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रंगभरी विवाद पर कार्रवाई, मंदिर ड्यूटी से नदारद हुए पुलिसकर्मी

रंगभरी विवाद पर कार्रवाई, मंदिर ड्यूटी से नदारद हुए पुलिसकर्मी

वाराणसी: रंगभरी एकादशी के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर में कथित अव्यवस्था और अभद्रता के आरोपों के बीच वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने त्वरित एक्‍शन लिया है. घटना का संज्ञान लेते हुए वीडियो में दिखाई दे रहे संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों को तत्काल मंदिर ड्यूटी से हटाकर पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है. साथ ही पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय विभागीय जांच के निर्देश जारी किए गए हैं.पुलिस कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी. जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मियों को फील्ड ड्यूटी से अलग रखा गया है.वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में तैनात सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पुनः कुशल एवं शालीन व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. बता दें कि रंगभरी एकादशी के अवसर पर भारी भीड़ के बीच कुछ श्रद्धालुओं और मीडिया कर्मियों ने पुलिसकर्मियों पर अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए थे. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद मामला तूल पकड़ लिया. घटना के बाद पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के पूर्व निर्देशों के पालन और व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठे.अनुशासन और संवेदनशीलता पर जोरप्रशासन ने दोहराया है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सर्वोच्च प्राथमिकता है. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए निगरानी और जवाबदेही की प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा. कमिश्नरेट की इस कार्रवाई को श्रद्धालुओं और नागरिकों के बीच विश्वास बहाल करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी.

होली त्योहार पर रंगों से आंखों को बचाने के लिए करें ये उपाय, जाने टिप्स

होली त्योहार पर रंगों से आंखों को बचाने के लिए करें ये उपाय, जाने टिप्स

वाराणसी: होली त्योहार पर रंगों से अपनी आंखों को बचाने के लिए धूप का चश्मा पहनें, हर्बल रंगों का उपयोग करें और आंखों के आसपास नारियल तेल लगाएं. रंग जाने पर रगड़ें नहीं बल्कि साफ पानी से धोएं. कॉन्टैक्ट लेंस न पहनें और आंखों को सीधे पानी की धार या गुलाल से बचाएं.होली पर आंखों की सुरक्षा के लिए मुख्य टिप्सनेत्र चिकित्‍सक डा. अनुराग टंडन के अनुसार धूप का चश्मा या गॉगल्स पहनेंयह आंखों में रंग जाने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका है.प्राकृतिक/हर्बल रंगरासायनिक रंगों की जगह हर्बल या ऑर्गेनिक रंगों का उपयोग करेंजो आंखों के लिए सुरक्षित होते हैं.आंखों के आसपास तेलआंखों के आसपास नारियल या बादाम का तेल लगाने से रंग सीधे त्वचा/आंखों में नहीं जाते.कॉन्टैक्ट लेंसयदि आप लेंस पहनते हैंतो होली खेलने से पहले इन्हें निकाल दें.रगड़ें नहींअगर आंख में रंग चला जाएतो रगड़ने के बजाय ठंडे और साफ पानी से धोएं.हाथ-मुंह धोनापानी का स्रोत पास रखें और रंग लगने पर तुरंत धोएं.क्या न करेंआंखों में ज़बरदस्ती रंग न डालेंआक्रामक खेल से बचेंऔर गंदे हाथों से आंखों को न छुएं.यदि रंग जाने के बाद भी जलनखुजली या धुंधलापन बना रहेतो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

