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वाराणसी में सुगम यातायात, गंगा पार एलिवेटेड रोड से शहर को जोड़ेंगे तीन पेडेस्ट्रियल सस्पेंशन ब्रिज

वाराणसी में सुगम यातायात, गंगा पार एलिवेटेड रोड से शहर को जोड़ेंगे तीन पेडेस्ट्रियल सस्पेंशन ब्रिज
Jan 12, 2026, 07:50 AM
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Posted By Monisha Rai

वाराणसी : महादेव की नगरी काशी में देश - विदेश से बडी संख्‍या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. चौतरफा बढ़ते पर्यटकों और श्रद्धालुओं के दबाव को देखते हुए सुगम यातायात के लिए कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं. इसमें से एक है गंगा के समानांतर विश्व सुंदरीपुल से रिंग रोड पर निर्माणाधीन गंगापुल तक लगभग 15 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड फोरलेन की योजना है. इसमें श्री काशी विश्वनाथ धाम तक पेडेस्ट्रियल सस्पेंशन ब्रिज बनाने की भी योजना है. इसके साथ ही अस्सीघाट और राजघाट के पास कहीं पर पेडेस्टियल सस्पेंशन ब्रिज भी बनाने के प्रस्ताव पर सहमति बनी है.


जिले के प्रभारी व वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पिछले दिनों कोर कमेटी की होटल रेडिसन में आयोजित बैठक में उक्त प्रस्ताव पर मंथन हुआ. कहा गया कि लोग अपनी गाड़ियां गंगा पार पार्क कर पैदल आकर शहर में अपना कार्य कर सकेंगे. इससे शहर में वाहनों का दबाव कम होगा. परियोजना के डीपीआर में इसे शामिल करने पर सहमति बनी. इसी प्रकार वरुणा नदी के किनारे बनने वाले एलिवेटेड रोड के संबंध में भी चर्चा हुई. जनप्रतिनिधियों ने कहा इससे शहर में आने वालों को सुगम यातायात मिलेगा. मंत्री ने कहा कि श्री शिवप्रसाद गुप्त चिकित्सालय में 350 करोड़ की लागत से मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल के लिए कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है.

उसकी आगे की प्रक्रिया को तेज करें इससे पूर्वांचल के लोगों को चिकित्सा सेवा सुगम होगी. बीएचयू का दबाव कम होगा. टेक्सटाइल पार्क को भी मंजूरी मिल गई है. उसके लिए अधिकारियों से संपर्क कर आगे बढ़ाएं.


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इस दौरान प्रभारी मंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि वे एसआइआर में जिन भी पात्र मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है उसे मैपिंग करवाने में बीएलओ के माध्यम से सहयोग करें. बैठक में महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, श्रम मंत्री अनिल राजभर, स्टांप राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल, विधायक डा. नीलकंठ तिवारी, टी. राम, सौरभ श्रीवास्तव, भाजपा जिलाध्यक्ष एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, एमएलसी धर्मेंद्र राय, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, वीडीए वीसी पूर्ण बोरा आदि मौजूद रहे.

