3 करोड़ की कार, रे-बैन का चश्मा और संत का भौकाल या जलवा, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वाराणसी : सतुआ बाबा की महिमा अपरंपार थी, उनका भी भौकाल कम नहीं था. विदेशी अनुयायियों से हमेश धिम रहने रहने वाले सतेुआ बाबा की जगह लेने वाले संतोष दास ने उनके बाद आश्रम की गद्दी संभाली. इस समय प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 में जहां एक ओर आस्था का सैलाब उमड़ा है, वहीं दूसरी ओर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा अपना जलवा बिखेर रहे हैं. साधु-संतों के बीच सतुआ बाबा का काफिला इन दिनों मेले का सबसे चर्चित आकर्षण के साथ सुर्खियों में बना हुआ है. सोशल मीडिया पर भी इन दिनों उनका जलवा सुर्खियों में है.
पहले लैंड रोवर डिफेंडर से मेला परिसर में एंट्री कर चर्चा में आए सतुआ बाबा ने अब अपने काफिले में पोर्श कार भी शामिल कर ली है, जिसकी अनुमानित कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है. खाक चौक क्षेत्र में स्थित उनके शिविर पहुंचते ही कार का विधि-विधान से पूजन किया गया, जहां साधु-संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में जयकारे भी लगे.
“साधन नहीं, लक्ष्य जरूरी” — सतुआ बाबा
मीडिया से बातचीत में सतुआ बाबा ने कहा कि उन्हें गाड़ियों के नाम या कीमत की जानकारी नहीं है. “मेरे लिए साधन नहीं, बल्कि मंजिल तक पहुंचना महत्वपूर्ण है.” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर उन्होंने कहा कि वे सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि सनातन और संत समाज के ध्वजवाहक हैं. लग्जरी गाड़ियों के वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. कुछ लोग इसे शाही ठाठ-बाट बता रहे हैं तो कुछ सवाल उठा रहे हैं कि आध्यात्मिक जीवन में लग्जरी का स्थान क्या है. बाबा के पास निजी विमान जैसी सुविधाओं की चर्चाएं भी सोशल मीडिया पर तैर रही हैं.
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इस पीठ के हैं पीठाधीश्वर
संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा काशी स्थित सतुआ पीठ के पीठाधीश्वर और जगतगुरु महामंडलेश्वर हैं. वे विष्णु स्वामी संप्रदाय से जुड़े हुए हैं और युवा संतों में उनकी अलग पहचान है. ब्रांडेड रे-बैन चश्मा, सादा वेश और आधुनिक अंदाज उन्हें भीड़ से अलग बनाता है. सतुआ बाबा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है. वे वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में कई आयोजनों में साथ नजर आ चुके हैं. माघ मेले की शुरुआत में भी योगी आदित्यनाथ उनके शिविर पहुंचे थे, जिससे उनकी नजदीकी की चर्चा और तेज हो गई.



