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अटल से नवीन युग तक का सफर, किस-किस ने संभाली BJP अध्यक्ष की कमान

अटल से नवीन युग तक का सफर, किस-किस ने संभाली BJP अध्यक्ष की कमान
Jan 21, 2026, 12:23 PM
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Posted By Preeti Kumari

भारतीय जनता पार्टी में एक बड़ा बदलाव हुआ है. जी हां, भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के कंधों पर अब राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. बीते 14 दिसंबर 2025 को नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, जिसके बाद से चुनावी प्रक्रिया की औपचारिकता पूरी होने के बाद से बीजेपी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन के नाम पर मुहर लग गई. जिसने ये तय कर दिया कि आज के बाद से नितिन नवीन राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर तैनात रहेंगे. इस पद के लिए उन्होंने सबसे पहले नामांकन दाखिल किया था, जिसमें वो निर्विरोध चुने गए. इन सभी रश्मों-रिवाजो के बाद से पार्टी ने इस नाम को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए घोषित कर दिया. बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने से पहले उन्होंने राजधानी दिल्ली के धार्मिक स्थलों पर जाकर मत्था टेका और अपने इस नए सफर के लिए माता का आशीर्वाद लिया. इस नाम के तहत अब बीजेपी का पूरा फोकस भविष्य की लीडरशिप पर जा टिका है. यहीं कारण है कि पार्टी ने 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन का नाम चुना है. उनका कार्यकाल तीन साल के लिए होगा.


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गौरतलब है कि, बिहार के बांकीपुर सीट से पांच बार के विधायक रहे नितिन नवीन को पिछले साल पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था, साल 2019 में पार्टी में कार्यकारी अध्यक्ष पद का सृजन हुआ. राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर चुने गए नितिन नवीन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका माल्यापर्ण कर उन्हें तहे दिल से बधाई दी. इस मौके पर पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, ‘मैं BJP का कार्यकर्ता हूं। मैं मानता हूं कि नितिन जी मेरे बॉस हैं। अब वे मेरे काम का आकलन करेंग. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ताजपोशी होने से पटना समेत बिहार के सभी भाजपा कार्यालयों में जश्न का माहौल देखने को मिला.


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नवीन को नई पीढ़ी की शक्ति और युवा ऊर्जा की जीत के रूप में देखा जा रहा, क्योंकि, बिहार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले नवीन को एक कुशल संगठनकर्ता और मजबूत नेतृत्वकर्ता बताया जा रहा है. पार्टी का कहना है कि नवीन के आने से बीजेपी को कई गुना मजबूती मिलेगी. इतना ही नहीं साथ ही 2029 के लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल करने और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में पार्टी को मजबूत करने की उम्मीद भी जताई जा रही है.


जानकारी के मुताबिक, 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की बुनियाद रखी गई. ऐसे में बीजेपी के गठन का 45 पैतालिस साल पुरा हो चुका हैं. इस सियासी इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे, बंगारू लक्ष्‍मण, के. जना कृष्णमूर्ति, वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, जगत प्रकाश नड्डा ने पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर रहते हुए अपनी सेवाएं दी है. जनता पार्टी को छोड़कर अटल बिहार वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विजयाराजे सिधिंया, सिकंदर बख्त जैसे तमाम नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी थी. अटल बिहारी वाजपेयी को को बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुना गया. इस दौरान वाजपेयी का अधिवेशन में एक भाषण ये था कि "अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा." ये वहीं भाषण है जो आज भी भाजपा के रघों में दौड़ता है. इसके बाद पार्टी की कमान लाल कृष्ण आडवाणी के हाथों सौंप दी गई, आडवाणी 1986 (छियासी) में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे और 1991 (इक्यानबे) तक उन्होंने इस पद की जिम्मेदारी निभाई.


