UGC के समर्थन में BHU के बाद काशी विद्यापीठ गरमाया, छात्र बोले - नये नियम से मिलेगा समान अवसर

वाराणसी - विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच शैक्षणिक परिसरों में सरगर्मी तेज हो गई है. शुक्रवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में OBC/SC-ST एकता मंच के बैनर तले छात्रों ने एकजुट होकर यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में आवाज बुलंद की. छात्रों ने जुलूस निकालेकर प्रदर्शन किया. इस दौरान संभावित तनाव को देखते हुए प्रशासन ने पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया. बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और हर गतिविधि पर नजर रखी गई.

“बिरसा–फूले–अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने की लड़ाई”
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने ‘बिरसा–फूले–अंबेडकर’ के नारों के साथ कहा कि यह आंदोलन सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में एक कदम है. छात्रों का आरोप था कि वर्षों से विश्वविद्यालयों में जातिगत वर्चस्व कायम है और योग्य होने के बावजूद वंचित वर्गों को नेतृत्व की भूमिका से दूर रखा जाता रहा है.
गौरतलब है कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शोध छात्र मृत्युंजय तिवारी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट यूजीसी के नए नियमों की वैधता पर सुनवाई कर रहा है. अदालत ने अगली सुनवाई तक नियमों के लागू होने पर रोक लगा रखी है. इससे पहले BHU में भी ओबीसी और एससी/एसटी वर्ग के छात्रों ने इन नियमों के समर्थन में मार्च निकाला था.
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छात्रों का आरोप— विश्वविद्यालयों में व्याप्त है सामंती सोच
प्रदर्शन में शामिल छात्र राज ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों से कुछ वर्गों में डर है कि जिन्हें सदियों से हाशिये पर रखा गया, वे अब बराबरी पर आ जाएंगे. उन्होंने कहा कि जब 10 प्रतिशत EWS आरक्षण लागू हुआ, तब किसी ने विरोध नहीं किया. छात्रों का आरोप है कि कई विश्वविद्यालयों में योग्य प्रोफेसरों को दरकिनार कर एक विशेष वर्ग के शिक्षकों को विभागाध्यक्ष बनाया जाता है. उनका कहना है कि यूजीसी के नए नियम ऐसी “तानाशाही और सामंती व्यवस्था” को खत्म करने की दिशा में मददगार साबित हो सकते हैं. प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई थी.