अग्रेजों ने ऐसे छिना भारतीयों का हक, जाने कैसे मिला संविधान
अग्रेजों ने ऐसे छिना भारतीयों का हक, जाने कैसे मिला संविधान
भारत का गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय उत्सव नहीं, बल्कि देश की विदेश नीति, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आईना भी है. गणतंत्र दिवस के मनाने की असली वजह यह है कि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था, जिससे देश एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और गणराज्य बनकर उभरा. ये वहीं दिन है जिस दिन भारत देश ने ब्रिटिश कानूनों की जगह अपने संविधान को अपनाया था, ये वो दिन है जब ब्रिटिश शासन की उन बेड़ियों से भारत वासियों को मुक्ति मिली थी, जिसने उनके अधिकारों को तो छिना ही साथ ही इन अंग्रेजो उनका जीवन-यापन तक करना दुश्वार कर दिया.ऐसे क्रूर्रता भरे अग्रेजों के शासन से आजादी मिलना भारतीयों के लिए एक नए जीवन जीने की किरण जैसी थी. जिससे वो हमेशा के लिए आजाद हो गये. इन्हीं जंजीरों से छुटकारा मिलने की वजह से 1930 के ऐतिहासिक दिन को चिन्हित करने के लिए चुना गया था. जिससे जनता को अपनी सरकार चुनने का अधिकार मिल सका. जो एक संवैधानिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव है. यह दिन नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और राष्ट्र की एकता के प्रति संविधान के सम्मान की याद दिलाता है.भारत आधिकारिक तौर पर बना गणतंत्र26 जनवरी का दिन देशभर के लिए बड़ा ही खास दिन होता है. क्योंकि, यह वो दिन है जब भारत आधिकारिक तौर पर गणतंत्र बना और उसने खुद अपना संविधान चुना. जो हर भारतवासियों के लिए बड़े ही गर्व की बात है. यहीं कारण है कि भारत के इतिहास में इस दिन का बहुत बड़ा महत्व है क्योंकि यह औपनिवेशिक अतीत से एक लोकतांत्रिक, संप्रभु राष्ट्र में परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है. ब्रिटिश सरकार की गुलामी से आजादी दिलाने वाली 26 जनवरी की ये तारीख हर भारतीयों के रघों में बसी है.इस आजादी ने भारत को अपना सम्मान, इज्जत, हक के साथ-साथ वो सभी अधिकार दिये जिसका भारत हकदार रहा है. सबसे खास भारत के लोकतंत्र की नींव संविधान है, जिससे भारत को एक बड़ी पहचान मिली है. यह दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसे तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा. इतने लंबे समये के बाद 26 नवंबर 1949 (उनचास) को यह बनकर तैयार हुआ. जो भारत की ताकत बनकर उभरा.जाने ब्रिटिश शासन से मुक्ति का प्रतीकभारत अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की याद में 26 जनवरी के दिन को जश्न के रूप में मनाता है. स्वतंत्रता दिवस जो ब्रिटिश शासन से मुक्ति का प्रतीक माना गया है, इस आजादी के दिन भारत अपने संविधान के साथ एक संप्रभु राष्ट्र बना, जिसने 1935 के भारत सरकार अधिनियम का स्थान भी लिया. इसे सुनकर आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि, जब हमारा संविधान 26 नवंबर को बनकर तैयार हो गया था, तो इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी का इंतजार क्यों किया गया? तो बता दें, भारतीय संविधान बनने से 20 साल पहले यानी 1929 में इस कहानी की शुरूआत हुई.उस समय लाहौर में इंडियन नेशनल कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था, जिसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था. ये वहीं अधिवेशन है जिसमें कांग्रेस ने पहली बार अंग्रेजों से डोमिनियन स्टेटस यानी अर्ध-स्वतंत्रता की मांग के बजाय 'पूर्ण स्वराज' का संकल्प लिया था. जिसके बाद से लाहौर अधिवेशन में यह फैसला लिया गया कि, 26 जनवरी 1930 को देशभर में 'स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा. इसी की खुशी में उस दिन हर भारतीयों ने पहली बार भारत देश का तिरंगा फहराते हुए अंग्रेजों की गुलामी से आजाद होने की कसम खाई थी.इतिहास के पन्नों में छाया 26 जनवरी बता दें, जब 1947 (सैंतालीस) में भारत असल में आजाद हुआ, तो वह तारीख 15 अगस्त थी. इसलिए इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन संविधान निर्माताओं, खासकर पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के मन में उस 26 जनवरी की तारीख के प्रति एक बड़ा सम्मान छिपा था, जिसके चलते वे नहीं चाहते थे कि 26 जनवरी जैसी ऐतिहासिक तारीख इतिहास के पन्नों से कहीं गायब हो जाए.इसलिए, इसे ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया कि भले ही संविधान 26 नवंबर 1949(उनचास) को तैयार हो गया है, पर इसे आधिकारिक रूप से 26 जनवरी 1950 को ही लागू किया जाएगा, ताकि इस दिन को 'गणतंत्र दिवस' के रूप में इतिहास के पन्नों पर हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया जाए. तभी से हर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. "जय हिंद...जय भारत...जय जवान"
वाराणसी पुलिस लाइंस में महिला कमांडो दस्ता और वर्दी में डीआईजी का बेटा बने आकर्षण, मंत्री ने ली सलामी
वाराणसी पुलिस लाइंस में महिला कमांडो दस्ता और वर्दी में डीआईजी का बेटा बने आकर्षण, मंत्री ने ली सलामी
