काशी में 16 दिवसीय सोरहिया मेले की हुई पूर्णाहुति, जिउतिया पर्व पर मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

वाराणसी : काशी में 16 दिनों से चल रहे ऐतिहासिक सोरहिया मेले की आज शनिवार को पूर्णाहुति हुई. आश्विन मास में लगने वाले इस मेले का समापन हवन-पूजन के साथ किया गया. वहीं जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत भी है, जिसके चलते सुबह से ही लक्सा स्थित मंदिर में व्रती महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ती रही. माताएं हाथों में टोकरी में पूजन सामग्री लेकर संतान की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती नजर आईं तो वहीं महिलाएं निर्जला व्रत रखकर जिउतिया माता की कथा सुन बच्चों पर आने वाले विघ्न टालने की कामना करती रहीं.
मेले के अंतिम दिन बाजार और मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की है. मेले में आने वाले भक्तों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. सुरहिया मेला काशी की सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर साल श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. इस मेले में विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन और धार्मिक सामग्री की बिक्री होती है. मेले में आने वाले लोग न केवल धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का अनुभव भी करते हैं.
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जिउतिया व्रत का विशेष महत्व है, खासकर माताओं के लिए. इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं. व्रति महिलाएं पूरे दिन निर्जला रहकर जिउतिया माता की पूजा करती हैं और उनकी कथा सुनती हैं. इस दिन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व काशीवासियों के लिए अत्यधिक है. इस वर्ष भी मेले में भक्तों की संख्या में वृद्धि देखी गई है. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि वे सुरक्षित और सुखद अनुभव कर सकें. मेले के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके.



