केंद्रीय बजट से पूर्वांचल के एमएसएमई को राहत की उम्मीद, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने पर जोर

वाराणसी : देश वासियों को बहुप्रतिक्षित केंद्रीय बजट 2026 का इंतजार है. एक फरवरी को केद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी. पिछले बजट में 12 लाख तक की आय को टैक्स फ्री किया गया था. इससे मध्यम वर्ग को बडी राहत मिली थी. अब हर किसीकी निगाह इस ओर ही है. केंद्रीय बजट 2026 से देश के निर्यातक, खासकर वाराणसी और पूर्वांचल के सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को बड़ी राहत की उम्मीद है.

फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन (फियो) ने बजट से पहले केंद्र सरकार को सौंपी गई अपनी सिफारिशों में लागत घटाने, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने पर जोर दिया है.
इनवर्टेड कस्टम ड्यूटी स्ट्रक्चर को निर्यातकों की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए कहा गया है कि कच्चे माल और कंपोनेंट्स पर लगने वाली ऊंची आयात शुल्क से बनारस के टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, हैंडीक्राफ्ट, केमिकल और लेदर सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है.
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वाराणसी के पावरलूम, सिल्क और कारपेट उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि ड्यूटी रैशनलाइजेशन से इनपुट कास्ट घटेगी और वर्किंग कैपिटल का दबाव कम होगा. पूर्वांचल के निर्यातक लंबे समय से ऊंचे फ्रेट चार्ज (सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए लगने वाले कुल परिवहन खर्च) और विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता से परेशान हैं. मजबूत घरेलू शिपिंग इकोसिस्टम से फ्रेट कास्ट कम होने और निर्यात में स्थिरता आने की उम्मीद जताई गई है. अनुसंधान एवं विकास पर 200-250 प्रतिशत वेटेड टैक्स डिडक्शन बहाल करने, ओवरसीज मार्केटिंग खर्च पर 200 प्रतिशत टैक्स छूट और नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए 15 प्रतिशत रियायती कारपोरेट टैक्स की समय-सीमा बढ़ाने से वाराणसी और पूर्वांचल को ग्लोबल वैल्यू चेन से जोड़ने और स्थानीय रोजगार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.



