वाराणसी मंडल में एक भी केंद्र पर नहीं हुई गेहूं की खरीद, खल रही बोरों की कमी

वाराणसी: रबी विपणन वर्ष 2026–27 के तहत सोमवार से केंद्रों पर गेहूं खरीद शुरू हो गई है. बवजूद इसके पहले दिन वाराणसी मंडल में एक भी केंद्र पर खरीद नहीं हो सकी. एक भी किसान केंद्र तक नहीं पहुंचे, जबकि विभाग ने सभी तैयारियां पूरी होने का दावा किया है. खाद और रसद विभाग के क्षेत्रीय विपणन अधिकारी प्रदीप कुशवाहा ने बताया कि कुल 29 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं.

इनमें 24 स्थायी और 5 मोबाइल केंद्र हैं. मोबाइल केंद्रों के जरिये दूरदराज के किसानों तक पहुंच बनाकर उन्हें नजदीक ही गेहूं बेचने की सुविधा दी जा रही है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति कुंतल तय किया है जो पिछले साल से ज्यादा है. किसानों को उतराई, छनाई और सफाई के लिए 20 रुपये प्रति कुंतल अतिरिक्त भी दिए जाएंगे. पिछले वर्ष 2025–26 में वाराणसी मंडल में गेहूं खरीद का प्रदर्शन संतोषजनक रहा था.

बोरों की कमी से खरीद प्रभावित होने की आशंका
वाराणसी, आजमगढ़ और मीरजापुर मंडल के 10 जिलों में संचालित 629 गेहूं क्रय केंद्रों पर नए जूट बोरों की कमी से खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. कई जिलों में लक्ष्य के मुकाबले बोरे कम हैं, जिसके चलते प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है. मीरजापुर में केवल 302 गांठ (प्रत्येक में 500 बोरे) उपलब्ध हैं. कमी होने पर कोटेदारों से खाली बोरे लेने के निर्देश दिए गए हैं.

मऊ में करीब 20 हजार बोरे उपलब्ध
मऊ में करीब 20 हजार बोरे उपलब्ध हैं, लेकिन अतिरिक्त आवश्यकता के लिए शासन को मांग भेजी गई है. वाराणसी में फिलहाल बोरे की कमी नहीं है. जरूरत पड़ने पर प्लास्टिक बोरों का उपयोग किया जाएगा. गाजीपुर में लगभग 8.25 लाख बोरे (1650 गांठ) की आवश्यकता है, जबकि नए बोरे उपलब्ध नहीं हैं. फिलहाल पुराने बोरों से काम चलाया जा रहा है. बलिया में 1.50 लाख बोरे उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें 61,500 प्लास्टिक बैग शामिल हैं, जिससे जूट बोरों की कमी बनी हुई है.

चंदौली में नए बोरों का अभाव है, यहां पुरानी जूट बोरियों में ही खरीद की जाएगी. भदोही में मात्र 16 हजार बोरे उपलब्ध हैं. जिला खाद्य विपणन अधिकारी शिशिर कुमार के अनुसार, लक्ष्य के सापेक्ष यह संख्या कम है, इसलिए कोटे की दुकानों से बोरे खरीदने की योजना है. सोनभद्र में 50 हजार बोरे उपलब्ध हैं और अतिरिक्त बोरों के लिए मांग भेजी गई है. आजमगढ़ में कमी होने पर कोटेदारों से 18 से 20 रुपये प्रति बोरा की दर से जूट बोरे खरीदे जाएंगे.

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जौनपुर में 3.30 लाख बोरे उपलब्ध हैं. डिप्टी आरएमओ अमित द्विवेदी के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर यहां भी कोटेदारों से बोरे लिए जाएंगे. नए जूट बोरों की कमी के चलते अधिकांश जिलों में पुराने बोरे, प्लास्टिक बैग और कोटेदारों से खरीद जैसे विकल्पों पर निर्भरता बढ़ रही है. यदि समय रहते पर्याप्त नए बोरे उपलब्ध नहीं हुए, तो गेहूं खरीद की गति प्रभावित हो सकती है.
इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे आवश्यक कदम उठाएं ताकि खरीद प्रक्रिया में कोई बाधा न आए. किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उन्हें समय पर उचित मात्रा में बोरों की उपलब्धता हो. विभिन्न जिलों में बोरों की कमी के कारण गेहूं खरीद प्रक्रिया में चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं, और प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है.



