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35 साल बाद बांग्लादेश को मिलेगा पुरुष प्रधानमंत्री, जाने कौन है तारिक रहमान

35 साल बाद बांग्लादेश को मिलेगा पुरुष प्रधानमंत्री, जाने कौन है तारिक रहमान
Feb 13, 2026, 12:00 PM
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Posted By Preeti Kumari

बांग्लादेश में बीते गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश की नेशनलिस्ट पार्टी यानि (BNP) ने बड़ी जीत हासिल की है. BNP ने 299 (निन्यानबे) सीटों में से 209 हासिल कर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया है. बीएनपी अब बांग्लादेश में सरकार बनाने को तैयार हो चुकी है, जहां तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने वाले है, लेकिन शफीकुर रहमान की अगुवाई वाला जमात ए इस्लामी यानी (BJI) गठबंधन बहुत पीछे रह गई है. खुशी की बात तो यह है कि, देश में करीब 20 साल बाद BNP की सरकार बनकर उभरी है. माना जा रहा है कि वह 14 फरवरी (शनिवार) को तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें इस जीत की बधाई दी है.


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कौन है तारक रहमान


तारिक रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं. 1967 सड़सठ में जन्मे बेटे रहमान की राजनीतिक पहचान उनके परिवारिक राजनीतिक रसूख से जानी जाती है. मां खालिदा जिया जब 2001 से 2006 तक बांग्लादेश में दूसरी बार प्रधानमंत्री रहीं तब एक प्रमुख संगठनात्मक रणनीतिकार के तौर पर तारिक रहमान ने पर्दे के पीछे से बखूबी मोर्चा संभाला. पार्टी पर पकड़ मजबूत बनाए रखने के नाते वह बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष बन बैठे. 2008 में हुए आम चुनाव में अवामी लीग की जीत हुई और शेख हसीना प्रधानमंत्री बनीं, तब रहमान ने बीएनपी द्वारा राजनीतिक उत्पीड़न के आरोपों का हवाला देते हुए बांग्लादेश छोड़कर लंदन में बस गए.


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विदेश में रहने के बाद भी पार्टी को संभाले रखा. तारिक के प्रधानमंत्री का चेहरा होना काफी लोगों के लिए खुशी की बात है, तारिक ने दो सीटों से चुनाव लड़ते हुए दोनों पर ही अपना परचम लहराया है, वे पिछले साल दिसंबर में 17 साल बाद देश लौटे थे, जब उनकी मां खालिदा का निधन हुआ था. खास बात तो यह है कि, बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनने जा रहा है, 1988 (अट्ठासी) में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री थे. इसके बाद 1991 इक्यानबे से 2024 तक देश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा कायम रहा. ये दोनों महिलाओं ने प्रधानमंत्री के रूप में बांग्लादेश का कार्यभार संभाला.


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बीएनपी पार्टी की जीत की वजह बड़ी ही दिलचस्प है. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए है. जिसका नतीजा जीत के रूप में देखने को मिला है. BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है. वहीं, इस चुनाव में उन तमाम छात्र नेताओं की राजनीतिक पार्टी भी शामिल थी, जिन्होंने बांग्लादेश में मौजूद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना सरकार को उखाड़ फेंका था.


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इस प्रोटेस्ट को Gen Z जेन ज़ेड प्रोटेस्ट का नाम दिया गया था. अब चुनाव नतीजों के बाद ये सवाल उठने लगा है कि आखिरकार उन छात्र नेताओं का क्या हुआ, जिन्होंने बांग्लादेश में सत्ता को बेदखल करने का काम किया था. प्रदर्शन से उभरे छात्र नेताओं ने चुनाव से पहले नई पार्टी बनाई थी, जिसका नाम जातीय नागरिक पार्टी यानि (JNP) रखा गया था. इसे नेशनल सिटिजन पार्टी यानि (NCP) के नाम से बांग्लादेश में जाना जाता है. प्रदर्शन में शामिल इन छात्रों को चुनाव में फायदा देने के बजाय बांग्लादेशियों ने इसे नकार दिया है.


जमात में बांग्लादेशियों ने नहीं दिखाई दिलचस्पी


बात करें जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन की तो इसे 70 की आस-पास की कुछ सीटें मिली हैं. जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत दर्ज की है. इसके प्रमुख शफीकुर रहमान का अतीत चुनाव के नतीजों में साफ देखने को मिला. जी हां, लोगों को उसकी वो करतूते चुनाव के दौरान भी याद रही जो उसने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध किया था, जमात इस दाग को धोने में फेल हो गया. जिसका नतीजा बांग्लादेश चुनाव में हार मिली. पाकिस्तान की करीबी मानी जाने वाली जमात ए इस्लामी की करारी हार के पीछे कहीं ना कहीं उसकी कट्टर सोच ही ज़िम्मेदार है. बांग्लादेश का ये वहीं राजनीतिक दल है, जिसने 1971 (इकहत्तर) में पाकिस्तान से बांग्लादेश की आज़ादी का विरोध किया था. इतना ही नहीं, इसी जमात पार्टी पर शेख हसीना कई बार कट्टरता फैलाने के आरोप में प्रतिबंध लगा चुकी हैं.


