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हसीना और खालिदा जिया के बिना बांग्लादेश में वोटिंग, छाया सन्नाटा

हसीना और खालिदा जिया के बिना बांग्लादेश में वोटिंग, छाया सन्नाटा
Feb 12, 2026, 11:53 AM
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Posted By Preeti Kumari

बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए सुबह से ही वोटिंग जारी हैं जो अब पुरी तरह से खत्म भी हो चुकी है. इस बार 51 राजनितिक पार्टियां सत्ता हासिल करने के लिए मैदान में हैं. बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ मतदाताओं ने आज अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है. बांग्लादेश में हो रहे चुनाव में युवाओं का इस चुनाव में युवाओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि लगभग आधे मतदाता 18 से 37 साल के हैं, इनमें करीब 45.7 लाख मतदाता पहली बार वोट करने की रस्में निभाई है. इस बार के चुनाव में बड़ी संख्या में लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया हैं. महिलाएं सुबह से ही मतदान के लिए अपने घरों से निकलकर लाइनों में घंटों-घंटों भर लगकर अपनी बारी का इंतजार करने को तैयार है. उसके बाद भी उनके चेहरे पर जरा भी थकान की सिकन दिखने के बजाय वोट डाने की उत्सुकता नजर आ रही है, कुछ जगहों पर तो मतदान अधिकारी वोट डालने में बुजुर्गों की मदद भी करते नजर आ रहे हैं.


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पीएम चेहरा बन सकते है खालिदा के बेटे तारिक


वहीं, पूर्व पीएम खालिदा जिया की पार्टी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है. अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ढाका के एक मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुंचे. ऐसे में माना ये जा रहा है कि, अगर BNP चुनाव जीतता है तो खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को अगला पीएम बनने का सुनहरा मौका मिल सकता है. लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है कि जमात-ए-इस्लामी पार्टी के नेता शिफुकर रहमान और नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम भी PM पद के लिस्ट में अपना नाम शामिल कर बैठे हैं. उनका दावा है जमात-NCP समेत 11 दलों का गठबंधन सरकार बनाएगा. अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने अपना मतदान ढाका के एक मतदान केंद्र पर डाला.


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आखिर 299 सीटों पर क्यों हो रहा मतदान


दरअसल, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने पद से इस्तीफा देने के करीब 1.5 साल बाद ये चुनाव हो रहा हैं. दशकों बाद देश में पहली बार शेख हसीना और खालिदा जिया जैसी राजनीतिक हस्तियों के बिना ये चुनाव कराया जा रहा है. जिसका महौल काफी बड़ी ही फीका सा है. इस चुनाव में तारिक रहमान राजनीतिक शून्य भर रहे हैं. बांग्लादेश की वोटिंग प्रणाली 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' पर आधारित है, जहाँ 300 सदस्य सीधे चुने जाते हैं और 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.


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देश में एकसदनीय विधायिका, जतीया संसद है. साफ शब्दों में कहे तो, बांग्लादेश की संसद में 300 सीटों के लिए वोटिंग होती है, लेकिन आज जो चुनाव हो रहे है वो 299 सीटों पर ही वोट डाले जा रहे हैं, इस कम सीटों पर मतदान करने की असली वजह यह है कि, शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मौत के बाद वहां मतदान रद्द कर दिया गया है. बता दें, कुल 12 करोड़ 77 लाख मतदाता ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ प्रणाली के तहत वोट में अपनी हिस्सेदारी निभा रहे है.

काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित नई व्‍यवस्‍था, श्रद्धालुओं को होगा बेहतर अनुभव
काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित नई व्‍यवस्‍था, श्रद्धालुओं को होगा बेहतर अनुभव
वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब दर्शन व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाया जा रहा है. मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और बेहतर अनुभव देने के उद्देश्य से एप-आधारित नई व्‍यवस्‍था लागू करने का निर्णय लिया है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास एक मई से ऐप आधारित व्यवस्था शुरू करने जा रहा है. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. काशी विश्वनाथ न्यास परिषद के सीईओ डॉ. विश्वभूषण ने बताया कि इसमें श्रद्धालुओं के मूल विवरण अनिवार्य रूप से प्राप्त किए जाएंगे. कई भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति इस आधार पर उनका सामान्य, क्षेत्रीय और भाषाई वर्गीकरण किया जाएगा. इससे कई भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति कर बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा. सुरक्षा की दृष्टि से नई व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी. आगंतुकों की मूल पहचान संबंधी जानकारी सीमित अवधि तक सुरक्षित रखी जाएगी. काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अनुसार, धाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषा और क्षेत्रीय भिन्नताओं के कारण कई बार असुविधा का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए यह नई व्यवस्था शुरू की जा रही है.ई प्रणाली के तहत सुगम दर्शन, अभिषेक और अन्य विशेष सेवाओं के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का पंजीकरण एप के माध्यम से किया जाएगा. इसमें आधार संख्या सहित कुछ जरूरी विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा. इस डेटा के आधार पर श्रद्धालुओं का भाषाई और क्षेत्रीय वर्गीकरण किया जाएगा, जिससे संबंधित भाषाओं में प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की जा सकेगी. इससे श्रद्धालुओं को अधिक सहज और संतोषजनक अनुभव मिलेगा.Also Read: बुद्ध पूर्णिमा: सारनाथ बौद्ध अनुयायियों से गुलजार, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के किए दर्शननई व्यवस्था आगामी दिनों में शुरू की जाएगी यह नई व्यवस्था आगामी दिनों में शुरू की जाएगी और 1 मई 2026 के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. न्यास ने स्पष्ट किया है कि सामान्य श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क दर्शन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. काशीवासियों के लिए भी विशेष द्वार से सुबह और शाम के समय मुफ्त दर्शन की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी. मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं से इस नई व्यवस्था के सफल संचालन के लिए सहयोग की अपील की है. साथ ही, सुझाव देने के लिए आधिकारिक वेबसाइट और ईमेल के माध्यम से अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है.https://www.youtube.com/watch?v=OxmuubD2ofQ
बुद्ध पूर्णिमा: सारनाथ बौद्ध अनुयायियों से गुलजार, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के किए दर्शन
बुद्ध पूर्णिमा: सारनाथ बौद्ध अनुयायियों से गुलजार, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के किए दर्शन
Buddha Purnima: Sarnath buzzes with Buddhist followers, offering prayers to the relics of Lord Buddhaवाराणसी: वैशाख बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर शुक्रवार को सारनाथ गुलजार है. इस अवसर पर सुबह मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर में हजारों बौद्ध अनुयायी भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष का दर्शन पूजन कर निहाल हुए. दिन भर बौद्ध भिक्षुओं की चहल पहल बनी रही. मंदिर और मठों में विशेष सजावट की गई. बौद्ध मंदिर के विहाराधिपति भिक्षु आर सुमित्ता नन्द थेरो के नेतृत्व में हीरा मोती से जड़ित फ्लास्क में रखा बुद्ध अस्थि अवशेष मन्दिर के हाल में दर्शन को रखा गया.जापानी बौद्ध मंदिर में किए दर्शन पूजन थाईलैंड, वियतनाम, श्रीलंका के साथ महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार के बोध गया, के अलावा यूपी के श्रावस्ती, कुशीनगर, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली,अन्य जिलों से बौद्ध अनुयायी एंव स्थानीय बौद्ध मठ के बौद्ध भिक्षुओं ने बुद्ध अस्थि अवशेष के दर्शन किये. इस दौरान भिक्षु चंदिमा, भिक्षु शीलवश, भिक्षु धम्म रत्न, भिक्षु रत्नाकर, सहित थाई, तिब्बती,जापानी, वियतनाम, कम्बोडिया बौद्ध मंदिर के बौद्ध भिक्षु शामिल रहे. इसके पूर्व मन्दिर में सुबह 6 बजे विश्व शांति के लिए बौद्ध भिक्षुओं ने पूजा की. इसके साथ यहां आए बौद्ध अनुयायियों ने सारनाथ के कम्बोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, तिब्बती, जापानी बौद्ध मंदिर में दर्शन पूजन किए.Also Read: कमर्शियल LPG सिलेंडर के संग महंगा हुआ 5 किलो वाला 'छोटू', जानें दामों में कितनी बढ़ोतरीबुद्ध पूर्णिमा पर सारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन दान किया गया. इसके पहले पहला भोजन भिक्षु चण्डपदुम लेकर भगवान बुद्ध के चढ़ाया गया. धम्म शिक्षण केंद्र के प्रभारी भिक्षु चंदिमा ने बताया कि मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर परिसर में सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक भोजन की व्यवस्था की गई. इस दौरान सारनाथ में दुकानों पर भी भीड देखी गई. अवकाश होने और मौसम के तकाजे के कारण आम लोग भी बडी संख्‍या में लोगा पहुंचे.https://www.youtube.com/watch?v=OxmuubD2ofQ
मजदूर दिवस पर बड़ा सवाल—क्या सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं अधिकार...
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वाराणसी: आज पूरे देश में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवसयानी मजदूर दिवस उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है. यह दिन श्रमिकों के संघर्ष, उनके अधिकारों और समाज के निर्माण में उनके अहम योगदान को याद करने के लिए समर्पित है.मजदूर दिवस की शुरुआत 19वीं सदी में श्रमिकों के काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर हुए आंदोलनों से जुड़ी है.भारत में पहली बार 1 मई 1923 को चेन्नई में इस दिवस को मनाया गया था, जिसकी पहल हिंदुस्तान लेबर किसान पार्टी ने की थी.आज के दिन विभिन्न श्रमिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा रैलियां, संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.वाराणसी सहित प्रदेश के कई जिलों में मजदूरों को उनके अधिकारों, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल को लेकर जागरूक किया जा रहा है.विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते समय के साथ मजदूरों की भूमिका और चुनौतियां भी बदल रही हैं.खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को आज भी रोजगार की अस्थिरता, कम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.also read:कमर्शियल LPG सिलेंडर के संग महंगा हुआ 5 किलो वाला 'छोटू', जानें दामों में कितनी बढ़ोतरीसरकार द्वारा श्रमिकों के हित में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता जमीनी स्तर पर अब भी महसूस की जा रही है.मजदूर दिवस के अवसर पर लोगों ने श्रमिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके बेहतर भविष्य और अधिकारों की सुरक्षा का संकल्प लिया.