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अजय राय: 27 साल के युवा से 57 साल के परिपक्‍व राजनीतिज्ञ तक...

अजय राय: 27 साल के युवा से 57 साल के परिपक्‍व राजनीतिज्ञ तक...
Oct 03, 2026, 10:13 AM
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Posted By Niharika dwivedi

वाराणसीः 27 साल के एक युवक अजय राय ने वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में वाराणसी की कोलसला (अब पिंडरा) सीट पर नौ बार के विधायक रहे दिग्गज कम्युनिस्ट नेता ऊदल को हराया तो सब चौंक पड़े. इस जीत का अंतर महज 488 वोटों का जरूर था लेकिन इस जीत के साथ उस युवा ने देश की राजनीति को एहसास करा दिया था कि आने वाले वक्त अब उसका है. अगले 30 सालों में अजय राय ने कभी पीछे मुड़ के नहीं देखा अपना कद इतना बड़ा कर लिया कि राजनीति के हर गलियारे में इनकी चर्चा होती है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर तीन साल रहने बाद उन्हें हटाए जाने पर फिर उनकी राजनैतिक हैसियत की बात हो रही है.


शुरुआत में की भाजपा की राजनीति


चेतगंज के भूमिहार परिवार के अजय राय का विद्यार्थी जीवन में ही राजनीत के प्रति आकर्षण रहा. वह 1990 के दशक की शुरुआत में भाजपा की छात्र इकाई ABVP से जुड़े रहे. भाजपा के टिकट पर उन्होंने वर्ष 1996 में वाराणसी की कोलसला विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा. उनके सामने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के उम्मीदवार ऊदल थे. इस चुनाव में अजय राय ने जबरदस्त उलटफेर किया और ऊदल को 488 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हरा दिया. इस चुनाव में अजय राय को 38,352 और ऊदल को 37,864 वोट मिले थे. कामरेड ऊदल बनारस और पूर्वांचल की राजनीति के बहुत बड़े नाम थे. वे इस क्षेत्र से 9 बार विधायक रह चुके थे. एक युवा नेता के रूप में अजय राय द्वारा इतने बड़े कम्युनिस्ट नेता को उनके ही गढ़ में मात देना उस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति की सबसे बड़ी चौंकाने वाली खबरों में से एक थी. इसके बाद उन्होंने 2002 और 2007 के विधानसभा चुनावों में भी इसी सीट से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में लगातार जीत दर्ज की.


भाजपा छोड़ थामा सपा का हाथ


वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में अजय राय वाराणसी सीट से भाजपा का टिकट चाहते थे. लेकिन भाजपा ने वहां से वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी को मैदान में उतार दिया. इससे नाराज होकर अजय राय ने भाजपा छोड़ दी.

भाजपा छोड़ने के बाद अजय राय समाजवादी पार्टी (SP) में शामिल हो गए.

सपा के टिकट पर उन्होंने 2009 का लोकसभा चुनाव मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ लड़ा, लेकिन वे तीसरे स्थान पर रहे. लोकसभा चुनाव हारने के तुरंत बाद उन्होंने सपा भी छोड़ दी और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी पुरानी कोलसला विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उतरे और चौथी बार विधायक चुने गए.


कांग्रेस के साथ आए


साल 2012 में अजय राय ने कांग्रेस का दामन थाम लिया, जिसके बाद वे राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आए. नए परिसीमन के बाद बनी पिंडरा विधानसभा सीट से उन्होंने 2012 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता और पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे. हालांकि, इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस ने अजय राय को वाराणसी लोकसभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगातार तीन बार मैदान में उतारा. 2014 और चुनावों में मोदी लहर के चलते वे तीसरे स्थान पर रहे. 2024 के लोकसभा चुनाव में अजय राय ने 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में पीएम मोदी को बेहद मजबूत टक्कर दी. इस चुनाव में पीएम मोदी की जीत का अंतर 2019 के मुकाबले घटकर केवल 1.5 लाख वोटों के आसपास रह गया, और अजय राय को 4,60,000 से अधिक वोट मिले.


