Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

मासूम संग दरिंदगी, आरोपी हकीम गिरफ्तार

मासूम संग दरिंदगी, आरोपी हकीम गिरफ्तार
Dec 04, 2025, 07:56 AM
|
Posted By Gaandiv

वाराणसी - कोतवाली के एक इलाके में रहने वाली सात साल की मासूम के साथ एक कथित हकीम के द्वारा दरिंदगी करने का मामला प्रकाश में आया. मासूम बच्ची के परिजनों के साथ स्थानीय लोगों ने 65 वर्षीय दरिंदे हकीम को पकड़ कर कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया है. इस मामले में इंस्पेक्टर कोतवाली दया शंकर सिंह ने बताया कि पीड़िता की बड़ी बहन के तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी हकीम के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है. वहीं, बच्ची के मेडिकल मुयाना के आधार पर विवेचना कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी.


मासूम की मां का निधन हो चुका है. पिता और चार भाई बहनों के साथ वह रहती है. पीड़िता की बड़ी बहन ने कोतवाली थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उनकी बहन घर में सोई थी. बुधवार भोर में कटेहर इलाके में रहने वाला 65 वर्षीय महमूद अली वहां पहुंचा और बच्ची को उठा कर अपने साथ घर ले गया. जहां पर महमूद ने अपना मुंह काला किया, बच्ची किसी प्रकार वहां से भाग कर घर आई और अपने परिजनों को आपबीती बताई.

मासूम के परिजनों के साथ स्थानीय लोग आरोपी के घर पहुंचे और उसे पकड़ कर कोतवाली थाने ले गए. घटना के संबंध में इंस्पेक्टर कोतवाली दया शंकर सिंह ने बताया कि पीड़िता की बड़ी बहन से तहरीर लेकर मामले की जांच शुरु कर दी गई है. बच्ची का मेडिकल मुआयना कराने के साथ उसका मौखिक और वीडियो के माध्यम से बयान दर्ज किया जाएगा. इधर, आरोपी महमूद के खिलाफ पाक्सो समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा जाएगा.


मासूम के पिता मजदूरी करने का काम करते हैं, जबकि दस वर्षीय भाई चाय की दुकान पर काम कर घर के भरण-पोषण में मदद करता है. उसकी बड़ी बहन अपने ससुराल रहती है. उसे जब छोटी बहन के साथ दरिंदगी होने की जानकारी मिली तो वह रोते हुए घर पहुंची. उसने पुलिस से आरोपी महमूद को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की गुहार लगाई है.

दरिंदगी के मामले में पकड़े गए आरोपी महमूद अली कटेहर इलाके में रहता है और खुद को हकीम बताता है. अपने दवा खाने के नाम पर उसने विजिटिंग कार्ड भी प्रिंट करवा रखा है. जब महमूद के घिनौने करस्तानी की जानकारी इलाके में लोगों को हुई तो सब हैरत में रह गए; महमूद अक्सर घूमते-टहलते बच्ची के घर जाकर उसके पिता से मिलता था.


ALSO READ: काशी तमिल संगमम - तमिलनाडु से आया दूसरा दल, डमरू वादन और पुष्पवर्षा के बीच हुआ भव्य स्वागत