वाराणसी : 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिले में देशभक्ति का उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला. सरकारी भवनों, राज्य व केंद्रीय कार्यालयों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों और निजी प्रतिष्ठानों तक राष्ट्रीय पर्व धूमधाम से मनाया गया. वाराणसी पुलिस लाइंस में पहली बार महिला पुलिसकर्मियों की ऑल वुमेन परेड का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें 400 महिला पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लेकर महिला सशक्तिकरण का मजबूत संदेश दिया. गणतंत्र दिवस पर आयोजित परेड की सलामी राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने ली. इस अवसर पर परेड में पहली बार महिला कमांडो दस्ता शामिल हुआ, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया. परेड के दौरान एक खास दृश्य तब देखने को मिला, जब डीआईजी शिवहरि मीणा के बेटे ने वर्दी पहनकर परेड में हिस्सा लिया और अधिकारियों से हाथ मिलाया. यह पल दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा.गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित इस परेड में महिला कमांडो दस्ता, महिला घुड़सवार पुलिस, महिला ट्रैफिक पुलिस और विभिन्न इकाइयों की महिला पुलिसकर्मी शामिल रहीं. परेड की सटीक ड्रिल, अनुशासन और आत्मविश्वास ने यह साबित कर दिया कि नारी शक्ति किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है. परेड स्थल पर मौजूद लोगों ने तालियों की गूंज के साथ महिला पुलिसकर्मियों का उत्साहवर्धन किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि आज देश में समानता की जो बात की जा रही है, उसका सजीव उदाहरण इस परेड में देखने को मिला. उन्होंने कहा कि नारी शक्ति किसी भी मायने में कम नहीं है और वाराणसी की इस परेड ने पूरे प्रदेश को गर्व का अवसर दिया है. उनके अनुसार, महिलाएं अब केवल सुरक्षा पाने वाली नहीं, बल्कि सुरक्षा देने वाली भूमिका में भी मजबूती से खड़ी हैं.मिशन शक्ति के जरिए महिलाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भरपुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कहा कि पुलिस विभाग के माध्यम से मिशन शक्ति को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है. इसका उद्देश्य महिलाओं के भीतर सुरक्षा, आत्मविश्वास और स्वावलंबन की भावना को विकसित करना है. उन्होंने बताया कि वाराणसी पुलिस महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास कर रही है, ताकि वे समाज में निर्भीक होकर आगे बढ़ सकें. इस ऐतिहासिक ऑल वुमेन परेड का नेतृत्व प्रशिक्षित आईपीएस अधिकारी मानसी सिंह ने किया. उनके नेतृत्व में परेड पूरी गरिमा, अनुशासन और आत्मबल के साथ संपन्न हुई, जिसने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा दिया.ALSO READ : गणतंत्र दिवस की परेड में दिखा भारत की झलक, परंपरा और विरासत ने मोह लिया मनसमारोह के दौरान अपने कर्तव्यों के निर्वहन में उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्य करने वाले 30 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारीगण को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया. यह सम्मान पुलिसकर्मियों के मनोबल को बढ़ाने तथा उत्कृष्ट कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदान किए गए.
गणतंत्र दिवस की परेड में दिखा भारत की झलक, परंपरा और विरासत ने मोह लिया मन
गणतंत्र दिवस की परेड में दिखा भारत की झलक, परंपरा और विरासत ने मोह लिया मन
देशभर में आज 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. 26 जनवरी 1950 के दिन देश का संविधान लागू किया गया था. इसी के साथ भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ था. 1950 में संविधान के लागू होने से ही भारत में इस दिन को मनाने की एक प्रथा बनी. देश की राजधानी दिल्ली में हर साल राजपथ (अब कर्तव्यपथ) पर परेड निकाली जाएगी, भारत के गणराज्य बनने से अब तक यह प्रथा हर साल देश के लोगों को गौरवान्वित करती है.कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना के जवानों की धमक, लड़ाकू विमानों की आसमान में गर्जना दुनिया को भारत की ताकत का संदेश देती है. परेड में शामिल राज्यों की झांकी देश की अनूठी कला, परंपरा और विरासत की झलक दिखाती हैं.गणतंत्र दिवस पर दिखी भारत की परंपरागणतंत्र दिवस के मौके पर किसी विशेष अतिथि को बुलाना भी भारत की परंपरा है. इस विशेष बात को एक परंपरा के तौर पर साल 1950 से ही निभाया जा रहा है. गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर इस साल यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल हो रहे हैं. गणतंत्र दिवस पर बुलाए जाने वाले विशेष अतिथि की सीट राष्ट्रपति की सीट के ठीक बराबर में लगाई जाती है. 26 जनवरी पर इस परेड को देखने के लिए भारी संख्या में लोग कर्तव्य पथ पर पहुंचते हैं.कौन करता है मुख्य अतिथि का चुनावगणतंत्र दिवस 2026 के लिए मुख्य अतिथि का चुनाव की प्रक्रिया विदेश मंत्रालय से होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय में संभावित अतिथियों की एक लिस्ट तैयार की जाती है. लिस्ट में जिन अतिथियों के नाम शामिल किए जाते हैं, उनकी उपलब्धता के बारे में भी पता लगाना रक्षा मंत्रालय का काम होता है. रक्षा मंत्रालय के लिस्ट बनाने के बाद मुख्य अतिथि के चुनाव का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय में लिया जाता है. इसके लिए चुने गए देशों से संपर्क भी किया जाता है, इस प्रक्रिया को पूरा करने में काफी समय लगता है.जाने कैसे तय होता है मुख्य अतिथिभारत में हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रमुख नेता आते हैं. इन राष्ट्राध्यक्षों का चुनाव भारत के वैश्विक संबंधों को ध्यान में रखकर किया जाता है. गणतंत्र दिवस के मौके पर इस साल यूरोपीय संघ का प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है. 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाली बैठक के बाद व्यापारिक संबंधों से जुड़े कई बड़े एलान किए जा सकते हैं.भारत में जब 1950 में इस परंपरा शुरुआत हुई थी, तब पहली बार इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए थे. भारत उस दौरान नए स्वतंत्र हुए देशों के साथ बेहकर रिश्ते बनाने पर जोर दे रहा था.