बने प्रदेश अध्यक्ष


2024 के आम चुनाव से ठीक पहले, 17 अगस्त 2023 को कांग्रेस आलाकमान ने उनके जुझारूपन को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) का अध्यक्ष नियुक्त किया. उनके कार्यकाल में यूपी में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (6 सीटें) किया. उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों और सांगठिनक बदलावों को ध्यान में रखते हुए, अक्टूबर 2026 में कांग्रेस ने उनकी जगह रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' को नया यूपी कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया है. अजय राय को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच रहने और बनारस के स्थानीय समीकरणों में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता के रूप में देखा जाता है.


बेहतर तरीके से साधा जातिय समीकरण


अजय राय भूमिहार ब्राह्मण परिवार से आते हैं. हालांकि, पूरे उत्तर प्रदेश में इस समाज की आबादी महज 2 से 3% के आसपास है, लेकिन वाराणसी, गाजीपुर, मऊ और बलिया जैसे पूर्वांचल के जिलों में भूमिहार वोट बैंक बेहद समृद्ध, जमींदार और राजनीतिक रूप से अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है. वाराणसी में भूमिहार समाज का ऐतिहासिक महत्व रहा है. क्योंकि बनारस का पारंपरिक राजपरिवार भी इसी भूमिहार समुदाय से आता है. भूमिहार समाज के साथ-साथ वाराणसी और पिंडरा क्षेत्र के ब्राह्मण और राजपूत मतदाताओं में भी अजय राय की मजबूत व्यक्तिगत पकड़ रही है.


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दबंग छवि भी है


अजय राय के परिवार की कहानी पूर्वांचल के कुख्यात गैंगवार और राजनीतिक वर्चस्व की जंग से गहराई से जुड़ी हुई है. अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय वाराणसी के एक रसूखदार कांग्रेस नेता थे. 3 अगस्त 1991 को वाराणसी के लहुराबीर इलाके में उनके भाई अवधेश राय की अंधाधुंध गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी मऊ के बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी को बनाया गया था.32 साल का कानूनी संघर्ष: बड़े भाई की हत्या के समय अजय राय की उम्र महज 22 साल थी. उन्होंने मुख्य गवाह के तौर पर माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ दशकों तक अदालती लड़ाई लड़ी। आखिरकार, जून 2023 में वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई. पारिवारिक संघर्षों और बनारस की धरती पर दबदबा बनाए रखने की वजह से अजय राय की छवि एक स्ट्रॉन्गमैन की बन गई। उनके खिलाफ कई राजनीतिक और स्थानीय मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं के संकट में खड़े रहने की उनकी आदत ने उन्हें बेहद लोकप्रिय बनाए रखा. कांग्रेस ने जब अगस्त 2023 में उन्हें उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया, तो उसके पीछे उनकी यही दबंग भूमिहार पृष्ठभूमि थी.

