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स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने खड़ी की चतुरंगिणी सेना, पदानुसार तय की जिम्‍मेदारी

स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने खड़ी की चतुरंगिणी सेना, पदानुसार तय की जिम्‍मेदारी
Mar 23, 2026, 12:24 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: स्‍वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ, धर्म और ब्राह्मण की रक्षा के लिए वाराणसी में सोमवार को चतुरंगिणी सेना के गठन की घोषणा की है. यह सेना समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की सुरक्षा के लिए समर्पित होगी. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस पहल के माध्यम से समाज में एकजुटता और जागरूकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. इसमें पदानुसार पत‍िपाल, सेनामुखपति‍, गुल्‍मपत‍ि, गणपाल, वाह‍िनीपति‍, पृतनापति, चमुपति‍, अनीक‍िनीपत‍ि और महासेनापत‍ि होंगे. चतुरंगिणी सेना में 2 लाख 18 हजार 700 सैनिक होंगे, इसमें देशभर से लोग भर्ती होंगे.


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सेना के काम करने के तरीके पर कहा कि पहले टोको, यानी टोकेंगे. कहो कि यह गलत हो रहा है. नहीं माने तो रोको. भाई, आपको रुकना पड़ेगा. नहीं तो फिर ठोको. ठोको का मतलब सीधे प्रहार करना नहीं है. मुकदमा करना, शिकायत करना और पंचायत करना भी ठोको में आएगा. ये सभी संवैधानिक तरीके अपनाते हुए काम करेंगे.


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि चतुरंगिणी सेना का गठन उन सभी लोगों के लिए एक मंच प्रदान करेगा जो गौ, धर्म और ब्राह्मण की रक्षा के प्रति समर्पित हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सेना न केवल धार्मिक मूल्यों की रक्षा करेगी, बल्कि समाज में एकता को भी बढ़ावा देगी. सेना का मकसद अभ‍िभावक के भाव को समृद्ध करना है. बताया क‍ि यह समाज के अंत‍िम पायदान पर खड़े सनातनी लोगों की रक्षा के ल‍िए काम करेगी.


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स्वामी ने यह भी बताया कि चतुरंगिणी सेना का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और लोगों को अपने धार्मिक अधिकारों के प्रति सजग करना है. उन्होंने कहा कि आज के समय में जब धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में इस प्रकार की पहल अत्यंत आवश्यक है. कहा क‍ि ह‍िंदू समाज के भीतर से भय खत्‍म करना इसका मकसद है. ताक‍ि अन्‍याय का प्रत‍िकार करने के ल‍िए उनमें क‍िसी प्रकार का भय ना हो. बताया क‍ि चार अंगाध्‍यक्ष इसमें मनबल, तनबल, धनबल और जनबल को न‍ियंत्र‍ित करेंगे ज‍िनके ज‍िम्‍मे पांच अलग अलग प्रभाग होंगे.


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अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना के सदस्यों से की अपील


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना के सदस्यों से अपील की कि वे अपने कर्तव्यों का पालन करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्रिय रहें. उन्होंने कहा कि यह सेना न केवल गौ और धर्म की रक्षा करेगी, बल्कि समाज के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करेगी.


चतुरंगिणी सेना का गठन


स्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि चतुरंगिणी सेना का गठन किसी भी प्रकार की हिंसा या असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया गया है. उनका उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस अवसर पर सभी धर्मप्रेमियों से अपील की कि वे इस पहल में शामिल हों और अपने-अपने स्तर पर समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करें. उन्होंने कहा कि एकजुटता में ही शक्ति है और सभी को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा.

