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नाव पर इफ्तार मामले में साझा संस्कृति मंच ने पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन, सामने आई यह वजह

नाव पर इफ्तार मामले में साझा संस्कृति मंच ने  पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन, सामने आई यह वजह
Mar 24, 2026, 09:26 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: गंगा नदी में चल रही नाव पर इफ्तार प्रकरण को लेकर साझा संस्कृति मंच की ओर से मंगलवार को पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन पत्र सौंपा गया. शहर के अमन सौहार्द को कायम रखने के लिए बुद्धिजीवी नागरिक समुदाय की ओर से एक जरुरी पहल की गई. ज्ञापन सौंपने वाले लोगों ने अपर पुलिस आयुक्त आलोक प्रियदर्शी को बताया कि नाव पर इफ्तार से जुड़े प्रकरण में एक वायरल वीडियो के आधार पर 14 युवकों की गिरफ्तारी, उन पर कठोर धाराएँ लगाकर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की कार्रवाई के मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय के मन में भय का माहौल है.


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पुलिस ने शुरू की जांच


प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन देने के बाद कहा कि कार्यवाही की जांच, विधिक नैतिकता और व्यापक प्रक्रिया की वस्तु है और अपनी जगह जायज है. लेकिन उसी समय मीडिया ट्रायल और धर्म विशेष से जुड़े प्रतीकों पर सोशल मीडिया से लेकर तमाम सार्वजनिक मंचों पर अपमानजनक बातें हो रही हैं जो कि समाज के सौहार्द और व्यवस्था को चोट पंहुचा रही है.


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ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे डॉ आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा कि अल्पसंख्यको के साथ ऐसी कार्रवाई की बढ़ती लिस्‍ट बनारस के गंगा जमुनी तहज़ीब से जुडी पहचान को नुकसान पंहुचा रही है. पूर्व में दशाश्वमेध पर आरती स्थल के निकट एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट, बजरडीहा क्षेत्र में बल्ब तोड़ने के मामले में नाबालिग़ लड़कों को पत्थरबाज़ बतलाना और जेल भेजना आदि घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं.


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बहुजन मोर्चा के डॉ अनुप श्रमिक ने कहा कि मदनपुरा क्षेत्र के ये चौदह लड़के जो नाव पर इफ्तार कर रहे थे ,इन्होने खुद ही वीडियो बनाया और सोशल मिडिया पर पोस्ट किया. उक्त वीडियो में नाव पर मल्लाह के साथ किसी तरह का तनाव नहीं दिख रहा है , जबकि पुलिस का कहना है कि उक्त लड़को ने नाव को जबरदस्ती ले गए थे. बनारस में मल्लाह समुदाय घाट पर सपरिवार और सशक्त तरह से नाव का संचालन करते है , किसी के लिए नाव को जबरन ले जाना और नाविक का अपहरण करना एकदम से अव्यवहारिक बात है.


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साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश


किसान नेता रामजनम ने बताया कि नदी में कोई चीज फेंकने का दृश्य वीडियो में दिखाई नहीं दे रहा है. जेल गए लड़को के परिजन सामान्य और कमजोर आर्थिक वर्ग के भी हैं. दो लड़के तो ऐसे है जिनके पिता नहीं हैं और उनके परिवार की आजीविका इन्ही लड़को पर निर्भर है. साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की संगीन धारा में मुकदमा कायम करने और जेल भेजे जाने पर प्रशासन को पुनर्विचार करना चाहिए. गाँधीवादी नेता जागृति राही ने कहा कि वाराणसी की पहचान उसकी साझी संस्कृति और आपसी भाईचारे से है. ऐसे में त्योहारों के समय किसी भी प्रकार की एकतरफा या असंतुलित कार्यवाही सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकती है.


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ज्ञापन में उठाई मांग


नाव पर इफ्तार प्रकरण सहित सभी संबंधित मामलों में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं तथ्यों पर आधारित जांच सुनिश्चित की जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी समुदाय के साथ भेदभावपूर्ण या चयनात्मक कार्यवाही न हो. कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु संतुलित, संवेदनशील एवं निष्पक्ष प्रशासनिक दृष्टिकोण अपनाया जाए. पुलिस अधिकारी ने उक्त बातें धैर्यपूर्वक सुनी और न्याय का आश्वासन दिया. ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से डॉ आनंद प्रकाश तिवारी , संजीव सिंह , डॉ अनूप श्रमिक , जागृती राही , रामजनम यादव, गगन प्रकाश यादव , जुबैर आदिल , ऐड राजेश यादव , धनञ्जय, ऐड प्रेम प्रकाश यादव आदि शामिल रहे.

