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दो दिवसीय दौरे पर पीएम पहुंचे बनारस, कार्यकर्ताओं ने जगह - जगह किया स्‍वागत

दो दिवसीय दौरे पर पीएम पहुंचे बनारस, कार्यकर्ताओं ने जगह - जगह किया स्‍वागत
Nov 07, 2025, 12:18 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी शुक्रवार की शाम दो दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे. बिहार में चुनावी सभा को संबोधित कर पीएम शाम पांच बजे लालबहादुर शास्‍त्री अंतरराष्‍ट्र्रीय एयरपोर्ट पहु्ंचे.वहां से सडक मार्ग से बरेका के लिए रवाना हो गए. रास्‍ते में कई जगहों पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने ढोल नगाडे और फूलों से उनका अभिवादन किया और नारे लगाए. पीएम के स्‍वागत में बरेका सहित शहर भर में जगह जगह होर्ड‍िंंग, बैनर और पोस्‍टर लगाए गए हैं.

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जनप्रतिधियों और पार्टी पदाधिकारियों से करेंगे चर्चा


पीएम बरेका गेस्ट हाउस जाएंगे और शाम सात बजे से जनप्रतिनिधियों व पार्टी पदाधिकारियों संग पार्टी को मजबूत बनाने के साथ जनता तक योजनाओं को पहुंचाने आदि विषयों पर चर्चा करेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री रात्रिभोज के अवसर पर रोप-वे परियोजना और अन्य निर्माणाधीन विकास परियोजनाओं का निरीक्षण कर सकते हैं.


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शनिवार को वंदे भारत ट्रेनों का उद्घाटन


शनिवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी बनारस रेलवे स्टेशन से चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी उपस्थित रहेंगे. ये ट्रेनें वाराणसी-खजुराहो, फिरोजपुर-दिल्ली, लखनऊ-सहारनपुर और एक अन्य महत्वपूर्ण रूट पर चलेंगी, जो यात्रा समय को कम करने के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगी. उदाहरण के लिए, वाराणसी-खजुराहो ट्रेन प्रयागराज, चित्रकूट जैसे तीर्थस्थलों को जोड़ेगी, जबकि लखनऊ-सहारनपुर ट्रेन 7 घंटे 45 मिनट में सफर पूरा कर सामान्य समय से 1 घंटा की बचत करेगी.

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3200 प्रबुद्धजनों से संवाद


ट्रेन उद्घाटन के बाद स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री लगभग 3200 प्रबुद्धजनों से संवाद करेंगे. इनमें धर्मगुरु, शिक्षाविद, उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता, विशेषज्ञ और 150 स्कूली बच्चे शामिल होंगे. यह संवाद काशी के सांस्कृतिक और विकासात्मक आयामों पर केंद्रित रहेगा. कार्यक्रम के समापन के बाद प्रधानमंत्री 8 नवंबर सुबह 9:20 बजे वाराणसी से दरभंगा (बिहार) के लिए रवाना हो जाएंगे, जहां वे चुनाव प्रचार को आगे बढ़ाएंगे. प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल रेल नेटवर्क के विस्तार का प्रतीक है, बल्कि काशी के समग्र विकास को नई गति प्रदान करने वाला भी सिद्ध होगा. भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह चरम पर है, जो इस दौरे को ‘विकास यात्रा’ का हिस्सा मान रहे हैं. जिला प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं.


