विश्व कैंसर दिवस - एमपीएमएमसीसी व एचबीसीएच में 30% अधिक मरीजों को रेडिएशन उपचार

वाराणसी - उत्तर प्रदेश सहित आसपास के पड़ोसी राज्यों के कैंसर मरीजों को बेहतर और आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाराणसी स्थित महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर (एम.पी.एम.एम.सी.सी.) केंद्र एवं होमी भाभा कैंसर अस्पताल (एच.बी.सी.एच.) वाराणसी में लगातार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है. इसी कड़ी में पिछले साल अस्पताल में तीन अतिरिक्त रेडिएशन मशीन स्थापित की गई. इसका प्रत्यक्ष लाभ मरीजों को मिल रहा है और वर्तमान में दोनों संस्थानों में प्रतिदिन औसतन 350 मरीजों को रेडिएशन थेरेपी प्रदान की जा रही है. विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर अस्पताल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2025 में 2024 की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी गई.
बीमारी के प्रति जागरुकता बेहद आवश्यक
बता दें कि हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2022 में विश्वभर में कुल 20 मिलियन कैंसर के मामले दर्ज हुए थे, जबकि इसी अवधि में 9.7 मिलियन लोगों की मौत भी बीमारी से हो गई थी. ऐसे में बीमारी के प्रति जागरुकता बेहद आवश्यक है. कैंसर का इलाज मुख्य रूप से सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी के माध्यम से किया जाता है. महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष मुखर्जी ने बताया कि अस्पताल आने वाले लगभग 60 से 65 प्रतिशत मरीजों को इलाज के किसी न किसी चरण में रेडियोथेरेपी की आवश्यकता होती है. उन्होंने बताया कि जब वर्ष 2018 में अस्पताल की शुरुआत हुई थी, तब उस वर्ष केवल 532 मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी गई थी, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 4,735 हो गई. डॉ. मुखर्जी ने कहा कि शुरुआती दौर में अस्पताल में केवल एक रेडिएशन मशीन उपलब्ध थीं, जबकि वर्तमान में दोनों अस्पतालों को मिलाकर कुल छह आधुनिक रेडिएशन मशीनें कार्यरत हैं, जिससे बड़ी संख्या में मरीजों को प्रतिदिन उपचार दिया जा रहा है.
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25 प्रतिशत मरीज मुख कैंसर से पीड़ित
रेडिएशन थेरेपी लेने वाले मरीजों में लगभग 25 प्रतिशत मरीज मुख कैंसर से पीड़ित होते हैं, जिसका मुख्य कारण तंबाकू एवं इससे जुड़े उत्पादों का सेवन है. एक मरीज को रेडिएशन थेरेपी का पूरा कोर्स करने में औसतन 35 दिन का समय लगता है, हालांकि मरीज की स्थिति के अनुसार यह अवधि कम या अधिक हो सकती है. मुख कैंसर के बाद स्तन कैंसर के मरीजों की संख्या रेडिएशन थेरेपी के लिए दूसरे स्थान पर है. डॉ. मुखर्जी ने यह भी बताया कि कैंसर के इलाज में समय पर जांच और बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में पहचान अत्यंत आवश्यक है. इससे न केवल इलाज की सफलता की संभावना बढ़ती है, बल्कि उपचार प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत आसान हो जाती है. हालांकि, अधिकांश मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब बीमारी उन्नत अवस्था में होती है, जिससे इलाज में कई प्रकार की चुनौतियां सामने आती हैं.
रेडिएशन विभाग के चिकित्सक डॉ. संबित स्वरूप नंदा ने बताया कि अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनों के साथ उन्नत स्तर का तकनीक भी है, इसमें खासकर सांस के साथ समन्वय कर रेडिएशन देने के साथ ही त्वचा संबंधित बीमारियों के लिए रेडिएशन देना है. हर मरीज की स्थिति के अनुसार दिए जाने वाले थेरेपी के लिए अस्पताल सभी संसाधनों से संपन्न है. अस्पताल के निदेशक डॉ. सत्यजीत प्रधान ने बताया कि वर्तमान में दोनों संस्थानों में कुल छह रेडिएशन मशीनें कार्यरत हैं. इनमें से तीन नई मशीनें पिछले वर्ष शुरू की गई थीं, जिनमे से दो का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था.
वर्ष रेडिएशन पाने वाले मरीजों की संख्या
2018 532
2019 1153
2020 2090
2021 3050
2022 3264
2023 3307
2024 3641
2025 4735