 वाराणसी में तीन लाख पौधरोपण...350 बीघा जमीन पर हरियाली

वाराणसी में तीन लाख पौधरोपण...350 बीघा जमीन पर हरियाली

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व में गोद लिए गांव डोमरी एक मार्च को इतिहास रचा गया. इस दिन 20 हजार लोग एक साथ पौधरोपण किए. इस कार्यक्रम में करीब 350 बीघा जमीन को हरा भरा किया गया और लगभग तीन लाख पौधे रोपे गए जिसके चलते यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया.नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश की एमबीके संस्था के साथ समझौता किया गया है. यह तीसरे वर्ष से निगम को दो करोड़ रुपये की आय देगी और सातवें वर्ष तक वार्षिक आय सात करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है. यहां मियावाकी तकनीक के साथ-साथ औषधीय पौधों और फूलों की खेती भी होगी. यह केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर इको-सिस्टम विकसित करने का प्रयास है. इसमें फलों के बाग, आयुर्वेदिक खेती और फूलों की खेती का समन्वय होगा.योजना में फलदार पौधे...परियोजना के तीसरे वर्ष आम, अमरूद, पपीता, अनार जैसे फलदार पेड़ और अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय, एलोवेरा जैसे औषधीय पौधे तथा गुलाब, चमेली और पारिजात के फूलों से राजस्व आरंभ . तीसरे वर्ष निगम को दो करोड़ रुपये, पांचवें वर्ष पांच करोड़, छठे वर्ष छह करोड़ और सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक अनुमानित आय होगी.

BHU में छात्र की मौत, अंधेरे में बैरिकेडिंग से टकराई बाइक, प्रदर्शन जारी...

BHU में छात्र की मौत, अंधेरे में बैरिकेडिंग से टकराई बाइक, प्रदर्शन जारी...

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शनिवार की देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में एमएससी एग्रीकल्चर के छात्र की मौत हो गई. घटना के बाद ट्रामा सेंटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए छात्र मुआवजे एवं उचित कार्रवाई की मांग करने लगे.एग्रीकल्चर सेकंड ईयर का था छात्र जानकारी के मुताबिक छात्र, एग्रीकल्चर सेकंड ईयर का छात्र था. देर रात लगभग 12:30 बजे अपने दो दोस्तों के साथ अवेंजर बाइक से बाल गंगाधर तिलक हॉस्टल से निकला था. जैसे ही वह जे.सी. बोस हॉस्टल के पास पहुंचा, वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण उसकी बाइक बैरिकेडिंग से टकरा गई.ALSO READ : वाराणसी में तीन लाख पौधरोपण...350 बीघा जमीन पर हरियालीचिकित्सकों पर लापरवाही का आरोपइस दुर्घटना में सूरज प्रताप को सीने और पेट में गंभीर चोटें आईं. घटना के बाद साथियों ने तत्काल एंबुलेंस की मदद से उन्हें ट्रामा सेंटर पहुंचाया. आरोप है कि वहां समय पर इलाज न मिलने और औपचारिकताओं में देरी के कारण उसकी मौत हो गई.

 काशी ने रचा कीर्तमान, चीन का तोडा रिकॉर्ड...

काशी ने रचा कीर्तमान, चीन का तोडा रिकॉर्ड...

वाराणसी: पर्यावरण संरक्षण में काशी ने आज अपनी अमिट छाप छोड़ दी है. नगर निगम द्वारा सुजाबाद डोमरी क्षेत्र के 350 बीघा में विकसित किए जा रहे आधुनिक ‘शहरी वन’ में 245103 पौधे लगा कर चाइना का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इससे पहले चीन ने 2018 में 153981 पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था.महापौर व नगर आयुक्त ने किया कार्यक्रम का नेतृत्वबता दें कि, इस पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने किया. वहीँ, इस ऐतिहासिक पल को दर्ज करने के लिए 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' की टीम ऋषि नाथ के नेतृत्व में डोमारी में मौजूद रही. इस रिकॉर्ड को महज एक घंटे में पूरा कर लिया गया.गंगा घाटों के नाम पर होंगे 60 सेक्टरइस 'शहरी वन' की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट है. पूरे वन क्षेत्र को 60 सेक्टरों में विभाजित किया गया है. प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों जैसे-दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, केदार घाट, चौशट्टी घाट, मानमंदिर घाट और शीतला घाट के नाम पर रखा गया है. प्रत्येक सेक्टर में पांच हजार पौधे रोपे जाएंगे. यह न केवल पौधों का समूह होगा, बल्कि गंगा किनारे एक हरा-भरा 'मिनी काशी' का स्वरूप नजर आएगा.also read : होली त्योहार पर रंगों से आंखों को बचाने के लिए करें ये उपाय, जाने टिप्सस्मार्ट सिंचाई और आधुनिक तकनीकतीन लाख पौधों को जीवित रखने के लिए मियावाकी पद्धति के साथ आधुनिक सिंचाई प्रणाली का जाल बिछाया गया है. करीब 10,827 मीटर लंबी पाइपलाइन, 10 बोरवेल और 360 'रेन गन' सिस्टम लगाए गए हैं. साथ ही नदी किनारे की मिट्टी को बचाने के लिए शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है. पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए वन के भीतर चार किलोमीटर लंबा पाथवे भी बनाया गया है.

