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मेगा एयर शो से पहले जानिए बनारस की भव्य मेजबानी का इतिहास, जब 130 देशों के मेहमानों से गुलजार हुई काशी.

Oct 19, 2026, 08:46 AM
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Posted By Niharika dwivedi

वाराणसी: काशी अब मेगा एयर शो के जरिए आसमान में अपनी भव्यता का नया अध्याय लिखने जा रही है. पहली बार आयोजित होने जा रहा यह आयोजन वाराणसी के बदलते स्वरूप और बड़े आयोजनों की मेजबानी करने की क्षमता को दर्शाता है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के भव्य आयोजनों के लिए बनारस की पहचान नई नहीं है. बीते वर्षों में काशी कई ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों की साक्षी बनी है, जिन्होंने इसे वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई. इन्हीं आयोजनों की कहानी बयां कर रही है गांडीव डिजिटल की विशेष श्रृंखला ‘नव्य बनारस, भव्य बनारस’ इस कड़ी में बात 2019 में वाराणसी में आयोजित 15वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन की, जिसने दुनिया के 130 से अधिक देशों के लोगों को काशी से जोड़ा था.


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130 से अधिक देशों के मेहमानों का संगम बनी थी काशी...

21 से 23 जनवरी 2019 तक वाराणसी में 15वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन किया गया था. इस सम्मेलन की थीम ‘नए भारत के निर्माण में भारतीय प्रवासी की भूमिका थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने इस आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई. सम्मेलन में कुल 7,239 लोगों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें 3,121 प्रवासी भारतीय 130 से अधिक देशों से आए थे. आमतौर पर प्रवासी भारतीय दिवस हर साल 9 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन वर्ष 2019 में सम्मेलन को जनवरी के उत्तरार्ध में आयोजित किया गया. इसकी खास वजह प्रवासी मेहमानों को प्रयागराज के कुंभ मेले और दिल्ली की गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का अवसर देना था. इस तरह काशी का यह आयोजन भारतीय संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण गतिविधियों का हिस्सा बन गया.


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टेंट सिटी से घरों तक, मेहमाननवाजी में दिखा बनारसी अंदाज...

प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन को यादगार बनाने के लिए वाराणसी में विशेष तैयारियां की गई थी. ऐढ़े गांव में भव्य टेंट सिटी बसाई गई, जहां करीब 1,480 प्रवासियों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी. स्विस कॉटेज की तर्ज पर टेंट विला, डीलक्स टेंट और डॉर्मिटरी जैसी श्रेणियों में आधुनिक सुविधाओं से लैस इंतजाम किए गए थे.

लेकिन इस आयोजन की सबसे खास बात केवल आधुनिक व्यवस्थाएं नहीं थीं. प्रवासी मेहमानों को बनारस की संस्कृति और पारिवारिक आत्मीयता से जोड़ने के लिए स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. करीब 1,400 विदेशी मेहमानों को स्थानीय नागरिकों के घरों में ठहराने की पहल की गई। ढोल-नगाड़ों, आरती और पारंपरिक स्वागत के बीच मेहमानों को घर का बना बनारसी भोजन परोसा गया. इस पहल ने काशी की अतिथि देवो भव की परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई.


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दीपों से जगमगाए घाट, गंगा आरती ने मोहा मन...

सम्मेलन के दौरान काशी के प्रमुख गंगा घाटों को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था. दशाश्वमेध घाट पर विशेष गंगा आरती का आयोजन हुआ, जिसे प्रवासी भारतीयों ने नावों में बैठकर देखा. गंगा की लहरों, मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी के बीच यह अनुभव मेहमानों के लिए यादगार बन गया.

इसके अलावा, बीएचयू और हस्तकला संकुल में भारतीय लोककलाओं, संगीत और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियां आयोजित की गईं. मेहमानों को बनारसी साड़ी की बुनाई और स्थानीय हस्तशिल्प को करीब से देखने का अवसर मिला. इन गतिविधियों के जरिए वाराणसी ने अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया.


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काशी से कुंभ और फिर दिल्ली तक पहुंचा आयोजन...

