स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खड़ी की चतुरंगिणी सेना, पदानुसार तय की जिम्मेदारी

वाराणसी: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ, धर्म और ब्राह्मण की रक्षा के लिए वाराणसी में सोमवार को चतुरंगिणी सेना के गठन की घोषणा की है. यह सेना समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की सुरक्षा के लिए समर्पित होगी. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस पहल के माध्यम से समाज में एकजुटता और जागरूकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. इसमें पदानुसार पतिपाल, सेनामुखपति, गुल्मपति, गणपाल, वाहिनीपति, पृतनापति, चमुपति, अनीकिनीपति और महासेनापति होंगे. चतुरंगिणी सेना में 2 लाख 18 हजार 700 सैनिक होंगे, इसमें देशभर से लोग भर्ती होंगे.

सेना के काम करने के तरीके पर कहा कि पहले टोको, यानी टोकेंगे. कहो कि यह गलत हो रहा है. नहीं माने तो रोको. भाई, आपको रुकना पड़ेगा. नहीं तो फिर ठोको. ठोको का मतलब सीधे प्रहार करना नहीं है. मुकदमा करना, शिकायत करना और पंचायत करना भी ठोको में आएगा. ये सभी संवैधानिक तरीके अपनाते हुए काम करेंगे.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि चतुरंगिणी सेना का गठन उन सभी लोगों के लिए एक मंच प्रदान करेगा जो गौ, धर्म और ब्राह्मण की रक्षा के प्रति समर्पित हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सेना न केवल धार्मिक मूल्यों की रक्षा करेगी, बल्कि समाज में एकता को भी बढ़ावा देगी. सेना का मकसद अभिभावक के भाव को समृद्ध करना है. बताया कि यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े सनातनी लोगों की रक्षा के लिए काम करेगी.

स्वामी ने यह भी बताया कि चतुरंगिणी सेना का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और लोगों को अपने धार्मिक अधिकारों के प्रति सजग करना है. उन्होंने कहा कि आज के समय में जब धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में इस प्रकार की पहल अत्यंत आवश्यक है. कहा कि हिंदू समाज के भीतर से भय खत्म करना इसका मकसद है. ताकि अन्याय का प्रतिकार करने के लिए उनमें किसी प्रकार का भय ना हो. बताया कि चार अंगाध्यक्ष इसमें मनबल, तनबल, धनबल और जनबल को नियंत्रित करेंगे जिनके जिम्मे पांच अलग अलग प्रभाग होंगे.
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अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना के सदस्यों से की अपील
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना के सदस्यों से अपील की कि वे अपने कर्तव्यों का पालन करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्रिय रहें. उन्होंने कहा कि यह सेना न केवल गौ और धर्म की रक्षा करेगी, बल्कि समाज के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करेगी.
चतुरंगिणी सेना का गठन
स्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि चतुरंगिणी सेना का गठन किसी भी प्रकार की हिंसा या असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया गया है. उनका उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस अवसर पर सभी धर्मप्रेमियों से अपील की कि वे इस पहल में शामिल हों और अपने-अपने स्तर पर समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करें. उन्होंने कहा कि एकजुटता में ही शक्ति है और सभी को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा.