होलिका दहन में 'रेढ़' का महत्व और औषधीय गुण: जानिए क्यों खास है गांवों का पारंपरिक विधि-विधान

होलिका दहन में 'रेढ़' का महत्व और औषधीय गुण: जानिए क्यों खास है गांवों का पारंपरिक विधि-विधान

वाराणसी: आधुनिकता के इस दौर में जहाँ त्योहार अब केवल सोशल मीडिया पोस्ट और औपचारिकता तक सिमटते जा रहे हैं, वहीं देश के ग्रामीण इलाकों में आज भी होली अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है.गांवों में होलिका दहन से लेकर रंग खेलने तक की परंपराएं आज भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती हैं.'रेढ़' से होती है शुद्ध शुरुआतवाराणसी के स्थानीय निवासी अभिषेक गुप्ता ने ग्रामीण होली की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि होलिका दहन की प्रक्रिया में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है. उन्होंने बताया, "होलिका दहन की शुरुआत सबसे पहले 'रेढ़' (एक प्राकृतिक वनस्पति) लगाने से होती है, जिसे सबसे शुद्ध माना जाता है. इसके साथ गोइठा (उपले), कपूर और देसी घी का मिश्रण अग्नि को समर्पित किया जाता है."क्या है 'रेढ़'?अभिषेक के अनुसार, रेढ़ एक औषधीय वनस्पति है जिसकी कई स्थानों पर खेती भी की जाती है. इसका उपयोग जड़ी-बूटी के रूप में होता है और होलिका दहन में इसका प्रयोग वातावरण को शुद्ध करने के लिए किया जाता है.ठंडाई और भांग: मिटते हैं आपसी मतभेदगांवों में होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि आपसी गिले-शिकवे दूर करने का जरिया है. उत्सव के दौरान पटाखे जलाए जाते हैं और घर-घर में भांग पीसकर ठंडाई तैयार की जाती है. अभिषेक कहते हैं कि मिल-बांटकर ठंडाई पीने से आपसी मतभेद कम होते हैं और भाईचारा बढ़ता है. शाम को 'होली मिलन' के दौरान ग्रामीण एक-दूसरे की समस्याओं को साझा करते हैं और यथासंभव मदद का हाथ बढ़ाते हैं.पकवानों की खुशबू और बदलता दौरहोली के खान-पान पर चर्चा करते हुए अमित सिंह ने बताया कि गांवों में आज भी पारंपरिक गुजिया, आलू के पापड़ और मूंग की पापड़ मुख्य आकर्षण होते हैं. बड़े-बुजुर्गों और युवाओं की टोली साथ मिलकर भांग की ठंडाई तैयार करती है, जो उत्सव के आनंद को दोगुना कर देती है.ALSO READ : वाराणसी: त्यौहार के सीजन में भी फूलों का बाज़ार ठंडाबढ़ती जिम्मेदारियां और लुप्त होते बैंड-बाजेहालांकि, बदलते समय के साथ कुछ परंपराएं फीकी भी पड़ रही हैं. अविनाश पटेल ने चिंता जताते हुए कहा, "पहले लोग बैंड-बाजे के साथ पूरे गांव का भ्रमण करते थे, लेकिन आज का युवा इन परंपराओं से दूर होता जा रहा है."उन्होंने इसके पीछे का कारण 'जिम्मेदारी' को बताया. शिक्षा और रोजगार के लिए बाहर गए युवा त्योहारों पर घर नहीं लौट पाते. परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य पर काम का बोझ इतना अधिक है कि वे चाहकर भी होली के उल्लास का पूरा आनंद नहीं ले पा रहे हैं.

