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होलिका दहन में 'रेढ़' का महत्व और औषधीय गुण: जानिए क्यों खास है गांवों का पारंपरिक विधि-विधान

होलिका दहन में 'रेढ़' का महत्व और औषधीय गुण: जानिए क्यों खास है गांवों का पारंपरिक विधि-विधान
Mar 01, 2026, 12:05 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी: आधुनिकता के इस दौर में जहाँ त्योहार अब केवल सोशल मीडिया पोस्ट और औपचारिकता तक सिमटते जा रहे हैं, वहीं देश के ग्रामीण इलाकों में आज भी होली अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है.गांवों में होलिका दहन से लेकर रंग खेलने तक की परंपराएं आज भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती हैं.


'रेढ़' से होती है शुद्ध शुरुआत


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वाराणसी के स्थानीय निवासी अभिषेक गुप्ता ने ग्रामीण होली की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि होलिका दहन की प्रक्रिया में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है. उन्होंने बताया, "होलिका दहन की शुरुआत सबसे पहले 'रेढ़' (एक प्राकृतिक वनस्पति) लगाने से होती है, जिसे सबसे शुद्ध माना जाता है. इसके साथ गोइठा (उपले), कपूर और देसी घी का मिश्रण अग्नि को समर्पित किया जाता है."


क्या है 'रेढ़'?


अभिषेक के अनुसार, रेढ़ एक औषधीय वनस्पति है जिसकी कई स्थानों पर खेती भी की जाती है. इसका उपयोग जड़ी-बूटी के रूप में होता है और होलिका दहन में इसका प्रयोग वातावरण को शुद्ध करने के लिए किया जाता है.


ठंडाई और भांग: मिटते हैं आपसी मतभेद


गांवों में होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि आपसी गिले-शिकवे दूर करने का जरिया है. उत्सव के दौरान पटाखे जलाए जाते हैं और घर-घर में भांग पीसकर ठंडाई तैयार की जाती है. अभिषेक कहते हैं कि मिल-बांटकर ठंडाई पीने से आपसी मतभेद कम होते हैं और भाईचारा बढ़ता है. शाम को 'होली मिलन' के दौरान ग्रामीण एक-दूसरे की समस्याओं को साझा करते हैं और यथासंभव मदद का हाथ बढ़ाते हैं.


पकवानों की खुशबू और बदलता दौर


होली के खान-पान पर चर्चा करते हुए अमित सिंह ने बताया कि गांवों में आज भी पारंपरिक गुजिया, आलू के पापड़ और मूंग की पापड़ मुख्य आकर्षण होते हैं. बड़े-बुजुर्गों और युवाओं की टोली साथ मिलकर भांग की ठंडाई तैयार करती है, जो उत्सव के आनंद को दोगुना कर देती है.


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बढ़ती जिम्मेदारियां और लुप्त होते बैंड-बाजे


हालांकि, बदलते समय के साथ कुछ परंपराएं फीकी भी पड़ रही हैं. अविनाश पटेल ने चिंता जताते हुए कहा, "पहले लोग बैंड-बाजे के साथ पूरे गांव का भ्रमण करते थे, लेकिन आज का युवा इन परंपराओं से दूर होता जा रहा है."

उन्होंने इसके पीछे का कारण 'जिम्मेदारी' को बताया. शिक्षा और रोजगार के लिए बाहर गए युवा त्योहारों पर घर नहीं लौट पाते. परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य पर काम का बोझ इतना अधिक है कि वे चाहकर भी होली के उल्लास का पूरा आनंद नहीं ले पा रहे हैं.

