प्लेन क्रैश में डिप्टी CM अजित पवार का निधन, नेताओं ने की शोक व्यक्त

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानि (NCP) प्रमुख अजित पवार इस दुनिया में नहीं रहे. जी हां, बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनका प्लेन अचानक से क्रैश हो गया. जिसमें अजित पवार के सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर समेत 5 लोगों की जान चली गई है. बताया जा रहा है कि, डिप्टी सीएम अजित पवार महाराष्ट्र पंचायत चुनाव के लिए जनसभा को संबोधित करने के लिये बारामती के लिए रवाना हुए थे, पर अफसोस की नियती को कुछ और ही मंजूर था.

पायलट की लापरवाही से 5 की जान
वहीं इस हादसे पर महाराष्ट्र एविएशन डिपार्टमेंट का कहना है कि, विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए अप्रोच कर रहा था. जहां पहली बार में पायलट को रनवे साफ दिखाई ना देने पर वह दुबारा से विमान को ऊंचाई पर ले गया. मतलब साफ है, पहली कोशिश नाकाम होने की वजह से बारामती के रनवे-11 पर दोबारा लैंडिंग की कोशिश की गई, तभी विमान रनवे से फिसलकर क्रैश हुआ और फौरन आग का गोला बन गया. माना ये जा रहा है कि लैंडिंग के दौरान पायलट ने कोई इमरजेंसी सिग्नल नहीं दिया था. जिसके चलते इस तरह का भयानक हादसा हुआ है.

प्लेन क्रैश हादसे में डिप्टी सीएम की मौत होने की खबर से महाराष्ट्र की राजनीति में शोक की लहर दौड़ पड़ी. ये दुखद घटना को देख अजित पवार के चाचा शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने अपना पूरा दर्द बयां कर सोशल मीडिया पर लिखा है- Devasted यानी हद से अधिक स्तब्ध या परेशान. इस घटना पर महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस ने दुख जताते हुए आज स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी है, साथ ही राज्य में 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा भी की है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संग कई नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया है.

अजित पवार का अधूरा रह गया ये सपना
अजित पवार का एक सपना था, जो कि अधूरा सा रह गया. जिसके बारे में आज हम आपको बताएंगे. 22 जुलाई 1959 (उनसठ) को आशा और अनंतराव पवार के घर जन्मे अजित पवार ने 1982 (बयासी) में अपने चाचा (उनके पिता के छोटे भाई) शरद पवार के नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में कदम रखा. राजनीति में उनका सफर छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के पद पर हुआ, पर अफसोस कि वो कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए और सीएम पद की उनकी तमन्ना अधूरी सी रह गई. हालांकि, अनुभवी राजनेता 66 (छाछठ) साल के अजित पवार की मुख्यमंत्री बनने की इच्छा किसी से भी छिपी नहीं थी, पिछले साल महाराष्ट्र दिवस के मौके पर डिप्टी सीएम अजित पवार ने मुख्यमंत्री बनने की अपनी दिली ख्वाहिश जाहिर कर कहा कि, उन्हें अब तक सीएम बनने का मौका नहीं मिल सका, लेकिन भविष्य में जीते जी ये सपना जरूर पूरा होगा.

जुलाई 2023 में BJP और शिवसेना गठबंधन सरकार में शामिल होने से पहले वे नवंबर 2019 में उपमुख्यमंत्री पद पर तैनात थे, जब देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे थे, लेकिन उनकी सरकार भी मुश्किल से दो या तीन दिन ही चल सकी थी. खास बात तो यह है कि अजित पवार अगले महीने 23 फरवरी को मुंबई में राज्य विधानमंडल का बजट सत्र शुरू होने पर 2026-27 का बजट पेश करने वाले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि इससे पहले ही उनकी सांसे ही थम जाएंगी.
राजनीतिक करियर के लिए नाटकीय रहे अजित
दरअसल, साल 2019 का दौर अजित पवार के राजनीतिक करियर के लिए किसी नाटकीय से कम नहीं था. अजित पवार ने अपने चाचा और पार्टी संरक्षक शरद पवार के खिलाफ ऐसा पासा पलटा कि महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल सा आ गया, क्योंकि अपने ही चाचा के खिलाफ अजित पवार खुली बगावत कर बैठे थे. उन्होंने देवेन्द्र फड़नवीस को सीएम बनाने के लिए बीजेपी के साथ अप्रत्याशित गठबंधन किया और खुद उपमुख्यमंत्री बन बैठे. लेकिन उन्होंने तीन दिन बाद इस्तीफा दे दिया, और तो और बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार से भी अपना समर्थन वापस ले लिया. इसी के चलते फड़णवीस को इस्तीफा देने के लिए मजबूर तक होना पड़ा था.

फिर क्या फड़णवीस के इस इस्तीफे ने राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी. लेकिन अजित पवार की जिंदगी ने ऐसा खेल खेला कि दिसंबर 2019 में अपने चाचा के साथ फिर से वापस आ गए और उद्धव ठाकरे के महा विकास अघाड़ी गठबंधन के नेतृत्व में उपमुख्यमंत्री के रूप में सरकार में शामिल हो गए. पर जुलाई 2023 में इस महा विकास अघाड़ी सरकार के पतन के बाद से अजीत पवार ने एक बार फिर अपने चाचा के खिलाफ विद्रोह किया. इससे उनकी पार्टी में एक बड़ी फूट पड़ गई और वे भाजपा-एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सरकार का दामन थाम लिया. फिलहाल, इस विमान दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

