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वाराणसी में 20वीं पूण्‍यतिथि पर याद आए भारत रत्‍न उस्‍ताद बिस्मिल्लाह खान, शहनाई बजाकर दी श्रद्धांजलि

वाराणसी में 20वीं पूण्‍यतिथि पर याद आए भारत रत्‍न उस्‍ताद बिस्मिल्लाह खान, शहनाई बजाकर दी श्रद्धांजलि
Aug 21, 2026, 07:46 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : भारत रत्‍न उस्‍ताद बिस्मिल्लाह खान साहब की 20वीं पुण्यतिथि आज शुक्रवार को दरगाह फातमान सिगरा पर मनाई गई. उनके कब्र पर श्रद्धा के फूल चढ़ाए गए तो कुरानख्‍वानी और दुआख्‍वानी के जर‍िए उस्‍ताद की शहनाई की गूंज फ‍िर काशी में याद की गई. इस मौके पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पुत्र आफाक हैदर, रिजवान हैदर ने शहनाई बजायी. वहीं बिलाल अली ने दुक्कड़ बजाकर दादा की परंपरा को निभाया. इस दौरान उनके अन्‍य करीबी भी मौजूद रहे. उस्ताद बिस्मिल्लाह खां चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में दरगाह फातमान में सुबह 11 बजे से प्रार्थना सभा और श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत हुई तो उस्ताद की कब्र और मकबरे पर दुआख्वानी, कुरानख्वानी के साथ श्रद्धासुमन अर्पित कर काशी ने उन्हें शिद्दत से याद किया.


ऐसे पडा था नाम, काशी से मिली पहचान


21 मार्च 1916 को बिहार के डुमरांव में जन्मे बिस्मिल्लाह खां का असली नाम कमरुद्दीन था. बचपन में जब उनके दादा रसूल बख्श खां ने उन्हें पहली बार देखा तो उनके मुंह से सहसा निकाला 'बिस्मिल्लाह. यहीं नाम आगे चलकर संगीत के इतिहास का एक जगमगाता अध्याय बन गया.


महान फनकार को असल पहचान और उस्ताद बनने की राह काशी की पावन घरा पर ही मिली. महज छह वर्ष की उम्र में वे बनारस आ गए और अपने मामा अली बख्श 'विलायती (अल्लन बिलातू) के सानिध्य में शहनाई सीखने लगे. मामा श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में शहनाई बजाया करते थे और यहीं से नन्हें बिस्मिल्लाह के भीतर संगीत और साधना का अनूठा मेल अंकुरित होने लगा.


उनकी शहनाई से निकलने वाला हर सुर लोगों के दिलों को छूने लगा और देखते ही देखते उनका नाम दुनिया के सुरमई फलक पर जगमगाने लगा. 15 अगस्त 1947 को जब भारत ने आजादी की पहली भोर देखी तब लाल किले की प्राचीर से नए भारत का स्वागत उस्ताद की शहनाई की गूंज से हुआ था. उन्होंने राग काफी बजाकर आजाद भारत को अपनी स्वरांजलि दी थी.


विरासत का लग रहा दीमक, संरक्षण का अभाव


शहनाई को मांगलिक आयोजन की चौखट से निकालकर दुनिया के सबसे बड़े संगीत मंचों तक पहुंचाने वाले उस्‍ताद की राष्ट्रीय विरासत आज दीमक और बारिश से जूझ रही है. भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को मिले पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे राष्ट्रीय सम्मान जर्जर हालत में पड़े हैं.


काशी स्थित उनके पैतृक आवास में रखी उनकी शहनाई, शेरवानी, टोपी, तस्वीरों और रोजमर्रा की दूसरी निशानियों का भी संरक्षण नहीं हो पा रहा है. नमी और बारिश के बीच सामान लगातार खराब हो रहा है और पद्म सम्मानों पर दीमक लग गई है. जो निशानियां घर में बची हैं, उन्हें सुरक्षित रखना मुश्किल होता जा रहा है.


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जर्जर हो रहा वह घर, जहां बसी है उस्ताद की याद


सम्मानों के साथ उस्ताद के जीवन से जुड़ी तमाम वस्तुएं भी उसी घर में रखी हैं. उनका रहने वाला कमरा जर्जर हो चुका है. बारिश के दौरान घर में नमी बढ़ने से सामान को और नुकसान पहुंच रहा है. उस्ताद की शहनाई, शेरवानी, टोपी, पंखा, आलमारी, ताड़ का पंखा, खाने के बर्तन और देश-विदेश में उनके कार्यक्रमों के दौरान खींची गई तस्वीरें भी संरक्षण के अभाव में खराब हो रही हैं.

