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दाने-दाने को मोहताज वेनेजुएला, कभी दुनिया का चौथा अमीर देश था

दाने-दाने को मोहताज वेनेजुएला, कभी दुनिया का चौथा अमीर देश था
Jan 05, 2026, 12:34 PM
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Posted By Preeti Kumari

वेनेजुएला कुछ दिनों से हिंसा का शिकार बन बैठा था. उसके खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई से दुनिया भर में सनसनी फैल गई. क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अपनी हिरासत में लिया था. इस घटना पर नाराजगी जताते हुए रूस और चीन जैसे देशों ने अमेरिका की सख्त आलोचना की है. जहां रूसी विदेश मंत्रालय ने मादुरो और उनकी पत्नी को रिहा करने की अपील करते हुए ये कहा कि, अमेरिका को अपने फैसले पर फिर से सोचना चाहिए, क्योंकि दोनों देशों के बीच सभी विवादों का हल जंग नहीं बल्कि, बातचीत से किया जा सकता है.


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वहीं, चीन ने अमेरिका के इस कदम को तानाशाही करार दिया और कहा ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का उल्लंघन किया है, हालांकि, वेनेजुएला एक संप्रभु देश है, जिसके राष्ट्रपति को बंदी बनाना बड़े ही शर्म की बात है. लेकिन कुछ देशों ने ट्रंप के इस फैसले को सही ठहराया है.


ट्रंप फैसले पर जियोर्जिया मेलोनी की प्रतिक्रियां


इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने ट्रंप के कदम पर एक बड़ी प्रतिक्रिया दी. एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, वेनेजुएला में जो कुछ भी हो रहा है, उसपर मैंने बारीकी से नजर रखी है, इटली ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर कभी मादुरो की चुनावी जीत को मान्यता नहीं दी, हमने मादुरो के बुरे कामों की हमेशा निंदा की है. पर फिर भी हमारा मानना है कि इसे खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई करना सही रास्ता नहीं है. वहीं, अगर बात अपने देश की सुरक्षा की हो, वेनेजुएला ड्रग्स तस्करी का बढ़ावा दे रहा था, ऐसे में देश की सुरक्षा किसी भी सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.


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मादुरो की गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन


आपको बता दें, कि वेनेजुएला में कुछ दिनों से हो रही हिंसा के बीच गिरफ्तार हुए पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स, जिन पर अमेरिका ने नारको-टेररिज्म के आरोप लगाए हैं. अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में गिरफ्तार हुए मादुरो पर नारको-टेररिज्म (नार्को-आतंकवाद) और ड्रग तस्करी जैसे गंभीर आरोप तय किए गए हैं. इस मामले में मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोर्स को भी सहआरोपी बनाया गया है.


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दोनों को अमेरिकी जिला न्यायाधीश एल्विन के हेलरस्टीन की अदालत में पेश होने की बात सामने आई है. यह उन दुर्लभ मामलों में से एक है, जब किसी देश के शीर्ष नेता को दूसरे देश की अदालत में अपराधी की तरह पेश किया जाएगा. अमेरिका ने जो आरोप मादुरो पर लगाए हैं, उस मामले में उन्हें उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. वहीं इस मामले में मादुरो की गिरफ्तारी को राजनीतिक विश्लेषक अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं. विश्लेषकों का कहना है कि कानून की जगह ताकत ने ले ली है.


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दिलचस्प बात यह है कि सरकारें गिराना अमेरिकी विदेश नीति का हिस्सा रही हैं. ऐसे में वेनेज़ुएला कोई पहला देश नहीं है, जहां अमेरिका ने परोक्ष या अपरोक्ष रूप से किसी नेता को सत्ता से बेदखल किया हो, उसने इसी नीति के तहत 1953 (तिरेपन) में ईरान में प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग की सरकार तख्तापलट के जरिए गिरा दी थी. कुछ ऐसा ही हाल चिली में भी देखने को मिला जहां, 1973 (तिहत्तर) में राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंदे की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई समाजवादी सरकार ऑगस्टो पिनोशे नाम के सैन्य जनरल के नेतृत्व में हुए सैन्य तख्तापलट में गिर गई. इसी के बाद से चिली में सैन्य तानाशाही की शुरुआत हो गई, जिसके पीछे अमेरिकी की खुफिया एजेंसी सीआईए का पूरा-पूरा हाथ था.


जाने वेनेजुएला कैसे हुआ गरीब


वेनेजुएला एक ऐसा देश है जिसके पास सऊदी अरब से भी ज्यादा तेल है, लेकिन पिछले एक दशक से ना जाने उसे क्या हो गया है जिसके चलते उसने अपनी 80% जीडीपी गंवा दी है. कभी दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल इस देश ने अपनी दौलत का ऐसा मिसमैनेजमेंट तैयार किया, पर अफसोस कि आज वहां के लोग देश छोड़ रहे हैं. बात करें 1950 की तो जब आधी दुनिया दूसरे विश्व युद्ध के नुकसान से उबरने वाली ही थी कि तभी जमीन के नीचे से निकलने वाले काले सोने यानी तेल ने वेनेजुएला की किस्मत में चार चांद लगा दिया था, जिसके चलते 1952 (बावन) में वेनेजुएला दुनिया का चौथा सबसे अमीर देश बनकर उभरा था.


