राष्ट्रीय खेल दिवस पर संस्कृत विश्वविद्यालय में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम....

वाराणसी: राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में खिलाड़ियों ने अपने खेल कौशल और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय के क्रीड़ा विभाग की ओर से 29 और 30 अगस्त को बैडमिंटन एवं तीरंदाजी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में छात्र-खिलाड़ियों ने उत्साह के साथ प्रतिभाग करते हुए अनुशासन, एकाग्रता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की मिसाल पेश की।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने विजेता और प्रतिभागी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खेल केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, एकाग्रता, धैर्य और संघर्षशीलता जैसे गुण भी विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षा के साथ खेलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि खेल विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करते हैं। राष्ट्रीय खेल दिवस युवाओं में खेल चेतना और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता पैदा करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
बैडमिंटन में अंकित निषाद प्रथम
बैडमिंटन प्रतियोगिता में अंकित निषाद ने प्रथम, अंश सिंह ने द्वितीय और सत्यम पाण्डेय ने तृतीय स्थान हासिल किया।
तीरंदाजी में अक्षत सिंह ने साधा निशाना
तीरंदाजी के रिकर्व राउंड में अक्षत सिंह प्रथम और सर्वेश कुमार द्वितीय रहे। वहीं कंपाउंड राउंड में अंश सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
इंडियन राउंड में महेश पटेल प्रथम, अंकित निषाद द्वितीय और निहाल चौहान तृतीय स्थान पर रहे। महिला रिकर्व वर्ग में क्षवर्षा जटराणा ने प्रथम स्थान हासिल कर शानदार प्रदर्शन किया।
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प्रतियोगिता के संयोजक एवं खेल प्रभारी डॉ. कुप्पा बिल्वेश शर्मा ने बताया कि खिलाड़ियों को विश्वविद्यालय के धनुर्विद्या प्रशिक्षक आदित्य कुमार का विशेष मार्गदर्शन मिला। उनके निर्देशन में खिलाड़ियों ने तीरंदाजी की तकनीक, एकाग्रता और लक्ष्य-साधना का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
क्रीड़ा विभाग के समन्वय से आयोजित प्रतियोगिता छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र की अध्यक्षता और खेल प्रभारी डॉ. कुप्पा बिल्वेश शर्मा के संयोजन में संपन्न हुई। आयोजन के दौरान खिलाड़ियों में खासा उत्साह देखने को मिला।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विश्वविद्यालय में “स्वस्थ शरीर–स्वस्थ मन–सशक्त युवा” की भावना को बढ़ावा दिया गया और विद्यार्थियों को खेलों के प्रति प्रेरित किया गया।



