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इस देश में सबसे पहले मनाया गया नए साल का जश्न! जानें

इस देश में सबसे पहले मनाया गया नए साल का जश्न! जानें
Jan 01, 2026, 08:44 AM
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Posted By Preeti Kumari

देशभर में आज हर कोई नए साल का जश्न में डूबा हुआ है. लेकिन क्या आपको पता है कि पूरी दुनिया में एक साथ कैलेंडर नहीं बदलता है. जरूरी नहीं की भारत में 2026 आ गया तो री दुनिया भी नये साल के जश्न में डूबी होगी. दरअसल, हर देश का अपना टाइम जोन होता है. ऐसे में ये जानना भी दिलचस्प है कि सबसे पहले नया साल कहां पर आता है. बता दें, दुनिया में सबसे पहले नए साल का जश्न प्रशांत महासागर के किरिबाती द्वीप पर मनाया जाता है, जिसे क्रिसमस आइलैंड भी कहते हैं. यह UTC+14 टाइम जोन में आता है, जो इसे बाकी दुनिया से घंटों आगे रखता है. पृथ्वी के घूमने और टाइम जोन के अंतर के कारण कई देशों में नए लसा का आगमन अलग-अलग समय पर होता है. इंटरनेशनल डेट लाइन भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे किरिबाती में जब नया साल आता है, तब न्यूयॉर्क में पिछला साल ही चल रहा होता है.


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दरअसल, किरिबाती प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटा द्वीपीय देश है. ये अपनी भौगोलिक स्थिति के चलते दुनिया में सबसे पहले नया साल मनाने के लिए काफी मशहूर है. प्रशांत महासागर के एक छोटे से द्वीप किरिबाती में सबसे पहलेदुनिया में नए साल की आमद होती है. यानी जब यहां पटाखों की गूंज और खुशियां गूंजती हैं, तो बाकी दुनिया को नए साल का इंतजार होता है. यह जगह इतनी अनोखी है कि यहां नया साल बाकी दुनिया से घंटों पहले ही आ जाता है. करीब 41 देश ऐसे हैं जो भारत से पहले नए साल का स्वागत कर रहे होते हैं. किरिबाती के बाद न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में नए साल का जश्न मनाने की परंपरा है. जैसे जैसे टाइम जोन आगे बढ़ेगा दुनिया नए साल की धूम मचनी शुरू हो जाती है.


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किरिबास ने बदला टाइम जोन


1994 (चौरानबे) की बात करें तो किरिबाती – जिसे “किरिबास” के नाम से भी जाना जाता है. ये वहीं किरिबास ये जिसने अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पार टाइम जोन बदलने का काम किया है, ताकि सभी 33 द्वीपों में एक ही तारीख हो (पहले अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पूर्वी तरफ कुछ द्वीप थे). प्रशांत द्वीप देशों समोआ, टोंगा, और टोकेलाऊ – जो ऑकलैंड से लगभग 3,500 किमी उत्तर में न्यूजीलैंड का एक आश्रित क्षेत्र है – इसने भी जश्न के साथ 2026 का स्वागत किया है. किरिबाती द्वीप हवाई के दक्षिण और ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में स्थित है, जहां कोरल रीफ्स की वजह से फैला हुआ इलाका लगभग 4,000 किलोमीटर तक पूर्व से पश्चिम तक फैला हुआ है, यहां की आबादी कुछ खास नहीं है.


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क्या टाइम जोन का 'रहस्य'


नए साल का जश्न कई देशों में अलग समय पर क्यों मनाया जाता है. क्योंकि, जवाब पृथ्वी की घूमने की रफ्तार और लंबाई-चौड़ाई की लाइनें है. पृथ्वी 24 घंटे में 360 डिग्री घूमती है, यानी हर 15 डिग्री देशांतर पर एक घंटे का फर्क पड़ता है. हर एक डिग्री देशांतर पर समय में चार मिनट का अंतर आता है, क्योंकि पूरे 360 डिग्री को 1,440 मिनट (24 घंटे) में बांटा जाता है.


