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सुरों की सरताज आशा ताई का हुआ निधन, शोक में डूबा देश

सुरों की सरताज आशा ताई का हुआ निधन, शोक में डूबा देश
Apr 12, 2026, 12:28 PM
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Posted By Preeti Kumari

मन को भां जाने वाली वो सुरीली आवाज आज 12 अप्रैल रविवार को हमेशा-हमेशा के लिए थम सी गई है. शरीर चला जाता है, लेकिन उनकी यादें लोगों के जहन से कभी नहीं जाती. हम बात कर रहें बॉलीवुड की लेजेंड्री सिंगर आशा भोसले की जिनका 92 की उम्र में आज निधन हो गया है. जाते-जाते वो अपने पीछे एक लंबी विरासत छोड़ गई हैं. वो विरासत उनका मधुर सुर है, जिसका हर कोई दिवाना है. उनके निधन के साथ-साथ सुरों का एक पूरा युग खामोश हो गया. वो आवाज, जिसने दशकों तक हर एहसास को शब्द दिए- चाहे वो प्यार हो, दर्द हो, शरारत हो या जश्न, आज हमेशा के लिए वो आवाज थम सी गई है. हिंदी सिनेमा के अनगिनत गानों को अपनी आवाज देने वाली आशा भोसले सिर्फ एक गायकी नहीं, बल्कि करोड़ों दिलों की धड़कन भी थी. जो अब शांत हो गई हैं.


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आशा भोसले ने हजारों सदाबहार गीत गाए


भारतीय संगीत जगत की एक बड़ी हस्ती के रूप में उनका नाम शुमार था और प्लेबैक सिंगर के रूप में उन्होंने कई यादगार गाने दिए, फिर चाहे वो राष्ट्रगीत हो या फिर देशभक्ति संग हजारों सदाबहार गीत गाए हैं, उनके लोकप्रिय गीतों में "दम मारो दम", "चुरा लिया है तुमने जो दिल को", "पिया तू अब तो आजा", "दिल चीज क्या है", "झुमका गिरा रे", और "राधा कैसे ना जले" समेत कई गाने शामिल हैं, जो उनके गायन की विविधता को दर्शाते हैं. ये गीत आज के दौर के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. बता दें, आशा को बीते 11 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांसे ली. उनकी पोती जनाई ने बताया था कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया है. वो ICU में थीं, इसके अगले दिन 12 अप्रैल को खबर आई कि दिग्गज सिंगर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है.


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ऑर्गन फेलियर के कारण आशा भोसले का निधन


अपनी मधुर आवाज से लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाली आशा भोसले के निधन को लेकर कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने बताया कि मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण आशा भोसले का निधन हो गया. उन्होंने आगे कहा कि कार्डियक अरेस्ट आने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल लाया गया, यहां उनका इमरजेंसी में इलाज भी किया गया, लेकिन उनके कई अंगों ने अचानक काम करना बंद कर दिया. इस गंभीर स्थिति में उन्हें बचाने की काफी कोशिश की गई, मगर खुदा को तो कुछ और ही मंजूर था, जिससे उनकी मौत हो गई. सुरों की महारानी आशा ताई सबकी चहेती थीं.


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आशा भोसले के निधन पर कई लोगों की आंखे नम


आशा भोसले के निधन पर पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई दिग्गज लोगों ने दुख व्यक्त किया है. उन्होंने लिखा- आज हर भारतीय और विशेषकर मेरे जैसे हर संगीत प्रेमी के लिए दुखद दिन है, जब हम सबकी प्रिय आशा भोसले जी हमारे बीच नहीं रहीं. आशा ताई ने न सिर्फ अपनी मधुर आवाज और अद्वितीय प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाई, बल्कि अपने सुरों से भारतीय संगीत को भी और अधिक समृद्ध किया. हर तरह के संगीत में ढल जाने की उनकी अनोखी प्रतिभा हर व्यक्ति का दिल जीत लेती थी. अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को छूने वालीं आशा जी ने हिंदी, मराठी, बांग्ला, तमिल, गुजराती सहित अनेक भाषाओं के साथ-साथ लोकगीतों में भी अमिट छाप छोड़ी.


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बता दें, गायिका आशा भोसले की आवाज में जितनी कोलमलता थी, उनके व्यवहार में भी उतनी ही सादगी और आत्मीयता थी. उनसे जब भी मुलाकात होती थी, संगीत और कला जैसे अनेक विषयों पर लंबी बातें होती थीं. आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर अपनी आवाज से वे सदैव हमारे दिलों में रहेंगी. ईश्वर आशा जी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें. उनके परिजनों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. ओम शांति शांति शांति.'

