इस देश में सबसे पहले मनाया गया नए साल का जश्न! जानें

देशभर में आज हर कोई नए साल का जश्न में डूबा हुआ है. लेकिन क्या आपको पता है कि पूरी दुनिया में एक साथ कैलेंडर नहीं बदलता है. जरूरी नहीं की भारत में 2026 आ गया तो री दुनिया भी नये साल के जश्न में डूबी होगी. दरअसल, हर देश का अपना टाइम जोन होता है. ऐसे में ये जानना भी दिलचस्प है कि सबसे पहले नया साल कहां पर आता है. बता दें, दुनिया में सबसे पहले नए साल का जश्न प्रशांत महासागर के किरिबाती द्वीप पर मनाया जाता है, जिसे क्रिसमस आइलैंड भी कहते हैं. यह UTC+14 टाइम जोन में आता है, जो इसे बाकी दुनिया से घंटों आगे रखता है. पृथ्वी के घूमने और टाइम जोन के अंतर के कारण कई देशों में नए लसा का आगमन अलग-अलग समय पर होता है. इंटरनेशनल डेट लाइन भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे किरिबाती में जब नया साल आता है, तब न्यूयॉर्क में पिछला साल ही चल रहा होता है.

दरअसल, किरिबाती प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटा द्वीपीय देश है. ये अपनी भौगोलिक स्थिति के चलते दुनिया में सबसे पहले नया साल मनाने के लिए काफी मशहूर है. प्रशांत महासागर के एक छोटे से द्वीप किरिबाती में सबसे पहलेदुनिया में नए साल की आमद होती है. यानी जब यहां पटाखों की गूंज और खुशियां गूंजती हैं, तो बाकी दुनिया को नए साल का इंतजार होता है. यह जगह इतनी अनोखी है कि यहां नया साल बाकी दुनिया से घंटों पहले ही आ जाता है. करीब 41 देश ऐसे हैं जो भारत से पहले नए साल का स्वागत कर रहे होते हैं. किरिबाती के बाद न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में नए साल का जश्न मनाने की परंपरा है. जैसे जैसे टाइम जोन आगे बढ़ेगा दुनिया नए साल की धूम मचनी शुरू हो जाती है.

किरिबास ने बदला टाइम जोन
1994 (चौरानबे) की बात करें तो किरिबाती – जिसे “किरिबास” के नाम से भी जाना जाता है. ये वहीं किरिबास ये जिसने अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पार टाइम जोन बदलने का काम किया है, ताकि सभी 33 द्वीपों में एक ही तारीख हो (पहले अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पूर्वी तरफ कुछ द्वीप थे). प्रशांत द्वीप देशों समोआ, टोंगा, और टोकेलाऊ – जो ऑकलैंड से लगभग 3,500 किमी उत्तर में न्यूजीलैंड का एक आश्रित क्षेत्र है – इसने भी जश्न के साथ 2026 का स्वागत किया है. किरिबाती द्वीप हवाई के दक्षिण और ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में स्थित है, जहां कोरल रीफ्स की वजह से फैला हुआ इलाका लगभग 4,000 किलोमीटर तक पूर्व से पश्चिम तक फैला हुआ है, यहां की आबादी कुछ खास नहीं है.

क्या टाइम जोन का 'रहस्य'
नए साल का जश्न कई देशों में अलग समय पर क्यों मनाया जाता है. क्योंकि, जवाब पृथ्वी की घूमने की रफ्तार और लंबाई-चौड़ाई की लाइनें है. पृथ्वी 24 घंटे में 360 डिग्री घूमती है, यानी हर 15 डिग्री देशांतर पर एक घंटे का फर्क पड़ता है. हर एक डिग्री देशांतर पर समय में चार मिनट का अंतर आता है, क्योंकि पूरे 360 डिग्री को 1,440 मिनट (24 घंटे) में बांटा जाता है.

यह सिस्टम इंटरनेशनल डेट लाइन से जुड़ा है, जो प्रशांत महासागर से गुजरती है. इस लाइन के पूर्व में समय आगे होता है, जबकि पश्चिम में पीछे, नतीजा यह कि कुछ देश नए साल में पहले कदम रखते हैं, जबकि दूसरे कई घंटों बाद. मिसाल के तौर पर, किरिबाती में जब 2026 शुरू होता है, तो न्यूयॉर्क में अभी 31 दिसंबर की सुबह होती है



