

अन्नपूर्णा गर्ग जिलाधिकारी श्रावस्ती

आलोक यादव जिलाधिकारी शामली

अरविन्द कुमार चौहान DM सहारनपुर

नितिन गौड़ जिलाधिकारी अमरोहा बने

अभिषेक गोयल जिलाधिकारी हमीरपुर

सरनीत कौर ब्रोका DM रायबरेली बनीं

निधि गुप्ता वत्स जिलाधिकारी फतेहपुर

घनश्याम मीना जिलाधिकारी उन्नाव

अंजमी कुमार सिंह DM लखीमपुर खीरी

इंद्रमणि त्रिपाठी जिलाधिकारी मैनपुरी

बृजेश कुमार जिलाधिकारी औरैया बने

मनीष बंसल जिलाधिकारी आगरा बने

अरविंद मलप्पा बांगरी विशेष सचिव CM बने

नितीश कुमार UPPCL के MD बने

श्रुति MD दक्षिणांचल विद्युत निगम बनीं

आशुतोष निरंजन परिवहन आयुक्त बने

किंजल सिंह सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग

दुर्गा शक्ति नागपाल मंडलायुक्त, देवीपाटन मंडल

शशि भूषण लाल सुशील प्रमुख सचिव MSME

आलोक कुमार अपर मुख्य सचिव MSME

रविंदर सिंह विशेष सचिव ऊर्जा बने

मृदुल चौधरी विशेष सचिव पर्यटन बने

अश्विनी कुमार पांडेय निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण

हर्षिता माथुर निदेशक बाल विकास विभाग

जुनैद अहमद अपर श्रमायुक्त कानपुर नगर

अनीता वर्मा सिंह विशेष सचिव खाद्य विभाग बनीं

सचिन कुमार सिंह अपर निदेशक कृषि उत्पादन

बसंत अग्रवाल निदेशक कर्मचारी बीमा योजना

हिमांशु गौतम उपाध्यक्ष, झांसी विकास प्राधिकरण

मुकेश चंद्र उपाध्यक्ष हापुड़-पिलखुवा प्राधिकरण

केशव कुमार कुलसचिव राम मनोहर लोहिया विवि

श्रुति शर्मा मुख्य विकास अधिकारी हापुड़ बनीं

गामिनी सिंगला मुख्य विकास अधिकारी बदायूं

सुनील कुमार धनवंता CDO बहराइच बने

पूजा साहू मुख्य विकास अधिकारी अमेठी बनीं

रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड CDO झांसी बने.