आडवाणी ने उठाया राम मंदिर का मुद्दा


आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति शुरू करने वाले आडवाणी ने राम मंदिर जैसे बड़े मुद्दे को उठाया. जिसे पार्टी ने अपने एजेंडे में शामिल किया. नतीजा 1991 (इक्यानबे) का चुनाव बीजेपी ने राम मंदिर के मुद्दे पर लड़ा, जिसके चलते उसने 120 सीटों पर अपना दबदबा कायम रखा. राम मंदिर के इस मुद्दे ने बीजेपी की रफ्तार को इस कदर तेज कर दिया कि हर चुनाव में ये पार्टी जीत की लिस्ट में शामिल होने से कभी पीछे नहीं हटी. साथ ही राम मंदिर का निर्माण कर इतिहास रचने का काम किया. साल 2002 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडु बने, जो साल 2004 तक अपने पद पर बने रहे. नायडू के अध्यक्ष रहते हुए 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में इंडिया शाइनिंग के बुरी तरह हारने के बाद से बीजेपी की कमान फिर से आडवाणी के हाथों में आ जाती है. आडवाणी 2004 में तीसरी बार बीजेपी के अध्यक्ष चुने जाते हैं और 2005 तक पार्टी की कमान संभालने में अपनी भूमिका निभाई. इस पद पर रहते हुए आडवाणी ने पाकिस्तान में जाकर जिन्ना की मजार पर खूब तारीफ की, ये वहीं तारीफ थी जिसने उनके लिए इतनी मुश्किले खड़ी कर दी कि उन्हें बीजेपी अध्यक्ष के पद से हाथ तक धोना पड़ गया था.


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आडवाणी द्वारा अध्यक्ष पद से छोड़ने के बाद से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में मशहूर राजनाथ सिंह ने साल 2005 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को संभाला. जिन्होंने 2009 तक बीजेपी के अध्यक्ष रहते हुए अपनी सेवाएं दी, खास बात तो यह है कि राजनाथ सिंह के अध्यक्ष पद पर रहते हुए लोकसभा का चुनाव हुआ, पर इत्तेफाक ऐसा कि, बीजेपी को करारी मात खानी पड़ी. इसका जिम्मेदार पार्टी ने राजनाथ सिंह के मथ्थे जड़ दिया, फिर क्या राजनाथ सिंह का अध्यक्ष पद की कमान नितिन गडकरी के हाथों सौंप दी गई. 2010 में बीजेपी के राष्ट्रीय चुने गए नितिन गडकरी ने तीन साल तक पार्टी संगठन को सियासी धार दिया, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव होने से पहले ही बीजेपी अध्यक्ष के बदलने का सिलसिला भी शुरू हो जाता हैं. फिर क्या गडकरी की जगह दुबारा से राजनाथ सिंह को संगठन की कमान सौंपी दी जाती है. इसी के चलते 2013 में दोबारा से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में राजनाथ का नाम चुना जाता हैं, उनके अगुवाई में 2014 में चुनाव होता है, लेकिन पीएम पद का चेहरा नरेंद्र मोदी ही हो बैठे.


गौर करने वाली बात तो ये है कि राजनाथ को सबसे ज्यादा इस बात का बुरा लगा जब साल 2002 में उनके ही नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी पहले से तीसरे नंबर पर आ खड़ी हुई. राजनाथ के लिए ये वो दौर था, जब बीजेपी ने उन पर हद से ज्यादा भरोसा किया, पर अफसोस की उनकी किसमत ने साथ नहीं दिया, जिसके चलते वो खुद को जिम्मेदार मानने लगे और पार्टी विधानसभा चुनाव में डगमगा गई. पर पार्टी ने एक बार फिर से उन पर विश्वास जताया और 3 वर्षों के लिए उन्हें राज्य इकाई का मुखिया बनाने का विचार किया. मार्च 1997 (सत्तानबे)से जनवरी 2000 तक यूपी में बीजेपी के चीफ रहे राजनाथ सिंह ने साल 2002 तक यूपी के मुख्यमंत्री का भी पद संभाला. उनका सफर यहीं नहीं रूका क्षत्रिय वर्ग से आने वाले राजनाथ बाराबंकी में स्थित हैदरगढ़ से दो बार विधायक भी चुने गए थे.