संपूर्ण समाधान दिवस: राजातालाब तहसील में 160 प्रार्थना पत्र, सिर्फ 8 का निस्‍तारण

संपूर्ण समाधान दिवस: राजातालाब तहसील में 160 प्रार्थना पत्र, सिर्फ 8 का निस्‍तारण

वाराणसी: जिले की राजातालाब तहसील में शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया. गहमागहमी के बीच कई विभागों से संबंधित कुल 160 प्रार्थनापत्र प्राप्त हुए, जिनमें से मौके पर केवल 8 शिकायतों का ही निस्तारण हो सका. शेष प्रार्थना पत्रों को संबंधित विभागों को जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया है. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर नगर मजिस्ट्रेट तृतीय देवेंद्र कुमार ने की.समाधान दिवस में पहुंची शिकायतकर्ताओं में शंभवी सिंह भी शामिल थीं. उन्होंने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी और उनकी बहन कियाका का नाम पैतृक संपत्ति में दर्ज नहीं हो पाया है. शंभवी के अनुसार, वह करीब एक वर्ष से तहसील के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन उसके बाद भी नामांतरण की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है. वर्तमान में संपत्ति में केवल उनकी मां का नाम दर्ज है, जिससे दोनों बहनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.यह भी पढ़ें: वाराणसी में पर्यटकों की सुविधा के लिए समिति का गठन, बेड एंड होमस्टे का करेंगे निरीक्षणएक अन्य शिकायतकर्ता संतोष कुमार ने अपने पिता की वृद्धा पेंशन पिछले छह महीनों से बंद होने की शिकायत की. उन्होंने बताया कि पेंशन बंद होने के कारण परिवार को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. संतोष कुमार ने प्रशासन से पेंशन दोबारा शुरू कराने की मांग की. समाधान दिवस के दौरान पुलिस से संबंधित मामले भी सामने आए. कुछ फरियादियों ने मारपीट और पैसे के लेनदेन से जुड़े विवादों की शिकायत की, जिस पर अधिकारियों ने संबंधित थाना अध्यक्षों को इन मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए. इसके अतिरिक्त, खाद्य आपूर्ति, बिजली, पेंशन, जल निगम सहित अन्य विभागों से जुड़ी समस्याएं भी प्रस्तुत की गईं, जिन्हें संबंधित विभागीय अधिकारियों को शीघ्र निस्तारण के निर्देश के साथ भेजा गया.इस अवसर पर तहसील प्रशासन के अधिकारी, राजस्व कर्मी और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिन शिकायतों का मौके पर निस्तारण नहीं हो पाया है, उनका प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाएगा ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके.

UP को वन ट्रिलियन डालर की आर्थिक शक्ति बनाने में कृषि की होगी बड़ी भूमिका

UP को वन ट्रिलियन डालर की आर्थिक शक्ति बनाने में कृषि की होगी बड़ी भूमिका

वाराणसी: उत्तर प्रदेश तेजी से आर्थिक विकास के रास्ते पर बढ़ रहा है. सरकार अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तदनुरूप नीतियों का अनुगमन कर रही है. प्रदेश को वन ट्रिलियन डालर की आर्थिक शक्ति बनाने मेें कृषि क्षेत्र की बड़ी भूमिका होगी. आइसार्क में आरंभ धान नीतियों पर उच्च स्तरीय नीति संवाद के निष्कर्षों को प्रदेश सरकार कृषि व किसान हित में लागू करेगी.ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आर्थििक सलाहकार केवी राजू ने कही. वह शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान, दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क व भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद के सहयोग से, आइसार्क में आरंभ दो दिवसीय उच्च स्तरीय नीति संवाद के दो दिवसीय आयोजन में प्रथम दिवस उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे.यह भी पढ़े: संपूर्ण समाधान दिवस: राजातालाब तहसील में 160 प्रार्थना पत्र, सिर्फ 8 का निस्‍तारणकार्यक्रम का मुख्य विषय “भारत में टिकाऊ एवं सुदृढ़ धान प्रणाली के लिए नीतियों का पुनर्गठन : सीख एवं प्राथमिकताएं’ है. इस दो दिवसीय कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंंध भारतीय अनुसंधान परिषद के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर डा. अशोक गुलाटी, विश्व बैंक की कृषि विशेषज्ञ डा. सौम्या श्रीवास्तव, फेडरेशन आफ सीड इंडस्ट्री आफ इंडिया के महानिदेशक डा. परेश वर्मा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक कृषि प्रसार डा. राजबीर सिंह आदि ने अपने विचार रखे. आयोजन में विभिन्न सरकारी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, शोधकर्ता, विकास सहयोगी संस्थाएं, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा किसान भाग ले रहे हैं.इसमें भारत की वर्तमान धान नीति की समीक्षा की जाएगी और भविष्य के लिए आवश्यक सुधारों पर विचार-विमर्श किया जाएगा. इस संवाद में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग ले रहे हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के सलाहकार, कृषि उत्पादन आयुक्त तथा प्रमुख सचिव प्रमुख हैं. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों, विकास संगठनों तथा निजी क्षेत्र की कंपनियों, जिनमें बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी शामिल हैं व उनके प्रतिनिधि भी इस संवाद में सहभागिता करेंगे.