BHU छात्र राजनीति से लेकर कांग्रेस न छोड़ने तक, नेता अनिल ने खोले कई राजनीतिक राज
BHU छात्र राजनीति से लेकर कांग्रेस न छोड़ने तक, नेता अनिल ने खोले कई राजनीतिक राज
वाराणसी: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल श्रीवास्तव ने छात्र राजनीति, बनारस की पुरानी सियासत, कांग्रेस से अपने लंबे सफर और वर्तमान राजनीति पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति की शुरुआत गांव से पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र जीवन में हुई और BHU छात्रसंघ ने उन्हें पहचान दिलाई. अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने सनातन धर्म इंटर कॉलेज से छात्र राजनीति शुरू की, फिर DAV कॉलेज और उसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय पहुंचे. वर्ष 1978 में पश्चिमी नगर शासन के अध्यक्ष चुने गए और बाद में नगर शासन के अध्यक्ष भी बने, इसके बाद BHU छात्रसंघ चुनाव लड़ा और महामंत्री बने.उन्होंने कहा कि उस दौर में BHU छात्रसंघ चुनाव सांसद चुनाव से भी ज्यादा चर्चित होता था, राष्ट्रीय दलों की नजर रहती थी और बड़े नेता इसमें रुचि लेते थे. छात्रसंघ केवल चुनाव नहीं, बल्कि वैचारिक राजनीति की प्रयोगशाला था.“कांग्रेस को रोकने के लिए बना था मोर्चा”अनिल श्रीवास्तव ने दावा किया कि जब वे छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे, तब कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को रोकने के लिए विरोधी दलों ने संयुक्त मोर्चा बनाया था. उस चुनाव में राजेश मिश्रा, ओमप्रकाश सिंह जैसे कई बड़े नाम सक्रिय थे, उन्होंने कहा कि चुनाव बेहद ऐतिहासिक और संघर्षपूर्ण रहा.छात्रसंघ खत्म होना लोकतंत्र के लिए नुकसानउन्होंने कहा कि छात्रसंघ राजनीति खत्म होना देश की राजनीति के पतन की शुरुआत है। छात्र राजनीति से ही बड़े नेता निकलते थे। लालू यादव, नीतीश कुमार, प्रफुल्ल महंत समेत कई नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि छात्र आंदोलन सत्ता बदलने की ताकत रखते थे।उनका आरोप था कि सभी दलों ने मिलकर छात्रसंघ व्यवस्था कमजोर की। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के बाद छात्र राजनीति का प्रभाव कम हो गया.“हर दल से ऑफर मिला, लेकिन कांग्रेस नहीं छोड़ी”अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें बसपा, समाजवादी पार्टी और भाजपा से भी प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने कभी कांग्रेस नहीं छोड़ी। उनका कहना था कि कांग्रेस की विचारधारा पर उन्हें भरोसा है और देश को आजादी दिलाने वाली पार्टी कांग्रेस ही है, उन्होंने कहा, “कांग्रेस हर जाति, धर्म, भाषा और वर्ग को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है।”विरोधियों से भी रिश्ते बेहतरउन्होंने बताया कि भाजपा के कई नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं। मनोज सिन्हा, महेंद्र पांडेय, रविंद्र जायसवाल जैसे नेताओं से आज भी आत्मीय संबंध हैं। चुनावी लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन निजी रिश्ते हमेशा सम्मानजनक रहे.“जहां खड़ा होता हूं, लोग साथ जुड़ जाते हैं”अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि वे किसी से चंदा लेकर राजनीति नहीं करते। चुनाव हारने के बाद भी कार्यकर्ताओं का पैसा लौटाते हैं। शादी-ब्याह, सामाजिक कार्यक्रम और जरूरतमंदों की मदद में हमेशा आगे रहते हैं। यही कारण है कि हर दल और समाज के लोग उनसे जुड़े रहते हैं.गांडीव अखबार की पुरानी पहचान का किया जिक्रअनिल श्रीवास्तव ने कहा कि एक समय में गांडीव अखबार बनारस के हर व्यापारी घराने तक पहुंचता था और लोग शाम को उसे खरीदकर पढ़ते थे। उन्होंने कहा कि गांडीव का अपना तेवर और अलग पहचान थी। अब गांडीव डिजिटल उसी विरासत को आगे बढ़ा रहा है, उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गांडीव डिजिटल को देखें, शेयर करें और समर्थन दें.https://www.youtube.com/watch?v=uhSzJoCRqDI
अक्षय तृतीया पर काशी विश्वनाथ धाम में अनुष्ठान का आयोजन, बद्रीनारायण स्वरूप का भव्य श्रृंगार
अक्षय तृतीया पर काशी विश्वनाथ धाम में अनुष्ठान का आयोजन, बद्रीनारायण स्वरूप का भव्य श्रृंगार
