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3 करोड़ की कार, रे-बैन का चश्मा और संत का भौकाल या जलवा, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

3 करोड़ की कार, रे-बैन का चश्मा और संत का भौकाल या जलवा, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
Jan 15, 2026, 08:40 AM
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Posted By Monisha Rai

वाराणसी : सतुआ बाबा की महिमा अपरंपार थी, उनका भी भौकाल कम नहीं था. विदेशी अनुयायियों से हमेश धिम रहने रहने वाले सतेुआ बाबा की जगह लेने वाले संतोष दास ने उनके बाद आश्रम की गद्दी संभाली. इस समय प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 में जहां एक ओर आस्था का सैलाब उमड़ा है, वहीं दूसरी ओर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा अपना जलवा बिखेर रहे हैं. साधु-संतों के बीच सतुआ बाबा का काफिला इन दिनों मेले का सबसे चर्चित आकर्षण के साथ सुर्खियों में बना हुआ है. सोशल मीडिया पर भी इन दिनों उनका जलवा सुर्खियों में है.

पहले लैंड रोवर डिफेंडर से मेला परिसर में एंट्री कर चर्चा में आए सतुआ बाबा ने अब अपने काफिले में पोर्श कार भी शामिल कर ली है, जिसकी अनुमानित कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है. खाक चौक क्षेत्र में स्थित उनके शिविर पहुंचते ही कार का विधि-विधान से पूजन किया गया, जहां साधु-संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में जयकारे भी लगे.


“साधन नहीं, लक्ष्य जरूरी” — सतुआ बाबा


मीडिया से बातचीत में सतुआ बाबा ने कहा कि उन्हें गाड़ियों के नाम या कीमत की जानकारी नहीं है. “मेरे लिए साधन नहीं, बल्कि मंजिल तक पहुंचना महत्वपूर्ण है.” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर उन्होंने कहा कि वे सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि सनातन और संत समाज के ध्वजवाहक हैं. लग्जरी गाड़ियों के वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. कुछ लोग इसे शाही ठाठ-बाट बता रहे हैं तो कुछ सवाल उठा रहे हैं कि आध्यात्मिक जीवन में लग्जरी का स्थान क्या है. बाबा के पास निजी विमान जैसी सुविधाओं की चर्चाएं भी सोशल मीडिया पर तैर रही हैं.


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इस पीठ के हैं पीठाधीश्‍वर


संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा काशी स्थित सतुआ पीठ के पीठाधीश्वर और जगतगुरु महामंडलेश्वर हैं. वे विष्णु स्वामी संप्रदाय से जुड़े हुए हैं और युवा संतों में उनकी अलग पहचान है. ब्रांडेड रे-बैन चश्मा, सादा वेश और आधुनिक अंदाज उन्हें भीड़ से अलग बनाता है. सतुआ बाबा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है. वे वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में कई आयोजनों में साथ नजर आ चुके हैं. माघ मेले की शुरुआत में भी योगी आदित्यनाथ उनके शिविर पहुंचे थे, जिससे उनकी नजदीकी की चर्चा और तेज हो गई.

