बीएचयू में दैनिक वेतन भोगी एवं संविदा कर्मियों ने दिया धरना , सामने आई यह वजह

वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने आज अपने लंबित मांगों को लेकर केंद्रीय कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना प्रदर्शन किया. कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा वर्षों से किए जा रहे उनके शोषण और अनदेखी ने अब उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है.
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने मांग की कि उन्हें स्थायी किया जाए, आउटसोर्सिंग की प्रथा को तुरंत समाप्त किया जाए और होने वाली जूनियर क्लर्क की परीक्षा की स्थगित किया जाए . उनका कहना है कि यदि प्रशासन इन बुनियादी मांगों पर ठोस आश्वासन दे दे, तो धरना तत्काल समाप्त किया जा सकता है.
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से विश्वविद्यालय में लगातार कार्यरत हैं. कई कर्मचारी तो इससे भी अधिक वर्षों से सेवा दे रहे हैं. इसके बावजूद 2019 में विश्वविद्यालय द्वारा कराई गई भर्ती परीक्षा के चलते नए कर्मचारियों को ऊंचे पद और अधिक वेतन दिया गया, जबकि वर्षों से सेवा दे रहे पुराने कर्मचारियों को न तो पदोन्नति मिली और न ही वेतन वृद्धि.
कर्मचारियों का आरोप है कि इतने लंबे समय तक काम करने के बावजूद उनके वेतन में केवल 10 से 50 रुपये तक ही बढ़ोतरी की गई है, जो उनके अनुसार बेहद अपमानजनक है. वहीं नए आने वाले कर्मचारियों को न केवल इनसे अधिक वेतन दिया जा रहा है बल्कि कई मामलों में वे अनुभवहीन और कम सक्षम भी साबित हो रहे हैं.
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अनुभव की अनदेखी और रोजगार सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों में लगातार चिंता बढ़ती जा रही है. उनका कहना है कि अगर भर्ती प्रणाली इसी तरह चलती रही तो पुराने कर्मचारियों का भविष्य पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगा.
धरने पर मौजूद कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और होने वाली जूनियर क्लर्क की परीक्षा को स्थगित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.