प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का कार्यक्रम इस तरह तैयार किया गया था कि मेहमान भारत के अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों का भी हिस्सा बन सकें. 24 जनवरी को विशेष परिवहन व्यवस्था के जरिए प्रवासी भारतीयों को प्रयागराज के कुंभ मेले में ले जाया गया, जहां उन्होंने त्रिवेणी संगम के दर्शन और स्नान का अनुभव किया. इसके बाद मेहमानों को 26 जनवरी को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड देखने का अवसर मिला. इस तरह वाराणसी में आयोजित सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भारत की सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय गौरव को एक साथ अनुभव करने का अवसर दिया.


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9 जनवरी को क्यों मनाया जाता है प्रवासी भारतीय दिवस?

प्रवासी भारतीय दिवस भारत सरकार के विदेश मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम है. इसका उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय को अपनी जड़ों से जोड़े रखना और देश के विकास में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना है. 9 जनवरी 1915 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे. उनके स्वदेश लौटने और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान की स्मृति में इस तारीख को प्रवासी भारतीय दिवस के लिए चुना गया. इस दिवस को मनाने की शुरुआत वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुई थी. इसकी अवधारणा लक्ष्मीमल सिंघवी समिति की सिफारिशों पर आधारित थी. शुरुआत में यह सम्मेलन हर साल आयोजित किया जाता था. वर्ष 2015 से इसके प्रारूप में बदलाव किया गया और इसे द्विवार्षिक यानी प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित किए जाने की व्यवस्था अपनाई गई. बीच के वर्षों में प्रवासी भारतीयों से जुड़े विभिन्न विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.


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प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार से होता है उत्कृष्ट योगदान का सम्मान...

प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विदेशों में रह रहे भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों के योगदान को सम्मानित करना भी है. सम्मेलन के दौरान प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार के जरिए उन लोगों और संस्थाओं के उत्कृष्ट योगदान को मान्यता दी जाती है, जिन्होंने भारत या अपने निवास वाले देश के हित में उल्लेखनीय कार्य किया हो. इसके साथ ही सम्मेलन प्रवासी भारतीयों को भारत की नीतियों, निवेश के अवसरों, तकनीकी सहयोग और विकास की संभावनाओं से जोड़ने का मंच भी प्रदान करता है. यह दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय और भारत के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है.


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मेगा एयर शो से पहले समझिए भव्य आयोजनों का बनारस कनेक्शन...

प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन ने यह दिखाया कि वाराणसी अपनी प्राचीन विरासत को सहेजते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों की मेजबानी भी कर सकता है। बेहतर व्यवस्थाओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने इस आयोजन को विशिष्ट बनाया। अब मेगा एयर शो जैसे आयोजन के जरिए काशी एक बार फिर बड़े आयोजन के केंद्र में है.