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इसी अमीरी के चलते वेनेजुएला की राजधानी काराकस की सड़कों पर लग्जरी कारें दौड़ने के साथ-साथ गगनचुंबी इमारतें भी खड़ी हो गई थी. लेकिन 1970 के दशक में जब पूरी दुनिया में तेल संकट मंडराते ही इसकी कीमतें आसमान छूने लगीं, ऐसे में वेनेजुएला के घरों में डॉलर की बारिश होने लगी. उस दौर के किस्से आज भी मशहूर हैं… तब वेनेजुएला दुनिया के सबसे महंगे स्कॉच व्हिस्की और शैंपेन के सबसे बड़े खरीदारों में से एक था. 1976 में सरकार ने तेल इंडस्ट्री का राष्ट्रीयकरण कर दिया और सरकारी कंपनी PDVSA बनाई, जो दुनिया की सबसे मुनाफे वाली तेल कंपनियों में से एक बनकर उभरी.


वेनेजुएला में छाई कंगाली


वेनेजुएला ने अपनी पूरी ताकत सिर्फ और सिर्फ तेल निकालने में लगा दी, यहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने खेती, फैक्ट्री और दूसरे बिजनेस पर ध्यान तक नहीं दिया, इसका नतीजा कुछ समय बाद काफी भयानक दिखा, जहां सूई से लेकर खाने तक के लिए वे दूसरे देशों पर निर्भर रहने लगे औक तेल के बदले सामान खरीदने लगे. 1999 (निन्यानबे) के बाद सरकार ने निवेश करने के बजाय डूबते देश के भविष्य की चिंता करते हुए मुफ्त योजनाओं में पैसा उड़ाने लगे, तब तक तेल की महंगाई ठीक-ठाक थी, लेकिन जैसे ही तेल की कीमतें गिरने लगी सरकार इस कदर कंगाल हुई मानों उसकी जेब में सैलरी देने तक के पैसे नहीं बचे. इसी के चलते सरकारी तेल कंपनी यानि (PDVSA) में काबिल इंजीनियरों को हटाकर राजनीतिक वफादारों को रखना शुरू कर दिया गया. इससे तेल उत्पादन की तकनीक खराब हो गई और कहीं ना कहीं बेरोजगारी की स्थिती जन्म लेने लगी, जिससे देश के 60 लाख से ज्यादा पढ़े-लिखे लोग (डॉक्टर, इंजीनियर) देश छोड़ने पर मजबूर हो गये.


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खास बात तो ह है कि भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत वहां से तेल खरीदने में मजबूर था. भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ऐसी रिफाइनरी है जो वेनेजुएला के 'भारी और गाढ़े' तेल को साफ करने के लिए दुनिया में बेस्ट मानी जाती है. वहीं, हीं ट्रम्प सरकार का दावा है कि इस सैन्य ऑपरेशन के बाद अब अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश करेंगी और वहां के टूटे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने में भी कामयाब होंगी. हालांकि, वहां बदलाव आएगा या नहीं, यह वहां बनने वाली नई सरकार पर निर्भर करता है, वो भी तब जब वहां अमेरिका समर्थित एक स्थिर व्यवस्था आती है, तो सालों से लगे हुए आर्थिक प्रतिबंध हज जाएंगे, जिसके बाद से वेनेजुएला एक बार फिर से तेल मामले में तरक्की कर सकेंगा.

काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के पहले दिन सजी भव्य सांस्कृतिक संध्या, भजनों और नृत्य से भक्तिमय हुआ माहौल
काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्रि के पहले दिन सजी भव्य सांस्कृतिक संध्या, भजनों और नृत्य से भक्तिमय हुआ माहौल
वाराणसी। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन रविवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित मंदिर चौक में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। मां भगवती की आराधना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को समर्पित इस कार्यक्रम में भजन गायन और नृत्य की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन उद्घोषिका मीनाक्षी दीक्षित ने किया।सांस्कृतिक संध्या में भजन गायक प्रवीण कुमार सिंह ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्तिमय वातावरण बनाया। इसके बाद भजन गायक शेर सिंह ने भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक भाव से जोड़ा। वहीं, सोनी सेठ के नृत्य समूह की आकर्षक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिए।ALSO READ : बीएचयू के श्री विश्वनाथ मंदिर में कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय पूजा कार्यक्रम का शुभारंभ.नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के साथ भारतीय कला, संगीत और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना है। मंदिर न्यास की ओर से नवरात्रि के प्रत्येक दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे धाम आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिल सके।श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।
सगरा तालाब के आसपास से हटेगा अतिक्रमण, नगर आयुक्त ने दिए सीमांकन के निर्देश.
सगरा तालाब के आसपास से हटेगा अतिक्रमण, नगर आयुक्त ने दिए सीमांकन के निर्देश.
वाराणसी। शहर में तालाबों के संरक्षण और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में रविवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने माधोपुर स्थित सगरा तालाब का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान तालाब के आसपास फैली गंदगी और अतिक्रमण की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तालाब की पैमाइश कराकर उसका सीमांकन कराने और अवैध अतिक्रमण को जल्द हटाने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने तालाब के आसपास की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से वहां की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि तालाबों का संरक्षण और उनके आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए तालाब की वास्तविक सीमा निर्धारित करना जरूरी है, ताकि उसके क्षेत्र में किए गए अवैध कब्जों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।नगर आयुक्त ने अधिकारियों को सगरा तालाब की तत्काल पैमाइश कराने और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालाब के आसपास यदि अवैध अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही तालाब और उसके आसपास के परिसर में व्यापक सफाई अभियान चलाकर गंदगी को दूर करने के निर्देश भी दिए।ALSO READ : केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचनसोमवार से शुरू होगी सफाई और आगे की कार्रवाईनगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए सोमवार से ही सफाई अभियान और आगे की कार्रवाई की योजना पर काम शुरू करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि तालाब के आसपास साफ-सफाई सुनिश्चित करने के साथ ही सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाए, ताकि तालाब की स्थिति में सुधार हो सके।नगर आयुक्त ने साफ किया कि तालाब के संरक्षण और सुंदरीकरण से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।नगर निगम की इस पहल से माधोपुर स्थित सगरा तालाब के आसपास स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने, उसकी सीमा स्पष्ट करने और अतिक्रमण की समस्या दूर करने की दिशा में कार्रवाई की उम्मीद है। अब संबंधित विभागों की ओर से की जाने वाली पैमाइश, सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचन
केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंदियों की रामलीला का शुभारंभ, मुकुट पूजन के साथ नारद मोह की लीला का मंचन
वाराणसी: केंद्रीय कारागार वाराणसी में नवरात्रि के प्रथम दिन रविवार को बंदियों द्वारा मंचित दस दिवसीय रामलीला का शुभारंभ विधि-विधान से मुकुट पूजन के साथ हुआ। रामलीला के पहले दिन नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। बंदियों ने अपनी अभिनय कला के माध्यम से नारद मोह की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस दौरान जेल के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ हुआ। इसके बाद नारद मोह की लीला का मंचन शुरू किया गया। कथा के अनुसार, कामदेव द्वारा नारद की समाधि भंग करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन वह इसमें असफल रहता है। इसके बाद नारद को अपनी तपस्या पर अभिमान हो जाता है और वह स्वयं को कामदेव पर विजय प्राप्त करने वाला मानने लगते हैं। नारद इस घटना का समाचार भगवान शिव को सुनाते हैं। भगवान शिव उन्हें भगवान विष्णु से इस प्रसंग का उल्लेख नहीं करने की सलाह देते हैं।अभिमान के वशीभूत नारद भगवान विष्णु के सामने भी अपनी विजय का वर्णन करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु अपने भक्त के अहंकार को दूर करने के लिए माया रचते हैं। माया के प्रभाव में नारद राजा शीलनिधि की कन्या पर मोहित हो जाते हैं और उससे विवाह करने की इच्छा व्यक्त करते हैं। वह भगवान विष्णु से अपने लिए सुंदर रूप प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।भगवान विष्णु नारद को वानर का रूप देकर भेजते हैं। स्वयंवर में अपने रूप को लेकर नारद को अपमान का सामना करना पड़ता है। इससे क्रोधित होकर नारद भगवान विष्णु को मनुष्य रूप धारण करने और नारी वियोग में दर-दर भटकने का श्राप दे देते हैं। इसी श्राप को भगवान राम के अवतार और उनके वनवास के प्रसंग से जोड़कर दिखाया गया। इसके बाद भगवान राम अपने अंशों सहित अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां प्रकट होते हैं। इसी प्रसंग के साथ रामलीला के पहले दिन का मंचन संपन्न हुआ।ALSO READ : सपा कार्यालय में मनाई गई लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती, संपूर्ण क्रांति के विचारों पर हुई चर्चा.केंद्रीय कारागार में बंदियों द्वारा आयोजित इस रामलीला का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना है। दस दिनों तक चलने वाली इस रामलीला में विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। बंदियों की सहभागिता से आयोजित यह कार्यक्रम जेल परिसर में धार्मिक वातावरण और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का माध्यम बना।इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी अभिषेक सिंह, जेलर अखिलेश कुमार, डिप्टी जेलर अखिलेश कुमार मिश्र, अमित कुमार वर्मा, अशोक कुमार राय, अयोध्या प्रसाद, भोजराज, श्रीमती अमिता श्रीवास्तव और फार्मासिस्ट संदीप खरे सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।