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विश्‍व कैंसर दिवस - एमपीएमएमसीसी व एचबीसीएच में 30% अधिक मरीजों को रेडिएशन उपचार

विश्‍व कैंसर दिवस - एमपीएमएमसीसी व एचबीसीएच में 30% अधिक मरीजों को रेडिएशन उपचार
Feb 03, 2026, 09:22 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी - उत्तर प्रदेश सहित आसपास के पड़ोसी राज्यों के कैंसर मरीजों को बेहतर और आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाराणसी स्थित महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर (एम.पी.एम.एम.सी.सी.) केंद्र एवं होमी भाभा कैंसर अस्पताल (एच.बी.सी.एच.) वाराणसी में लगातार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है. इसी कड़ी में पिछले साल अस्पताल में तीन अतिरिक्त रेडिएशन मशीन स्थापित की गई. इसका प्रत्यक्ष लाभ मरीजों को मिल रहा है और वर्तमान में दोनों संस्थानों में प्रतिदिन औसतन 350 मरीजों को रेडिएशन थेरेपी प्रदान की जा रही है. विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर अस्पताल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2025 में 2024 की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी गई.


बीमारी के प्रति जागरुकता बेहद आवश्यक


बता दें कि हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2022 में विश्वभर में कुल 20 मिलियन कैंसर के मामले दर्ज हुए थे, जबकि इसी अवधि में 9.7 मिलियन लोगों की मौत भी बीमारी से हो गई थी. ऐसे में बीमारी के प्रति जागरुकता बेहद आवश्यक है. कैंसर का इलाज मुख्य रूप से सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी के माध्यम से किया जाता है. महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष मुखर्जी ने बताया कि अस्पताल आने वाले लगभग 60 से 65 प्रतिशत मरीजों को इलाज के किसी न किसी चरण में रेडियोथेरेपी की आवश्यकता होती है. उन्होंने बताया कि जब वर्ष 2018 में अस्पताल की शुरुआत हुई थी, तब उस वर्ष केवल 532 मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी गई थी, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 4,735 हो गई. डॉ. मुखर्जी ने कहा कि शुरुआती दौर में अस्पताल में केवल एक रेडिएशन मशीन उपलब्ध थीं, जबकि वर्तमान में दोनों अस्पतालों को मिलाकर कुल छह आधुनिक रेडिएशन मशीनें कार्यरत हैं, जिससे बड़ी संख्या में मरीजों को प्रतिदिन उपचार दिया जा रहा है.

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25 प्रतिशत मरीज मुख कैंसर से पीड़ित


रेडिएशन थेरेपी लेने वाले मरीजों में लगभग 25 प्रतिशत मरीज मुख कैंसर से पीड़ित होते हैं, जिसका मुख्य कारण तंबाकू एवं इससे जुड़े उत्पादों का सेवन है. एक मरीज को रेडिएशन थेरेपी का पूरा कोर्स करने में औसतन 35 दिन का समय लगता है, हालांकि मरीज की स्थिति के अनुसार यह अवधि कम या अधिक हो सकती है. मुख कैंसर के बाद स्तन कैंसर के मरीजों की संख्या रेडिएशन थेरेपी के लिए दूसरे स्थान पर है. डॉ. मुखर्जी ने यह भी बताया कि कैंसर के इलाज में समय पर जांच और बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में पहचान अत्यंत आवश्यक है. इससे न केवल इलाज की सफलता की संभावना बढ़ती है, बल्कि उपचार प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत आसान हो जाती है. हालांकि, अधिकांश मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब बीमारी उन्नत अवस्था में होती है, जिससे इलाज में कई प्रकार की चुनौतियां सामने आती हैं.

रेडिएशन विभाग के चिकित्सक डॉ. संबित स्वरूप नंदा ने बताया कि अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनों के साथ उन्नत स्तर का तकनीक भी है, इसमें खासकर सांस के साथ समन्वय कर रेडिएशन देने के साथ ही त्वचा संबंधित बीमारियों के लिए रेडिएशन देना है. हर मरीज की स्थिति के अनुसार दिए जाने वाले थेरेपी के लिए अस्पताल सभी संसाधनों से संपन्न है. अस्पताल के निदेशक डॉ. सत्यजीत प्रधान ने बताया कि वर्तमान में दोनों संस्थानों में कुल छह रेडिएशन मशीनें कार्यरत हैं. इनमें से तीन नई मशीनें पिछले वर्ष शुरू की गई थीं, जिनमे से दो का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था.