वंदे भारत एक्सप्रेस में तकनीकी खराबी, चार घंटे की मशक्कत के बाद रवाना हुई ट्रेन...
वंदे भारत एक्सप्रेस में तकनीकी खराबी, चार घंटे की मशक्कत के बाद रवाना हुई ट्रेन...
वाराणसी: खजुराहो के लिए रवाना हुई वंदे भारत एक्सप्रेस रविवार सुबह तकनीकी खराबी का शिकार हो गई, जिसके चलते ट्रेन को वाराणसी जंक्शन पर एहतियातन रोकना पड़ा.ट्रेन के पिछले पैंटोग्राफ में आई तकनीकी समस्या के कारण रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए.घटना के बाद उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारियों में हड़कंप मच गया और मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर शुरू कराया गया.जानकारी के अनुसार गाड़ी संख्या 26506 वंदे भारत एक्सप्रेस सुबह निर्धारित समय पर बनारस स्टेशन से रवाना हुई थी, लेकिन कुछ ही देर बाद तकनीकी गड़बड़ी सामने आने पर इसे वाराणसी जंक्शन पर रोक दिया गया.सूचना मिलते ही उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और मरम्मत कार्य की लगातार निगरानी करते रहे.दोनों रेलवे जोनों के इंजीनियरों और कर्मचारियों के समन्वय से खराबी दूर करने का कार्य तेजी से किया गया.मरम्मत के दौरान गाड़ी के अग्रिम पैंटोग्राफ की भी विस्तृत जांच की गई.सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि होने के बाद ट्रेन को सुबह 9:35 बजे अपने गंतव्य के लिए रवाना किया गया. इस दौरान ट्रेन लगभग चार घंटे सात मिनट की देरी से चली.रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा. ट्रेन का वातानुकूलित सिस्टम लगातार संचालित रखा गया तथा यात्रियों को नाश्ता, जलपान और पेयजल उपलब्ध कराया गया.वहीं प्लेटफॉर्म पर वाणिज्य विभाग, रेल सुरक्षा बल और जीआरपी के कर्मचारी लगातार मौजूद रहे और यात्रियों को आवश्यक सहायता प्रदान करते रहे.रेलवे अधिकारियों के अनुसार तकनीकी खराबी के कारणों की जांच कराई जा रही है.रेलवे ने कहा कि त्वरित कार्रवाई, बेहतर समन्वय और प्रभावी संकट प्रबंधन के चलते स्थिति पर जल्द काबू पा लिया गया और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई.
ऑटो चालक के बेटे अभय ने हांगकांग में रचा इतिहास, जीता कांस्य पदक
ऑटो चालक के बेटे अभय ने हांगकांग में रचा इतिहास, जीता कांस्य पदक
Auto driver's son Abhay creates history in Hong Kong, wins bronze medalवाराणसी: संकल्प, संघर्ष और मेहनत के दम पर वाराणसी के अभय कुमार दुबे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहरा दिया, ऑटो चालक पिता के बेटे अभय कुमार दुबे ने रविवार को हांगकांग (चीन) में चल रही एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप अंडर-20 में चार गुणों चार सौ मीटर रिले रेस में कांस्य पदक जीतकर पूरे पूर्वांचल को गौरवान्वित कर दिया. भारतीय पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम में शामिल अभय कुमार दुबे ने अपने साथियों के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए 3.05.54 का समय निकाला और भारत को कांस्य पदक दिलाया.उपलब्धि से शहर में खुशी की लहर दौड़ीवाराणसी के विकास इंटर कॉलेज के छात्र अभय कुमार दुबे की इस उपलब्धि से शहर में खुशी की लहर दौड़ा दी है। एथलेटिक्स में लंबे समय बाद वाराणसी के किसी खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीता है. अभय की सफलता के पीछे उसके परिवार का संघर्ष भी उतना ही बड़ा है.Also Read: काशी में बढ़ रही नावों की संख्या, नहीं मिला किसी को भी लाइसेंसकॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि अभय के ऑटो चालक पिता प्रेम चंद्र दुबे सीमित संसाधनों के बावजूद अभय ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया. इसी के आगे उन्होंने कहा कि अभय की इस सफलता से जिले के अन्य खिलाड़ियों का भी मनोबल बढ़ेगा, हांगकांग से लौटने पर अभय का भव्य स्वागत किया जाएगा.बड़ा लालपुर स्टेडियम में तैयार हुआ चैंपियनअभय कुमार दुबे पिछले चार वर्षों से डॉ. भीमराव अंबेडकर क्रीड़ा संकुल, बड़ा लालपुर में क्रीड़ा अधिकारी डॉ. मंजूर आलम अंसारी से प्रशिक्षण ले रहा है। उसकी मेहनत और अनुशासन ने आज उसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
