नाव पर इफ्तार मामले में साझा संस्कृति मंच ने पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन, सामने आई यह वजह

वाराणसी: गंगा नदी में चल रही नाव पर इफ्तार प्रकरण को लेकर साझा संस्कृति मंच की ओर से मंगलवार को पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन पत्र सौंपा गया. शहर के अमन सौहार्द को कायम रखने के लिए बुद्धिजीवी नागरिक समुदाय की ओर से एक जरुरी पहल की गई. ज्ञापन सौंपने वाले लोगों ने अपर पुलिस आयुक्त आलोक प्रियदर्शी को बताया कि नाव पर इफ्तार से जुड़े प्रकरण में एक वायरल वीडियो के आधार पर 14 युवकों की गिरफ्तारी, उन पर कठोर धाराएँ लगाकर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की कार्रवाई के मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय के मन में भय का माहौल है.

पुलिस ने शुरू की जांच
प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन देने के बाद कहा कि कार्यवाही की जांच, विधिक नैतिकता और व्यापक प्रक्रिया की वस्तु है और अपनी जगह जायज है. लेकिन उसी समय मीडिया ट्रायल और धर्म विशेष से जुड़े प्रतीकों पर सोशल मीडिया से लेकर तमाम सार्वजनिक मंचों पर अपमानजनक बातें हो रही हैं जो कि समाज के सौहार्द और व्यवस्था को चोट पंहुचा रही है.

ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे डॉ आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा कि अल्पसंख्यको के साथ ऐसी कार्रवाई की बढ़ती लिस्ट बनारस के गंगा जमुनी तहज़ीब से जुडी पहचान को नुकसान पंहुचा रही है. पूर्व में दशाश्वमेध पर आरती स्थल के निकट एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट, बजरडीहा क्षेत्र में बल्ब तोड़ने के मामले में नाबालिग़ लड़कों को पत्थरबाज़ बतलाना और जेल भेजना आदि घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं.
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बहुजन मोर्चा के डॉ अनुप श्रमिक ने कहा कि मदनपुरा क्षेत्र के ये चौदह लड़के जो नाव पर इफ्तार कर रहे थे ,इन्होने खुद ही वीडियो बनाया और सोशल मिडिया पर पोस्ट किया. उक्त वीडियो में नाव पर मल्लाह के साथ किसी तरह का तनाव नहीं दिख रहा है , जबकि पुलिस का कहना है कि उक्त लड़को ने नाव को जबरदस्ती ले गए थे. बनारस में मल्लाह समुदाय घाट पर सपरिवार और सशक्त तरह से नाव का संचालन करते है , किसी के लिए नाव को जबरन ले जाना और नाविक का अपहरण करना एकदम से अव्यवहारिक बात है.

साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश
किसान नेता रामजनम ने बताया कि नदी में कोई चीज फेंकने का दृश्य वीडियो में दिखाई नहीं दे रहा है. जेल गए लड़को के परिजन सामान्य और कमजोर आर्थिक वर्ग के भी हैं. दो लड़के तो ऐसे है जिनके पिता नहीं हैं और उनके परिवार की आजीविका इन्ही लड़को पर निर्भर है. साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की संगीन धारा में मुकदमा कायम करने और जेल भेजे जाने पर प्रशासन को पुनर्विचार करना चाहिए. गाँधीवादी नेता जागृति राही ने कहा कि वाराणसी की पहचान उसकी साझी संस्कृति और आपसी भाईचारे से है. ऐसे में त्योहारों के समय किसी भी प्रकार की एकतरफा या असंतुलित कार्यवाही सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकती है.

ज्ञापन में उठाई मांग
नाव पर इफ्तार प्रकरण सहित सभी संबंधित मामलों में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं तथ्यों पर आधारित जांच सुनिश्चित की जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी समुदाय के साथ भेदभावपूर्ण या चयनात्मक कार्यवाही न हो. कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु संतुलित, संवेदनशील एवं निष्पक्ष प्रशासनिक दृष्टिकोण अपनाया जाए. पुलिस अधिकारी ने उक्त बातें धैर्यपूर्वक सुनी और न्याय का आश्वासन दिया. ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से डॉ आनंद प्रकाश तिवारी , संजीव सिंह , डॉ अनूप श्रमिक , जागृती राही , रामजनम यादव, गगन प्रकाश यादव , जुबैर आदिल , ऐड राजेश यादव , धनञ्जय, ऐड प्रेम प्रकाश यादव आदि शामिल रहे.