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पंचकोशी यात्रा की तैयारियों का नगर आयुक्त ने लिया जायजा...
पंचकोशी यात्रा की तैयारियों का नगर आयुक्त ने लिया जायजा...
वाराणसी: नगर निगम द्वारा पंचकोशी यात्रा की तैयारियों को लेकर व्यवस्थाएं तेज कर दी गई हैं. सोमवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शिवपुर स्थित पांचो पांडव मंदिर, धर्मशाला एवं पंचकोशी यात्रा मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जायजा लिया.निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पंचकोशी यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. यात्रा मार्ग एवं आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ सुलभ शौचालयों की नियमित सफाई और स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए.भीषण गर्मी को देखते हुए धर्मशालाओं में ठहरने वाले यात्रियों के लिए कूलर और पंखों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया. नगर आयुक्त ने निर्देश दिया कि कूलरों में नियमित रूप से पानी भरने की व्यवस्था भी बनी रहे, ताकि श्रद्धालुओं को राहत मिल सके.ALSO READ:राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...रात्रि में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पंचकोशी मार्ग पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए. इसके अलावा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु पर्याप्त संख्या में पानी के टैंकर लगाने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग करने के आदेश भी संबंधित विभागों को दिए.नगर निगम प्रशासन ने कहा कि पंचकोशी यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा किया जा रहा है.
राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...
राष्ट्रपति भवन में चमका बीएचयू का नाम, जुड़े विशेषज्ञ को मिला पद्म पुरस्कार...
नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. कला, चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला.भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान वायलिन वादक डॉ. एन. राजम् को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. “सिंगिंग वायलिन” के नाम से प्रसिद्ध डॉ. राजम् ने हिंदुस्तानी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में लंबे समय तक प्रोफेसर और डीन के रूप में सेवाएं दीं.संक्रामक रोगों विशेषकर काला- अजार के उपचार और अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रो. श्याम सुन्दर को पद्म श्री से सम्मानित किया गया. बीएचयू में उनके नेतृत्व में काला- अजार रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और उनके शोध कार्यों को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सराहा.पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रो. बुद्ध रश्मि मणि को भी पद्म श्री प्रदान किया गया.अयोध्या, सारनाथ और कपिलवस्तु सहित कई ऐतिहासिक स्थलों पर उनके शोध और उत्खनन कार्यों ने भारतीय इतिहास अध्ययन को नई दिशा दी.ALSO READ:धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवालपद्म पुरस्कारों में बीएचयू से जुड़ी हस्तियों की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय परिवार और पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है. शिक्षा, शोध और संस्कृति के क्षेत्र में बीएचयू की मजबूत परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है.
धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
धार्मिक पहचान के ‘विकृतिकरण’ पर BHU डॉक्टर का उपवास, आस्था को लेकर उठे सवाल
BHU doctor fasts to protest 'distortion' of religious identity, raises questions about faithवाराणसी: धर्म, आस्था और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सहप्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार ने वाराणसी में उपवास शुरू किया है. सर्किट हाउस के समीप चल रहे इस उपवास के माध्यम से उन्होंने धार्मिक प्रतीकों, नामों और स्वरूपों के कथित “विकृतिकरण” तथा आध्यात्मिक भ्रम फैलाने के खिलाफ जनजागरण की जरूरत बताई.डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में भोजन, आचरण और आध्यात्मिक शुद्धता का विशेष महत्व बताया गया है. उनके अनुसार दूषित विचारों और आचरण का प्रभाव समाज की चेतना पर पड़ता है, जिससे धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन भी प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि जब धार्मिक संस्थाओं और परंपराओं में आस्था से इतर विचारधारा का प्रभाव बढ़ता है, तब श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं और भ्रम की स्थिति पैदा होती है.उन्होंने दक्षिण भारत के कुछ राज्यों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण मंदिर व्यवस्थाओं में ऐसे लोगों को स्थान मिला, जिनकी धार्मिक आस्था पर सवाल उठते रहे हैं. डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि इससे आम श्रद्धालु स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है. उन्होंने धार्मिक और पौराणिक पात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म और अधर्म, आदर्श और विरोधी प्रवृत्तियों के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है. उनका कहना है कि यदि इन भेदों को जानबूझकर धुंधला किया जाता है तो समाज की सांस्कृतिक चेतना प्रभावित होती है और नई पीढ़ी भ्रमित हो सकती है.Also Read: नमोघाट हत्‍याकांड पर सामने आया मंत्री रवींद्र जायसवाल का बयान, 5 लाख मुआवजे का एलानतमिलनाडु और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक राजनीति का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाओं और पात्रों की व्याख्या को राजनीतिक या वैचारिक लाभ के लिए बदले जाने के प्रयास हुए हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम को धर्म स्थापना का प्रतीक माना जाता है, जबकि महाभारत के पात्र कर्ण की भूमिका अलग रही है. समाज में कई बार नायक और खलनायक की छवि को मिलाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिससे सही और गलत की समझ कमजोर होती है. डॉ. सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि उनका उपवास किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से है.