सेंट्रल जेल के कैदी सीखेंगे फैशन व टेक्सटाइल डिजाइनिंग, खुलेगा अध्ययन केंद्र...
सेंट्रल जेल के कैदी सीखेंगे फैशन व टेक्सटाइल डिजाइनिंग, खुलेगा अध्ययन केंद्र...
वाराणसी : सेंट्रल जेल में बंद कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी रिहाई के बाद रोजगार के बेहतरअवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक नई पहल शुरू की जा रही है. जेल प्रशासन पहली बार राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के सहयोग से केंद्रीय जेल परिसर में अध्ययन केंद्र खोलेगा. इस केंद्र के माध्यम से बंदियों को विभिन्न व्यावसायिक और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे सजा पूरी होने के बाद समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें.जेल अधीक्षक आर.के. त्रिपाठी ने बताया कि अध्ययन केंद्र में करीब 40 नियमित और व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे. इनमें फैशन डिजाइनिंग, टेक्सटाइल डिजाइनिंग, कंप्यूटर, मेडिकल, योग, फिजियोथेरेपी सहित कई प्रोफेशनल कोर्स शामिल होंगे. इन पाठ्यक्रमों का संचालन राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से किया जाएगा.उन्होंने बताया कि अब तक जेल में बंद कैदियों को इस तरह के उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण का अवसर नहीं मिल पाता था. विश्वविद्यालय की टीम ने जेल का निरीक्षण कर अध्ययन केंद्र खोलने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली है. जल्द ही केंद्र का संचालन शुरू कर दिया जाएगा.जेल प्रशासन का मानना है कि इन पाठ्यक्रमों से कैदियों को नई दिशा मिलेगी और वे अपनी रुचि के अनुसार कौशल विकसित कर सकेंगे. प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे समाज की मुख्यधारा में उनकी वापसी आसान होगी.ALSO READ : नमक सत्याग्रह की थीम पर भव्य रूप में संवरेगा सोनिया पोखरा, नगर निगम ने बनाई रुपरेखा...प्रशासन का कहना है कि शिक्षा और कौशल विकास के जरिए कैदियों के पुनर्वास को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है. इस पहल से बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे जेल से बाहर आने के बाद अपने जीवन की नई शुरुआत करने में सक्षम होंगे. अध्ययन केंद्र शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में कैदियों के इन पाठ्यक्रमों से जुड़ने की संभावना है.
नमक सत्याग्रह की थीम पर भव्य रूप में संवरेगा सोनिया पोखरा, नगर निगम ने बनाई रुपरेखा...
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​वाराणसी : करीब दो वर्ष के लंबे इंतजार और कानूनी गतिरोध के बाद आपसी समझौते से सोनिया पोखरे के सुंदरीकरण का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है. गतिरोध समाप्त होते ही नगर निगम युद्धस्तर पर तालाब की कायाकल्प की रुपरेखा तैयार करने में जुट गया है. इस क्रम में शुक्रवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और वरिष्ठ एडवोकेट संतोष कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से नारियल फोड़ कर ऐतिहासिक तालाब के सुंदरीकरण कार्य का विधि-विधान से शुभारंभ किया.बनेगा ओपन जिम​इस अवसर पर महापौर ने कहा कि सोनिया पोखरे का सुंदरीकरण 'नमक सत्याग्रह' की थीम पर कराया जाएगा. उन्होंने इसके पीछे का गौरवशाली इतिहास बताते हुए कहा कि वर्ष 1930 में जब महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह का शंखनाद किया था, तब ब्रिटिश हुकूमत देश भर में इसके समर्थकों को गिरफ्तार कर रही थी. उस दौर में आजादी के मतवाले और वाराणसी के प्रथम सांसद डॉ. रघुनाथ सिंह ने मात्र 19 वर्ष की अल्पायु में इसी सोनिया पोखरे पर नमक कानून तोड़कर सत्याग्रह का बिगुल फूंका था. उनके इस अप्रतिम योगदान को नमन करते हुए सोनिया मार्ग व तालाब का नामकरण डॉ. रघुनाथ सिंह के नाम पर किया जाएगा और वहां उनकी भव्य मूर्ति भी स्थापित की जाएगी. इसके अतिरिक्त, स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तालाब की भूमि पर जल्द ही एक आधुनिक ओपन जिम का निर्माण भी कराया जाएगा.