बीएचयू की डॉ. नेहा पाण्डेय ने मद्रास विश्वविद्यालय में एआई आधारित संचार पर दिया विशेष व्याख्यान.
बीएचयू की डॉ. नेहा पाण्डेय ने मद्रास विश्वविद्यालय में एआई आधारित संचार पर दिया विशेष व्याख्यान.
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पत्रकारिता एवं जनसम्प्रेषण विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नेहा पाण्डेय ने मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित संचार तकनीकों पर विशेष व्याख्यान दिया। 23 अक्टूबर को आयोजित इस व्याख्यान का विषय ‘ट्रांसफॉर्मिंग कम्युनिकेशन थ्रू एआई: चैटबॉट्स, ऑटोमेशन एंड इमर्जिंग ऑपर्च्युनिटीज’ रहा। इसमें आधुनिक संचार व्यवस्था में एआई चैटबॉट्स की बढ़ती भूमिका, उनके उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. नेहा पाण्डेय ने बताया कि एआई आधारित चैटबॉट्स पत्रकारिता, व्यावसायिक संचार, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने चैटबॉट्स के विभिन्न प्रकार, उनके काम करने के तरीके और संचार प्रक्रियाओं को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने में उनकी उपयोगिता को समझाया। साथ ही, एआई तकनीक के विस्तार से पैदा हो रहे नए अवसरों और संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।पत्रकारिता में बदल रही है एआई की भूमिकाव्याख्यान के दौरान डॉ. पाण्डेय ने पत्रकारिता के क्षेत्र में एआई आधारित टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इनकी मदद से ब्रेकिंग न्यूज उपलब्ध कराने, पाठकों के सवालों का जवाब देने, समाचार लेखों का सारांश तैयार करने, फैक्ट-चेकिंग में सहायता करने और पत्रकारों को शोध एवं डेटा विश्लेषण में सहयोग देने जैसे कार्य किए जा सकते हैं। उन्होंने ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के एआई टूल ‘हेलियोग्राफ’ और ‘रॉयटर्स’ के ‘न्यूज ट्रेसर’ का उदाहरण देते हुए बताया कि तकनीक किस तरह समाचारों के संकलन, विश्लेषण और प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई का उपयोग पत्रकारिता में सहायक हो सकता है, लेकिन सूचनाओं की सत्यता की जांच और जिम्मेदार पत्रकारिता का महत्व बना रहता है।स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में भी उपयोगी एआई चैटबॉट्सडॉ. नेहा पाण्डेय ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एआई चैटबॉट्स की उपयोगिता पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि इनकी मदद से स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जानकारी देने, बीमारियों के लक्षणों के बारे में मार्गदर्शन करने, वर्चुअल परामर्श में सहायता और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित शुरुआती सहयोग उपलब्ध कराने जैसे कार्य किए जा सकते हैं।इसके अलावा मरीजों का डेटा एकत्र करने, अस्पताल में अपॉइंटमेंट निर्धारित करने और रिमाइंडर भेजने जैसी नियमित प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने में भी इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों के कामकाज को व्यवस्थित करने और कार्यभार कम करने में सहायता मिल सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी एआई आधारित उपकरणों के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराने और सीखने की प्रक्रिया को सहयोग देने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।ALSO READ : बरेका में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत चला स्वच्छता अभियान, पुराने रिकॉर्ड और अनुपयोगी सामान हटाए गएएआई के इस्तेमाल में नैतिकता और सत्यता जरूरीव्याख्यान में एआई से जुड़ी चुनौतियों और नैतिक सवालों को भी प्रमुखता से उठाया गया। डॉ. पाण्डेय ने गलत या भ्रामक जानकारी, एआई द्वारा मनगढ़ंत तथ्य प्रस्तुत करने, तकनीकी पूर्वाग्रह, भेदभाव और डेटा की गोपनीयता जैसे मुद्दों पर चर्चा की। इसके साथ ही शैक्षणिक ईमानदारी, तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता, डिजिटल विभाजन, सहमति, कॉपीराइट और जवाबदेही से जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने एआई से तैयार सामग्री के सत्यापन की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि तकनीक का उपयोग करते समय तथ्यों की जांच, गोपनीयता की सुरक्षा और नैतिक मानकों का पालन आवश्यक है। व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्न-उत्तर सत्र में डॉ. नेहा पाण्डेय ने प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए। इस दौरान चैटबॉट्स के नैतिक उपयोग और एआई से तैयार सामग्री की सत्यता जांचने से जुड़े प्रश्नों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में मद्रास विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं संचार विभाग की प्रमुख डॉ. बेउलाह राहेल ने डॉ. नेहा पाण्डेय का स्वागत किया, जबकि विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. टी. आर. गोपालकृष्णन ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विभाग के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
