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काशी में बनेगा 130 फीट ऊंचा शिवलिंग, ₹104 करोड़ से विकसित होगा भव्य ‘शिव थीम पार्क’…

काशी में बनेगा 130 फीट ऊंचा शिवलिंग, ₹104 करोड़ से विकसित होगा भव्य ‘शिव थीम पार्क’…
Jun 06, 2026, 12:26 PM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी: धर्म और संस्कृति की राजधानी काशी को जल्द ही एक और विश्वस्तरीय पहचान मिलने जा रही है. वाराणसी नगर निगम भेलूपुर स्थित जलकल विभाग की लगभग 20 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक स्पिरिचुअल एवं ऑक्सीजन पार्क (शिव थीम पार्क) विकसित करने की तैयारी में है. करीब 104 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण 130 फीट ऊंचा विशाल शिवलिंग होगा, जिसे उत्तर प्रदेश का सबसे ऊंचा शिवलिंग और दुनिया की सबसे ऊंची धार्मिक संरचनाओं में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है.

नगर निगम द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेज दी गई है. मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा.


लेजर शो से जीवंत होगा शिवलिंग


पार्क के केंद्र में स्थापित होने वाले विशाल शिवलिंग पर अत्याधुनिक डायनेमिक लेजर, साउंड एंड लाइट शो का आयोजन किया जाएगा. इसके साथ ही होलोग्राफिक प्रोजेक्शन तकनीक के माध्यम से भगवान शिव और काशी की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में प्रदर्शित किया जाएगा.


काशी की विरासत को दिखाएगा संग्रहालय


परियोजना में एक आधुनिक काशी म्यूजियम और आर्ट गैलरी भी प्रस्तावित है, जहां काशी के इतिहास, श्री काशी विश्वनाथ धाम के विकास, बनारसी संगीत, कला और खानपान संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा. इसके अलावा शहर के गौरवशाली इतिहास, प्रमुख विभूतियों और पद्म सम्मान प्राप्त हस्तियों से जुड़ी म्यूरल प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी.


ऑक्सीजन हब के रूप में होगा विकसित


यह पार्क केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं होगा बल्कि शहर के लिए एक बड़े हरित क्षेत्र के रूप में भी काम करेगा. यहां 1000 मीटर से अधिक लंबा वॉकिंग ट्रैक, योग एवं ध्यान केंद्र, औषधीय पौधों के उद्यान और खुले हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे. इसका उद्देश्य शहरवासियों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना और काशी में हरित क्षेत्र बढ़ाना है.


हाईटेक सुविधाओं से लैस होगा परिसर


पार्क में आधुनिक प्लैनेटेरियम, वरिष्ठ नागरिकों के लिए पुस्तकालय, बच्चों के मनोरंजन क्षेत्र, फूड कोर्ट और अन्य नागरिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. इसके अलावा पूरी परियोजना को ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए 1 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगाने की योजना है.


पर्यटन को मिलेगा नया आयाम


विशेषज्ञों का मानना है कि काशी विश्वनाथ धाम, नमो घाट और गंगा घाटों के बाद शिव थीम पार्क धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है. इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा.

गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
गुरु पूर्णिमा से पहले शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन, काशीवासियों से किया गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान.
वाराणसी : गुरु पूर्णिमा से पूर्व काशी के श्रद्धालुओं ने सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर शंकराचार्य ने काशीवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।बताया गया कि इस वर्ष शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास्य व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसी कारण श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा से पहले ही उनकी चरण पादुका के पूजन की अनुमति मांगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय 'गविष्ठी यात्रा' पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया। अपने संदेश में शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हैं और शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास उनमें माना गया है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गौरक्षा का संकल्प लेकर इस अभियान से जुड़ना चाहिए।शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें उन्हें गौरक्षा आंदोलन और शंकराचार्य की गौरक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।ALSO READ: बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, स्वामी निधिरव्यानंद, गिरीश चंद्र तिवारी, अविनाश मिश्रा, रवि त्रिवेदी, रमेश उपाध्याय, अभय शंकर तिवारी, विमल तिवारी, हजारी कीर्ति शुक्ला, मनीष पाण्डेय, मयंक दोषी, शाश्वत मिश्रा, लता पाण्डेय, मंजरी पाण्डेय, चांदनी चौबे, नीलम दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।