जेलब्रेक के बीच सुरक्षा घेरा मजबूत करने के लिए लेंगे सेंसर का सहारा, बंदियों की आनलाइन ड्यूटी

वाराणसी : हाल की जेलब्रेक की घटनाओं के बाद जेल प्रशासन के कान खडे हो गए हैं. इसकी रोकथाम के लिए कठाेर उपाय किए जा रहे हैं. इसके तहत कारागार में बंदी रक्षकों की सुरक्षा ड्यूटी पर अब सेंसर से निगरानी होगी. 25 दिनों के अंतराल पर पहले कन्नौज फिर अयोध्या जिला कारागार से दो-दो बंदियों भागने की घटना के बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा घेरा मजबूत करने के लिए आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन) तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है.
सुरक्षा दीवारों पर अलग-अलग स्थानों पर सेंसर टैग लगाए जाएंगे, जहां से होकर गुजरने पर ही बंदियों की ऑनलाइन ड्यूटी लग पाएगी. बंदीरक्षकों के अभी तक अपनी ड्यूटी टाइमिंग खुद से दर्ज करने के कारण कई तरह की सुरक्षा आशंकाएं बलवती हो उठती थीं. सेंसर से आनलाइन निगरानी होगी तो न ही सुरक्षा दीवार में सेंध लगेगी और न ही बंदी ऊंची दीवार फांद फुर्र हो पाएंगे.
जिला जेल वाराणसी में चंदौली जनपद के भी बंदियों के निरुद्ध किए जाने से यहां औसतन 1700 बंदी निरुद्ध रहते हैं. ऐसे में दीवार फांदकर भागने की घटनाओं के बाद जेल प्रशासन ने आठ सौ मीटर की सुरक्षा दीवार पर आरएफआईडी तकनीक आधारित सेंसर लगवाने का निर्णय लिया है. बंदी रक्षक सुरक्षा दीवारों की निगरानी करते चार घंटे में जितनी बार गुजरेंगे, वहां बायोमीट्रिक उपस्थिति लगाएंगे. इसका डेटा जेल के कमांड सेंटर में लगे कंप्यूटर में अंकित होता जाएगा. ड्यूटी मुस्तैदी से होगी तो घटनाएं होने का सवाल ही पैदा नहीं होगा.
ALSO READ : मणिकर्णिका घाट हंगामे के बाद बदली हरिश्चंद्र श्मशान घाट की डिजाइन, नहीं छेड़ेंगे देव विग्रह
आरएफआईडी का सेंसर कैसे करेगा काम
आरएफआईडी वायरलेस तकनीक की तरह काम करता है. यह रेडियो तरंगों के जरिए वस्तु व व्यक्तियों की पहचान करता है. इसमें एक आरएफआईडी टैग और एक रीडर होता है, जो भौतिक संपर्क के बगैर ही डेटा पढ़ने की शक्ति रखता है. जेल प्रशासन बंदियों का डेटा इसमें फीड करेगा, जिसे रेडियो सिग्नल के माध्यम से पढ़ा जा सकेगा. जेल अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि तकनीकि से हमारी सुरक्षा रणनीति मजबूत होगी. आरएफआईडी का उपयोग बड़े माल व संस्थानों में एंट्री प्वाइंट पर किया जाता है. यह तकनीक उसी व्यक्ति को पहचान कर जाने देती है, जिसका डेटा फीड रहता है. हमारे बंदी रक्षक जितनी बार, जिस-जिस समय टैग प्वाइंट पार करेंगे, उसकी टाइमिंग नोट होगी. इसका डेटा हमारे कमांड सेंटर के कंप्यूटर में कैद होगा, जिससे कभी भी चेक किया जा सकेगा. ड्यूटी सख्त होगी तो यकीन मानिए घटनाएं शून्य के स्तर पर आ पहुंचेंगी.