क्या था रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड, जिसमें 24 साल बाद बरी हुए राम रहीम...

क्या था रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड, जिसमें 24 साल बाद बरी हुए राम रहीम...

रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आज डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को 24 साल पुराने हत्याकांड में बरी कर दिया है. हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले में बदलाव करते हुए राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया. हालांकि हाईकोर्ट ने इस केस में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों कुलदीप, निर्मल और किशन लाल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है.अक्टूबर 2002 में हुई थी हत्या...बता दें कि, सिरसा में एक स्थानीय समाचार पत्र चलाने वाले रामचंद्र छत्रपति की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा क्यूंकि, पत्रकार ने डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ सम्बंधित आरोपों के खिलाफ रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इन रिपोर्ट में पत्रकार ने डेरा प्रमुख के खिलाफ यौन संबंध के मामले में आरोप लगाए थे. मामले में जांच शुरू हुई और मामले को CBI को दे दिया गया.यह भी पढ़ें: UP को वन ट्रिलियन डालर की आर्थिक शक्ति बनाने में कृषि की होगी बड़ी भूमिकाहाईकोर्ट ने राम रहीम को किया बरीबता दें कि आरोपियों ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ दायर की थीं. हाई कोर्ट ने मामले से जुड़े सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुनने के बाद यह निर्णय दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि राम रहीम के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले. इसलिए उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है. वहीं बाकी तीन आरोपियों के खिलाफ मौजूद साक्ष्यों को अदालत ने पर्याप्त माना. कोर्ट ने इन दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा.

