बीएचयू के संस्कृत विभाग में दो दिवसीय आयोजन, भाषण से लेकर श्लोक अंताक्षरी तक हुईं प्रतियोगिताएं

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय स्थित संस्कृत विभाग में एक और दो सितंबर को द्विदिवसीय संस्कृत दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के दौरान संस्कृत भाषा के प्रति विद्यार्थियों में रुचि और अभ्यास बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और महाविद्यालयों के 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने इसमें उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
समारोह के तहत संस्कृत भाषण प्रतियोगिता, संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, सुस्वर स्तोत्र पाठ प्रतियोगिता और श्लोक अंताक्षरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। सभी कार्यक्रम संस्कृत विभाग के सभागार में संस्कृत भाषा में संपन्न हुए।
उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. प्रशस्यमित्र शास्त्री ने प्रभावशाली वक्तव्य और संस्कृत कविता के माध्यम से विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति अनुराग और उत्साह पैदा किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने की। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा संस्कृत भाषा में निबद्ध है। वेद, पुराण, स्मृति, अर्थशास्त्र और आयुर्वेद सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में रचे गए हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल स्वरूप और उसमें निहित वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक ज्ञान को समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं से विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के अभ्यास और प्रयोग की क्षमता मजबूत होती है।
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संस्कृत आज भी प्रासंगिक : प्रो. तिवारी
कार्यक्रम के संयोजक प्रो. शरदिंदु कुमार तिवारी ने संस्कृत के महत्व और उसके वर्तमान प्रयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन ज्ञान की भाषा नहीं है, बल्कि आज भी विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर प्रयोग की जा रही और प्रासंगिक भाषा है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत के अध्ययन, प्रयोग और प्रचार-प्रसार के लिए आगे आने का आह्वान किया।
प्रतियोगिताओं में निर्णायक के रूप में प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी, प्रो. पतंजलि मिश्र, प्रो. विनय पाण्डेय, प्रो. भगवत्शरण शुक्ल, प्रो. चन्द्रकान्ता राय, प्रो. शिवराम शर्मा, प्रो. जया मिश्रा, डॉ. मंजु कुमारी, प्रो. पुष्पा त्रिपाठी, डॉ. अभिजित दीक्षित, डॉ. बृहस्पति भट्टाचार्य और डॉ. दीपक शर्मा ने भूमिका निभाई।
तीन सितंबर को मिलेगा पुरस्कार
प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के साथ दो सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे। विजेता छात्र-छात्राओं को तीन सितंबर 2026 को संस्कृत विभाग के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।



