मणिकर्णिका घाट विरोध करने पहुंचे पाल समाज के लोगों को पुलिस ने खदेड़ा, कई हिरासत में

वाराणसी : मणिकर्णिका घाट सुंदरीकरण कानूनी दायरे में आ गया है. सोशल मीडिया पर तरह तरह की आरोप प्रत्यारोप और चर्चाएं आम हैं. वीडियो तेजी से वायरल है. इन दावों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी. इस बीच मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को लेकर उपजे विवाद के बाद पाल समाज के लोगों ने सोमवार को प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस बल ने उन्हें हटाने के प्रयास में हल्का बल प्रयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया गया. इस दौरान दर्जन भर से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर चौक थाने लाया गया. मणिकर्णिका की गली में इस दौरान काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा.

पाल समाज के लोग मणिकर्णिका घाट पर अपनी मांगों को लेकर सोमवार को एकत्रित हुए थे. उनका मुख्य उद्देश्य अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को तोड़ने को लेकर प्रदर्शन करना था. प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज उठाते हुए कहा कि यह मूर्ति उनके समाज के लिए महत्वपूर्ण है और इसे फिर से स्थापित करने की अनुमति दी जानी चाहिए. आरोप लगाया कि प्रशासन ने मूर्ति को खंडित किया है. पुलिस ने उन्हें खदेड़ने का निर्णय लिया, जिससे स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई.
प्रदर्शन के दौरान, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने, तो पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. इस कार्रवाई के दौरान कुछ लोग चोटिल भी हो गए. पुलिस ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक था. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के उनपर हमला कर दिया.
इस घटना के बाद, पाल समाज के नेताओं को हिरासत में लेकर थाने भेजा गया. वहीं उन्होंने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे और किसी भी प्रकार के दमन को सहन नहीं करेंगे. समाज के सदस्यों ने यह भी कहा कि वे आगामी दिनों में फिर से प्रदर्शन करेंगे और अपनी आवाज को और अधिक मजबूती से उठाएंगे.
इस घटना ने वाराणसी में मणिकर्णिका प्रकरण को लेकर एक बार फिर से तनाव बढ़ा दिया है. स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल घाट पर तैनात किया है. पुलिस ने कहा कि वे किसी भी प्रकार की अशांति को रोकने के लिए तैयार हैं.
बीएचयू में विरोध प्रदर्शन

इसी क्रम में बीएचयू के कुछ छात्रों ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर स्थित मंदिर के बाहर विरोध सभा की. छात्रों ने पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित व जीर्णोद्धारित मणिकर्णिका घाट और उससे जुड़ी ऐतिहासिक संरचनाओं को संभावित नुकसान को लेकर चिंता जाहिर की. सभा में वक्ताओं ने कहा कि काशी को केवल एक विकास परियोजना के तौर पर देखना दुर्भाग्यपूर्ण है. धर्मेंद्र पाल ने मांग की कि देवी अहिल्याबाई होल्कर की विरासत का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए और विकास व संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जाए. उत्कर्ष कृष्ण गणेश ने कहा कि छात्र विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता जो आस्था, परंपरा और ऐतिहासिक स्मृतियों को नुकसान पहुंचाए. अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने सरकार की ओर से प्रस्तुत कथित एआई जनरेटेड प्रचार वीडियो को भ्रामक बताते हुए कहा कि इससे वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है.
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