वाराणसी कोर्ट में राहुल गांधी को होना होगा पेश, नहीं तो होगी कार्रवाई

वाराणसी- नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को वाराणसी के कोर्ट में पेश होना होगा. उनके खिलाफ दायर एक निगरानी याचिका में अब अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी. एमपी-एमएलए अदालत के न्यायाधीश यजुवेंद्र बिक्रम सिंह ने नोटिस तामील की रिपोर्ट देखने के बाद यह तिथि निर्धारित की है. अदालत ने संकेत दिया है कि यदि निर्धारित तिथि तक राहुल गांधी उपस्थित नहीं होते हैं तो आगे की सांविधानिक कार्रवाई की जाएगी. मामला राहुल गांधी के सितंबर 2024 में अमेरिकी दौरे के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में सिखों को पगड़ी बांधने और कड़ा पहनने की आजादी मिलेगी क्या, वे एक सिख के रूप में गुरुद्वारे जा सकेंगे.

इस बयान पर सारनाथ क्षेत्र के तिलमापुर निवासी पूर्व प्रधान नागेश्वर मिश्र ने आपत्ति जताते हुए परिवाद दायर किया था. इस प्रकरण में अवर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ निरज त्रिपाठी ने 28 नवंबर 2024 को परिवाद खारिज कर दिया था. इसके विरुद्ध नागेश्वर मिश्र ने सत्र न्यायालय की एमपी-एमएलए कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की. सुनवाई के बाद न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने एसीजेएम के आदेश को निरस्त कर पुनः सुनवाई का निर्देश दिया था.

अमेरिकन यूनिवर्सिटी में भगवान श्री राम पर टिप्पणी के मामले में सुनवाई
विशेष न्यायाधीश (एमपी एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में गुरुवार को अमेरिका यात्रा के दौरान ब्राउन यूनिवर्सिटी में भगवान श्री राम पर टिप्पणी करने के मामले में निगरानी अर्जी पर सुनवाई हुई. अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 16 मार्च की नियत की। इस मामले में निगरानी कर्ता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पार्टी बनाया है.
प्रकरण के अनुसार एडवोकेट हरीशंकर पांडेय ने अदालत में रिवीजन अर्जी दाखिल किया। जिसमें कहा गया कि भारतीय संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अमेरिका के बोस्टन में 21 अप्रैल को पहुंचे थे.

यहां पर ब्राउन यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के साथ उनका एक सेशन था. यहां पर राहुल ने भगवान श्रीराम को लेकर विवादित बयान दिए थे. उन्होंने भगवान राम को पौराणिक बताया था और उस युग पर बताई जाने वाली कहानियों को काल्पनिक कहा था. वही नहीं भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. इस संबंध में अवर न्यायालय में परिवाद पत्र दाखिल किया गया. जिसपर कोर्ट ने सरसरी तरीके से विधि व्यवस्था के विरोध उसके परिवाद पत्र पोषणीयता के स्थिति पर खारिज कर दिया है. निगरानी कर्ता ने निगरानी अर्जी को स्वीकार करने की गुहार लगाई है.