इन वस्तुओं की अहमियत इस लिहाज से भी अधिक है कि वे उस्ताद के जीवन, उनकी दिनचर्या और दशकों लंबी संगीत साधना की प्रत्यक्ष गवाह हैं. इनके नष्ट होने का अर्थ केवल पुराने सामान का खराब होना नहीं, बल्कि संगीत इतिहास के एक हिस्से का हमेशा के लिए खो जाना होगा.


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संग्रहालय की पहल भी परिवार के समन्वय में अटकी


उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पैतृक घर को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की पहल भी पहले सामने आ चुकी है, लेकिन परिवार के सदस्यों के बीच समन्वय नहीं बनने से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी. परिवार के भीतर मतभेद और अलग-अलग राय के कारण उस्ताद की विरासत को एक जगह संरक्षित करने की कोशिशें अटकती रही हैं. उस्‍ताद की बेटी जरीना बेगम का कहना है कि परिवार के सभी सदस्यों के बीच समन्वय बनाकर उस्ताद की निशानियों को सहेजने का प्रयास किया जा रहा है.

जन्‍मदिन के अगले दिन बुझ गया घर का चिराग, जनरल स्टोर में हुए विस्फोट से घायल मासूम की हुई मौत
जन्‍मदिन के अगले दिन बुझ गया घर का चिराग, जनरल स्टोर में हुए विस्फोट से घायल मासूम की हुई मौत
वाराणसी : कपसेठी बाजार में शनिवार को एक जनरल स्टोर में रखे पटाखों में अचानक विस्फोट से घायल पांच साल के मासूम कार्तिक जायसवाल की मौत हो गई. विस्फोट इतना जबरदस्‍त रहा कि बारजा ढह गया. दुकान के दरवाजे, खिड़की और दीवार की रेलिंग टूट गई. बाजार से लगभग 200 मीटर दूर तक धमाके से ग्रामीण दहल गए. मासूम घर का इकलौता चिराग था.भदवर स्थित हेरिटेज मेडिकल कॉलेज से बच्चे के शव को पुलिस ने पंचायतनामा के बाद परिजनों को सौंप दिया. सूचना के बाद गोमती जोन के अधिकारियों ने घटना की जानकारी ली. कार्तिक माता-पिता का इकलौता बेटा था. शुक्रवार को कार्तिक का पांचवां जन्मदिन था. ननिहाल से कार्तिक रात में ही घर लौटा था. खिलौने आदि भी ननिहाल से उपहार में कार्तिक को मिले थे. खिलौने लेकर वह तीसरी मंजिल पर गया था. अचानक फुलझड़ी जलाने के दौरान ही तेज धमाका हो गया. इकलौते बेटे की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया. पिता आशीष और मां का रो-रोकर हाल खराब हो गया.कपसेठी थाना क्षेत्र के स्थानीय बाजार में आशीष जायसवाल का मकान है. मकान में ही जायसवाल जनरल स्टोर संचालित है. सुबह लगभग 8 बजे के बाद आशीष का बेटा कार्तिक जायसवाल खेलते हुए तीसरी मंजिल की दुकान पर जा पहुंचा. इस बीच वह फुलझड़ी जलाने का प्रयास कर रहा था कि अचानक एक बोरे में तेज धमाका हो गया. धमाके की गूंज से मकान समेत बाजार दहल उठा. तीसरे तल के आगे का बारजा ढह गया. दुकान की रेलिंग, खिड़की-दरवाजे भी क्षतिग्रस्त हो गए.ALSO READ : एयरपोर्ट विस्तार का मुआवजा उड़ाया, एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख की साइबर ठगी...कार्तिक जायसवाल लहूलुहान होकर अचेत हो गया. परिजन तुरंत उसे लेकर कपसेठी चौराहे स्थित शर्मा क्लिनिक पर गए, जहां हालत गंभीर होता देख चिकित्सकों ने हेरिटेज अस्पताल में रेफर किया. उपचार के दौरान मौत हो गई. वहीं, स्थानीय लोगों को कहना है कि एक माह बाद ही दशहरा और दिवाली है. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पटाखों का अवैध भंडारण किया जा रहा है.
एयरपोर्ट विस्तार का मुआवजा उड़ाया, एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख की साइबर ठगी...
एयरपोर्ट विस्तार का मुआवजा उड़ाया, एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख की साइबर ठगी...
