योगी सरकार और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच घमासान, धर्मयुद्ध आंदोलन के लिए किया लखनऊ प्रस्थान

वाराणसी: गौ प्रतिष्ठा को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी से धर्मयुद्ध आंदोलन का शंखनाद किया. अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश सरकार को दी गई 40 दिन की अवधि समाप्त होने से पांच दिन पहले ही आंदोलन की रणनीति के तहत लखनऊ के लिए प्रस्थान किया. बीते शुक्रवार की सुबह केदारघाट स्थित विद्या मठ आश्रम स्थित गौशाला मैं सबसे पहले गौ पूजन किया गया. इसके बाद निकलकर वह पालकी पर सवार हुए और चिंतामणि गणेश मंदिर जा पहुंचे. वहां 11 बटुकों ने मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत और स्वस्तिवाचन किया. मंदिर में गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद वह संकट मोचन हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक और बजरंग बाण का पाठ किया. इसके बाद जयकारों के साथ अपनी वैनिटी वैन में सवार होकर लखनऊ के लिए प्रस्थान किया.

जिंदा हिंदू लखनऊ चलें
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपने ही वोट से चुनी गई सरकार के सामने गौ रक्षा के लिए धर्म युद्ध करना पड़ रहा है. इस दौरान उनके शिष्यों ने लोगों के बीच एक पंफलेट वितरित किया, जिसमें लिखा था "जिंदा हिंदू लखनऊ चलें". "गौ माता की जय", "शंकराचार्य भगवान की जय", "हर हर महादेव" के उद्घोष के बीच लगभग 20 गाड़ियों के काफिले के साथ उन्होंने लखनऊ के लिए प्रस्थान किया. पत्रकारों द्वारा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान के संदर्भ में पूछे जाने पर कि "गौ माता को कोई खरोच नहीं पहुंचा सकता", स्वामी ने कहा कि यह सही समय है कि जो भी कहना है, वह कह दें. कोई पक्ष में बोलेगा, कोई विपक्ष में, लेकिन जो सच है, वह सभी जानते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जो कालनेमि हैं, वे कुछ नहीं बोलेंगे.
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संकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसा
संकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण आदि का पाठ कर लखनऊ के धर्म युद्ध यात्रा के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद निकले तो वाराणासी के बाबतपुर मार्ग पर पहुंचने के साथ ही रास्ते में जगह- जगह उनका स्वागत भी हो रहा है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह आंदोलन गौ माता की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. उनका मानना है कि गौ माता की सुरक्षा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक है. बता दें कि कांग्रेस और सपा ने भी उनके आंदोलन को समर्थन किया है.

शंकराचार्य द्वारा प्रस्तावित सभा कार्यक्रम को अभी तक नहीं मिली है अनुमति
शंकराचार्य के लखनऊ में प्रस्तावित होने वाले सभा कार्यक्रम को अभी तक किसी भी प्रकार के प्रशासनिक अनुमति नहीं मिली है. बावजूद इसके शंकराचार्य कार्यक्रम को लेकर अड़े हुए हैं. उनका मानना है कि जो भी औपचारिकताएं हैं हमने पूरी कर ली है. जो फीस है वह भी हमने जमा कर दिया है. हमें उम्मीद है कि तीन-चार दिनों के अंदर हमें अनुमति मिल जाएगी. वाराणसी प्रशासन से सहयोग के संदर्भ मे बोले शंकराचार्य प्रशासन ने हमें रोक नहीं मतलब यात्रा की अनुमति है. भीड को लेकर के बोले शंकराचार्य मुझे नहीं पता कॉल मेरे साथ है मैं यहां से अकेला निकल रहा हूं जो भी होगा साथ आएगा.