350 रुपए के पार पहुचा पेट्रोल, इस देश में मचा हाहाकार

350 रुपए के पार पहुचा पेट्रोल, इस देश में मचा हाहाकार

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से पाकिस्तान ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी की है. मतलब साफ है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपए (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है. इन बढ़ते दामों की वजह कुछ और नहीं बल्कि अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के साथ-साथ मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव है. जिसकी वजह से पाकिस्तान में पेट्रोल- डीजल के तेलों की कीमतों में आग लग गई है. इन दामों को देख सबसे ज्यादा कोई परेशान है तो वो है पेट्रोल-डीजल खरीदने वाले ग्राहक जिनकी जेब पर अब हद से ज्यादा बोझ पड़ने लगा है. यहीं कारण है कि ईरान-इजरायल युद्ध से चिंतित लोगों को अब इस बात की चिंता सताने लगी है कि आखिर कब तक इस बढ़ती महंगाई का दिन देखना पड़ेगा.फ्यूल खरीदने वालों को डराने लगे पेट्रोल-डीजल के दामदरअसल, पाकिस्तान में बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दाम अब रिटेल फ्यूल खरीदने वाले लोगों को डराने लगे है. इन बढ़ते दामों से पहले पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 266 (दो सौ छियासठ).17 रुपये थी, जो अब बढ़कर 321.17 रुपये (105.62) प्रति लीटर हो गई है. वहीं हाई स्पीड वाला डीजल जो अब लोगों के लिए लो होने का एहसास कराने लगा है, इसके दाम पहले 280.86 रुपये बेचा जा रहा था, जो अब बढ़कर 335.86 (छियासी) (110) रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. इन दामों को देख रिटेल फ्यूल खरीदने वाले लोग इसलिए टेंशन में आ गये है क्योंकि भारत की तुलना में अब ये कीमतें तीन गुना से ज्यादा रफ्तार पकड़ चुकी हैं. दिल्ली में पेट्रोल 94 चौरानबे.72 बहत्तर रुपये और डीजल 87सत्तासी.62 बासठ रुपये बेचा जा रहा है. ऐसे में अब आलम ये है कि, खरीदने से पहले लोग ये तक सोचने लगे है कि अगर इतने का पेट्रोल और डीजल खरीदेंगे तो खाएंगे क्या.पाक पीएम ने लोगों को दी चेतावनीअमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज आठवां दिन है. जहां ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध की वजह से तेल की इन बढ़ती कीमतों ने लोगों के रातों की नींद उड़ा दी है. पाक पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर रिटेल फ्यूल कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की जानकारी दी है, जहां उन्होंने बताया कि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस तरह का फैसला मजबूरी में लेना पड़ा है, क्योंकि, वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी का असर पाकिस्तान पर भी पड़ा है. हालांकि, पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान को मिडिल ईस्ट ने और भी मुश्किलों बढ़ा दी है. जिससे गरीब आवाम को सबसे ज्यादा जूझना पड़ेगा. मगर हमारी पाकिस्तान सरकार के पास इसके सिवा और कोई चारा नहीं बचा है.यह भी पढ़ें: क्या था रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड, जिसमें 24 साल बाद बरी हुए राम रहीम...गजब की बात तो यह रही कि, पाक सरकार की तरफ से फ्यूल के रेट बढ़ाए जाने के ऐलान से पहले लाहौर और कराची जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर लोगों की लंबी कतारें देखी गईं. इस स्थिति को देखते हुए पीएम शहबाज शरीफ ने लोगों को फ्यूल की जमाखोरी के खिलाफ पहले ही चेतावनी दे दी है. उन्होंने साफ तौर पर कह दिया है कि जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, सरकार कह रही है कि उनके पास पर्याप्त पेट्रोल है. लेकिन वह चाहती है कि फ्यूल का इस्तेमाल ज्यादा समय तक किया जा सके. क्योंकि मिडिल ईस्ट का संकट कब तक चलेगा, ये किसी को भी नहीं पता.


संस्कृत बटुक क्रिकेट टीम ने वेद मंन्त्रों के साथ टीम इण्डिया के लिए की प्रार्थना

संस्कृत बटुक क्रिकेट टीम ने वेद मंन्त्रों के साथ टीम इण्डिया के लिए की प्रार्थना

वाराणसी: जहाँ एक तरफ पूरे देश में टी 20 वर्ल्ड कप फाइनल के लिए अनेक आयोजन किए जा रहे हैं वहीं धर्म नगरी काशी में संस्कृत बटुक क्रिकेट टीम ने दोपहर माँ गंगा का अभिषेक वैदिक मंत्रो के साथ करते हुए जीत के लिए प्रार्थना की। ज्ञात हो कि ये वही बटुक क्रिकेट टीम है जिसके मैच की कमेंट्री संस्कृत भाषा में होती है। शनिवार को शास्त्रार्थ महाविद्यालय के प्राचार्य डा. पवन कुमार शुक्ला के नेतृत्व में टीम इंडिया की जीत के लिए विशेष हवन,पूजा और अभिषेक का आयोजन किया गया।हवन और पूजा...टीम इंडिया की फाइनल में जीत के लिए अहिल्याबाई घाट पर आचार्य विकास दीक्षित व आचार्य संजय उपाध्याय के नेतृत्व में वेद मंत्रों के पाठ के साथ पूजन के उपरान्त हवन किया गया।also read: 350 रुपए के पार पहुचा पेट्रोल, इस देश में मचा हाहाकारअभिषेक कर की गयी प्रार्थना...हवन के पश्चात बटुक क्रिकेट टीम ने गंगा में शुक्लयजुर्वेद के मन्त्रों के साथ अभिषेक किया गया। इस दौरान जयतु जयतु संस्कृतम् - जयतु जयतु भारतम् का जय घोष चलता रहा। कार्यक्रम संयोजक डा. पवन कुमार शुक्ला ने बताया की आज प्रातः महाविद्यालय के बटुकों ने इच्छा जातायी की हम सभी अपने देश के क्रिकेट टीम के लिए भगवान से प्रार्थना करना चाहते हैं सो इसी क्रम में यह आयोजन किया गया। इसमें प्रमुख रूप से संस्था के निदेशक डा.गणेश दत्त शास्त्री, आचार्य विकास दीक्षित,आचार्य संजय उपाध्याय,अवशेष पाण्डेय 'कल्लू महाराज',बृजेश शुक्ला,विशाल शास्त्री,आकाश पाठक, सुनील शर्मा सहित काफी संख्या में बटुक छात्र उपस्थित रहे।

 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष दर्शन ...