वाराणसी: बाबतपुर एयरपोर्ट विस्तार के लिए मिले मुआवजे की रकम पर साइबर ठगों के सेंध लगाने का मामला सामने आया है. फूलपुर थाना क्षेत्र के मंगारी गांव निवासी अंजू देवी के संयुक्त बैंक खाते से ठगों ने एपीके फाइल के जरिये 6.64 लाख रुपये उड़ा लिए. मामले में साइबर क्राइम पुलिस थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस जांच में जुट गई है.अंजू देवी ने पुलिस को बताया कि उनका और उनके पति मनोज पटेल का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में संयुक्त बचत खाता है. इसी खाते में बाबतपुर एयरपोर्ट विस्तार के मुआवजे के रूप में 9.03 लाख रुपये आए थे. 20 अगस्त से 31 अगस्त के बीच उनके संयुक्त खाते से अलग-अलग माध्यमों से 6,51,783 रुपये निकल गए.इसके अलावा बैंक की मंगारी शाखा स्थित एक अन्य खाते से भी 13 हजार रुपये निकाल लिए गए. कुल 6,64,783 रुपये की साइबर ठगी हुई. पीड़िता के मुताबिक, उनके वाट्सएप पर एक मोबाइल नंबर से एपीके फाइल भेजी गई थी. फाइल पर क्लिक करते ही साइबर अपराधियों ने मोबाइल और खाते से संबंधित जानकारी तक पहुंच हासिल कर ली. इसके बाद खाते से रकम निकलती चली गई. खाते से रकम कटने की जानकारी होने पर पीड़िता ने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की.ALSO READ: दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धिसाइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह ने बताया कि मामले की जांच निरीक्षक ओम प्रकाश सरोज को सौंपी गई है. पुलिस लेनदेन से जुड़े विवरण और एपीके फाइल भेजने वाले मोबाइल नंबर की जांच कर रही है. पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील की है. थाना प्रभारी ने कहा कि वाट्सएप या एसएमएस पर अनजान नंबरों से आने वाली किसी भी एपीके फाइल पर क्लिक न करें. संदिग्ध लिंक खोलने से भी बचें. ऐसी फाइलें मोबाइल में सेंध लगाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाने का माध्यम बन सकती हैं. साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं.
पितृपक्ष 27 सितंबर से, इस बार 14 दिनों त‍क म‍िलेगी पितरों की कृपा
पितृपक्ष 27 सितंबर से, इस बार 14 दिनों त‍क म‍िलेगी पितरों की कृपा
वाराणसी : इस वर्ष पितृपक्ष का आरंभ 27 सितंबर से होगा और यह 10 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. यानी पितरों की कृपा पाने का पक्ष इस बार 14 दिनों का होगा. साथ ही षष्ठी और सप्तमी तिथि एक ही दिन पड़ने के कारण पितृपक्ष की अवधि कम हो रही है. जिनके पिता की मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई है, वे 26 सितंबर को पितृ श्राद्ध करेंगे. ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, 27 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी. 2 अक्टूबर को षष्ठी और सप्तमी तिथि एक साथ आने के कारण पितृपक्ष की अवधि में कमी आ रही है. जिनके पिता की मृत्यु शस्त्र या विष से हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी को किया जाता है.वहीं, जिनके पिता की स्वाभाविक मृत्यु चतुर्दशी को हुई हो, वे द्वादशी तिथि को श्राद्ध करेंगे. माता की मृत्यु किसी भी तिथि पर हुई हो, उनका श्राद्ध नवमी (मातृ नवमी) को करना चाहिए. इस वर्ष मातृ नवमी 4 अक्टूबर को है. पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं को अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का अवसर मिलता है. यह समय परिवार के सदस्यों के लिए एकत्रित होने और अपने पूर्वजों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करने का होता है. पितृपक्ष के दौरान किए गए अनुष्ठान से पितरों की कृपा प्राप्त करने की मान्यता है. इस समय श्रद्धालु अपने पितरों के लिए विशेष भोजन तैयार करते हैं और उन्हें अर्पित करते हैं. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.आनलाइन पिंडदान के लिए कर रहे संपर्कपितृपक्ष पर काशी में ई-पिंडदान कराने के लिए कर्मकांडी ब्राह्मण पैकेज दे रहे हैं. विदेशों में बैठे आस्थावानों ने अपने पितरों का श्राद्ध करने के लिए इन पुरोहितों से संपर्क करना शुरू कर दिया हैं. ब्राह्मणों ने सोशल मीडिया पर इसका प्रचार प्रसार भी शुरू कर दिया है. बता दें कि पिंडदान, तर्पण और त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए व्यक्तिगत रूप से आने में असमर्थ आस्थावान आनलाइन अनुष्ठान कराते हैं. हाल ही में रूस की महिला ने अपने पिता और भाई का आनलाइन पिंडदान कराया था.ALSO READ : दूध प्रोटीन-एलोवेरा एंटासिड टैबलेट को भारतीय पेटेंट, बीएचयू की शोध टीम की बड़ी उपलब्धि