Daily Bulletin Tag
AI गार्गी दैनिक बुलेटिन

बीएचयू और स्वीडन के विश्वविद्यालय के बीच एमओयू का नवीनीकरण, नहीं देनी होगी कोर्स फीस

बीएचयू और स्वीडन के 
विश्वविद्यालय के बीच एमओयू का नवीनीकरण, नहीं देनी होगी कोर्स फीस
Oct 08, 2025, 09:01 AM
|
Posted By Gaandiv

वाराणसी : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रों के लिए खुशखबरी है. क्योंकि स्वीडन के कार्लस्टाड विश्वविद्यालय (Karlstad University) के बीच वर्षों से चल रहे शैक्षणिक सहयोग को और सशक्त करने के लिए मंगलवार को उनके एमओयू (MOU) का नवीनीकरण किया गया है. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के केन्द्रीय कार्यालय में आयोजित समारोह में दोनों विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने समझौते के दस्ताेवेजों का आदान-प्रदान किया.

इस नवीनीकृत समझौते का उद्देश्य शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विद्यार्थियों व शिक्षकों के पारस्परिक विकास को प्रोत्साहन देना है. यह एमओयू दोनों विश्वविद्यालयों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है.


BHU


आनलाइन और आफलाइन कोर्स फ्री


इस अवसर पर बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग से न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता में वृद्धि होगी बल्कि राष्ट्रों के बीच आपसी समझ और सांस्कृतिक संवाद भी मजबूत होंगे. उन्होंने कहा कि यह नवीनीकरण बीएचयू की वैश्विक शिक्षा दृष्टि को और सशक्त बनाएगा.

कार्लस्टाड विश्वविद्यालय के प्रो. पावेल ओडिनियेक ने बताया कि विश्वविद्यालय शांति अध्ययन, अंतरसंस्कृति शिक्षा और अंतःविषयक अध्ययन के क्षेत्रों में बीएचयू के साथ अपने सहयोग को विस्तारित करेगा. उन्होंने यह भी घोषणा की कि नवीनीकृत समझौते के अंतर्गत बीएचयू के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को कार्लस्टाड विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों के लिए कोई कोर्स फीस नहीं देनी होगी, चाहे वे कोर्स ऑनलाइन हों या स्वीडन में ऑफलाइन.


ALSO READ :काशी विद्यापीठ का 47वां दीक्षांत समारोहः 101 विद्यार्थियों को सौंपा गया स्वर्ण पदक


अनुसंधान, सेमिनार और छात्र-शिक्षक विनिमय


नए एमओयू के तहत दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, सेमिनारों, अकादमिक वर्कशॉप्स और शिक्षकों व छात्रों के पारस्परिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेंगे.

इस पहल का मुख्य उद्देश्य वैश्विक शिक्षा, शांति अध्ययन और सतत विकास के साझा लक्ष्यों को बढ़ावा देना है. बीएचयू और कार्लस्टाड विश्वविद्यालय के बीच यह समझौता न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक स्तर पर भी भारत-स्वीडन संबंधों को मजबूत करने वाला मील का पत्थर साबित होगा.

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग समन्वयक प्रो. राजेश सिंह, मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च के समन्वयक प्रो. मनोज कुमार मिश्रा और सामाजिक विज्ञान संकाय के सहायक प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार यादव उपस्थित रहे. वहीं, कार्लस्टाड विश्वविद्यालय की ओर से आए प्रतिनिधिमंडल में इंडिया स्टडीज प्रोग्राम के प्रमुख प्रो. पावेल ओडिनियेक, मानविकी और सामाजिक विज्ञान संकाय की निदेशक प्रो. जोहाना एल्फग्रेन, तथा प्रो. कारोलीना एलेगॉड शामिल थीं.

