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आईआईटी (बीएचयू) ने सूजन रोगों के उपचार एवं प्रबंधन के लिए विकसित की पॉलिमरिक नैनोमेडिसिन

आईआईटी (बीएचयू) ने  सूजन रोगों के उपचार एवं प्रबंधन के लिए विकसित की पॉलिमरिक नैनोमेडिसिन
Nov 17, 2025, 12:31 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) के स्कूल ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग स्थित ट्रांसलेशनल नैनोमेडिसिन फॉर थेरेप्यूटिक अप्लीकेशन लेबोरेटरी के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है. टीम ने सूजन से संबंधित बीमारियों के उपचार एवं प्रबंधन के लिए एक अभिनव पॉलिमरिक नैनोमेडिसिन विकसित की है, जिसे वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य संकट के समाधान की दिशा में आशाजनक कदम माना जा रहा है.

सूजन संबंधी बीमारियाँ विश्वभर में सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करती हैं. दीर्घकालिक सूजन (क्रॉनिक इंफ्लेमेशन) रूमेटाइड आर्थराइटिस, इंफ्लेमेट्री बाउल डिजीज, सोरायसिस और सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमैटोसस जैसी गंभीर स्थितियों की प्रमुख वजह है. यदि इनका उपचार न किया जाए तो यह ऊतकों को नुकसान, अंगों की कार्यक्षमता में कमी, और कई बार बहु-अंग विफलता जैसी स्थितियाँ पैदा कर सकती हैं, जिससे मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है.


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प्रयोगों में दिखाई अत्यधिक प्रभावशीलता


इसके अतिरिक्त, प्रणालीगत सूजन (सिस्टमिक इंफ्लेमेशन) हृदय रोगों, कई प्रकार के कैंसर, मधुमेह, गुर्दा रोग, नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज, ऑटोइम्यून बीमारियों और न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. सूजन के कारणों की सटीक पहचान अत्यंत जटिल होती है, क्योंकि ये बाहरी कारकों (जैविक या रासायनिक) या आंतरिक कारणों (जैसे आनुवंशिक परिवर्तन) से उत्पन्न हो सकती है. ऐसे रोगियों में अक्सर सूजन संबंधी बायोमार्कर्स का स्तर अत्यधिक पाया जाता है, जो प्रभावी उपचारों की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित करता है.

इसी महत्वपूर्ण आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आईआईटी (बीएचयू) के प्रो. प्रदीप पाईक के नेतृत्व में शोध दल ने एक पॉलिमरिक नैनोमेडिसिन विकसित की है, जिसने प्रयोगों में अत्यधिक प्रभावशीलता दिखायी है. प्रो. पाईक के अनुसार यह नैनोमेडिसिन बहुत कम मात्रा में ही उच्च चिकित्सकीय प्रभाव प्रदान करती है, इम्यून-संवेदनशील है और सूजन से संबंधित कई तरह के विकारों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है. यह रूमेटाइड आर्थराइटिस और सिस्टमिक इंफ्लेमेशन जैसी तीव्र सूजन स्थितियों में एक प्रभावी वैकल्पिक उपचार साबित हो सकती है तथा हृदय संबंधी जटिलताओं, कैंसर, मधुमेह, गुर्दे के रोग, फैटी लिवर, ऑटोइम्यून और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों में भी सुरक्षा प्रदर्शित करती है.


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नवाचार को मिला GYTI अप्रिशिएशन अवॉर्ड 2024


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इस प्रभावशाली शोध कार्य के लिए परियोजना की प्रमुख सहयोगी एवं पीएच.डी. शोधार्थी दिव्या पारीक को गांधियन यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन (GYTI) अप्रिशिएशन अवॉर्ड 2024 से सम्मानित किया गया है. इस पुरस्कार की घोषणा 12 नवंबर 2025 को की गई. नैनोमेडिसिन की खोज एवं विकास में उनका योगदान इस राष्ट्रीय सम्मान का प्रमुख आधार रहा. इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान के समाजोपयोगी ट्रांसलेशनल रिसर्च को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि सूजन संबंधी व्यापक रोगों के उपचार की क्षमता वाली पॉलिमरिक नैनोमेडिसिन का विकास देश एवं विश्व के प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कदम है. उन्होंने शोध दल को उनकी समर्पित मेहनत और उत्कृष्ट वैज्ञानिक कार्य के लिए बधाई दी.