On Akshaya Tritiya, rituals were organised at Kashi Vishwanath Dham, where the Badrinarayana form was decorated in a grand manner.वाराणसी: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम में विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं परंपरागत विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ. इस अवसर पर श्रीहरि विष्णु के बद्रीनारायण स्वरूप का भव्य श्रृंगार किया गया.काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा मंदिर सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए आज से पवित्र श्रावण मास तक भगवान श्री विश्वनाथ जी के विग्रह पर ‘कुंवरा’ (शॉवर) की स्थापना की जाएगी. यह परंपरागत व्यवस्था शिवलिंग पर निरंतर जलाभिषेक के उद्देश्य से की जाती है. यह परंपरा प्रत्येक वर्ष निभाई जाती है.कई फलों के रस से भगवान विश्वेश्वर का अभिषेकअक्षय तृतीया के पावन अवसर पर मध्यान्ह भोग आरती के समय भगवान विश्वेश्वर का विभिन्न फलों के रस से विशेष अभिषेक भी संपन्न किया गया. इसके अतिरिक्त, बढ़ती गर्मी को दृष्टिगत रखते हुए धाम में उपस्थित श्रद्धालुओं एवं कार्यरत कार्मिकों के मध्य बेल, नींबू एवं दही से निर्मित शीतल पेय (शरबत) का वितरण किया गया.काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास सनातन संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है, जिससे धाम में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को दिव्य पवित्र एवं आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके. अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास समस्त सनातन समाज को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता है तथा भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता लक्ष्मी से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना करता है.Also Read: काशी जनसंवाद में बेहतरीन के लिए मंडलायुक्त ने मांगे सुझाव, जनभागीदारी से समावेशी विकास पर जोरभगवान बद्रीनारायण की कृपा सदैव सभी पर बनी रहे. उधर सोमवार को घाटों पर सुबह से ही स्नान करने के लिए भीड़ लगी रही. श्रद्धालु गंगा स्नान कर तीर्थ पुरोहितों को दान-दक्षिणा देकर अक्षय फल की कामना कर रहे हैं. चांदी, दूध, चावल, शंख या सफेद मोती, गेहूं, इत्र, रेशमी वस्त्र, मसूर दाल, चने के दाल, हल्दी आदि दान में दे रहे हैं.
काशी जनसंवाद में बेहतरीन के लिए मंडलायुक्त ने मांगे सुझाव, जनभागीदारी से समावेशी विकास पर जोर
काशी जनसंवाद में बेहतरीन के लिए मंडलायुक्त ने मांगे सुझाव, जनभागीदारी से समावेशी विकास पर जोर
Divisional Commissioner seeks suggestions for better public interaction in Kashi; emphasis on inclusive development through public participationवाराणसी: शहर के बेहतर विकास पर मंथन के लिए कमिश्नरी सभागार में आयोजित काशी जन संवाद की अध्यक्षता करते हुए मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने आमजन से लिखित सुझाव मांगे. जिससे उन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके. कार्यक्रम का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से वाराणसी के सतत एवं समावेशी विकास को सुनिश्चित करना था. इसमें प्राप्त सुझावों को भविष्य की योजनाओं में शामिल किया जाएगा. कार्यक्रम में सबसे प्रमुख मुद्दा काशी में बढ़ते पर्यटन दबाव के कारण उत्पन्न हो रही यातायात व्यवस्था और पार्किंग की रही. लोगों ने सुझाव दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुदृढ़ किया जाए.शहर से बाहर शिफ्ट किया जाए रोडवेज बस अड्डा रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाए. इससे जाम की समस्या कम हो सके. जल परिवहन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया. शहर की साफ-सफाई को लेकर लोगों ने जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई. खासकर काशी की संकरी गलियों को स्वच्छ रखने पर बल दिया गया. रामनगर क्षेत्र को विकसित करने का सुझाव आया, ताकि शहर के मुख्य हिस्सों पर भीड़ का दबाव कम किया जा सके.इसके अलावा गंगा पर दो सिग्नेचर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव रखा गया और नमो घाट से लेकर आदिकेशव घाट तक के समग्र विकास की मांग की गई. अवैध कॉलोनियों का मुद्दा भी चर्चा में रहा. लोगों ने इन्हें वैध करने के लिए ठोस नीति बनाने का सुझाव दिया. वहीं हाई फ्लड लेवल के तहत गंगा के 200 मीटर के दायरे में निर्माण पर रोक को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की भी मांग उठी.Also Read: श्रद्धालु अब अपने सामान के खोने की चिंता से होंगे मुक्त, मिलेेेगी यह सुविधामंडलायुक्त ने सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया. बैठक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, पर्यावरण एवं गैर-सरकारी संगठन, महिला सशक्तीकरण से जुड़े संगठन, व्यापार एवं बाजार संघ, होटल व रेस्टोरेंट संघ, पर्यटन गाइड, परिवहन संघ, घाट समितियां, विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शामिल रहे.