वर्ष रेडिएशन पाने वाले मरीजों की संख्या

2018 532

2019 1153

2020 2090

2021 3050

2022 3264

2023 3307

2024 3641

2025 4735

शुगर पेशेंट्स फलों से बनाए रखे दूरी, जाने क्यों?
शुगर पेशेंट्स फलों से बनाए रखे दूरी, जाने क्यों?
डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसके होने का ज्यादातर लोगों को बहुत देर से पता चलता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक करीब 90 फीसदी लोगों को देर से पता चलता है कि वे शुगर का शिकार हो गए हैं. बीमारी की चपेट में आने के बाद मरीज को जिंदगी भर दवा के भरोसे शुगर को कंट्रोल रखना पड़ता है. इतना ही नहीं शुगर लेवल न बढ़ जाए, इसके लिए खानपान पर भी खास फोकस रखना काफी जरूरी होता है.जड़ वाली सब्जियों से दूर रहे डायबिटीट मरीज डायबिटीट को लेकर बहुत लोगों का मानना है कि, इस कंडीशन में जड़ वाली सब्जी नहीं खानी चाहिए. आलू से तो दूरी ही बनाकर रखनी चाहिए. वैसे डायबिटीज मरीजों को फल खाने चाहिए या नहीं ये कंफ्यूजन हर किसी के मन में अक्सर बनी रहती है. ये एक मिथक भी है कि शुगर पेशेंट्स को फ्रूट्स भूल से भी नहीं खाने चाहिए. फलों में नेचुरल शुगर (फ्रक्टोज) होता है जो इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ा सकती है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इन्हें फलों को ही नहीं खाना चाहिए. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि, फलों में शुगर के अलावा फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं. इसलिए बैलेंस तरीके से खाना चाहिए. ज्यादा मात्रा में नहीं, ताकि किसी तरह की कोई भी दिक्कते होने से आप बचें रहे.शुगर का लेवल कितना होना चाहिए ये पहले जानना काफी जरूरी है. बता दें, नॉर्मल शुगर लेवल 120 एमजी/डीएल है. अगर किसी का शुगर लेवल 140 से ज्यादा है तो ये चिंता का कारण है. लेकिन अगर ये 200 के पार है तो तुरंत डॉक्टरी इलाज जरूरी है. कभी-कभी ये लेवल 500 या इससे ज्यादा भी चला जाता है. शुगर को कंट्रोल न किया जाए तो ये धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खत्म करती जाती है. वैसे किसी का शुगर लेवल शूट कर जाए और इसे कंट्रोल न करें तो ऑर्गन तक डैमेज हो जाते हैं. एक्सपर्ट से जानें किन फलों को शुगर में खा सकते हैं और किन्हें नहीं?क्यों फलों से बढ़ता है डायबिटीजशुगर में फ्रूट्स को लेकर सबसे बड़ा मिथ ये है कि फलों से डायबिटीज बढ़ जाती है. एक्सपर्ट के मुताबिक सच ये है कि फ्रूट्स नेचुरल शुगर के साथ फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन भी देते हैं. ये तत्व ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. हालांकि आप फलों का सेवन किस तरह कर रहे हैं, इसका ध्यान रखना भी जरूरी है. शुगर के मरीज सेब, अमरूद, नाशपाती, पपीता, ऑरेंज/मौसंबी (साबुत), बैरीज, कीवी और अनार को खा सकते हैं. लेकिन खाने के तरीके पर फोकस रखना है जिसमें मात्रा कम हो और साबुत ही खाना चाहिए. ये फ्रूट्स लो टू मॉर्डरेट ग्लाइसेमिक इंडेक्स के होते हैं और शुगर स्पाइक धीरे करते हैं.शुगर पेशेंट न खाएं ये फलएक रिपोर्ट के अनुसार, डायबिटीज के मरीज आम, केला, चीकू, अंगूर, कस्टर्ड एप्पल और सभी तरह के फ्रूट जूस से दूरी बनाकर रखें तो ही अच्छा है. भले ही जूस फ्रेश ही क्यों न हो फिर भी इसे पीने से बचना चाहिए. दरअसल, जूस में फाइबर निकल जाता है और इसे पीने से शुगर सीधे ब्लड में चली जाती है.
NEET छात्रा मौत मामले में अब होगा पर्दाफाश, CBI ने दर्ज की FIR
NEET छात्रा मौत मामले में अब होगा पर्दाफाश, CBI ने दर्ज की FIR
बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों हलचल मचा हुआ है. नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में एक नया मोड आ गया है. अब इस केस में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी (सीबीआई) ने आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कर ली है. जांच एजेंसी ने इस मामले को स्पेशल केस के रूप में दर्ज करते हुए केस नंबर 7S/26 आवंटित किया है. जिसके बाद से मामले की जांच में जुटी एजेंसी ये पता लगाने में लगी हुई है कि छात्रा की मौत के पीछे साजिश है या फिर कुछ और ही सच्चाई है. जिसे लेकर सीबीआई टीम ने अपनी जांच को और भी तेज कर दिया है.वहीं, इस मामले को लेकर सूत्रों का कहना है कि, एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीम अब राज्य पुलिस और गठित की गई विशेष जांच दल यानि (एसआईटी) से अब तक की जांच से जुड़े सभी दस्तावेज, साक्ष्य और केस डायरी को जब्द कर लिया है. इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. माना जा रहा है कि सीबीआई की टीम जल्द ही पटना संबंधित अधिकारियों और गवाहों से पूछताछ शुरू कर सकती है.जानिए क्या है नीट छात्रा का मामला दरअसल, यह मामला सामने आते ही राजनीतिक रूप ले बैठा. विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर हमला करते हुए उस पर सवाल उठाने लगे फिर क्या इस मुद्दे के बहाने सदन से लेकर विधानसभा परिसर तक लगातार हंगामा और प्रदर्शन होने लगे. जहां इस मामले में जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच की मांग करने लगे. इस बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनभावनाओं को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते 31 जनवरी को केंद्र सरकार से इस प्रकरण की सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया, इस अपील के पीछे की वजह ये है कि नीतीश कुमार अपने पार्टी को फजीयत होने से बचाना चाहते है, जिसके चलते प्रदर्शन को देख उनकी बीपी हाई होने लगी.इस बात की जानकारी नीतीश कुमार के पार्टी के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के जरिए दी थी, राज्य सरकार के काफी अनुरोध करने पर केंद्र की मोदी सरकार ने इस मामले में जांच के लिए अपनी मंजूरी दी, जिसके बाद से सीबीआई ने नीट केस की कमान अपने हाथ में लेते हुए मामले का पर्दाफाश करने में लगी हुई है. यहीं कारण है कि अब हर किसी की निगाहें इस जांच एजेंसी पर जा टिकी हैं.पीड़ित परिजनों का आरोप आपको बता दें, कि छात्रा के पीड़ित परिजनों ने आरोप लगाया था कि एसआईटी उन पर दबाव बना रही है. बार-बार एक ही तरह की बातें पूछी जा रही हैं. वे लोग जांच से संतुष्ट नहीं हैं. परिजनों ने बिहार के डीजीपी से भी जाकर मुलाकात की थी. अब देखना यह होगा कि सीबीआई जांच शुरू करती है तो क्या कुछ निकलकर आता है.
कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, केबीएन प्‍लाजा जब्त
कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, केबीएन प्‍लाजा जब्त
वाराणसी : कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में रोहनिया पुलिस ने व्यापक विवेचना पूर्ण करते हुए मुख्य आरोपी भोला प्रसाद जायसवाल समेत कुल 07 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है. यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देशन में अपराधों की रोकथाम और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत की गई. पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के निर्देशन, अपर पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के नेतृत्व तथा सहायक पुलिस आयुक्त रोहनिया एवं प्रभारी निरीक्षक रोहनिया के पर्यवेक्षण में गठित टीम ने सुनियोजित तरीके से साक्ष्य संकलित कर आरोपियों के विरुद्ध मजबूत केस तैयार किया. उधर, कोतवाली में दर्ज मुकदमे में न्‍यायालय के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने महमूरगंज स्थित आरोपी भोला जायसवाल की संपत्ति केबीएन प्‍लाजा पर जब्‍ती की कार्रवाई की. इसी संपत्ति को पूर्व में रोहनिया पुलिस ने भी फ्रीज किया था.मुकदमे का पंजीकरण और विवेचना की दिशाथाना रोहनिया कमिश्नरेट वाराणसी पर मु0अ0सं0 0343/2025 धारा 8, 21, 25, 29 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज किया गया था. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी संगठित तरीके से कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त कर रहे थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल गठित किया गया, जिसने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, बैंकिंग लेनदेन, परिवहन रिकॉर्ड और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं.विवेचना के दौरान ई-वे बिल, बैंक स्टेटमेंट, नगद जमा पर्चियां, विभिन्न बैंकों की सीसीटीवी फुटेज, आयकर विवरणी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वाहनों के टोल डेटा, विधि विज्ञान प्रयोगशाला रामनगर की रिपोर्ट, औषधि निरीक्षक की परीक्षण रिपोर्ट तथा संबंधित दवा कंपनियों से प्राप्त दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया. बैंक प्रबंधकों, कैशियरों तथा स्वतंत्र गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए. इन सभी साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ कि आरोपी बड़े पैमाने पर अवैध तस्करी में संलिप्त थे.बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप का विवरणकार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप को बरामद किया था. बरामदगी में PHENSEDYL COUGH SYRUP 100 ML की कुल 18,600 शीशियां तथा ESKUF 100 ML COUGH SYRUP की कुल 75,150 शीशियां शामिल हैं. जांच में पुष्टि हुई कि इन दवाओं की वैध आपूर्ति कागजों में दर्शाई जाती थी, जबकि वास्तविक माल को अवैध रूप से अन्य राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता था.अपराध करने का तरीकाविवेचना से यह तथ्य प्रकाश में आया कि अभियुक्तों ने कागजी और फर्जी फर्म बनाकर हवाला के माध्यम से प्राप्त नगद धनराशि को वैध लेनदेन का रूप दिया. पहले नकदी विभिन्न फर्मों के बैंक खातों में जमा कराई जाती थी, फिर उसे अलग-अलग खातों के माध्यम से शैलि ट्रेडर्स के खाते में स्थानांतरित किया जाता था. इस प्रकार अवैध आय को वैध व्यापारिक लेनदेन के रूप में प्रस्तुत किया जाता था.कोडीनयुक्त कफ सिरप को गुप्त स्थानों पर छिपाकर रखा जाता था और आवश्यकता पड़ने पर ट्रांसपोर्ट के जरिए सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता था. जांच में संकेत मिले कि इस नेटवर्क के तार बांग्लादेश सीमा तक जुड़े थे, जहां माल ऊंचे दामों पर बेचा जाता था. इस अवैध कारोबार से अर्जित धन से चल-अचल संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया. इस संबंध में धारा 68-एफ एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत भी कार्रवाई की गई है.इस आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्रप्रकरण में में आरोपी आजाद जायसवाल, महेश कुमार सिंह, शिवाकांत उर्फ शिव, स्वपलिन केसरी, दिनेश कुमार यादव, आशीष यादव तथा भोला प्रसाद जायसवाल शामिल हैं. इनमें से भोला प्रसाद को शैली ट्रेडर्स का प्रोपराइटर बताया गया है. सभी आरोपियों के विरुद्ध संकलित साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है.ALSO READ : महाशिवरात्रि - एक हजार भक्‍त मंगला आरती में होंगे शामिल, 10 लाख भक्‍तों के पहुंचने का अनुमानमुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहासमुख्य आरोपी भोला प्रसाद के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट और अन्य धाराओं में वाराणसी, सोनभद्र, जौनपुर, चंदौली, झारखंड सहित कई जनपदों में अनेक मुकदमे दर्ज हैं. इसके अतिरिक्त सह अभियुक्तों के विरुद्ध भी विभिन्न थानों में मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े प्रकरण पंजीकृत पाए गए. पुलिस अन्य राज्यों में दर्ज मामलों की जानकारी भी एकत्र कर रही है. वहीं कोतवाली पुलिस ने भोला जायसवाल के व्‍यवसायिक कांप्‍लेक्‍स केबीएन प्‍लाजा को जब्‍त करने की कार्रवाई की.