ANRF और DBT की ओर से BHU के वैज्ञानिक अनुसंधान को बड़ा प्रोत्साहन

वाराणसी : देश में वैज्ञानिक अनुसंधान को नई गति देने के लिए ANRF (Anusandhan National Research Foundation) और DBT (Department of Biotechnology) ने मिलकर अहम कदम उठाया है. इसके तहत पर्यावरण, माइक्रोप्लास्टिक, धातु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए BHU के वैज्ञानिकों को भारी भरकम रिसर्च फंड दिया गया है.
DBT की ओर से एक वैज्ञानिक को 1.83 करोड़ के दो प्रोजेक्ट
DBT ने BHU के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक को कुल 1.83 करोड़ रुपये के दो शोध प्रोजेक्ट स्वीकृत किए हैं।
इन प्रोजेक्ट्स का फोकस है—
. माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण
. धातु (Heavy Metal) प्रदूषण
. जल और पर्यावरण पर इनका प्रभाव.
इन शोधों के ज़रिए यह समझने की कोशिश होगी कि माइक्रोप्लास्टिक और धातु प्रदूषण किस तरह जल स्रोतों, मानव स्वास्थ्य और पारिस्थिति की तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं, और इनके नियंत्रण व समाधान क्या हो सकते हैं.
8 वैज्ञानिकों को 6 करोड़ रुपये से अधिक का रिसर्च ग्रांट
ANRF और DBT के सहयोग से BHU के कुल 8 वैज्ञानिकों को 6 करोड़ रुपये से अधिक का रिसर्च ग्रांट प्रदान किया गया है.
यह फंडिंग उन विषयों पर केंद्रित है जो आज पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं.
प्रमुख शोध विषय
.माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण
.धातु और औद्योगिक अपशिष्ट से होने वाला प्रदूषण
.जल संसाधनों की गुणवत्ता और संरक्षण
.जलवायु परिवर्तन और उसके दीर्घकालिक प्रभाव.
शोध का उद्देश्य क्या है?
इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य केवल समस्या को चिन्हित करना नहीं, बल्कि— प्रदूषण के वैज्ञानिक कारणों की पहचान करना , डेटा आधारित समाधान तैयार करना , नीति निर्माण (Policy Making) में मदद करना साथ ही आम जनता और पर्यावरण के लिए सस्टेनेबल मॉडल विकसित करना.
भारत के लिए क्यों अहम है यह रिसर्च?
भारत तेजी से औद्योगीकरण और शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है इसका सीधा असर नदियों, भूजल और हवा पर पड़ रहा है.
ऐसे में यह रिसर्च भविष्य की पर्यावरणीय रणनीति तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है.
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ANRF और DBT की यह पहल साफ संकेत देती है कि भारत अब
वैज्ञानिक समाधान , पर्यावरण संरक्षण , वैश्विक जिम्मेदारी
की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है.



