CM फडणवीस ने कहा- 'मुंबई का मेयर मराठी हिंदू ही बनेगा...'

बनारस: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक कार्यक्रम ‘पावर प्ले' में आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानि (BMC) चुनावों को लेकर कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि मुंबई में गैर-मराठी भाषा के लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं और कुछ तत्व केवल प्रचार-प्रसार पाने के लिए इन लोगों को अपना निशाना बनाते हैं. लेकिन राज्य सरकार ऐसी हरकतों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा. देवेंद्र फडणवीस ने बीएमसी चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति का भी जिक्र करते हुए कहा उनकी सरकार विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी. इसलिए मुंबई का मेयर हिंदू मराठी ही होगा. यह बयान चुनावी समीकरणों को लेकर बड़ा संकेत माना जा रहा है.

BMC चुनाव में BJP को कितना खतरा
वहीं सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मराठी भाषा के बीच चुनाव का जिक्र किया, जहां उन्होंने कहा कि विधानसभा से अच्छा परिणाम तो हमें यकीनन बीएमसी चुनाव में मिलेगा, क्योंकि विधानसभा चुनाव के समय वोटर कुछ असमंजस में थे. लेकिन अब वो बिल्कुल असमंजस में नहीं है क्योंकि उन्हें पता है कि किसके साथ रहना है. इसलिए मैं कह रहा हूं कि विधानसभा से अच्छे परिणाम नगर पालिका चुनाव में देखने को मिलेंगे.

वजह साफ है, एनडीए सरकार का विज़न मुंबई को वाइब्रेंट और सस्टेनेबल सिटी के रूप में विकसित करना है. सरकार ने रिडेवलपमेंट ड्राइव शुरू की है ताकि मराठी व्यक्तियों के लिए सस्ती आवास उपलब्ध हो सकें, और धारावी में भी लोगों को घर देने का काम चल रहा है. हमने मुंबई में रिडेवलपमेंट शुरू किया है ताकि मराठी मानुष को किफायती घर मिलें, धारावी में भी लोगों को घर दे रहे हैं.
सिंगल टिकट की हो रही प्लानिंग
महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि पिछले पांच साल में मुंबई में 437 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क शुरू किया गया है. उनके मुताबिक, “दिल्ली को इसमें 20 साल लगे, हमने पांच में कर दिखाया.” उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार रोड कनेक्टिविटी और BEST सेवाओं का विस्तार कर रही है और मुंबई की लाइफलाइन लोकल ट्रेन नेटवर्क को अपग्रेड किया जा रहा है. सबअर्बन रेलवे में मेट्रो-जैसे AC कंपार्टमेंट लाए जा रहे हैं. जिसमें सिंगल टिकट प्लान पर काम हो रहा है.

इसी बीच एनडीए के भीतर मतभेदों पर सवाल के जवाब में फडणवीस ने कहा कि गठबंधन पूरी तरह स्थिर है और “आने वाले पांच साल तक साथ रहेंगे.” डिप्टी सीएम और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे का दिल्ली जाना अक्सर निजी कारणों की वजह से होता है, विशेषकर अपने पोते से मिलने के लिए होता है, जिसे बेवजह राजनीतिक संकेत मान लिया जाता है.



