इस कचहरी की सुरक्षा को लेकर चला चेकिंग अभियान, सामने आई बड़ी लापरवाही

वाराणसी: उत्तर-प्रदेश के वाराणसी कचहरी के सुरक्षा बिंदुओं पर जांच-पड़ताल की गई है. जहां कचहरी के किसी गेट पर तलाशी जरूरी है तो किसी गेट पर बेमन से जांच की जा रही है. जी हां, हजारों अधिवक्ताओं और वादकारियों से हर वक्त खचाखच भरी रहने वाली कचहरी में इतनी बड़ी मनमानी और लापरवाही देखने को मिल रही है. वहीं जिला पंचायत गेट से प्रवेश पर किसी तरह की चेकिंग हो भी रही है तो वो भी किसी दिखावटी से कम नहीं है.

जाने क्या है मामला
दरअसल, जिला जल के आधिकारिक ई-मेल पर वाराणसी कचहरी को बम से उड़ाने की लगातार दो बार धमकी मिल रही थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन द्वारा एक बड़ा एक्शन लिया गया है. जिसके बाद से कचहरी के सभी गेटों पर जांच-पड़ताल के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई. पुलिस कर्मियों की ये तैनाती कचहरी की सुरक्षा-व्यवस्था के लिए लगाई गई थी, मगर सुरक्षा करने के बजाय यहां ढिलाई देखने को मिली. ऐसे में अब सवाल ये उठने लगा है कि कचहरी की सुरक्षा में लगाए गए पुलिसकर्मियों की तैनाती एक एक दिखावा है, जो इस तरह की मनमानी कर रही है.

"कचहरी में खानापूर्ति वाली हो रही जांच"
कानून के नियमों का पालन कराने वाली पुलिस ही जब नियमों की धज्जियां उड़ाती रहेगाी, तो फिर तो आम जनता की तो बात ही निराली है. बता दें, डीएम कार्यालय की ओर बढ़ने के दौरान पूर्व सैनिक कल्याण केंद्र के पास गेट तो दोपहिया के लिए बंद किया गया, लेकिन पैदल चलने वालों की तलाशी नहीं हुई, पीठ पर बैग लेकर बड़े आराम से रिपोर्टर कचहरी परिसर में दाखिल हुआ, कुछ देर तक टहलने के बाद दीवानी गेट नंबर पांच पर पहुंचा तो ड्यूटी में लगे दो पुलिसकर्मियों ने रोका, जिसके बाद से उसका बैग चेक किया और फिर आगे बढ़ने की उसे इजाजत दी गई.

जांच को लेकर अधिवक्ताओं का बड़ा बयान
पुलिस की जांच-पड़ताल का आलम ये रहा कि, गेट नंबर 3 पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगने के बाद भी इसमें एक सिपाही हैंड मेटल डिटेक्टर लेकर जांच करता रहा, हालांकि हर किसी की जांच नहीं हुई. कुछ देर तक ठहरने के बाद अन्य आने वालों की भी जांच पूरी तन्मयता से नहीं होती देखी गई. जांच की इस खानापूर्ति को लेकर कई बड़े सवाल भी उठने लगे है. वहीं इस मामले पर अधिवक्ताओं का कहना है कि, कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था और चाक चौबंद बनाने की काफी हद तक जरूरत है. अधिवक्ताओं और वादकारियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए. कचहरी परिसर के अंदर वाहन नहीं आने चाहिए.