नगर निगम ने तोड़े लाइसेंस शुल्क वसूली में पुराने रिकॉर्ड, करोड़ों रुपये से अधिक की हुई वसूली
नगर निगम ने तोड़े लाइसेंस शुल्क वसूली में पुराने रिकॉर्ड, करोड़ों रुपये से अधिक की हुई वसूली
वाराणसी: काशी की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए नगर निगम ने राजस्व वसूली की रफ्तार तेज कर दी है. गृहकर और जलकर के साथ-साथ अब लाइसेंस विभाग भी पूरी तरह एक्शन मोड में है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक निगम लाइसेंस शुल्क के मद में कुल 4,13,58,687 रुपये की वसूली की है. इसमें 18,77,550 रुपये की धनराशि चेक के माध्यम से प्राप्त हुई है. निगम ने इस बार पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की कुल वसूली 2.11 करोड़ के रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया है.पिछले साल के मुकाबले दोगुना राजस्वगत वर्ष लाइसेंस शुल्क के मद में जहां महज 2.11 करोड़ की वसूली हुई थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा दोगुने के करीब पहुंच गया है. हालांकि निगम ने लाइसेंस शुल्क से वसूली का लक्ष्य 5.85 करोड़ रुपये निर्धारित किया है. ऐसे में 31 मार्च तक लक्ष्य हासिल होना तय माना जा रहा है. ​वहीं लाइसेंस शुल्क जमा करने के लिए निगम के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. स्मार्ट काशी ऐप के माध्यम से शहर का कोई भी व्यापारी या संस्थान घर बैठे ही अपना लाइसेंस शुल्क ऑनलाइन जमा कर सकता है. इस डिजिटल पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि वसूली की प्रक्रिया भी तेज हुई है.स्मार्ट काशी एप के माध्यम से घर बैठे करें शुल्‍क जमाअपर नगर आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च है. उन्होंने व्यापारियों से स्मार्ट काशी एप के माध्यम से जल्द से जल्द लाइसेंस शुल्क जमा करने की अपील की है. अन्यथा निर्धारित समय सीमा के भीतर लाइसेंस शुल्क जमा न करने की स्थिति में बकाया राशि पर 50 प्रतिशत का भारी जुर्माना (अर्थदंड) लगाया जाएगा. साथ ही विघिक कार्रवाई की चेतावनी दी है.यह भी पढ़ें: UGC नियम के विरोध में प्रदर्शन, वापस लेने की उठाई मांग-देशी, अंग्रेजी शराब की दुकानों और बार लाइसेंस से सर्वाधिक 1.66 करोड़ रुपये की आया हुई.-होटल एवं गेस्ट हाउस (थ्री स्टार, फाइव स्टार से लेकर छोटे गेस्ट हाउस और लॉज तक ) से लगभग 64.14 लाख रुपये.- ​निजी कोचिंग संस्थानों से 1.15 लाख रुपये.-​ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर (चार पहिया और दो पहिया वाहनों के अधिकृत सर्विस सेंटरों) से 11.60 लाख रुपये.-​नर्सिंग होम, निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लीनिकों से 85.45 लाख रुपये.​-फाइनेंस, चिटफंड और इंश्योरेंस कंपनियों से 11.40 लाख रुपये.
UGC नियम के विरोध में प्रदर्शन, वापस लेने की उठाई मांग
UGC नियम के विरोध में प्रदर्शन, वापस लेने की उठाई मांग
वाराणसी: यूजीसी 2026 के विरोध में सोमवार को काशी में व्यापक जन आक्रोश देखने को मिला. सामाजिक संगठन केसरिया भारत के बैनर तले कचहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में छात्र, युवा, अधिवक्ता और आम नागरिक सड़कों पर उतर आए और प्रस्तावित नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने इसे “काला कानून” बताते हुए इसे पूर्णत: वापस लेने की मांग की. इससे पूर्व संगठन द्वारा 27, 28 और 29 जनवरी को भी विरोध, धरना और प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थगन आदेश जारी किया गया था. इसी क्रम में कानून को पूरी तरह समाप्त कराने की मांग को लेकर सोमवार को छात्र-युवा-किसान जन आक्रोश मार्च निकाला गया.