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क्यों हार गया जमात


ऐसे में ये सवाल उठने लगता है कि 90% मुस्लिम आबादी वाले बांग्लादेश में आख़िरकार जमात हार कैसे गई? वो भी तब जब इस्लामी शासन ही जमात का प्रमुख चुनावी एजेंडा रहा है. बांग्लादेश के चुनाव नतीजों में जमात की हार से यह जाहिर होता है कि बांग्लादेश की जनता अब दुबारा से पाकिस्तान के बुरे प्रभाव को देश में लागू नहीं होने देना चाहती है,इसीलिए जमात को चुनाव में हराना ही सही समझा. इस आवाम का अब सोचना है कि बांग्लादेश कंट्टरपंथी से हटकर एक नए विकास वाला राज्य बनकर उभरे, हर किसी के साथ एक जैसा व्यवहार हो, ताकि सभी भाईचारे के साथ रह सके.बांग्लादेशी जनता हमेशा से भारत को अपने करीब देखना चाहती है, न कि पाकिस्तान को. इसीलिए पाकिस्तान परस्त जमात को जनता ने सत्ता तक नहीं पहुंचने दिया. बांग्लादेश की जनता यह भी जानती है कि जमात पाकिस्तान के एजेंडा को बहुत ही आगे रखती है.