शास्त्रीघाट पर भूख हड़ताल के तीसरे दिन बृजेश मिश्रा की बिगड़ी तबीयत, प्रदर्शनकारियों में बढ़ी चिंता
शास्त्रीघाट पर भूख हड़ताल के तीसरे दिन बृजेश मिश्रा की बिगड़ी तबीयत, प्रदर्शनकारियों में बढ़ी चिंता
वाराणसी। यूजीसी के खिलाफ शास्त्रीघाट पर चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच भूख हड़ताल के तीसरे दिन प्रदर्शनकारी बृजेश मिश्रा की तबीयत बिगड़ने की सूचना है। लगातार भूख हड़ताल के कारण उन्हें कमजोरी महसूस होने लगी है। इसके साथ ही शरीर में दर्द की शिकायत भी बताई जा रही है। बृजेश मिश्रा की तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में चिंता का माहौल है।बताया जा रहा है कि यूजीसी से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारी शास्त्रीघाट पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में बृजेश मिश्रा ने भूख हड़ताल शुरू की है। मंगलवार को भूख हड़ताल का तीसरा दिन है। लगातार तीन दिनों से अन्न ग्रहण नहीं करने के कारण उनकी तबीयत प्रभावित होने लगी है।प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, शुरुआत में बृजेश मिश्रा सामान्य स्थिति में थे, लेकिन भूख हड़ताल के तीसरे दिन उन्हें कमजोरी और शरीर में दर्द की शिकायत होने लगी। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद साथी प्रदर्शनकारी उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।ALSO READ : आईएम बीएचयू में सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू.प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखा जाएगा। प्रदर्शनकारियों की ओर से यूजीसी के समक्ष अपनी मांगें रखी गई हैं और उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।वहीं, बृजेश मिश्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रदर्शनकारियों के बीच स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद साथी उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। भूख हड़ताल लंबी खिंचने की स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और बढ़ने की आशंका को लेकर भी प्रदर्शनकारी चिंतित हैं।फिलहाल प्रदर्शन स्थल पर आंदोलन जारी है और बृजेश मिश्रा की तबीयत पर सभी की नजर बनी हुई है।
आईएम बीएचयू में सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू.
आईएम बीएचयू में सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू.
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईएम) में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए पांच दिवसीय सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार से शुरू हुआ। कार्यक्रम 21 से 25 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से बैंक के जनरल मैनेजर, चीफ जनरल मैनेजर, डिप्टी जनरल मैनेजर, असिस्टेंट जनरल मैनेजर और चीफ इंटरनल ऑडिटर स्तर के अधिकारी शामिल हो रहे हैं।उद्घाटन सत्र की शुरुआत माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। आईएम बीएचयू के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेई ने कहा कि सेवानिवृत्ति जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई राह की शुरुआत है, जिसके लिए नई दृष्टि और बेहतर योजना की आवश्यकता होती है। उन्होंने काशी के आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए सोमवार को कार्यक्रम की शुरुआत को भी विशेष बताया।प्रो. बाजपेई ने सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन की योजना, उद्देश्यपूर्ण सहभागिता, वित्तीय तैयारी, स्वास्थ्य एवं कल्याण तथा व्यक्तिगत संतुष्टि जैसे पहलुओं पर जोर दिया।संकाय प्रमुख प्रो. सुजीत कुमार दुबे ने कहा कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन के लिए आईएम बीएचयू पर विश्वास जताना संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान की अकादमिक क्षमता और प्रशिक्षण विशेषज्ञता में बैंक के भरोसे को दर्शाता है।ALSO READ : सत्यम मिश्र ने काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का संभाला पदभारकार्यक्रम में प्रो. प्रेम शंकर त्रिपाठी ने प्रतिभागियों को जीवन के विभिन्न चरणों से लेकर सेवानिवृत्ति तक की यात्रा को समझाया। उन्होंने सेवानिवृत्ति को जीवन का अंतिम पड़ाव मानने के बजाय नई संभावनाओं और सुनियोजित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण संक्रमण के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया।वहीं, प्रो. सुजीत कुमार दुबे ने 'जॉय ऑडिट' अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को पेशेवर जीवन से इतर खुशी और संतुष्टि के वास्तविक स्रोतों को पहचानने के लिए प्रेरित किया।समापन सत्र में प्रो. आशुतोष मोहन ने सेवानिवृत्ति के बाद अनुभव और ज्ञान के माध्यम से समाज एवं संस्थानों में योगदान जारी रखने की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों से अगली पीढ़ी के नेतृत्व को तैयार करने में मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत की भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सत्यम मिश्र ने काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का संभाला पदभार
सत्यम मिश्र ने काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का संभाला पदभार
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास एवं श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद के नव नियुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी सत्यम मिश्र ने सोमवार को विधिवत अपना पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने से पहले उन्होंने सपरिवार बाबा कालभैरव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।पदभार ग्रहण के दौरान मंदिर न्यास एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। पदभार संभालने के बाद सत्यम मिश्र ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और उनका अभिवादन स्वीकार किया।ALSO READ : 33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापनइस दौरान उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगम दर्शन, व्यवस्थाओं की गुणवत्ता और श्री काशी विश्वनाथ धाम की गरिमा के अनुरूप कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही।उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और मंदिर की व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय के साथ कार्य किया जाएगा।