मेगा एयर शो से पहले जानिए बनारस की भव्य मेजबानी का इतिहास, जब 130 देशों के मेहमानों से गुलजार हुई काशी.
वाराणसी: काशी अब मेगा एयर शो के जरिए आसमान में अपनी भव्यता का नया अध्याय लिखने जा रही है. पहली बार आयोजित होने जा रहा यह आयोजन वाराणसी के बदलते स्वरूप और बड़े आयोजनों की मेजबानी करने की क्षमता को दर्शाता है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के भव्य आयोजनों के लिए बनारस की पहचान नई नहीं है. बीते वर्षों में काशी कई ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों की साक्षी बनी है, जिन्होंने इसे वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई. इन्हीं आयोजनों की कहानी बयां कर रही है गांडीव डिजिटल की विशेष श्रृंखला ‘नव्य बनारस, भव्य बनारस’ इस कड़ी में बात 2019 में वाराणसी में आयोजित 15वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन की, जिसने दुनिया के 130 से अधिक देशों के लोगों को काशी से जोड़ा था.

130 से अधिक देशों के मेहमानों का संगम बनी थी काशी...
21 से 23 जनवरी 2019 तक वाराणसी में 15वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन किया गया था. इस सम्मेलन की थीम ‘नए भारत के निर्माण में भारतीय प्रवासी की भूमिका थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने इस आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई. सम्मेलन में कुल 7,239 लोगों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें 3,121 प्रवासी भारतीय 130 से अधिक देशों से आए थे. आमतौर पर प्रवासी भारतीय दिवस हर साल 9 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन वर्ष 2019 में सम्मेलन को जनवरी के उत्तरार्ध में आयोजित किया गया. इसकी खास वजह प्रवासी मेहमानों को प्रयागराज के कुंभ मेले और दिल्ली की गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का अवसर देना था. इस तरह काशी का यह आयोजन भारतीय संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण गतिविधियों का हिस्सा बन गया.

टेंट सिटी से घरों तक, मेहमाननवाजी में दिखा बनारसी अंदाज...
प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन को यादगार बनाने के लिए वाराणसी में विशेष तैयारियां की गई थी. ऐढ़े गांव में भव्य टेंट सिटी बसाई गई, जहां करीब 1,480 प्रवासियों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी. स्विस कॉटेज की तर्ज पर टेंट विला, डीलक्स टेंट और डॉर्मिटरी जैसी श्रेणियों में आधुनिक सुविधाओं से लैस इंतजाम किए गए थे.
लेकिन इस आयोजन की सबसे खास बात केवल आधुनिक व्यवस्थाएं नहीं थीं. प्रवासी मेहमानों को बनारस की संस्कृति और पारिवारिक आत्मीयता से जोड़ने के लिए स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. करीब 1,400 विदेशी मेहमानों को स्थानीय नागरिकों के घरों में ठहराने की पहल की गई। ढोल-नगाड़ों, आरती और पारंपरिक स्वागत के बीच मेहमानों को घर का बना बनारसी भोजन परोसा गया. इस पहल ने काशी की अतिथि देवो भव की परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई.

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दीपों से जगमगाए घाट, गंगा आरती ने मोहा मन...
सम्मेलन के दौरान काशी के प्रमुख गंगा घाटों को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था. दशाश्वमेध घाट पर विशेष गंगा आरती का आयोजन हुआ, जिसे प्रवासी भारतीयों ने नावों में बैठकर देखा. गंगा की लहरों, मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी के बीच यह अनुभव मेहमानों के लिए यादगार बन गया.
इसके अलावा, बीएचयू और हस्तकला संकुल में भारतीय लोककलाओं, संगीत और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियां आयोजित की गईं. मेहमानों को बनारसी साड़ी की बुनाई और स्थानीय हस्तशिल्प को करीब से देखने का अवसर मिला. इन गतिविधियों के जरिए वाराणसी ने अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया.

काशी से कुंभ और फिर दिल्ली तक पहुंचा आयोजन...
प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का कार्यक्रम इस तरह तैयार किया गया था कि मेहमान भारत के अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों का भी हिस्सा बन सकें. 24 जनवरी को विशेष परिवहन व्यवस्था के जरिए प्रवासी भारतीयों को प्रयागराज के कुंभ मेले में ले जाया गया, जहां उन्होंने त्रिवेणी संगम के दर्शन और स्नान का अनुभव किया. इसके बाद मेहमानों को 26 जनवरी को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड देखने का अवसर मिला. इस तरह वाराणसी में आयोजित सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भारत की सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय गौरव को एक साथ अनुभव करने का अवसर दिया.

9 जनवरी को क्यों मनाया जाता है प्रवासी भारतीय दिवस?
प्रवासी भारतीय दिवस भारत सरकार के विदेश मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम है. इसका उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय को अपनी जड़ों से जोड़े रखना और देश के विकास में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना है. 9 जनवरी 1915 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे. उनके स्वदेश लौटने और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान की स्मृति में इस तारीख को प्रवासी भारतीय दिवस के लिए चुना गया. इस दिवस को मनाने की शुरुआत वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुई थी. इसकी अवधारणा लक्ष्मीमल सिंघवी समिति की सिफारिशों पर आधारित थी. शुरुआत में यह सम्मेलन हर साल आयोजित किया जाता था. वर्ष 2015 से इसके प्रारूप में बदलाव किया गया और इसे द्विवार्षिक यानी प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित किए जाने की व्यवस्था अपनाई गई. बीच के वर्षों में प्रवासी भारतीयों से जुड़े विभिन्न विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार से होता है उत्कृष्ट योगदान का सम्मान...
प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विदेशों में रह रहे भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों के योगदान को सम्मानित करना भी है. सम्मेलन के दौरान प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार के जरिए उन लोगों और संस्थाओं के उत्कृष्ट योगदान को मान्यता दी जाती है, जिन्होंने भारत या अपने निवास वाले देश के हित में उल्लेखनीय कार्य किया हो. इसके साथ ही सम्मेलन प्रवासी भारतीयों को भारत की नीतियों, निवेश के अवसरों, तकनीकी सहयोग और विकास की संभावनाओं से जोड़ने का मंच भी प्रदान करता है. यह दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय और भारत के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है.

मेगा एयर शो से पहले समझिए भव्य आयोजनों का बनारस कनेक्शन...
प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन ने यह दिखाया कि वाराणसी अपनी प्राचीन विरासत को सहेजते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों की मेजबानी भी कर सकता है। बेहतर व्यवस्थाओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने इस आयोजन को विशिष्ट बनाया। अब मेगा एयर शो जैसे आयोजन के जरिए काशी एक बार फिर बड़े आयोजन के केंद्र में है.