त्योहारों पर वाराणसी पुलिस का मेगा प्लान, चप्पे-चप्पे पर रहेगी नजर
त्योहारों पर वाराणसी पुलिस का मेगा प्लान, चप्पे-चप्पे पर रहेगी नजर
वाराणसी. आगामी पर्वों को लेकर कमिश्नरेट पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का मेगा प्लान तैयार किया है। श्रावण माह में प्रस्तावित शोभायात्रा, जलाभिषेक यात्रा, रक्षाबंधन, पूर्णिमा और बारावफात समेत अन्य आयोजनों को देखते हुए पुलिस ने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय शिवहरि मीना ने पुलिस उपायुक्त काशी गौरव बंसवाल, अपर पुलिस उपायुक्त काशी वैभव बांगर, एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार और एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजन त्रिपाठी समेत पुलिस बल के साथ बारावफात जुलूस के निर्धारित मार्गों का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ब्रॉडवे तिराहा, रेवड़ी तालाब, गोदौलिया, रामापुरा, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और मैदागिन चौराहा समेत प्रमुख स्थानों पर पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान जुलूस और शोभायात्रा के मार्ग, संवेदनशील स्थानों, प्रमुख चौराहों, भीड़ नियंत्रण, पुलिस बल की तैनाती और बैरिकेडिंग व्यवस्था की समीक्षा की गई। संकरे मार्गों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और यातायात दबाव वाले स्थानों को चिन्हित कर समय से सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि श्रावण माह में मंदिरों और प्रमुख शिवालयों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल, कतार प्रबंधन और लगातार निगरानी सुनिश्चित की जाए। बारावफात जुलूस के पूरे मार्ग का दोबारा सत्यापन कर बाधाओं को हटाने और आवश्यक स्थानों पर बैरिकेडिंग कराने को कहा गया।जुलूस मार्ग और संवेदनशील स्थलों पर जिम्मेदार अधिकारियों की तैनाती के साथ जुलूस के आगे-पीछे पर्याप्त पुलिस बल लगाने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस के समन्वय से डायवर्जन और वैकल्पिक मार्ग पहले से तैयार रखने को कहा गया है। गोदौलिया, रामापुरा, रेवड़ी तालाब और ब्रॉडवे तिराहा पर यातायात पुलिस की पर्याप्त तैनाती रहेगी।ALSO READ : संस्कृत संरक्षण के साथ व्यवहारिक प्रयोग पर जोर, BHU में संस्कृत सप्ताह का शुभारंभजुलूस मार्ग से बिजली के लटके तार, निर्माण सामग्री, अतिक्रमण और सड़क पर रखी अन्य सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं। थाना प्रभारी और क्षेत्राधिकारी शांति समितियों, आयोजकों और संभ्रांत नागरिकों से लगातार समन्वय बनाए रखेंगे। आयोजकों को निर्धारित मार्ग और समय का कड़ाई से पालन कराना होगा।अफवाहों और संदिग्ध तत्वों पर रहेगी नजरपुलिस सोशल मीडिया पर भ्रामक और अफवाह फैलाने वाली पोस्ट पर तत्काल कार्रवाई करेगी। क्यूआरटी और रिजर्व फोर्स को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार रखा जाएगा। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ एंटी-ईव टीजिंग टीम को लगातार भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं।बाजारों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर फुट पेट्रोलिंग बढ़ाने, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करने और छेड़छाड़ की घटनाओं पर विशेष नजर रखने को कहा गया है। साथ ही एम्बुलेंस और फायर सर्विस के लिए आपातकालीन मार्ग हमेशा खुला रखने के निर्देश दिए गए हैं।अपर पुलिस आयुक्त शिवहरि मीना ने कहा कि सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कमिश्नरेट पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि सभी पर्व शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हों और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
संस्कृत संरक्षण के साथ व्यवहारिक प्रयोग पर जोर, BHU में संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ
संस्कृत संरक्षण के साथ व्यवहारिक प्रयोग पर जोर, BHU में संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में मंगलवार को संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ हुआ। संस्कृत भारती, काशी तथा संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, मालवीय भवन, वैदिक विज्ञान केंद्र, संस्कृत विभाग एवं श्री विश्वनाथ मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन, अध्ययन-अध्यापन के साथ ही इसे दैनिक व्यवहार और संवाद की भाषा बनाने पर जोर दिया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान-विज्ञान, सभ्यता और संस्कृति की संवाहक है। आध्यात्मिक चिंतन, दर्शन, साहित्य और ज्ञान की विभिन्न परंपराओं के विकास में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण के साथ इसके निरंतर और व्यवहारिक प्रयोग पर भी ध्यान देने की जरूरत है। संस्कृत को केवल अध्ययन का विषय न मानकर दैनिक व्यवहार और संवाद की भाषा के रूप में अपनाया जाना चाहिए। विभिन्न संकायों के विद्यार्थी संस्कृत में संवाद की पहल करें और अधिक से अधिक शिक्षक एवं विद्यार्थी इसके व्यवहार को अपनाएं तो संस्कृत को कठिन भाषा मानने की धारणा और झिझक दूर की जा सकती है।कुलपति ने कहा कि संस्कृत का अध्ययन केवल संस्कृत विषय के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों को भी भारतीय ज्ञान परंपरा की इस समृद्ध भाषा से जुड़ना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी संकायों और विद्यार्थियों से संस्कृत के व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा, “जयतु संस्कृतम्, जयतु भारतम्।”