प्रधानमंत्री को सौपा ज्ञापन मार्च में शामिल होने के लिए केसरिया भारत के हजारों कार्यकर्ता वरुणा पुल स्थित शास्त्री घाट पर एकत्र हुए. इसके बाद संस्था के राष्ट्रीय संयोजक कृष्णानन्द पाण्डेय के नेतृत्व में जुलूस जिलाधिकारी कार्यालय की ओर बढ़ा, जहां प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया. प्रदर्शन के दौरान युवाओं, अधिवक्ताओं और आमजन में यूजीसी के नए नियमों को लेकर तीखा आक्रोश देखने को मिला. राष्ट्रीय संयोजक कृष्णानन्द पाण्डेय ने कहा कि जब तक इस कानून को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.यह भी पढ़ें: मंडलायुक्त ने कमिश्नरी बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई शपथ, सकारात्‍मक सहयोग की अपील कीइस दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया और यूजीसी नियमों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. केसरिया भारत व धरोहर संरक्षण के प्रदेश अध्यक्ष गौरीश सिंह तथा गौरव मिश्र ने लोगों से आंदोलन को मजबूत बनाने और कानून वापस होने तक सहयोग जारी रखने की अपील की. प्रदर्शन में आनंद मिश्र ‘बब्बू’, चन्द्रदेव पटेल, बृजेश पाण्डेय, अधिवक्ता अनुज मिश्र, अर्पित मिश्रा, अशोक पाण्डेय, राकेश त्रिपाठी, अमन सिंह, उपेंद्र सिंह, शुभम पाण्डेय, ऋषभ सिंह, शिवम उपाध्याय, अधिवक्ता अमन कुमार त्रिपाठी और अधिवक्ता रामानन्द पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
मंडलायुक्त ने कमिश्नरी बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई शपथ, सकारात्‍मक सहयोग की अपील की
मंडलायुक्त ने कमिश्नरी बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई शपथ, सकारात्‍मक सहयोग की अपील की
वाराणसी: कमिश्नरी सभागार में सोमवार को आयोजित एक समारोह में मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. कार्यक्रम में कमिश्‍नरी बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष लालचंद चौबे, महामंत्री अजय कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य पदाधिकारियों ने शपथ ग्रहण किया और अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं निष्ठा से निर्वहन करने का संकल्प लिया.न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में अधिवक्ताओं की अहम भूमिका इस अवसर पर मंडलायुक्त ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. उन्होंने आशा व्यक्त की कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारी अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ न्यायिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने में सकारात्मक सहयोग प्रदान करेंगे. मंडलायुक्त ने स्वतंत्रता आंदोलन में अधिवक्ताओं के रोल को रेखांकित करते हुए कहा गया कि देश की आजादी के बाद महत्वपूर्ण पदों पर भी अधिवक्ताओं को जिम्मेदारी दी गई. उन्होंने केशवानंद भारती समेत देश की न्यायव्यवस्था में पीआईएल की शुरुआत पर भी प्रकाश डालते हुए अधिवक्ताओं के रोल को रेखांकित किया.यह भी पढ़ें: SI भर्ती परीक्षा में 'पंडित' शब्द से जुड़े सवाल पर बवाल, वकीलों ने किया विरोध प्रदर्शनअपर आयुक्त विवेक कुमार द्वारा कार्यक्रम में निर्वाचित सभी लोगों को बधाई देते हुए विधि सम्मत कार्य में सभी को सहयोग करने हेतु कहा. उन्होंने वादकारियों को सुगम न्याय दिलाने में सभी के सहयोग की अपेक्षा की. उन्होंने सभी के उज्जवल भविष्य की कामना की. कार्यक्रम में उपायुक्त खाद्य ओमप्रकाश पटेल, सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेमप्रकाश सहित बार एसोसिएशन के सदस्य, अधिवक्ता गण तथा प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे. समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ.