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अजित पवार की दर्दनाक मौत ने कई विमान हादसों की दिलाई याद, जाने आपबीती

अजित पवार की दर्दनाक मौत ने कई विमान हादसों की दिलाई याद, जाने आपबीती
Jan 28, 2026, 12:22 PM
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Posted By Preeti Kumari

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की दर्दनाक मौत ने न सिर्फ प्रदेश की राजनीति को झकझोर दिया, बल्कि जिस विमान Learjet 45 से वह यात्रा कर रहे थे, उसकी सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा होने लगा हैं. बारामती एयरपोर्ट पर क्रैश-लैंडिंग के बाद हुई इस त्रासदी ने दुनिया भर में हुई जेट से जुड़े पुराने हादसों की याद दिला दी हैं. DGCA की रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान Learjet 45 ही था. इसके बाद एविएशन एक्सपर्ट्स और जांच एजेंसियों की नजर इस मिड-साइज बिजनेस जेट के रिकॉर्ड पर जा टिकी, जो बीते दो दशकों में कई बार जानलेवा हादसों का हिस्सा बना हुआ है.


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जाने विमान हादसा


जानकारी के मुताबिकि, Learjet 45 को कनाडा की एयरोस्पेस कंपनी बॉम्बार्डियर ने 1990 के दशक के अंत में पेश किया था. चार्टर फ्लाइट, सरकारी यात्राओं और मेडिकल इवैक्यूएशन के लिए यह काफी लोकप्रिय रहा है, इसका उत्पादन 2007 तक चला, जिसके बाद से इसके उन्नत वर्जन Learjet 45XR ने जगह ली और 2012 तक बनता रहा. लेकिन इसकी लोकप्रियता के पीछ एक बड़ी कहानी भी है. वो किस्सा लगातार हो रहे प्लेन क्रैश हादसों का सिलसिला है. खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान, खराब मौसम या फिर चुनौतीपूर्ण रनवे पर इस विमान से जुड़े कई गंभीर हादसे सामने आए हैं.


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बारामती की त्रासदी


महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार एक निजी कार्यक्रम के सिलसिले में बारामती जा रहे थे. तभी विमान को अचानक से एयरपोर्ट पर क्रैश-लैंडिंग करनी पड़ी, जिसमें अजित पवार समेत पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, यह हादसा इतना दर्दनाक था कि कितनों के घर उजड़ गए. फिलहाल हादसे के कारणों की जांच जारी है और DGCA की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. प्लेन क्रैश मामले की बात करें तो ये कोई पहला हादसा नहीं है, इससे पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है. जिसके चलते लोगों का विमान यात्रा से धीरे-धीरे भरोसा ही हटता जा रहा है.


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रनवे से फिसला प्लेन


बात करें, अक्टूबर 2023 में मेक्सिको के जलापा शहर में एक Learjet 45 लैंडिंग के बाद रनवे से फिसल गया था, विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, हालांकि सभी सात लोग सुरक्षित बचा लिए गए थे. इसके एक महीने पहले ही माहर सितंबर 2023 में मुंबई एयरपोर्ट पर भारी बारिश के दौरान एक Learjet 45 रनवे से फिसलकर दो हिस्सों में टूट गया और उसमें आग का गोला बनकर धूं-धूं जलने लगा. सभी आठ यात्री बच गए, लेकिन कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गये थे, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. इस माले की जांच में खराब मौसम और कम दृश्यता को कारण बताया गया.


Learjet 45 टेकऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त


फरवरी 2021 में मैक्सिकन एयरफोर्स का Learjet 45 टेकऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया, विमान ऊंचाई नहीं पकड़ सका, पेड़ों से टकराया और खेत में गिरकर आग का गोला बन गया. इस हादसे में सवार सभी छह सैन्यकर्मियों की मौत हो गई, नवंबर 2008 में मेक्सिको सिटी में सरकारी Learjet 45 बड़ा हादसा हुआ, बड़े विमान से बने वेक टर्बुलेंस में फंसकर जेट क्रैश हो गया, इसमें नौ यात्रियों और जमीन पर मौजूद सात लोग अपनी जान गवा बैठे, मरने वालों में देश के गृह मंत्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे.


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2009 और 2003 प्लेन हादसा


जनवरी 2009 में अमेरिका के टेलुराइड एयरपोर्ट पर बर्फीले रनवे पर लैंडिंग के दौरान Learjet 45XR बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. सभी यात्री बच गए, लेकिन विमान को भारी नुकसान पहुंचा. इस घटना से पहले भी जून 2003 में इटली के मिलान लिनेटे एयरपोर्ट से टेकऑफ के तुरंत बाद एक Learjet 45 पक्षियों के झुंड से टकरा गया. दोनों इंजन फेल हो गए और विमान एक फैक्ट्री से टकरा गया, इस हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई थी.

169 साल पहले 282 सैनिकों के साथ हुई बर्बरता को 12 साल पहले जान सकी दुनिया...
169 साल पहले 282 सैनिकों के साथ हुई बर्बरता को 12 साल पहले जान सकी दुनिया...
वाराणसी: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों की बर्बरता का शिकार बने 282 भारतीय सैनिकों का अंतिम संस्कार अब काशी में किया जाएगा. उनकी अस्थियों को मोक्ष दिलाने के उद्देश्य से उनके संभावित वंशज भी इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे. 169 वर्ष पहले हुई इस घटना की जानकारी दुनिया को करीब 12 वर्ष पहले मिली, जबकि वैज्ञानिक शोध और डीएनए परीक्षण के जरिए इन शहीदों की पहचान संभव हो सकी.पंजाब के अमृतसर जिले के अजनाला में वर्ष 2014 में एक कुएं से 282 मानव कंकाल मिले थे. शुरुआत में माना गया कि ये 1947 के विभाजन के दौरान मारे गए लोगों के अवशेष हैं. लेकिन काशी हिंदू विश्वविद्यालय, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट, सीसीएमबी हैदराबाद समेत देश-विदेश के वैज्ञानिकों की टीम ने डीएनए और आइसोटोप अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला कि ये 1857 में शहीद हुए बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सैनिक थे, जिनकी जड़ें गंगा घाटी यानी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से जुड़ी थीं.एक किताब से खुला इतिहास का राज.पंजाब के इतिहासकार एवं शोधकर्ता सुरिंदर कोचर को अंग्रेज अधिकारी फ्रेडरिक हेनरी कूपर की पुस्तक "क्राइसिस इन पंजाब: फ्रॉम 10 मई अनटिल फॉल ऑफ दिल्ली" मिली. इसमें लिखा था कि मियां मीर में तैनात बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की 26वीं रेजीमेंट के सैनिकों ने 1857 में विद्रोह कर दिया था. अंग्रेजों ने 218 सैनिकों को रावी नदी के किनारे गोली मार दी, जबकि 282 सैनिकों को अजनाला लाकर 237 को गोली मारने के बाद 45 सैनिकों को जिंदा कुएं में फेंक दिया और मिट्टी-चूने से कुएं को बंद कर दिया. बाद में उस स्थान पर गुरुद्वारा बना दिया गया. वर्ष 2014 में उसी कुएं की खुदाई के दौरान ये कंकाल मिले.डीएनए जांच से मिली पहचानपंजाब विश्वविद्यालय के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के डॉ. जे.एस. सहरावत के नेतृत्व में बीएचयू, बीरबल साहनी संस्थान और सीसीएमबी के वैज्ञानिकों ने डीएनए और आइसोटोप अध्ययन किया. दोनों अध्ययनों ने पुष्टि की कि ये सैनिक पंजाब के नहीं बल्कि गंगा घाटी क्षेत्र के निवासी थे. इस घटना को दुनिया की सबसे जघन्य ऐतिहासिक घटनाओं में भी गिना जाता है.दक्षिण भारत से आए संभावित वंशजडीएनए सैंपल देने वाराणसी पहुंचे कृतेश तिवारी, जो वर्तमान में दक्षिण भारत के संथूर कस्बे में रहते हैं, बताते हैं कि उनके पूर्वजों का मानना रहा है कि उनका परिवार अजनाला में शहीद हुए सैनिकों का वंशज है. इसी दावे की पुष्टि के लिए उन्होंने qअपना डीएनए सैंपल दिया है. उनका कहना है कि यदि वैज्ञानिक जांच में यह साबित होता है कि उनका परिवार उन्हीं सैनिकों का वंशज है, तो यह उनके लिए गर्व और भावनात्मक संतोष का विषय होगा.2022 से जारी है शोधडॉ. ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं कि वर्ष 2022 से उनकी टीम अजनाला के 282 शहीद सैनिकों पर शोध कर रही है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में कुएं से मिले कंकालों के अध्ययन से पता चला कि इनमें बड़ी संख्या में गंगा घाटी के लोग थे, जिनमें कई कान्यकुब्ज ब्राह्मण भी शामिल थे। समय के साथ इनके कई परिवार दक्षिण भारत के संथूर क्षेत्र में जाकर बस गए.ALSO READ: रथयात्रा मेला प्लास्टिक मुक्त घोषित, पॉलीथिन इस्तेमाल करने वालों पर नगर निगम की कार्रवाईडॉ. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि जब इस शोध को प्रकाशित किया गया तो कनाडा से समीर पांडेय नामक व्यक्ति का फोन आया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में लगभग सात पीढ़ी पहले एक सदस्य लापता हो गए थे, जो 1857 में उसी बटालियन में कार्यरत थे और संभवतः अजनाला नरसंहार के शिकार हुए. इसके बाद संभावित वंशजों की तलाश शुरू की गई.उन्होंने कहा कि डीएनए परीक्षण के जरिए वंशजों की पहचान सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है. शोध पूरा होने के बाद अजनाला से मिले सभी शहीद सैनिकों की अस्थियों का काशी में पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा, ताकि 169 साल बाद उन्हें सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई मिल सके.