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यह सिस्टम इंटरनेशनल डेट लाइन से जुड़ा है, जो प्रशांत महासागर से गुजरती है. इस लाइन के पूर्व में समय आगे होता है, जबकि पश्चिम में पीछे, नतीजा यह कि कुछ देश नए साल में पहले कदम रखते हैं, जबकि दूसरे कई घंटों बाद. मिसाल के तौर पर, किरिबाती में जब 2026 शुरू होता है, तो न्यूयॉर्क में अभी 31 दिसंबर की सुबह होती है

95 बटालियन CRPF का धूम-धाम से मना 38वाँ स्थापना दिवस, आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या
95 बटालियन CRPF का धूम-धाम से मना 38वाँ स्थापना दिवस, आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या
वाराणसी: 95 बटालियन सीआरपीएफ ने बीते 1 अप्रैल को अपना 38वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया. इस अवसर पर बटालियन के कमांडेंट राजेश्वर बालापुरकर ने स्पेशल गार्ड की सलामी ली और सभी कार्मिकों को बधाई देते हुए बटालियन के कार्यों को याद किया. अपने इस स्थापना दिवस पर विशेष रूप से सभी जवानों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, किसी भी बटालियन के लिए अपना वार्षिकोत्सव उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना किसी व्यक्ति के जन्मदिन का. उन्होंने बटालियन के गौरवशाली इतिहास और उपलब्धियों को याद करते हुए सभी कार्मिकों का उत्साहवर्धन किया.भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन38वें स्थापना दिवस के अवसर पर वाहिनी मुख्यालय में शाम के समय पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता द्वितीय कमान अधिकारी आलोक कुमार ने की. जहां मुख्य अतिथि के रूप में आशीष जैन, डीआरएम वाराणसी और मनोज कुमार, डीआईजीपी एनडीआरएफ उपस्थित रहे. बता दें, अप्रैल को 95 बटालियन CRPF की स्थापना दिवस होता है, जिसके उपलक्ष्य में इसे धूम-धाम के साथ मनाया गया है.कार्यक्रम में घुला संगीत का रंगसबसे खास बात तो यह रही कि इस समारोह में दिग्गज अधिकारी से लेकर वाहिनी के जवानों और उनके परिजनों ने कई प्रकार के लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किया, साथ ही अधिकारियों, जवानों और उनके परिवारिजनों ने मिलकर एक साथ बड़े खाने में भोजन भी किया. जहां हर कोई एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते नजर आए. जिसके चलते कार्यक्रम का वातावरण काफी संगीतमय दिखा. 95 बटालियन सीआरपीएफ का स्थापना दिवस हर वर्ष 1 अप्रैल को ही मनाया जाता है. यह दिन न केवल बटालियन की स्थापना की याद दिलाता है, बल्कि सभी कार्मिकों को एकजुटता और समर्पण की प्रेरणा भी देता है.असिस्टेंट कमांडेंट अभिषेक सिंहआशुतोष शाहुअभिषेक कुमारशिव कुमार दिक्षितरंजन कुमार सिंहसांस्कृतिक कार्यक्रम में काशी विश्वनाथ मंदिर के श्रीकांत महंत, कमांडेंट सीआईएसएफ श्रीमती सुचिता सिंह, डीडीए पहाड़ियां मंडी संजय सिंह, डीडीसी पहाड़ियां मंडी अमित कुमार, डॉ. अजय तिवारी (नयी सुबह संस्था), एस.एन. यादव (HBIS), राजीव कुमार सिंह (SHO लालपुर), आदित्य राज सिंह (संत अतुलानंद) सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- अभी खेल बाकी है, फिर करेंगे ईरान पर जोरदार हमला
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- अभी खेल बाकी है, फिर करेंगे ईरान पर जोरदार हमला
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अभी भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि,अभी वो ईरान जंग को खत्म करने नहीं जा रहे हैं. क्योंकि, अमेरिकी सेना लक्ष्य हासिल करने के करीब है और अमेरिका अगले 2-3 सप्ताह तक ईरान पर 'बेहद कड़ा' प्रहार करेगा. लेकिन उससे पहले ये बता दें कि, एक महीने की जंग में अमेरिकी सेना ने ईरान की हालत इतनी खराब कर दी है कि अमेरिकी हमले में ईरानी नौसेना और एयरफोर्स तक तबाह हो चुके है. साथ ही उसके टॉप लीडर तक मारे जा चुके हैं.अपने इसी कार्रवाई पर डोनाल्ड ट्रंप ने खुद की बड़ाई करते हुए ये तक कह दिया कि, अमेरिका के इतिहास में आज-तक कोई भी राष्ट्रपति मेरे जैसा काम नहीं किया होगा. जो आज डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शासन काल में कर दिखाया है. वो मिडिल ईस्ट में की गई पिछली सरकारों की गलतियों को सुधार रहे हैं.ट्रंप ने संबोधन में कह दी बड़ी बात दरअसल, अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमला शुरू करने के बाद से ट्रंप का यह पहला प्रमुख संबोधन है. गौर करने वाली बात यह है कि अपने संबोधन में उन्होंने वहीं बात कहीं है जो कुछ दिनों पहले भी अपने इन्हीं बयानों को लेकर चर्चाओं में छाएं हुए थे. हालांकि, यह संबोधन ऐसे समय पर हुआ है, जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया जा रहा है.