उन्होंने संस्कृत सप्ताह के दौरान लिए जाने वाले संकल्पों को केवल कार्यक्रम तक सीमित न रखकर जीवन और व्यवहार में उतारने की आवश्यकता बताई। उन्होंने संस्कृत भारती के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय में कुछ संकायों और विद्यार्थियों से संस्कृत में सामान्य बोलचाल की शुरुआत कर इसे व्यापक स्तर तक ले जाने पर जोर दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल ने की। उन्होंने उपस्थित विद्वानों, आचार्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए संस्कृत सप्ताह के आयोजन के उद्देश्य और उपयोगिता पर प्रकाश डाला।संस्कृत भारती के अखिल भारतीय शिक्षण प्रमुख डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में संस्कृत के उत्थान और संवर्धन के लिए इस प्रकार का आयोजन गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की संस्कृत के प्रति गहरी आस्था थी और संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन की उनकी भावना को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। संस्कृत को किसी एक विषय या वर्ग तक सीमित न रखकर इसके अध्ययन, अध्यापन और व्यवहारिक प्रयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की जरूरत है।ALSO READ : बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1कार्यक्रम में डॉ. जगद्गुरु परमहंस, छावनी पीठ अयोध्या, व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो. रामनारायण द्विवेदी, संस्कृत भारती के अध्यक्ष प्रो. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. सरोज कुमार पाण्डेय, श्री अशोक चौधरी और श्री अमरचन्द शुक्ल समेत अनेक आचार्य, विद्वान, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।संस्कृत सप्ताह के तहत पूरे सप्ताह संस्कृत से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनका उद्देश्य संस्कृत के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अध्ययन-अध्यापन को प्रोत्साहित करने और संस्कृत को व्यवहार की भाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को गति देना है। कार्यक्रम के अंत में संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1
बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के लॉ फैकल्टी ने वर्ष 2026 की प्रमुख राष्ट्रीय रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान कायम की है। बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026 में फैकल्टी ने देश के 10 बेस्ट वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों की श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया है। फैकल्टी का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) स्कोर 78.53 रहा। वहीं सभी लॉ संस्थानों की समग्र रैंकिंग में 1428.1 के कंपोजिट स्कोर के साथ इसे देश में 13वां स्थान मिला।फैकल्टी ने द वीक-हंसा रिसर्च सर्वे 2026 में भी देशभर में आठवीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा आउटलुक सर्वे 2026 में लॉ फैकल्टी को देश में 11वां स्थान मिला, जबकि IIRF लॉ रैंकिंग 2026 में फैकल्टी देश में 13वें और उत्तर प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही। IIRF में फैकल्टी का ओवरऑल इंडेक्स स्कोर 70.84 रहा।सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में भी बीएचयू के योगदान का उल्लेखराष्ट्रीय रैंकिंग के अलावा बीएचयू लॉ फैकल्टी के क्लिनिकल लीगल एजुकेशन और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के ऐतिहासिक योगदान को भारत के सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक रिपोर्ट में भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग द्वारा अक्टूबर 2024 में प्रकाशित “लीगल एड थ्रू लॉ स्कूल्स: ए रिपोर्ट ऑन वर्किंग ऑफ लीगल एड सेल्स इन इंडिया” में बीएचयू के योगदान का उल्लेख किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू ने 1970 के दशक की शुरुआत में भारत के शुरुआती क्लिनिकल लॉ कोर्स में से एक शुरू किया था। इसके तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में क्लिनिक आधारित कानूनी सहायता, अदालतों का दौरा और अधिवक्ताओं के साथ इंटर्नशिप जैसी व्यवस्थाओं को जोड़ा गया था।रिपोर्ट में बीएचयू के लीगल एड एंड सर्विसेज क्लिनिक की ओर से 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर क्रिमिनल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) का भी उल्लेख है। इस मामले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को कैदियों की दैनिक मजदूरी बढ़ाने और जेलों में भीड़ कम करने के लिए अतिरिक्त सुधार गृहों के निर्माण की दिशा में कदम उठाने पड़े।ALSO READ : वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूपआधुनिक सुविधाओं और शोध पर रहेगा जोरलॉ फैकल्टी के प्रमुख एवं डीन प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार सिंह ने इन उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि फैकल्टी अपनी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, अत्याधुनिक कानूनी शोध, उद्योग और न्यायपालिका के साथ साझेदारी मजबूत करने तथा छात्रों की प्रो-बोनो कानूनी सेवा पहलों को सक्रिय करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि शैक्षणिक और विकास के सभी मानकों को बेहतर बनाते हुए फैकल्टी की रैंकिंग में निरंतर सुधार का प्रयास किया जाएगा। साथ ही नैतिक मूल्यों से युक्त और विश्वस्तरीय कानूनी पेशेवर तैयार करने की दिशा में संस्थान को और मजबूत किया जाएगा।