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RJD का अंदरूनी कलेश हुआ उजागर, रोहिणी ने किया तंज

RJD का अंदरूनी कलेश हुआ उजागर, रोहिणी ने किया तंज
Jan 10, 2026, 09:07 AM
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Posted By Preeti Kumari

क़ानूनी शिकंजा जब सियासत पर कसता है, तो अक्सर उसका असर अदालत की चौखट तक सीमित नहीं रहता. कुछ ऐसा ही राष्ट्रीय जनता दल के साथ भी हो रहा है. दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित सीबीआई अदालत के एक फ़ैसले ने न सिर्फ़ लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को मुश्किलों में डाला हैं, बल्कि उस विरासत की नींव को भी हिला कर रख दिया है. जिस पर तीन दशकों से बिहार की राजनीति टिकी रही है. बता दें, अदालत ने ज़मीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में सुनवाई करते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत तमाम आरोपितों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं में मुक़दमा चलाने का आदेश दे दिया है. कोर्ट का यह फैसला अपने आप में काफी गंभीर मुद्दा है,


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लेकिन इससे बड़ा सियासी संकेत उस प्रतिक्रिया में छिपा है, जो लालू की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर किया गया वो पोस्ट है, जिसने राजद की अंदरूनी सियासत को समाज के सामने लाकर खड़ा कर दिया. रोहिणी ने तंज करते हुए लिखा- 'बड़ी ही शिद्दत से बनायी और खड़ी की गयी ‘बड़ी विरासत’ को तहस-नहस करने के लिए परायों की ज़रूरत नहीं होती, अपने और चंद षड्यंत्रकारी ‘नए बने अपने’ ही काफ़ी होते हैं।' जिस पहचान और वजूद की वजह से सब कुछ है, उसी को मिटाने पर जब अपने ही आमादा हो जाएं, तो हैरानी लाजमी है, उनके शब्दों में अहंकार साफ़ दिखता है. हालांकि, इस टिप्पणी का राजनीतिक गलियारों में सीधा मतलब तेजस्वी यादव के रणनीतिकार संजय यादव और सोशल मीडिया संचालन से जुड़े रमीज नेमत से जोड़ा जा रहा है. जो चर्चा का विषय बन बैठा है.


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जाने कौन है संजय यादव


आपको बता दें कि, संजय यादव को तेजस्वी की राजनीति का ‘माइंड’ मास्टर माना जाता है, जिन्होंने कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर राजद की रणनीति संभालने का अपने कंधों पर जिम्मा उठा रखा है. वहीं रमीज नेमत की बात करें तो इनका नाम पहले भी कई विवादों से जुड़ा रहा है और पार्टी के डिजिटल नैरेटिव पर उनकी पकड़ बताई जाती है. रोहिणी के संकेतों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पार्टी की दिशा परिवार के बाहर से तय हो रही है. यह पहला मौका नहीं है जब लालू कुनबे में 'भीतरघात' की बात सार्वजनिक हुई हो, इससे पहले भी तेज प्रताप यादव ‘जयचंद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर अपनों पर ही तीर चला चुके हैं. इसके बाद अब रोहिणी आचार्य के बयान वो भी ऐसे समय में आया है जब लालू परिवार खुद एक भ्रष्टाचार केस से जूझ रहा है. फर्क सिर्फ़ इतना है कि इस बार बात केवल राजनीतिक रणनीति की नहीं, बल्कि विरासत और नेतृत्व की भी हो गई है.


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परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है राजद की राजनीति


वहीं राजद की राजनीति हमेशा परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है. लालू यादव की करिश्माई छवि, सामाजिक न्याय का नैरेटिव और यादव-मुस्लिम समीकरण, यही पार्टी की शुरू से ताक़त रही है. लेकिन अदालत के फ़ैसले और परिवार के भीतर उभरते मतभेदों ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाला समय सिर्फ़ कानूनी लड़ाई का नहीं, बल्कि नेतृत्व के पुनर्परिभाषण का भी हो सकता है.


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राउज एवेन्यू की अदालत में चल रही मुक़दमेबाज़ी अब सिर्फ़ काग़ज़ों और तारीख़ों की कहानी नहीं रही, यह लड़ाई अब सियासी विरासत भरोसे और नियंत्रण की भी बन चुकी है. सवाल यही है कि क्या लालू परिवार इस आंतरिक टकराव को संभाल पाएगा या फिर अदालत के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी एक नई सियासी क़यामत दस्तक देने वाली है.

गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।