इस महायुद्ध का दूसरे महीना भी लग गया है, जिसे विराम देने के लिए खुद डोनाल्ड ट्रंप ने ये दावा किया था कि कुछ दिनों में युद्ध खत्म हो जाएगा, लेकिन ईरान के साथ चल रहे जंग को खत्म नहीं करने के दावे ने हर किसी को हैरान कर दिया है. लेकिन हाल के दिनों में इस संघर्ष को लेकर अमेरिकी जनता के बीच नाराजगी भी साफ देखने को मिल रही है. जो अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि उन्हें आरोपों का सामना करना पड़ रहा है कि उन्होंने मिडिल ईस्ट के इस संघर्ष पर कंट्रोल खो दिया है, जिससे युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर पाएंगे.अपने ही दावे से मुकरे डोनाल्ड ट्रंप कुछ भी हो ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले ट्रंप ने खुद ही इस जंग में अमेरिका की जीत बता चुके हैं. ऐसे में उन्होंने दुनिया भर में फैले आर्थिक नतीजों की जिम्मेदारी लेने से भी साफ इंकार कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप के इस रवैये को देख अमेरिकी जनता समेत देश और दुनिया के लोग काफी हैरान है, उन्हें ये समझ नहीं आ रहा है कि आखिर ट्रंप राष्ट्रपति के पद पर होकर इस तरह की बाते करना और अपने दावों से पल भर में मुकर जाना ठीक नहीं है, इसका असर आने वाले आगामी चुनाव पर साफ पड़ सकता है. जिससे ट्रंप बिलकुल भी परे है.यह भी पढ़ें: यूपी कॉलेज में छात्रों ने काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन, प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांगबता दें, एक तरफ ट्रंप द्वारा ये दावा किया जा रहा है कि, ईरानी सेना पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है, इसकी कमजोरी का कारण अमेरिकी हमला है, जिससे वो डर चुका है, तो दूसरी तरफ ईरान ने इजरायल पर हवाई हमला कर दिया है. इजरायल की सेना ने कहा कि उसके एयरडिफेंस ने गुरुवार तड़के ईरानी मिसाइलों की तीन लहरों का जवाब दिया. खास बात है कि तीसरी लहर की खबर डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के तुरंत बाद सामने आई है. जो काफी हैरान कर देने वाली है.
यूपी कॉलेज में छात्रों ने काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन, प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग
यूपी कॉलेज में छात्रों ने काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन, प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग
वाराणसी: यूपी कॉलेज परिसर में बीएससी चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र सूर्य प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या के बाद से छात्र आक्रोशित हैं. इस बीच गुरुवार को भी उनका आंदोलन जारी रहा. उन्‍होंने काली पट्टी बांधकर धरना-प्रदर्शन किया. छात्रों ने बांहों पर काली पट्टी बांधकर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध जताया और घटना की निंदा की. धरने पर बैठे छात्रों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कॉलेज प्रशासन से कैंपस सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, प्राचार्य सहित दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मृतक छात्र के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की.हत्याकांड में की न्याय की मांग इसी दौरान हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज के छात्रों ने भी विशाल सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन किया और सूर्य प्रताप सिंह हत्याकांड में न्याय की मांग की. 20 मार्च को दिनदहाड़े यूपी कॉलेज परिसर में ही सूर्य प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मुख्य आरोपी मंजीत चौहान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है जबकि दूसरे आरोपी अनुज ने कोर्ट में समर्पण कर दिया था. छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने पहले से सुरक्षा में लापरवाही बरती जिसके चलते यह घटना हुई.यह भी पढ़ें: पुलिस और गौ तस्‍कर के बीच मुठभेड़, आरोपी के पैर में लगी गोलीछात्रों ने प्राचार्य धर्मेंद्र कुमार सिंह को तत्काल हटाने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी रखी है. बता दें कि बुधवार को भी विरोध के दौरान कुछ छात्रों ने बाल मुंडवाए थे. इस बीच पुलिस ने कालेज परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है. छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे लेकिन न्याय मिलने तक नहीं हटेंगे.