काशी में बढ़ रही नावों की संख्या, नहीं मिला किसी को भी लाइसेंस
काशी में बढ़ रही नावों की संख्या, नहीं मिला किसी को भी लाइसेंस
The number of boats is increasing in Kashi, but no one has got a license.Varanasi News: वाराणसी में नावों के पंजीकरण की प्रक्रिया एक वर्ष से चल रही है, लेकिन अब तक एक भी नाव का पंजीकरण नहीं हो सका है. गंगा में नावों की संख्या लगातार बढ़ रही है. प्रशासन एक लाइसेंस पर 10 नावों के संचालन की व्यवस्था लागू करने के साथ 100 इलेक्ट्रिक और मोटरबोट को सीएनजी में परिवर्तित कर चलाने की योजना बना रहा है.एक साल से चल रही प्रक्रिया, फिर भी नहीं मिला लाइसेंस गंगा में चल रही नावों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया एक साल से चल रही है, लेकिन एक भी नाव को लाइसेंस नहीं मिला है. पुराने एक नाव के लाइसेंस पर नाविक 5 से 10 नाव चला रहे हैं. इस कारण गंगा में ट्रैफिक भी बढ़ा है. स्थानीय पुलिस इनकी नाव जब्त भी नहीं कर पा रही है. गंगा में बेलगाम नावों की संख्या से आए दिन घटनाएं और मारपीट किसी भी दिन बड़े हादसे का रूप ले सकती है, नौका विहार में बंपर कमाई के चलते कई नई बड़ी नावें गंगा में उतरने के लिए लाइन में हैं. नगर निगम की ओर से महज 1217 नावों को ही लाइसेंस जारी किया गया है, जबकि संचालन 4000 से अधिक नावों का हो रहा है.नावों का चालान हुआ है पहचानना मुश्किलदरअसल, लाइसेंस देने का अधिकार पहले नगर निगम को था. डेढ़ साल से आरटीओ और आईडब्ल्यूएआई को जिम्मेदारी दी गई है, जब से काम इन दो विभागों को मिला है तभी से लाइसेंस की प्रक्रिया शिथिल पड़ गई है, हालांकि, नाविकों की मनमानी पर कार्रवाई में जल पुलिस कोई कसर नहीं छोड़ रही. आए दिन नावों का चालान किया जा रहा है. पुलिस को यह समस्या हो रही है कि नावों को जब्त करने की कोई जगह नहीं है. नाविक सभी नावों को एक जैसा रंग दे रहे हैं जिससे किस नाव का चालान हुआ है पहचानना मुश्किल हो जा रहा है.नाव की संख्या बढ़ने से गंगा में बढ़ा ट्रैफिक गंगा में नावों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक बढ़ गया है, इस समय मौसम सामान्य न होने से बहुत नावें नहीं दिख रही हैं. ट्रैफिक और सवारियों की ओवरलोडिंग के कारण आए दिन घटनाएं हो रही हैं. इस साल की शुरुआत से अब तक तीन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं. 100 इलेक्ट्रिक और सीएनजी बोट चलाने की सरकारी योजना के तहत गंगा में आने वाले समय में 100 इलेक्ट्रिक नावों को लांच किया जाएगा. मोटरबोट को सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा. इसे माझी व नाविक समाज के लोगों की सहभागिता से योजना से जोड़ा जाएगा, इसके लिए बीते दिनों मंडलायुक्त की अध्यक्षता में बैठक भी हुई है.मोटर बोट का हल नहींगंगा में लाख प्रयासों के बाद भी प्रशासन और अन्य विभागों को मोटर बोट का विकल्प नहीं मिल पाया है. इसके लिए पिछले 10 वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं, वर्ष 2017 में नावों पर सोलर सिस्टम और 2021 से 2023 तक सीएनजी इंजन लगाए गए, लेकिन इनमें से कोई भी प्रयोग सफल नहीं हो सका. मौजूदा समय में गंगा में डीजल वाली मोटर बोट ही संचालित हो रही हैं, जिनसे होने वाले प्रदूषण का अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं निकल पाया है. वर्ष 2017 में टाटा की एसोसिएट कंपनी टेरा की ओर से 40 नावों का चयन कर उन पर सोलर पैनल लगाए गए थे, इसमें प्रति नाव करीब सात लाख रुपये खर्च हुए.Also Read: क्वींस कॉलेज में प्रधानाचार्य का तबादला, चित्रकूट से आएंगे नए प्राचार्य