रथयात्रा मेला प्लास्टिक मुक्त घोषित, पॉलीथिन इस्तेमाल करने वालों पर नगर निगम की कार्रवाई
रथयात्रा मेला प्लास्टिक मुक्त घोषित, पॉलीथिन इस्तेमाल करने वालों पर नगर निगम की कार्रवाई
वाराणसी: ऐतिहासिक तीन दिवसीय रथयात्रा मेले को नगर निगम ने प्लास्टिक (पॉलीथिन) मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। मेले में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने व्यापक तैयारियां की हैं। साथ ही प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग करने वाले दुकानदारों के खिलाफ अभियान चलाकर चालान और जुर्माने की कार्रवाई भी की जा रही है।नगर निगम के अनुसार पूरे मेला क्षेत्र में 24 घंटे तीन शिफ्टों में विशेष सफाई व्यवस्था लागू की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके। निगम की टीमें स्थायी और अस्थायी दुकानदारों से संपर्क कर उन्हें दुकान के सामने डस्टबिन रखना, प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग न करना और ग्राहकों को केवल कपड़े के थैले उपलब्ध कराने के निर्देश दे रही हैं।नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ मौके पर चालान कर जुर्माना वसूला जा रहा है। वहीं, जोनल स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में आईसी एक्टिविटी टीम लाउडस्पीकर के जरिए दुकानदारों और श्रद्धालुओं को सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने के लिए जागरूक कर रही है।ALSO READ: वाराणसी की 30 महिलाएं बनी 'सोलर दीदी', नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरेइसके अलावा मेला क्षेत्र में "स्वच्छ काशी, सुंदर काशी" और "थैला अपना साथ लाएं, प्लास्टिक को दूर भगाएं" जैसे संदेशों वाले पोस्टर भी लगाए गए हैं। नगर निगम ने सभी श्रद्धालुओं और व्यापारियों से प्लास्टिक मुक्त रथयात्रा मेला बनाने में सहयोग की अपील की है।
वाराणसी की 30 महिलाएं बनी 'सोलर दीदी', नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरे
वाराणसी की 30 महिलाएं बनी 'सोलर दीदी', नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरे
वाराणसी : भारत सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत संचालित 'सोलर दीदी' अभियान के तहत वाराणसी में 30 महिलाओं को रोजगार प्रदान किया गया. आर्क सूर्य शक्ति प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आयोजित चयन एवं नियुक्ति कार्यक्रम में चयनित महिलाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए. साथ ही उन्हें सौर ऊर्जा से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण, कार्य प्रणाली और जनजागरूकता अभियान से जुड़ी जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई.कार्यक्रम में आर्क सूर्य शक्ति प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अभिषेक सिंह 'चंचल' ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है. 'सोलर दीदी' अभियान महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका भी प्रदान कर रहा है. चयनित महिलाएं अब लोगों को योजना की जानकारी देंगी और सोलर संयंत्र लगाने के लिए प्रेरित करेंगी.अभिषेक सिंह ने बताया कि आर्क परिवार फाउंडेशन समाज सेवा के अपने संकल्प के तहत सौर ऊर्जा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का कार्य लगातार कर रहा है. संस्था ऐसे परिवारों तक पहुंच रही है, जो जानकारी के अभाव या आर्थिक कारणों से सोलर संयंत्र नहीं लगवा पा रहे हैं. फाउंडेशन उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, सरकारी सब्सिडी, बैंक ऋण और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी देने के साथ आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराता है. जरूरतमंद परिवारों को संस्था अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग भी प्रदान करती है.ALSO READ: कैंट स्टेशन के बाहर महिलाओं से अश्लील हरकत, एंटी रोमियो टीम ने दो युवकों को किया गिरफ्तारउन्होंने कहा कि फाउंडेशन कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से उद्योग जगत को भी स्वच्छ ऊर्जा अभियान से जोड़ने का प्रयास कर रहा है. उनका मानना है कि सरकार, उद्योग, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही भारत ऊर्जा आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार राष्ट्र बन सकता है. उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा अपनाना केवल बिजली बिल कम करने का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी भी है.