वाराणसी में दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता, गेंद में बंधे घुंघरू की आवाज से अंदाजा लगा गोल करेंगे
वाराणसी में दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता, गेंद में बंधे घुंघरू की आवाज से अंदाजा लगा गोल करेंगे
वाराणसी : दिव्यांग खेलों को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता वाराणसी के सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में होगी. ऑल इंडिया दिव्यांग एसोसिएशन के डॉ उत्तम ओझा ने बताया कि इसमें खास तरह के फुटबॉल का प्रयोग होगा. गेंद के अंदर विशेष घुंघरू लुढ़कने पर आवाज करती है. खिलाड़ी गेंद की आवाज के आधार पर गेंद का अंदाजा लगाकर गोल करने का प्रयास करते हैं.नवंबर में प्रस्तावित इस प्रतियोगिता में देश के सात राज्यों के 56 फुटबॉलर खेलेंगे. उन्होंने आगे बताया कि गेंद सामान्य फुटबॉल से भारी होती है. इसमें उछाल कम होता है. इसे ही दृष्टि बाधित फुटबॉल (ब्लाइंड फुटबॉल) या 5-ए-साइड फुटबॉल भी कहा जाता है. यह फुटबॉल पूरी तरह से या आंशिक रूप से भी देखने में अक्षम खिलाड़ी के लिए डिजाइन की गई है. इसकी प्रतियोगिता इंटरनेशनल ब्लाइंड स्पोर्ट्स फेडरेशन (आईबीएसए) के नियमों के तहत खेली जाती है. एक समय में प्रत्येक टीम के पांच-पांच खिलाड़ी मैदान पर होते हैं. चार खिलाड़ी पूरी तरह दृष्टि बाधित होते हैं. खेलने के दौरान चार खिलाड़ियों को अपनी आंखों पर आई-पैच (आई-ब्लाइंडफोल्ड) पहनना अनिवार्य है. गोलकीपर पूरी तरह से देखने में सक्षम होता है. वह डी-एरिया से बाहर नहीं निकल सकता और न ही गोल पोस्ट छोड़कर बाहर खेल सकता है.खिलाड़ियों को गाइड करते हैं तीन कोच मैदान पर खिलाड़ियों की मदद के लिए तीन गाइड होते हैं जो आवाज देकर खिलाड़ियों को बताते हैं कि उन्हें कहां जाना है और कब बॉल किक करनी है. दृष्टि बाधित फुटबॉल में 30 मिनट के मैच में 15-15 मिनट के दो हाफ होते हैं. कोच मिडफील्ड मैदान से खिलाड़ियों को निर्देश देते हैं.ALSO READ : गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमानबिना बोले गेंद पर अटैक करने पर होता है फाउलजब भी कोई डिफेंडर (रक्षा करने वाला खिलाड़ी) गेंद छीनने के लिए आगे बढ़ता है, तो उसे स्पष्ट आवाज में वोई या गो अनिवार्य रूप से बोलना होता है. स्पेनिश शब्द वोई का अर्थ है मैं आ रहा हूं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि गेंद लेकर जा रहे खिलाड़ी को पता चल सके कि कोई सामने से आ रहा है. वोई नहीं बोलने पर फाउल दिया जाता है.दर्शकों के लिए भी होती है गाइडलाइनदृष्टि बाधित फुटबॉल में दर्शकों के लिए भी गाइडलाइन होती है. इसमें दर्शक ज्यादातर शांत रहते हैं. इसमें दर्शक तभी शोर या जश्न मना सकते हैं जब कोई टीम गोल करती है. ऐसा इसलिए कि खिलाड़ी गेंद की आवाज और अपने गाइड के निर्देशों को साफ-साफ सुन सकें और कमांड के आधार पर खेल को किक कर सके.प्रदेश में पहला आयोजनआयोजन सचिव डॉ. संजय चौरसिया ने बताया कि प्रदेश में पहली बार दिव्यांग खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए फुटबॉल प्रतियोगिता वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में कराई जाएगी. इसमें स्थानीय फुटबॉल संघ से मदद ली जाएगी. इससे दिव्यांग खिलाड़ियों में भी लोगों में खेल के प्रति जुनून बढ़ेगा और वे प्रेरित होंगे.
गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमान
गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमान
वाराणसी : नमो घाट पर शनिवार को एयर शो के दूसरे दिन आसमान में भारतीय वायुसेना के विमानों की गर्जना गूंज उठी. गंगा की लहरों के ऊपर हेलिकॉप्टर से तिरंगा प्रदर्शन और राफेल, सुखोई व तेजस लड़ाकू विमानों के हैरतअंगेज कलाबाजियों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. नमो घाट से लेकर अस्सी घाट तक एयर शो देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी. विमानों के करतब देखकर कहीं तालियां गूंजती रहीं, तो कहीं लोग मोबाइल से इन यादगार पलों को कैमरे में कैद करते नजर आए.