वाराणसी में 2.87 लाख बच्चों की नहीं बनी अपार आईडी, प्रवेश में होगी दिक्कत

वाराणसी: उत्तर-प्रदेश के वाराणसी जिले के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ रहे 42.33 फीसदी यानी 2.87 लाख बच्चों की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी अभी तक नहीं बन पाई है. इसे लेकर शासन ने नाराजगी व्यक्त की. बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी बीएसए और डीआईओएस को पत्र भेजकर जल्द इसे 100 फीसदी करने को कहा है. बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में करीब 6.78 लाख बच्चे हैं. इनमें बेसिक के 1.78 लाख और करीब 5 लाख बच्चे माध्यमिक शिक्षा के हैं.
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इनमें से 2.87 लाख बच्चे अभी भी अपार आईडी से वंचित हैं. इससे बच्चों का डेटा जुटाना मुश्किल होगा. नई शिक्षा नीति के तहत हर बच्चे की जानकारी अब यू डाइस में पूरी तरह से डिजिटल होगी. छात्र की एक ही आईडी रहेगी। जिसे लेकर छात्र-छात्रों की अपार आईडी (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक एकाउंट ) बनाई जा रही है. अपार आइडी के बिना अब स्कूल अपने यहां छात्रों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं.
मिशन महादेव के तहत बदलेगी शिक्षा की तस्वीर
वाराणसी स्थित राजकीय क्वींस कॉलेज में इस सत्र से कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. मिशन महादेव के तहत इस सत्र से जहां छात्राओं को निशुल्क प्रवेश और शिक्षा मिलेगी. वहीं, टॉप-30 छात्रों को आईआईटी और मेडिकल की निशुल्क तैयारी कराई जाएगी. प्रधानाचार्य सुमीत श्रीवास्तव ने बताया कि विद्यालय में इस सत्र से मिशन महादेव के तहत शिक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी. इसमें महादेव का मतलब म से समावेशी दृष्टिकोण के माध्यम से क्यूआईसी (क्वींस इंटर कॉलेज) का प्रबंधन और विकास, ह से सर्वांगीण शिक्षा, ए से शैक्षणिक सत्यनिष्ठा, डी से विविधता और समावेशन, ई से समान पहुंच, सभी के लिए शिक्षा और सतत विकास के लिए शिक्षा और वी से मानवता के प्रति मूल्यपरक दृष्टिकोण है.

"मिशन देगा शिक्षा में आधुनिकता को बढ़ावा"
प्रधानाचार्य ने बताया कि इस मिशन के तहत विद्यालय में दी जाने वाली शिक्षा में आधुनिकता को बढ़ावा दिया जाएगा. इस सत्र से चार बड़े बदलाव विद्यालय में किए जाएंगे. इसमें पहला तो सभी छात्राओं को निशुल्क प्रवेश व शिक्षा, दूसरा टाॅप 30 छात्रों को निशुल्क आईआईटी और मेडिकल की कोचिंग दी जाएगी. तीसरा यह कि वाराणसी का पहला विद्यालय होगा जिसमें इस सत्र से तमिल भाषा की पढ़ाई की जाएगी और चौथा इस सत्र से विद्यालय में कक्षा 6 से 11 तक की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम होगी. इन सभी बदलावों के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.