वाराणसी में एयरशो को सफल बनाने वाले पुलिस अफसर होंगे सम्मानित, 100 इंस्पेक्टरों को प्रशस्ति पत्र...
वाराणसी में एयरशो को सफल बनाने वाले पुलिस अफसर होंगे सम्मानित, 100 इंस्पेक्टरों को प्रशस्ति पत्र...
वाराणसी : गंगा किनारे काशी में तीन दिन तक एयर शो को सफल बनाने वाले पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों का सम्मान होगा. 50 राजपत्रित अधिकारियों को डीजीपी की ओर से प्रशस्ति पत्र और विशेष योगदान देने वाले 10 वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिष्ठित डीजी कमेंडेशन डिस्क से सम्मानित किया जाएगा. मुस्तैदी से ड्यूटी निभाने वाले 100 इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को पुलिस आयुक्त स्तर से प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया जाएगा. आयोजन में दिन-रात तैनात रहे अन्य सभी शेष पुलिस कर्मचारियों के योगदान को भी रेखांकित किया गया है.डीसीपी स्तर से इन सभी पुलिसकर्मियों के कैरेक्टर रोल में गुड एंट्री दर्ज की जाएगी. 22, 24 और 25 अक्‍टूबर को एयरशो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य वीवीआईपी आगमन के दौरान भीड़ प्रबंधन, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया गया. पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के अनुसार एयरशो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और सराहनीय कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा. पुलिस महानिदेशक ने बेहतरीन व्यवस्था और सुरक्षा करने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र व डीजी कमेंडेशन डिस्क देने की सहमति दी है.पुलिस आयुक्‍त मोहित अग्रवाल के अनुसार, एयर शो को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाले कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारियों और विभिन्न जिलों से आए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र व डीजी कमेंडेशन डिस्क से नवाजा जाएगा. डीजीपी ने इस पर सहमति दी है. इस सम्मान से अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा.ALSO READ : आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत में कुमार मंगलम मुख्‍य अतिथि, हरजस कौर को प्रेसिडेंट मेडल...वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस और चंदौली पुलिस ने एयरशो की सफलता को लेकर एक माह पहले से लगातार तैयारियों की समीक्षा और व्यवस्थाओं की निगरानी हो रही थी. पुलिस आयुक्त के निर्देशन में पुलिस कर्मियों के प्रशिक्षण और नो टच पॉलिसी ने कार्यक्रम को सफल बनाया. पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, वाराणसी एडीजी जोन नवीन अरोरा, अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था शिवहरी मीणा, वाराणसी परिक्षेत्र डीआईजी रेंज वैभव कृष्ण, चंदौली एसपी आकाश पटेल, डीसीपी वरुणा राजेश कुमार पांडेय, डीसीपी काशी गौरव बंशवाल, एडीसीपी यातायात अंशुमान मिश्रा समेत सभी काशी, वरुणा जोन के एडीसीपी, एसीपी स्तर के अधिकारियों ने योजना के तहत काम किया. घाटों पर भीड़ को सेक्टर में बांटकर 1600 से अधिक एनसीसी कैडेट और स्काउट गाइड को जिम्मेदारी साैंपी गई थी.
आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत में कुमार मंगलम मुख्‍य अतिथि, हरजस कौर को प्रेसिडेंट मेडल...
आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत में कुमार मंगलम मुख्‍य अतिथि, हरजस कौर को प्रेसिडेंट मेडल...
वाराणसी: आईआईटी बीएचयू का 15वां दीक्षांत समारोह 31 अक्‍टूबर को स्‍वतंत्रता भवन में आयोजित होने जा रहा है. समारोह में आदित्य बिरला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला मुख्य अतिथि होंगे. इसमें बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की छात्रा हरजस कौर को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल प्रदान किया जाएगा. वह संस्थान के मेडल एवं पुरस्कार विजेताओं में सबसे आगे हैं. उनके खाते में 15 सम्मान दर्ज हैं.वहीं, बीटेक केमिकल इंजीनियरिंग की तनिषा अग्रवाल ने छह गोल्ड मेडल सहित नौ पुरस्कार हासिल किए हैं. सिविल इंजीनियरिंग की रेशमा खातून और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की श्रेया श्रीवास्तव को सात-सात, जबकि मैकेनिकल इंजीनियरिंग के जतिन अग्रवाल को छह पुरस्कारों के लिए चुना गया है.हरजस कौर को बीटेक की सभी शाखाओं में उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल मिलेगा. उनके नाम सूची में 15 सम्मान दर्ज हैं, जिनमें 10 गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल शामिल हैं. उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में प्रथम स्थान और बीटेक की सभी शाखाओं में सर्वाधिक अंक हासिल करने सहित विभिन्न उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा.तनिषा को छह गोल्ड मेडलबीटेक केमिकल इंजीनियरिंग की तनिषा अग्रवाल को नौ पुरस्कारों के लिए चुना गया है. इनमें छह गोल्ड मेडल शामिल हैं. उन्हें विभाग में प्रथम स्थान, सर्वाधिक सीपीआइ और छात्राओं में सर्वाधिक सीपीआइ सहित विभिन्न उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा. सिविल इंजीनियरिंग की रेशमा खातून को सात पुरस्कार मिलेंगे. इनमें शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के मेधावी विद्यार्थी के लिए निर्धारित सम्मान भी शामिल हैं. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की श्रेया श्रीवास्तव को भी सात पुरस्कारों के लिए चुना गया है.प्रतीक और लखदीव को डायरेक्टर्स गोल्ड मेडलबीटेक के विद्यार्थियों में सर्वांगीण प्रदर्शन, संगठनात्मक क्षमता और नेतृत्व कौशल के लिए प्रतीक त्रिपाठी को डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल प्रदान किया जाएगा. बीआर्क और इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री के विद्यार्थियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए लखदीव मेहुलकुमार राजकुमार को यह सम्मान मिलेगा.ALSO READ: दीपावली पर वाराणसी के लाखों उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलेगा मुफ्त गैस सिलेंडर, करना होगा यह काममैकेनिकल इंजीनियरिंग के जतिन अग्रवाल को छह पुरस्कारों के लिए चुना गया है, जबकि मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की अपूर्वा कशिश को चार मेडल के साथ एक लाख रुपये का आदित्य कुमार अवस्थी एंडोमेंट पुरस्कार दिया जाएगा. दीक्षांत समारोह में विभिन्न स्नातक, परास्नातक और शोध कार्यक्रमों के 2048 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी.
दीपावली पर वाराणसी के लाखों उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलेगा मुफ्त गैस सिलेंडर, करना होगा यह काम
दीपावली पर वाराणसी के लाखों उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलेगा मुफ्त गैस सिलेंडर, करना होगा यह काम
वाराणसी: दीपावली पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मुफ्त गैस सिलेंडर रिफिल की सुविधा मिलेगी. वाराणसी जिले में इस बार 2,69,923 परिवारों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके तहत केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर प्रति सिलेंडर रिफिल पर 1,005.50 रुपये की सहायता देंगी. इससे त्योहार के दौरान गरीब परिवारों को रसोई गैस के खर्च में राहत मिलेगी.पिछले साल से 1.04 लाख अधिक परिवारों को लाभजिला पूर्ति अधिकारी केबी सिंह के अनुसार, पिछले साल दीपावली पर जिले में 1,65,855 उज्ज्वला लाभार्थियों ने मुफ्त सिलेंडर रिफिल का लाभ लिया था. इस बार लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर 2,69,923 करने का लक्ष्य रखा गया है. इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में 1,04,068 अधिक परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाने की तैयारी है. इससे अधिक संख्या में पात्र परिवारों को त्योहार के दौरान रसोई गैस की सुविधा मिल सकेगी.दो चरणों में संचालित होगी योजनाउज्ज्वला लाभार्थियों को सिलेंडर रिफिल पर सहायता देने की योजना दो चरणों में संचालित की जाएगी. पहला चरण अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण जनवरी से मार्च 2027 तक निर्धारित है. प्रति सिलेंडर रिफिल पर केंद्र सरकार की ओर से 359.52 रुपये और प्रदेश सरकार की ओर से 645.98 रुपये की सहायता दी जाएगी. दोनों सरकारों की सहायता मिलाकर कुल राशि 1,005.50 रुपये होगी.आधार से बैंक खाता लिंक कराना अनिवार्यजिला पूर्ति अधिकारी ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों से अपने बैंक खातों की स्थिति जांचने की अपील की है. उन्होंने कहा कि जिन लाभार्थियों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं हैं या जिनका आधार सत्यापन पूरा नहीं हुआ है, वे संबंधित बैंक से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करा लें. इससे योजना के तहत सहायता राशि प्राप्त करने में आने वाली संभावित परेशानियों से बचा जा सकेगा.ALSO READ: जनगणना के ल‍िए वाराणसी नगर में 3105 प्रगणक घर-घर जाकर संकलित करेंगे परिवारों का ब्योराप्रशासन का जोर है कि पात्र लाभार्थी समय रहते बैंक खाते और आधार सत्यापन से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर लें, ताकि योजना का लाभ लेने में किसी तरह की दिक्कत न हो.