स्मार्ट काशी ऐप से घर बैठे कराएं पालतू कुत्‍तों-बिल्‍ली का रजिस्ट्रेशन, वरना खैर नहीं
स्मार्ट काशी ऐप से घर बैठे कराएं पालतू कुत्‍तों-बिल्‍ली का रजिस्ट्रेशन, वरना खैर नहीं
Register your pet dogs and cats from home using the Smart Kashi app, or you'll be in trouble.​वाराणसी: यदि आप भी पशु प्रेमी हैं और घर में कुत्ता या बिल्ली पालने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए खास है. नगर निगम अब पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण (श्वान प्रजनन एवं विपणन) नियम 2017 को कड़ाई से अनुपालन कराने की तैयारी कर रहा है. इसके तहत शहरी सीमा में पालतू कुत्तों और बिल्लियों का पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है. नियमों की अनदेखी करने वाले पशुपालकों को न केवल आर्थिक दंड भुगतना होगा, बल्कि उन पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं नगर निगम पशुपालकों की सुविधा के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है. ऐसे में अब स्मार्ट काशी ऐप के माध्यम से घर बैठे ही अपने पालतू जानवरों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. ​पशु कल्याण एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष पाल ने बताया कि पालतू जानवरों का पंजीकरण कराने के लिए पशुपालकों को ऑनलाइन व आफलाइन दोनों सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है. इस नियम का मुख्य उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा और शहर में पालतू जानवरों का सटीक डेटा रखना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजीकरण न कराने की स्थिति में पशुपालकों पर 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. साथ ही गंभीर उल्लंघन के मामलों में पशु को जब्त करने जैसी कानूनी कार्रवाई भी संभव है.Also Read: वैशाख पूर्णिमा पर नमामि गंगे ने जगाई स्वच्छता की अलख, गंगा को स्वच्छ रखने का दिया संदेशकुछ नस्लों पर विशेष पाबंदीनगर निगम ने पिटबुल, रॉटवीलर, डोगो अर्जेंटीनो, तोसा, फाइला ब्रासीलियो जैसे आक्रामक माने जाने वाले कुत्तों के पालतूकरण को प्रतिबंधित किया है. " कुत्तों और बिल्लियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए इसे पूरी तरह डिजिटल किया गया है. ऐसे में समय रहते अपने पालतू पशुओं का विवरण दर्ज करा लें, ताकि जुर्माने से बचा जा सके. - हिमांशु नागपाल, नगर आयुक्तhttps://www.youtube.com/watch?v=yk_vEG6WMTk
वैशाख पूर्णिमा पर नमामि गंगे ने जगाई स्वच्छता की अलख, गंगा को स्वच्छ रखने का दिया संदेश
वैशाख पूर्णिमा पर नमामि गंगे ने जगाई स्वच्छता की अलख, गंगा को स्वच्छ रखने का दिया संदेश
On Vaishakh Purnima, Namami Gange raised awareness about cleanliness and gave the message of keeping the Ganga clean.वाराणसी: वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर नमामि गंगे ने शूक्रवार को अस्सी घाट पर स्वच्छता अभियान चलाया. भगवान बुद्ध द्वारा दिए गए पर्यावरण संरक्षण के संदेश को ध्वनि विस्तारक यंत्र से जन-जन तक पहुंचाकर गंगा को स्वच्छ रखने का संदेश दिया. कार्यक्रम का नेतृत्व नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने किया. इस दौरान गंगा घाट पर पहुंची नमामि गंगे की टीम द्वारा गंगा की तलहटी और किनारे पड़ी गंदगी को उठाकर कूड़ेदान तक पहुंचाया गया. पॉलिथीन कचरा तथा गंगा में श्रद्धालुओं द्वारा विसर्जित की गयी पूजा सामग्री के अवशेषों को निकाला गया.