ज्ञानवापी मस्जिद की दीवार पर गेरुआ पेंटिंग को लेकर विवाद, शहर मुफ्ती ने किया विरोध
ज्ञानवापी मस्जिद की दीवार पर गेरुआ पेंटिंग को लेकर विवाद, शहर मुफ्ती ने किया विरोध
Controversy erupts over saffron painting on the wall of Gyanvapi Mosque, city Mufti protestsवाराणसी: अति संवेदनशील ज्ञानवापी मस्जिद की दीवार पर गेरुआ रंग से की गई पेंटिंग को लेकर विवाद सामने आया है. शहर मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी साहब ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि मस्जिद की दीवार पर इस तरह की पेंटिंग धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ है. उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि इसे नहीं हटाया गया, तो विरोध जारी रहेगा. शर मुफ्ती ने इसे परंपराओं के खिलाफ बताया. कहा कि पहले भी विरोध किया गया था. वहीं नमाज़ अदा करके निकले स्थानीय शकील अहमद ‘जादूगर’ ने इस मामले में अलग राय रखते हुए कहा कि उन्हें इस पेंटिंग से कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर मस्जिदों का रंग सफेद या हरा होता है, जबकि गेरुआ रंग मंदिरों से जुड़ा माना जाता है. ऐसे में धार्मिक स्थलों की परंपरा और पहचान का ध्यान रखना जरूरी है.वहीं, जुमे की नमाज को देखते हुए शुक्रवार को वाराणसी में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया. काशी विश्वनाथ मंदिर–ज्ञानवापी क्षेत्र सहित संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई. एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि नमाज़ के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो.इस पूरे मामले पर प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल जुम्मे की नमाज़ को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना रही. वहीं पुलिस अधिकारियों से इस मुद्दे पर पूछे जाने पर वे खुलकर कुछ कहने से बचते नजर आए और सुरक्षा व्यवस्था पर ही जोर देते रहे. इधर, सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी और एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 पर भारी पुलिस बल तैनात रहा.Also Read: विश्‍व मजदूर दिवस पर पीएम आदर्श गांव में बुलंद की आवाज, मजदूरी बढ़ाने की उठाई मांगमौके पर डीसीपी काशी गौरव बंसवाल, एडीसीपी काशी वैभव बाँगर और अन्य अधिकारी मौजूद रहे और लगातार निगरानी करते दिखे. फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य है, लेकिन संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी तरह के विवाद को बढ़ने से रोका जा सके.https://www.youtube.com/watch?v=yk_vEG6WMTk
विश्‍व मजदूर दिवस पर पीएम आदर्श गांव में बुलंद की आवाज, मजदूरी  बढ़ाने की उठाई मांग
विश्‍व मजदूर दिवस पर पीएम आदर्श गांव में बुलंद की आवाज, मजदूरी बढ़ाने की उठाई मांग
On World Labour Day, voices were raised in the PM's Adarsh ​​Village, demanding a wage increase.वाराणसी: विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम नागेपुर में बुनकरों और दिहाड़ी मजदूरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की. सैकड़ों की संख्या में जुटे मजदूरों ने बुनकरी उद्योग को बचाने, रोजगार की स्थिरता सुनिश्चित करने और मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर गांव में रैली निकाली और प्रदर्शन किया. रैली के बाद अम्बेडकर पार्क में एक सभा का आयोजन किया गया, जहां बुनकरों और मजदूरों ने अपनी समस्याओं को खुलकर रखा. वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती महंगाई और घटते रोजगार के कारण बुनकर समुदाय और दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. पारंपरिक बुनकरी उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है.कनेक्शन से जुड़ी समस्याएं उठाईंसभा में मौजूद बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता अभिषेक कुमार और उपखण्ड अधिकारी मुकेश यादव के समक्ष ग्रामीणों और बुनकरों ने बिजली आपूर्ति, बिलिंग और कनेक्शन से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं. अधिकारियों ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया. इस अवसर पर सर्व सेवा संघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ गांधीवादी समाजसेवी रामधीरज भाई ने कहा कि बुनकरों और मजदूरों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने सरकार से मांग की कि बुनकरी उद्योग को संरक्षण देने के लिए ठोस नीतियां बनाई जाएं और मजदूरों को उचित पारिश्रमिक दिया जाए.Also Read: मनीष हत्‍याकांड के विरोध में वकीलों ने किया चक्‍काजाम, धरना देकर की आवाज बुलंदभारतीय सामुदायिक कार्यकर्ता मंच (आईकन) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद मूर्ति ने कहा कि मजदूरों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. वहीं, आल इंडिया बुनकर फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुहम्मद अकरम ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. कार्यक्रम में बुनकर प्रकोष्ठ सलाहकार उत्तर प्रदेश शैलेश, संतोष बीडीसी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे. सभा के अंत में मजदूरों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की.https://www.youtube.com/watch?v=yk_vEG6WMTk
मनीष हत्‍याकांड के विरोध में वकीलों ने किया चक्‍काजाम, धरना देकर की आवाज बुलंद
मनीष हत्‍याकांड के विरोध में वकीलों ने किया चक्‍काजाम, धरना देकर की आवाज बुलंद
Lawyers staged a sit-in protest against the Manish murder case and raised their voices.वाराणसी: फूलपुर थाना क्षेत्र के युवा उद्यमी मनीष सिंह की पीट-पीटकर निर्मम हत्या के विरोध में अब अधिवक्ता सडक पर उतर गए. वकीलों ने घमहापुर गांव पहुंचकर पुलिस की लचर कार्रवाई पर विरोध जताया, आक्रोश जताते हुए अधिकवक्ताओं ने चक्काजाम किया. पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना भी दिया. धरना-प्रदर्शन के चलते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन प्रभावित हुआ. अधिवक्ताओं और परिजनों द्वारा दो 2:10 बजे धरना प्रारंभ किया गया. उनके द्वारा मांग की गई की मौके पर वरिष्ठ अधिकारी जब तक नहीं आएंगे धरना प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा.परिजनों ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप शुक्रवार दोपहर सेंट्रल बार एसोसिएशन, वाराणसी के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश सिंह गौतम के साथ दर्जनों अधिवक्ता पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. इस दौरान परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरी घटना की जानकारी अधिवक्ताओं को दी. इसके बाद अधिवक्ताओं और परिजनों ने बसनी-कुआर मार्ग पर जाम लगाकर धरना शुरू कर दिया. हालांकि एसीपी पिंडरा द्वारा 48 घंटे का समय मांगा गया. एसीपी ने कहा कि 48 घंटे के अंदर परिणाम आप लोगों के सामने होगा. उसके बाद नाराज अधिवक्ता और परिजन धरना प्रदर्शन समाप्त किए. करीब 20 मिनट तक बसनी-कुआर मार्ग जाम रहा. एसीपी पिंडरा ने सीपी से वार्ता करके बताया कि 2 दिन के अंदर सभी की गिरफ्तारी हो जाएगी और सीपी आज सायं 5 बजे पीड़ित परिवार को मिलने के लिए बुलाया है. इसके बाद वकलों ने धरना समाप्त किया और आवागमन चालू हुआ.उद्योग व्यापार मंडल ने जताया आक्रोशइस बीच उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा. सभी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की तथा हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया. प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने कहा कि इस दुखद घटना की व्यापार मंडल कड़ी निंदा करता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा.Also Read: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में एप आधारित दर्शन व्‍यवस्‍था का विरोध, कांग्रेस और सपा ने लगाया यह आरोप