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इन जिम्मेदारियों के बाद से केंद्रीय मंत्री से राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय नेता तक का सफर तय किया. इनमें वो सारी खूबियां थी जिसने उन्हें भाजपा से आज भी जोड़े रखा है, पद और ज़िम्मेदारी देने वालों के तय किए ढर्रे पर चलने को तैयार रहने वाले राजनाथ सिंह के सफर में एक ऐसा मोड आया जब हर किसी को ये लगा कि उनमें और आडवाणी में खुला युद्ध हो सकता है. वो खूबी कोई और नहीं बल्कि ये थी कि, राजनाथ सिंह युद्ध के मुहाने तक जाने के बाद भी अपने कदम धीरे से पीछे खींच लेते. क्योंकि जीत से ज़्यादा उनका फोकस इस बात पर होता है कि पार्टी की हार न हो. जिससे साफ होता है कि जब युद्ध ही नहीं होगा, तो जय और पराजय का सवाल ही नहीं उठता.


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2014 में अमित शाह ने संभाली


वहीं राजनाथ सिंह के बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद से पार्टी की कमान 2014 में अमित शाह ने संभाली. अमित शाह का अध्यक्ष पद का सफर 2014 से 2020 तक लगातार बना रहा. अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 2019 में बीजेपी की सत्ता में फिर से एंट्री की. उनका कार्य करने का जो नजरिया था वो मोदी सरकार को इस कदर पसंद आया कि उन्हें केंद्र की मोदी सरकार में गृहमंत्री बनने का एक सुनहरा मौका मिल गया. जिसके बाद किन्हीं कारणों की वजह से अमित शाह को अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ गया...अमित शाह के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर पार्टी ने जेपी नड्डा की ताजपोशी की. जेपी नड्डा पहले 2019 में बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष बने और फिर 2020 में राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर निर्वाचित हुए.


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इस तरह 2020 से लेकर अभी तक नड्डा बीजेपी की कमान संभाल रहे थे, उनके अगुवाई में 2024 का लोकसभा चुनाव हुआ. बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक की बदौलत इतिहास रचा और अब जेपी नड्डा की जगह पर नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. पार्टी ने यह जिम्मेदारी नवीन को देकर ये साबित कर दिया है कि बीजेपी भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए नई लीडरशिप की तैयार में लगी हुई है. क्योंकि, नितिन नवीन कायस्थ समुदाय से आते हैं, जिनकी संख्या चुनावी राजनीति में निर्णायक नहीं मानी जाती. इसके बावजूद भी उन्हें पार्टी का शीर्ष पद सौंपना मामूली नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि बीजेपी नेतृत्व चयन में जातिगत गणित से ऊपर उठकर संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक समझ को प्राथमिकता देने का काम कर रही है.


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नितिन नवीन ऐसे समय में अध्यक्ष बने हैं जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. इनमें से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं, जहां बीजेपी आज तक अपनी सरकार नहीं बना पाई है. इन चुनौतियों के बीच अब देखना ये होगा कि नितिन नवीन भाजपा का बेडापार लगाने में किस हद तक कामयाब हो पाएंगे या नहीं. ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