बरेका में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत चला स्वच्छता अभियान, पुराने रिकॉर्ड और अनुपयोगी सामान हटाए गए
बरेका में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत चला स्वच्छता अभियान, पुराने रिकॉर्ड और अनुपयोगी सामान हटाए गए
वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत शुक्रवार को विभिन्न कार्यालयों और परिसरों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। रेल मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में महाप्रबंधक आशुतोष पंत के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य कार्यालयों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और अनावश्यक सामग्री से मुक्त बनाना है। अभियान के तहत बरेका के जनसंपर्क कार्यालय और स्टोर में साफ-सफाई की गई। इस दौरान पुराने अभिलेखों और अनुपयोगी सामान को हटाकर कार्यालय परिसर को व्यवस्थित बनाया गया। साथ ही कर्मचारियों को कार्यस्थल पर नियमित साफ-सफाई बनाए रखने और स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। इसी क्रम में लेखा विभाग के जनरल फाइनेंस, डब्ल्यूएमएस अनुभाग, स्टोर फाइनेंस और स्थापना अनुभाग में भी विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। यहां कार्यालयों की सफाई के साथ पुराने रिकॉर्ड और बेकार सामान को हटाया गया। अभियान के माध्यम से कर्मचारियों को स्वच्छ एवं बेहतर कार्य वातावरण बनाए रखने के प्रति जागरूक किया गया।ALSO READ : काशी विश्वनाथ मंदिर के पास महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी, शाहजहांपुर का युवक गिरफ्तारवहीं, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के आईपीएफ चैंबर, पोस्ट क्षेत्र के आसपास, बैरक संख्या एक और तीन के सामने तथा फायर टेंडर रूम में भी साफ-सफाई कराई गई। इन स्थानों पर जमा अनावश्यक सामग्री को हटाकर परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने की पहल की गई। बरेका प्रशासन के अनुसार, स्पेशल कैंपेन 6.0 के अंतर्गत स्वच्छता के साथ कार्यालयों के बेहतर रखरखाव और कार्यस्थलों को व्यवस्थित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य कर्मचारियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और कार्यालयों में स्वच्छ, स्वस्थ एवं सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित करना है। बरेका प्रशासन ने स्वच्छता और सुव्यवस्थित कार्यस्थल को प्राथमिकता देते हुए इस तरह के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। अभियान की जानकारी जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने दी।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पास महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी, शाहजहांपुर का युवक गिरफ्तार
काशी विश्वनाथ मंदिर के पास महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी, शाहजहांपुर का युवक गिरफ्तार
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर तीन के पास महिलाओं और लड़कियों पर अश्लील टिप्पणी करने और अशोभनीय इशारे करने के आरोप में चौक पुलिस ने शाहजहांपुर निवासी अमन गुप्ता (22) को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 22 अक्टूबर को मिशन शक्ति अभियान के तहत कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, मंदिर के गेट नंबर तीन के पास गश्त के दौरान महिलाओं और लड़कियों ने एक युवक की हरकतों की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि युवक गली से गुजरने वाली महिलाओं को देखकर अश्लील शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था और अशोभनीय इशारे कर रहा था। इससे महिलाओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा था।ALSO READ : वाराणसी में बालिकाओं ने निकाली रैली, भ्रूण हत्या बाल विवाह के खिलाफ बुलंद की आवाजशिकायत मिलने पर महिला उपनिरीक्षक मानसी वर्मा पुलिसकर्मियों संजू देवी और खुशबू के साथ मौके पर पहुंचीं। टीम ने गली में निगरानी शुरू की। कुछ देर बाद शिकायत में बताए गए हुलिए का युवक वहां दिखाई दिया। पुलिस के अनुसार, महिलाओं को देखकर अश्लील हरकत करने पर टीम ने उसे पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपी अमन गुप्ता शाहजहांपुर जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित चौकसी मुन्नूगंज फाटक, राजन कुआं का निवासी है। पुलिस ने उसके खिलाफ चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई करने वाली टीम में चौक थाना प्रभारी विजय कुमार शुक्ला, महिला उपनिरीक्षक मानसी वर्मा, उपनिरीक्षक सुमित, आरक्षी संजू देवी, खुशबू और आरक्षी अजीत कुमार यादव शामिल रहे।