भारतीय परंपरा से जुड़े खेल ही व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम : प्रो. बिहारी लाल शर्मा...

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय स्थित डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल एजुकेशन द्वारा आयोजित 'भारतीय दृष्टि से खेल सृष्टि' विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने भारतीय खेल परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और व्यक्तित्व निर्माण में खेलों की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे.
प्रो. शर्मा ने कहा कि 'भारतीय दृष्टि से खेल सृष्टि' जैसा विषय अपने आप में अत्यंत विलक्षण है, महामना की बगिया में इस विषय पर चिंतन-मनन होना न केवल स्वागतयोग्य है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और खेल संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है, उन्होंने कहा कि जब क्रीड़ा भारतीय संस्कृति, दर्शन और जीवन मूल्यों से जुड़ती है, तब उसका महत्व और व्यापक हो जाता है.
उन्होंने कहा कि खेल केवल मनोरंजन या प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि भटकती मानवता के स्वभाव में संतुलन, अनुशासन और सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रभावी शक्ति रखते हैं, उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि हमें अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना होगा, उन्होंने कहा, "जो अपने मूल से जुड़ा रहता है, वही आगे बढ़ता है और जो अपने मूल को छोड़ देता है, वह मामूली बनकर रह जाता है, जब मूल का संचय होगा, तभी सफलता और व्यक्तित्व विकास के फूल खिलेंगे.

कुलपति ने भारतीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए कहा कि ये खेल केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि धैर्य, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, लक्ष्य के प्रति समर्पण और नैतिक मूल्यों का भी विकास करते हैं, उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, और यहां की प्रकृति तथा परंपराएं जीवन जीने की अनेक प्रेरणाएं देती हैं, जिन्हें खेलों के माध्यम से सहज रूप से आत्मसात किया जा सकता है.
उन्होंने वर्तमान समय की बदलती जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की असंतुलित दिनचर्या अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन रही है, नियमित रूप से खेलों को जीवन का हिस्सा बनाकर स्वस्थ, अनुशासित और संतुलित जीवन की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है, खेल व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ उसके चरित्र, व्यक्तित्व और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी निर्माण करते हैं.
अपने संबोधन के अंत में प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने आयोजन समिति को इस सार्थक विषय पर संगोष्ठी आयोजित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय खेल परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.