नेपाल के चुनावी नतीजों ने केपी ओली की बढ़ाई बीपी,  बालेन शाह ने मारी बाजी
नेपाल के चुनावी नतीजों ने केपी ओली की बढ़ाई बीपी, बालेन शाह ने मारी बाजी
नेपाल में बीते गुरुवार को हुए राष्ट्रीय चुनाव के बाद से वोटों की गिनती आज सुबह से शुरू हो चुकी है. पिछले साल हुए Gen-Z हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद से यह देश में पहला आम चुनाव हुआ है. जो 77 सतहत्तर जिलों में 23 हजार केंद्रों पर मतदान हुआ, इसके आने वाले नतीजों पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई है. ये वहीं विरोध प्रदर्शन है जिसके चलते पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गठबंधन सरकार गिर गई थी. बता दें, नेपाल में हुए आम चुनावों में लगभग 60 प्रतिशत वोटिंग हुई है. चुनाव में पूर्व पीएम केपी शर्मी ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल यानि (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) सीपीएन (यूएमएल), शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस और पुष्प दहल प्रजंड की CPN (माओइस्ट सेंटर) के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला है. जहां बालेन शाह की पार्टी आरएसपी ने 69 उनहत्तर सीटों से ज्यादा की बढ़त बनाती नजर आ रही है. वहीं केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन यूएमएल केवल 5 सीटों पर आगे चल रही है.बालेन शाह की सुनामी के आगे बिखरे ओलीवहीं, नेपाली कांग्रेस भी 5 सीटों पर ही अपनी बढ़त बनाए हुए है. तो वहीं, नेपाली कम्‍युनिस्‍ट पार्टी 3 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. केपी ओली खुद भी बालेन शाह की सुनामी के आगे पिछड़ते ही जा रहे हैं. काठमांडू के मेयर रह चुके पूर्व रैपर बालेंद्र शाह यानि (बालेन) करीब 6100 (इकसठ) सौ वोटों से ओली से आगे चल रहे हैं. बालेन की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी भी इस चुनावी मैदान में हुंकार भरती नजर आई हैं. युवाओं में बेहद लोकप्रिय बालेन नेपाल के पुराने दिग्गजों को कड़ी चुनौती दे रहे हैं.49 (उनचास) साल के गगन थापा भी प्रधानमंत्री बनने की रेस में हैं. वह नेपाली कांग्रेस में टूट के बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी के नए प्रमुख हैं. आपको बता दें, बलेंद्र शाह यानि (बालेन शाह) नेपाल के एक प्रमुख युवा राजनेता, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और पूर्व रैपर हैं, जिन्होंने मई 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के 15वें मेयर के रूप में चुनाव जीतकर इतिहास रचा था. लेकिन इस साल जनवरी 2026 में मेयर पद से इस्तीफा देने के बाद से वह अब 2026 के आम चुनावों के लिए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानि(RSP) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चर्चा में हैं.यह भी पढ़े: इंग्लैंड के वेलिंगबोरो के मेयर की महापौर से शिष्टाचार भेंट, शहरी विकास पर हुई चर्चागजब की बात तो यह है कि, नेपाल में राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी बंपर जीत की ओर बढ़ रही है. Gen-Z के फेवरेट बालेंद्र शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली को काफी पीछे छोड़ दिया है. कोसी, मदेश, बागमती, लुंबीनी लगभग सभी प्रांतों में राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी बढ़त बनाए हुए है. बता दें. मतगणना शुरू होने के 24 घंटे के भीतर सीधे 165 सीटों (एफपीटीपी) के परिणाम जारी करने का दावा किया है. नेपाल के आम चुनाव के शुरुआती रुझान सियासी समीकरण बदलने के संकेत दे रहे हैं। शुरुआती आंकड़ों में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी पारंपरिक दलों को कड़ी चुनौती देती दिख रही है। करीब 60 फीसदी मतदान के बीच केपी शर्मा ओली और गगन थापा जैसे बड़े नेता भी चुनावी मैदान में हैं। इस चुनाव में भ्रष्टाचार और सिस्टम में बदलाव सबसे बड़े मुद्दों के तौर पर उभरकर सामने आए हैं
इंग्लैंड के वेलिंगबोरो के मेयर की महापौर से शिष्टाचार भेंट, शहरी विकास पर हुई चर्चा
इंग्लैंड के वेलिंगबोरो के मेयर की महापौर से शिष्टाचार भेंट, शहरी विकास पर हुई चर्चा