नमामि गंगे परियोजना का विवरण दर्शातीश्रमदान में अन्य श्रद्धालुओं ने भी सहयोग किया. इस दौरान नमामि गंगे टीम ने सुबह ए बनारस के मंच पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित नमामि गंगे परियोजना का विवरण दर्शाती पत्रिका का वितरण किया. बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सुबह ए बनारस के मंच पर स्वच्छता के स्वर गूंजे. संयोजक राजेश शुक्ला ने बताया कि तथागत भगवान बुद्ध ने पर्यावरण के संरक्षण का संदेश दिया है. वह कहते थे कि मनुष्य को अपने किसी भी कृत्य से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए. कहा कि भारतीय जनजीवन में नदियों का महत्व इसी से जाना जा सकता है कि धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, व्यापारिक, पर्यटन, स्वास्थ्य , कृषि, शैक्षिक, औषधि, पर्यावरण और न जाने कितने क्षेत्र हैं जो हमारी नदियों से सीधे-सीधे जुड़े हुए हैं.Also Read: ताइक्वांडो कप 2026: नन्हे खिलाड़ियों की दमदार किक, वाराणसी बना चैंपियनवसुधैव कुटुंबकम का संदेश कहा कि हमारी पवित्र नदियां विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुंबकम का संदेश देती हैं वैसे ही भगवान बुद्ध का संदेश हमें सत्य, अहिंसा, प्रेम, करुणा और शांति के मार्ग पर चलकर मानवता की सेवा करने की प्रेरणा देता है. हम सब बुद्ध के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात कर सामाजिक समरसता का संकल्प लें. आयोजन में प्रमुख रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक वह नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला, महानगर प्रभारी पुष्पलता वर्मा, डॉ रत्नेश वर्मा, फैजल, अमन, शिव आदि उपस्थित रहे.https://www.youtube.com/watch?v=yk_vEG6WMTk
ताइक्वांडो कप 2026: नन्हे खिलाड़ियों की दमदार किक, वाराणसी बना चैंपियन
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Taekwondo Cup 2026: Powerful kicks from young players, Varanasi becomes championवाराणसी: मेहनत जब मैट पर उतरती है, तो हर किक और पंच एक कहानी बन जाती है. बीएचयू के विभूति नारायण सिंह इंडोर हॉल में 29-30 अप्रैल 2026 को आयोजित 5वीं स्व. जनार्दन मिश्र स्मृति ओपन स्टेट ताइक्वांडो चैंपियनशिप में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां सैकड़ों बच्चों ने अपने हुनर से माहौल को जोश और उत्साह से भर दिया. 3 साल के नन्हे खिलाड़ियों से लेकर 20 वर्ष तक के युवाओं ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. मिर्जापुर, भदोही, गाजीपुर, बलरामपुर समेत कई जिलों और राज्यों से आए खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला.किसी के चेहरे पर जीत की चमक थी तो कहीं हार के बाद भी सीखने का जज़्बा. मेजबान वाराणसी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया. गाजीपुर दूसरे और बलरामपुर तीसरे स्थान पर रहा. UMAI ग्रुप के खिलाड़ियों ने गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर शहर का नाम रोशन किया. वाराणसी की आश्वी मिश्रा ने फ्रेशर कैटेगरी में पहली बार उतरते ही गोल्ड मेडल जीतकर सबका ध्यान खींचा. आश्वी ने अपनी सफलता का श्रेय गुरुजनों और कड़ी मेहनत को दिया. कोच विकास यादव ने कहा, “ये मेडल सिर्फ धातु नहीं, बल्कि उन सुबहों की मेहनत है जब बच्चे सूरज से पहले अभ्यास के लिए मैदान में होते हैं.”फ्रेशर कैटेगरी के उभरते नामफ्रेशर वर्ग में समृद्धि, मानवी, लावण्या, क्योंरके इसीका, रितिका और रिसीका जैसे खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन कर अपनी छाप छोड़ी. इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बनारस की धरती पर खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं, बस उन्हें मंच और मार्गदर्शन की जरूरत है.Also Read: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित नई व्‍यवस्‍था, श्रद्धालुओं को होगा बेहतर अनुभवhttps://www.youtube.com/watch?v=OxmuubD2ofQ