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष दर्शन ...

वाराणसी: आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है. यह व्यवस्था प्रातः मंगला आरती से प्रारम्भ होकर रात्रि 11 बजे तक निरंतर जारी रहेगी.इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए दर्शन मार्ग और व्यवस्था को विशेष रूप से सुगम बनाना है, ताकि इस विशेष दिवस के महत्व और महिला सम्मान के प्रति सामाजिक संवेदनशीलता में वृद्धि हो सके. भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव शक्ति का प्रतीक माना गया है. भगवान शिव स्वयं अर्धनारीश्वर के रूप में यह संदेश देते हैं कि सृष्टि के संतुलन में नारी और पुरुष दोनों का समान महत्व है. शिव और शक्ति का यह अद्वितीय स्वरूप नारी की गरिमा, सामर्थ्य और आदर का प्रतीक है.महिला दिवस के अवसर पर यह विशेष व्यवस्थाबता दें कि, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महिला दिवस के अवसर पर यह विशेष व्यवस्था की गई है. इस व्यवस्था के तहत महिलाएं श्रद्धा, भक्ति और सम्मान के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकेंगी. यह पहल न केवल महिलाओं के प्रति सम्मान प्रकट करती है, बल्कि समाज में उनकी भूमिका को भी उजागर करती है.महिलाओं के लिए इस विशेष दर्शन व्यवस्था का उद्देश्य उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान करना है, जहां वे अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें. इस अवसर पर मंदिर प्रशासन ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं, ताकि महिलाएं बिना किसी बाधा के दर्शन कर सकें.ALSO READ : किसी की औकात नहीं मुझे शंकराचार्य न माने: अविमुक्तेश्वरानंदसजाया गया मंदिर परिसर...महिला दिवस के इस विशेष आयोजन में मंदिर परिसर को सजाया गया है और महिलाओं के लिए अलग से कतार की व्यवस्था की गई है. इसके साथ ही, मंदिर में आने वाली महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध भी किए गए हैं. यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी महिलाएं बिना किसी परेशानी के बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकें.

महिला दिवस पर नारी शक्ति का उत्सव, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही महिलाएं

महिला दिवस पर नारी शक्ति का उत्सव, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही महिलाएं

वाराणसी:आज पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है.हर साल 8 मार्च को यह दिन महिलाओं के सम्मान, उनके अधिकारों और समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य महिलाओं को समान अधिकार दिलाना, उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और समाज में उनकी भूमिका को सम्मान देना है.आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं.चाहे वह शिक्षा, राजनीति, खेल, विज्ञान या व्यापार का क्षेत्र हो, महिलाएं लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और समाज में अपनी मजबूत भूमिका निभा रही हैं.महिला दिवस के अवसर पर वाराणसी समेत देश के कई हिस्सों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया.स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा महिलाओं को सम्मानित किया गया और महिला सशक्तिकरण को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए गए.कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि आज महिलाएं पहले के मुकाबले काफी आगे बढ़ रही हैं.ऐसी कोई फील्ड नहीं है जहां महिलाएं अपनी भागीदारी न निभा रही हों.उन्होंने बताया कि उनकी सफलता के पीछे परिवार का काफी सहयोग रहा है और आज भी परिवार उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है.ALSO READ : मांगी छुट्टी, हस्ताक्षर की जगह लगाना पड़ा अंगूठा.. महिलाओं का कहना है कि आज की महिलाओं को भी आगे बढ़ना चाहिए और अपने दम पर समाज में अपना मुकाम हासिल करना चाहिए.महिला दिवस हमें यह याद दिलाता है कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और उनके सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है