वाराणसी: इंग्लैंड केवेलिंगबोरो नगर के मेयर राज मिश्रा ने आज वाराणसी प्रवास के दौरान वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी से उनके कक्ष में शिष्टाचार भेंट की. इस अवसर पर महापौर द्वारा उन्हें अंगवस्त्रम एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया. इस दौरान नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल सहित नगर निगम के पार्षदगण भी उपस्थित रहे। मुलाकात के दौरान दोनों जनप्रतिनिधियों के मध्य शहरी विकास, जनसुविधाओं के विस्तार तथा विभिन्न जनकल्याणकारी विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई.उल्लेखनीय है कि राज मिश्रा वर्तमान में इंग्लैंड के वेलिंगबोरो टाउन काउंसिल के मेयर हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद के निवासी हैं तथा 13 मई 2025 को वेलिंगबोरो टाउन काउंसिल के पाँचवें मेयर के रूप में निर्वाचित हुए. उनका कार्यकाल 13 मई 2025 से 13 मई 2026 तक है. वे यूनाइटेड किंगडम की प्रमुख राजनीतिक पार्टी Conservative Party से जुड़े हुए हैं.किसान परिवार में जन्मे श्री राज मिश्रा ने चंडीगढ़ से बी.टेक तथा लंदन से कंप्यूटर साइंस में एम.टेक की डिग्री प्राप्त की है. इसके अतिरिक्त उन्होंने Massachusetts Institute of Technology से डेटा साइंस में प्रमाणन भी हासिल किया है. राजनीति में आने से पूर्व वे सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगभग 15 वर्षों तक कार्यरत रहे तथा यूके के रक्षा मंत्रालय एवं बैंकिंग सेक्टर में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.यह भी पढ़ें: अब चार रंगों के डस्टबिन से होगा कूड़ा निस्तारण, भवन स्वामियों को मिलेंगे चार प्रकार के बिन्सअपने वर्तमान कार्यकाल में उन्होंने स्थानीय चैरिटी Veterans Community Network तथा Louisa Gregory’s Hospice Campaign को सहयोग देने का संकल्प लिया है. इसके अतिरिक्त अक्टूबर 2025 में उन्होंने उत्तर प्रदेश में एआई डेवलपमेंट सॉल्यूशन प्रोजेक्ट के अंतर्गत लगभग 2500 करोड़ रुपये के संभावित निवेश की घोषणा भी की थी. इस अवसर पर उपस्थित पार्षदगण में सुरेश कुमार चौरसिया, सिंधु सोनकर, मदन दूबे, प्रवीण राय, सुरेश पटेल आदि जनप्रतिनिधियों ने दोनों नगरों के मध्य सहयोग एवं संवाद को भविष्य में और सुदृढ़ करने की आशा व्यक्त की. स्वागत जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने किया.
अब चार रंगों के डस्टबिन से होगा कूड़ा निस्तारण, भवन स्वामियों को मिलेंगे चार प्रकार के बिन्स
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वाराणसी: नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैकिंग के लिए लगातार प्रयासरत है. हालांकि इसके लिए जनसहभागिता बेहद जरूरी है. इसे देखते हुए निगम अब प्रत्येक वार्ड में चार अलग-अलग श्रेणियों के डस्टबिन और जागरूकता स्टिकर वितरित करने का निर्णय लिया है ताकि शतप्रतिशत कूड़े का पृथ्थक्कीकरण (सोर्स सेग्रिगेशन) किया जा सके.स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम का लक्ष्य है कि 'सोर्स सेग्रिगेशन' यानी घर से ही कचरा अलग-अलग होकर निकले. इसके लिए जागरूकता स्टिकर घरों के बाहर लगाए जा रहे हैं. नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जो नागरिक इस नियम का पालन करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए और जो सहयोग नहीं कर रहे हैं, उन्हें स्वच्छता के नियमों का पाठ पढ़ाया जाए. इस क्रम में अपर नगर आयुक्त सविता यादव ने स्वास्थ्य विभाग से प्रत्येक वार्ड के लिए चार रंगों के कूड़ेदान (बिन्स) जारी देने का निर्देश दिया है. उन्होंने अभियान के पहले चरण में प्रत्येक वार्ड के कम से कम 30 ऐसे भवन स्वामियों को चिन्हित करने जो शत-प्रतिशत कूड़ा पृथक्करण का पालन कर रहे हैं या इसके लिए तत्पर हैं.यह भी पढ़ें: वरिष्ठ नाटककार, रंगकर्मी और निर्देशक नाट्य मोतीलाल गुप्ता का निधनइन नागरिकों को मॉडल के रूप में डस्टबिन और जागरूकता स्टिकर दिए भी जा रहे हैं, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हो सकें. अपर नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि कूड़ा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सभी मुख्य सफाई एवं खाद्य निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वह डस्टबिन वितरण और स्टिकर चिपकाने की फोटो साक्ष्य के साथ रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराएं. इस प्रक्रिया की मॉनिटरिंग के लिए वाट्स-एप ग्रुप और निर्धारित प्रारूप का उपयोग किया जा रहा है. अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे वार्डों में जाकर सीधे लोगों को गीला, सूखा और हानिकारक कचरा अलग रखने के लिए जागरूक करें.