​आपसी समझौते से हटा कानूनी रोड़ासोनिया रोड पर करीब 27 बिस्वा के विशाल क्षेत्र में फैले इस​तालाब के स्वामित्व को लेकर पिछले कई वर्षों से उच्च न्यायालय में वाद लंबित चल रहा था, जिसके कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप थे. डॉ. रघुनाथ सिंह के वंशज एडवोकेट संतोष कुमार सिंह के साथ हुए सकारात्मक आपसी समझौते और सहमति के बाद यह गतिरोध समाप्त हुआ. उनकी ओर से हरी झंडी मिलते ही निगम की टीम पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुंची और तालाब की सफाई शुरू कर दी. पहले ही दिन निगम ने तालाब में तीन बड़ी जेसीबी मशीनों को उतारकर मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है. संचालन क्षेत्रीय पार्षद प्रवीण राय व धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय महामंत्री अशोक अग्रहरी ने किया.ALSO READ : वाराणसी नगर निगम का 88 प्रतिशत नाला सफाई का दावा, जमीनी हकीकत कुछ और...इनकी रही उपस्थिति​इस अवसर पर प्रमुख रूप से शुभम सिंह, भाजपा मण्डल अध्यक्ष राजेश कुशवाहा, पार्षद इन्द्रेश सिंह, विवेक कुमार कुशवाहा, श्याम आसरे मौर्य, सिद्धनाथ शर्मा, अनंतराज गुप्ता, अमरेश गुप्ता, श्रवण गुप्ता, सिन्धु सोनकर, सुशील गुप्ता, मनीष गुप्ता, नामित पार्षद अंकुर मेहरोत्रा, किशन कन्नौजिया, अतुल पाण्डेय, पूर्व पार्षद पुन्नु बिन्द, पूर्णामासी गुप्ता, देवानंद सिंह, पूर्व मण्डल उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, सहायक नगर आयुक्त अनिल कुमार यादव, सहित राजीव सिंह, पंचम यादव, विशाल तिवारी एवं सुरेश वाद्या मुख्य रूप से उपस्थित रहे.
वाराणसी नगर निगम का 88 प्रतिशत नाला सफाई का दावा, जमीनी हकीकत कुछ और...
वाराणसी नगर निगम का 88 प्रतिशत नाला सफाई का दावा, जमीनी हकीकत कुछ और...
वाराणसी : मानसून की दस्तक के बीच नगर निगम ने शहर के 128 बड़े और छोटे नालों में से 88 प्रतिशत नालों की सफाई पूरी होने का दावा किया है. हालांकि कई इलाकों में जमीनी स्थिति इस दावे से अलग नजर आ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर केवल नालों के ऊपर से कचरा हटाया गया है, जबकि अंदर जमी गाद अब भी नहीं निकाली गई है.ऐसे में हल्की बारिश में भी जलभराव की आशंका बनी हुई है.नगर निगम के अनुसार, शहर में करीब 15 लाख आबादी के लिए 258 छोटे और 128 बड़े नालों की नियमित सफाई कराई जा रही है.अधिकारियों का दावा है कि छोटे नालों की 88 प्रतिशत से अधिक सफाई पूरी हो चुकी है, लेकिन कई मोहल्लों में नालों की स्थिति लोगों की परेशानी बढ़ा रही है.लक्ष्मी नगर और चरण नगर के बीच स्थित नाले में सफाई अधूरी होने की शिकायत सामने आई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऊपर से कचरा हटाने के बावजूद नाले के भीतर गाद जमा है, जिससे पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है.घोसाबाद की ओर से आने वाले नाले और उससे जुड़े मुख्य नाले की भी यही स्थिति बताई जा रही है.लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पूरी तरह सफाई नहीं हुई तो बारिश के दौरान जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है.नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अब तक नालों की तीन बार सफाई कराई जा चुकी है और अभियान लगातार जारी है. विभाग का दावा है कि जहां भी शिकायतें मिल रही हैं, वहां टीम भेजकर दोबारा सफाई कराई जा रही है.नगर निगम का यह भी कहना है कि नालों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण सफाई कार्य में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं, जिससे कई स्थानों पर मशीनें और सफाई कर्मी पूरी तरह काम नहीं कर पा रहे हैं.ALSO READ : वाराणसी में मुहर्रम जुलूस के दौरान दो गुट भिड़े, पुलिस ने लाठी भांजकर किया नियंत्रित...स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि नगर निगम केवल कागजी दावों तक सीमित न रहे, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में नालों की पूरी तरह सफाई कराकर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करे, ताकि बारिश के मौसम में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े.