भारत-EU डील से सदमें में पाकिस्तान, जल्द छिन्न जाएंगी करोड़ों नौकरियां

भारत और ईयू के बीच FTA यानि (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) या मुक्त व्यापार समझौता हो चुका है. दो देशो के बीच हुए एग्रीमेंट को देख पाकिस्तान को मानों अब बुखार आने लगा है. क्योंकि, इससे पाकिस्तानी कॉमर्स मिनिस्टर ने 1 करोड़ नौकरियां जाने की बात कही है. ऐसे में उसे कई अरबों डॉलर के नुकसान होने का डर भी सताने लगा है. इसलिए पाकिस्तान ने इस समझौते को लेकर कहा कि वह EU के अधिकारियों के संपर्क में रहकर उनसे ये जानने की कोशिश करेगा कि, भारत-EU FTA का उसके निर्यात पर किस हद तक और क्या असर पड़ेगा.

जाने क्या है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
दरअसल, बीते 27 जनवरी को ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा हुई थी. भारत द्वारा इतिहास का सबसे बड़ा ट्रेड डील फाइनल होता देख पाकिस्तान के व्यापारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं. इसके बाद पाकिस्तान के निर्यातकों और बिजनेस एक्सपर्ट्स का यह सोच कर बीपी हाई होने लगी कि यह व्यापार समझौता पाकिस्तान के निर्यात के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करने वाला है. भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मदर ऑफ ऑल डील करार दिया है.

इसी ट्रेड डील से पाक के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस कदर परेशान दिख रहे है कि पाकिस्तान के कॉमर्स मिनिस्टर गोहर एजाज ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब EU के साथ पाकिस्तान का 'जीरो-टैरिफ वाला हनीमून' खत्म हो गया है, करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में चली गई हैं. ऐसी स्थिति में सरकार उद्योगों को सस्ती बिजली, कम टैक्स और आसान कर्ज दे, ताकि वे दूसरे देशों की इंडस्ट्री से मुकाबला कर सकें. इतना ही नहीं, पाक की इस परेशानी की असली वजह यह है कि उसे काफी लंबे समय से यूरोपीय मार्केट में भारत के मुकाबले बढ़त हासिल थी. जी हां, पाकिस्तान को यूरोपीय संघ के 27 देशों में GSP Plus का स्टेटस मिला हुआ है. जिसे Generalised Scheme of Preferences Plus के नाम से जाना जाता है.
जाने उर्सुला का मदर ऑफ ऑल डील का मुद्दा
यह वो स्टेटस है जिसमें यूरोपीय संघ द्वारा विकासशील देशों को दी जाने वाली एक विशेष व्यापारिक छूट है. जिससे यूरोपीय संघ के देशों में पाकिस्तान के लगभग 80 प्रतिशत निर्यात पर कोई भी टैरिफ नहीं लगता है. इस छूट के कारण यूरोपीय संघ में पाकिस्तान का कपड़ा निर्यात 6.2 अरब डॉलर का है. लेकिन भारत को 9 से 12 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ता था. जहां भारतीय सामान पाकिस्तानी सामानों के मुकाबले थोड़े महंगे थे.

हालांकि, इसके बावजूद भी पाकिस्तान का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 6.2 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 5.6 अरब डॉलर का था. यहीं कारण है कि ट्रेड एग्रीमेंट में टैरिफ शून्य होने से पाकिस्तान को मिलने वाली यह बढ़त पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. बता दें, GSP प्लस की सुविधा पाकिस्तान को 2014 में मिली थी, जो दिसंबर 2027 में पूरी तरह से खत्म होने वाली है. अगर इसे आगे नहीं बढ़ाया गया, तो पाकिस्तान को यूरोप में मिलने वाली खास व्यापार सुविधा हमेशा के लिए उससे छिन्न जाएगी. पाकिस्तान को फायदा देने वाला बाजार अगर उसके हाथ से निकल गया, तो उसे दुबारा लाना काफी मुश्किल हो सकता है.