म‍िड एयर रिफ्यूलिंग का प्रदर्शनआयोजन जब अपने समाप्‍त‍ि की ओर पहुंचा तो बीच हवा में भारी भरकम टैंकर व‍िमान के पीछे राफेल व‍िमान उड़ते नजर आए. दो पाइपों के सहारे बीच हवा में पर्याप्‍त दूरी बनाकर व‍िमान एक समान गत‍ि से उड़े और म‍िड एयर रिफ्यूलिंग का प्रदर्शन क‍िया गया. इस प्रकार के फार्मेशन के माध्‍यम से भारतीय वायु सेना ने प्रदर्श‍ित कि‍या क‍ि लंबी दूरी में जंग के दौरान व‍िमानों को उतरने की जरूरत नहीं होगी और बीच हवा में ईंधन भरा जा सकता है. इससे लंबी दूरी की मारक क्षमता का भी भारतीय वायु सेना की दक्षता साब‍ित होती है.ALSO READ : रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटनादर्शक हुए रोमांचितएयर शो शुरू होते ही नमो घाट पर उत्साह का माहौल बन गया. आसमान में तेज गर्जना के साथ लड़ाकू विमानों ने अपनी रफ्तार और कौशल का प्रदर्शन किया. राफेल के हवा में अचानक मुड़ने, नीचे की ओर आने और फिर तेजी से ऊंचाई पकड़ने जैसे करतबों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. वहीं, सुखोई के हवाई करतबों ने भी लोगों का ध्यान खींचा. तेजस की दमदार गर्जना से गंगा के घाट गूंज उठे.इस दौरान भारतीय सेना का हेलिकॉप्टर तिरंगा लेकर गंगा के ऊपर से गुजरा. आसमान में लहराते तिरंगे को देखकर घाटों पर मौजूद लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया. लोगों ने तालियां बजाकर इस दृश्य का स्वागत किया. एयर शो के दौरान नमो घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिससे आयोजन का उत्साह और बढ़ गया. एयर शो को लेकर शहर के गंगा घाटों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी. नमो घाट, अस्सी घाट समेत विभिन्न घाटों पर लोग विमानों के करतब देखने पहुंचे. कई लोगों ने अपने घरों की छतों से भी एयर शो का आनंद लिया. शहर के 84 गंगा घाटों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के मद्देनजर बैरिकेडिंग की गई है. नमो घाट पर भारतीय रेलवे के अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की गई है. वहीं, मीडियाकर्मियों और अन्य दर्शकों के लिए भी अलग-अलग इंतजाम किए गए हैं. एयर शो देखने के लिए एनसीसी कैडेट्स भी पहुंचे. पूरे आयोजन के दौरान काशीवासियों में देशभक्ति और रोमांच का माहौल देखने को मिला.हर पल को बनाया यादगारगंगा के ऊपर भारतीय तिरंगे का प्रदर्शन, लड़ाकू विमानों की गर्जना और आसमान में उनके हैरतअंगेज करतबों ने एयर शो के दूसरे दिन को यादगार बना दिया. घाटों पर उमड़ी भीड़ और दर्शकों का उत्साह इस आयोजन के प्रति लोगों के आकर्षण को दर्शाता रहा. मणिकर्णिका घाट पर जलती चिता के सामने भी लोग एयर शो का लुत्फ उठाते हुए काशी में नजर आए. वहीं दशाश्वमेध घाट पर नाव पर बैठकर देखने में जो आनंद पब्लिक को आ रहा है वह नमो घाट पर नहीं आ रहा है. कुछ इसी तरह के भाव से पर्यटक भी अन्‍य घाटों पर भरे नजर आए. जबक‍ि गंगा में नमो घाट की ओर नौका संचालन पर प्रत‍िबंध होने से नाव‍िक कुछ उदास भी दिखे.
रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटना
रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटना
वाराणसी : रामनगर की रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत घपलू नट उर्फ छपलू की आजमगढ़ के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई. 18 अक्टूबर को हाथी को नहलाने ले जाते समय हाथी अचानक बेकाबू हो गया था और उसने महावत को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया था. गंभीर रूप से घायल होने के बाद संक्रमण फैलने से डॉक्टरों को उसका बायां पैर काटना पड़ा, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.घपलू चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था. उसको चार साल का बेटा है. उसकी मौत से पत्नी सरीकुन और मां कलावती का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और घटना से गांव में शोक का माहौल है.ALSO READ : वाराणसी एयर शो: दूसरे दिन चरमराई यातायात व्यवस्था, शहर में लगा भीषण जाम, रहगीर परेशानगत 18 अक्‍टूबर को रामनगर में उस समय हड़कंप मच गया था, जब रामलीला में आया हाथी अचानक बेकाबू होकर इधर-उधर भागने लगा. हाथी का उत्‍पात देख लोगों में भगदड़ मच गई. महावत ने उसे काबू करने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने उसे पटक दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया. उसका इलाज अस्पताल में चल रहा था. हाथी को आजमगढ़ से रामलीला में लाया गया था, जहां वह पंचवटी मैदान से निकलकर सड़क पर भागने लगा. 12 घंटे बाद थककर एक जगह हाथी रुक गया. मौके पर वन विभाग के कर्मी व पुलिस फोर्स मौजूद रहे. इसके साथ ही गोरखपुर से भी वन विभाग की स्पेशल टीम पहुंची. हाथी पर मशक्‍कत के बाद काबू पाया जा सका. हाथी के हमले में घायल महावत को 50 टांके लगे थे. हाथी के बेकाबू होने की वजह से रविवार को लीला भी प्रभावित हुई. लीला का मंचन नहीं हुआ, बल्कि भगवान की आरती हुई थी.