कफ सिरप तस्‍करी के तीन वांटेड नेपाल बार्डर से गिरफ्तार, 50 हजार का इनामी विकास भी शामिल
कफ सिरप तस्‍करी के तीन वांटेड नेपाल बार्डर से गिरफ्तार, 50 हजार का इनामी विकास भी शामिल
वाराणसी : दो हजार करोड़ के कफ सीरप तस्करी के मामले में वाराणसी पुलिस को अहम सफलता हाथ लगी है. इस प्रकरण में आरोपित आजमगढ़ के नर्वे गांव निवासी 50 हजार का इनामी तस्कर विकास सिंह नरवे, मेड रेमेडी लाइफकेयर प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्जी दवा फर्म का संचालक आकाश पाठक और उसके साथी अंकित श्रीवास्तव को पुलिस कमिश्नरेट पुलिस की एसआइटी टीम ने सिद्धार्थ नगर में नेपाल बार्डर के पास से गिरफ्तार किया है. आकाश पाठक की कंपनी में तस्‍करी मामले का मास्‍टरमाइंड इनामी शुभम जायसवाल डायरेक्टर के पद पर नियुक्‍त था.जारी हुआ था लुक आइट नोटिसडीसीपी क्राइम सरवणन टी ने बताया कि गिरफ्तार तीनों आरोपितों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था. इसके बाद ये तीनों आरोपित नेपाल भागने के प्रयास में बार्डर तक पहुंच गए थे, लेकिन पुलिस की सतर्कता के कारण उन्हें दबोच लिया गया. उन्होंने बताया कि विकास सिंह देवनाथ फार्मेसी का प्राप्राइटर था. इसने 5,13,000 शीट कोडीनयुक्त कफ सीरप शैली ट्रेडर्स से खरीदे और लगभग 15 करोड़ का कारोबार करने का आरोपित है. कफ सीरप तस्करी गिरोह में इसकी भूमिका समूचे गिरोह द्वारा की गई तस्करी से कमाए गए रुपये को हैंडल करने की थी.पुलिस की जांच में विकास के कई बार दुबई जाने के सबूत मिले हैं. आकाश पाठक को शुभम ने अपने हस्ताक्षर से लाइसेंस दिलाने के लिए कंपीटेंट सर्टिफिकेट जारी किया था.विकास ने शुभम को अमित टाटा से था मिलवायाविकास सिंह नरवे ने ही शुभम जायसवाल को अमित टाटा और आलोक सिंह से मिलवाया था. विकास सिंह नरवे के खिलाफ आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी समेत कई जिलों में केस दर्ज हैं. विकास की यूपी एसटीएफ को भी तलाश लंबे समय से थी. पुलिस अब आरोपित से पूछताछ कर उसकी संलिप्तता के साथ ही अवैध संपत्तियों के बारे में जानकारी हासिल करेगी.ALSO READ ; यूजीसी के नए नियम के खिलाफ आंदोलन की आंच पहुंची काशी, जिला मुख्‍यालय पर सवर्ण समाज का प्रदर्शनइस मामले में पुलिस सख्त कदम उठा रही है. वाराणसी पुलिस की इस सफलता से तस्करी के गिरोहों में हड़कंप मच गया है. पुलिस ने इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए भी प्रयास तेज कर दिए हैं. इस गिरफ्तारी से तस्‍करी मामले में रहस्‍य सामने आएंगे. इस प्रकार की तस्करी न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह समाज में अपराध को बढ़ावा देती है. इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के बाद और भी महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आ सकती हैं, जो इस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी में सहायक सिद्ध होंगी. बतादें कि पिछले दिनों वाराणसी पुलिस ने शुभम के पिता भोला जायसवाल की करोडों की चल अचन संपत्तियों को फ्रीज किया है.
यूजीसी के नए नियम के खिलाफ आंदोलन की आंच पहुंची काशी, जिला मुख्‍यालय पर सवर्ण समाज का प्रदर्शन
यूजीसी के नए नियम के खिलाफ आंदोलन की आंच पहुंची काशी, जिला मुख्‍यालय पर सवर्ण समाज का प्रदर्शन
वाराणसी : युनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के नए नियम के खिलाफ सवर्ण आंदोलन की लपट मंगलवार को काशी जा पहुंची. वि‍रोध प्रदर्शन के बीच अपने हक और मांग को लेकर सड़क पर उतरे सवर्ण समाज ने सरकार की मंशा के विरोध में हुंकार भरी. इस दौरान कृष्णानंद पांडेय के नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों ने दैत्रा वीर मंदिर सर्किट हाउस के सामने से कलेक्ट्रेट गेट तक जुलूस निकालकर यूजीसी के नियमों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया.इस दौरान कचहरी मुख्यालय के सामने सवर्ण समाज के लोगों ने सरकार विरोधी नारे भी लगाए. यह प्रदर्शन यूजीसी द्वारा लागू किए गए नियमों के विरोध में आयोजित किया गया, जिसे सवर्ण समाज ने अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण बताया. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियम शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को बढ़ावा देते हैं और सवर्ण समाज के छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं.छात्रों ने कहा कि ये नियम न केवल उनके भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि समाज में विभाजन भी पैदा कर रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया. कृष्णानंद पांडेय ने कहा, "हम यूजीसी के नियमों के खिलाफ हैं क्योंकि ये हमारे छात्रों के लिए अवसरों को सीमित कर रहे हैं. हम सभी को समान अवसर मिलना चाहिए, और हम इस अन्याय के खिलाफ खड़े होंगे." उन्होंने यह भी कहा कि सवर्ण समाज के छात्रों को शिक्षा में समानता का अधिकार है और इस अधिकार की रक्षा के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे.ALSO READ : वाराणसी में बटुकों ने कंठी माला और धोती कुर्ता पहनकर खेला क्रिकेट, संस्‍कृत में कमेंट्रीधरने में शामिल छात्रों ने विभिन्न बैनर और पोस्टर लिए हुए थे, जिन पर उनके विरोध के कारणों को स्पष्ट रूप से लिखा गया था. छात्रों ने यह भी मांग की कि सरकार इस मुद्दे पर ध्यान दे और यूजीसी के नियमों में संशोधन करे. प्रदर्शन के दौरान कई छात्र नेताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और सरकार से अपील की कि वह सवर्ण समाज के छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से ले.इस धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए, जो अपने हक के लिए आवाज उठाने के लिए एकत्रित हुए थे. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और किसी भी प्रकार के भेदभाव को सहन नहीं करेंगे. छात्रों ने यह संदेश दिया कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ खड़े रहेंगे.
वाराणसी में बटुकों ने  कंठी माला और धोती कुर्ता पहनकर खेला क्रिकेट, संस्‍कृत में कमेंट्री
वाराणसी में बटुकों ने कंठी माला और धोती कुर्ता पहनकर खेला क्रिकेट, संस्‍कृत में कमेंट्री
वाराणसी : महादेव की नगरी में यूं तो नित कोई न कोई आयोजन होते रहते हैं लेकिन काशी आज मंगलवार को एक अनोखे क्रिकेट मैच की साक्षी बनी. इस मैचे में खेल से अधिक मनोरंजन ने लोगों को आकर्षित किया. ऐसा इसलिए क्‍यांकि बटुकों ने कंठी माला और धोती-कुर्ता पहनकर गेंद और बल्‍ले से कमाल दिखाया. इस विशेष आयोजन में बटुकों ने बल्‍ला थामकर टीका-त्रिपुण्ड लगाकर क्रिकेट खेला. इस दौरान मैच की कमेंट्री संस्कृत भाषा में की गई, जो दर्शकों के लिए कौतूहल का केंद्र रही.यह आयोजन शास्त्रार्थ महाविद्यालय (दशाश्वमेध) के 82वें स्थापनोत्सव के अवसर पर किया गया. इस बार मैच का स्थान जयनारायण इंटर कॉलेज, रामापुरा था. संस्कृत भाषा के जानकार बटुकों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया, जिससे यह आयोजन और भी विशेष बन गया. बटुकों ने साधु संतों के भेष में क्रिकेट खेलते हुए दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया. मैच के दौरान बटुकों ने न केवल क्रिकेट के चौके-छक्के लगाए, बल्कि संस्कृत में चल रही कमेंट्री ने भी माहौल को और जीवंत बना दिया.ALSO READ : सप्‍ताह में पांच दिन काम की मांग को लेकर बैंककर्मी हड़ताल पर, करोड़ों के लेनदेन प्रभावितसंस्कृत भाषा के प्रति प्रेम और सम्मान को दर्शाते हुए, इस आयोजन ने सभी उपस्थित लोगों को एक नई ऊर्जा प्रदान की. इस क्रिकेट प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बटुकों ने न केवल खेल का आनंद लिया, बल्कि संस्कृत भाषा के प्रति अपनी रुचि को भी प्रदर्शित किया. संस्कृत में कमेंट्री करने वाले कमेंटेटर ने मैच के हर पल को जीवंत कर दिया, जिससे दर्शकों को खेल का आनंद लेने में कोई कमी नहीं आई. इस प्रकार के आयोजनों से न केवल खेल को बढ़ावा मिलता है, बल्कि संस्कृत भाषा के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है. इस विशेष क्रिकेट मैच में भाग लेने वाले बटुकों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का दिल जीत लिया.