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बीएचयू में ‘एग्री स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2026’ की शुरुआत, कृषि नवाचार पर मंथन

बीएचयू में ‘एग्री स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2026’ की शुरुआत, कृषि नवाचार पर मंथन
Mar 29, 2026, 07:08 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान में 28 और 29 मार्च 2026 को “एग्री स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2026” का आयोजन किया जा रहा है. “इनोवेटिंग एग्रीकल्चर फॉर सस्टेनेबल एंड एंटरप्रेन्योरियल फ्यूचर” थीम पर आधारित इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में देशभर से वैज्ञानिक, स्टार्टअप्स, किसान, नीति निर्माता एवं उद्योग विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं. कार्यक्रम की अध्यक्षता में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल भाषण के लिए नहीं, बल्कि संवाद, समस्याओं की समझ और समाधान खोजने में मददगार साब्त होते हैंउन्होंने विश्वविद्यालय की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि बीएचयू का दायित्व केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में सक्रिय योगदान देना भी है.


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उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के बावजूद आर्थिक प्रगति की चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए तकनीक के साथ प्रभावी बिजनेस मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही उन्होंने कृषि के साथ पशुपालन को महत्व देने, स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेशन केंद्रों को जोड़ने तथा किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही.


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कृषि क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था


इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अवनीश के. अवस्थी, सलाहकार, माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका है. उन्होंने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28 जनपदों में विश्व बैंक परियोजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने स्टार्टअप्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, रोबोटिक्स जैसी तकनीकों के माध्यम से कृषि को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है तथा किसानों को प्रशिक्षित किया जा सकता है.


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उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के योगदान की सराहना करते हुए विपणन, पैकेजिंग और ऑनलाइन बिक्री में स्टार्टअप्स की भागीदारी को आवश्यक बताया. उन्होंने कॉन्क्लेव की थीम—इनोवेशन, इन्क्यूबेशन, इन्वेस्टमेंट और स्केलेबिलिटी—को कृषि के सतत विकास के लिए आवश्यक बताया तथा स्टार्टअप उद्यमियों से सरकारी प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया.


किसानों तक पहुँचाना वैज्ञानिक ज्ञान अनावश्यक


आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि यह पहल बीएचयू, आईआईटी (बीएचयू) और अन्य संस्थानों के संयुक्त प्रयास से पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास के लिए की जा रही है. उन्होंने कृषि में नवाचार एवं वैल्यू एडिशन की अपार संभावनाओं पर बल देते हुए कहा कि तकनीक एवं वैज्ञानिक ज्ञान को सही तरीके से किसानों तक पहुँचाना आवश्यक है, उन्होंने उत्पादन के साथ-साथ प्रभावी विपणन एवं मजबूत बिजनेस मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा किसानों को उद्यमी बनाकर सफल व्यवसायी के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य करने की बात कही. कॉन्क्लेव में विभिन्न विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए. डॉ. विकास कुमार सिंह ने ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) एवं नई तकनीकों के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा स्टार्टअप्स की भूमिका कि चर्चा की.


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राकेश कुमार, वाइस प्रेसिडेंट, देहात (एग्रिटेक स्टर्टअप कम्पनी) ने कृषि स्टार्टअप मॉडल, किसानों के साथ तकनीकी जुड़ाव एवं नवाचार आधारित सेवाओं के महत्व को रेखांकित किया. मिलिंद राज — ड्रोन मैन ऑफ इंडिया, संस्थापक, रोबोज़.इन (Roboz.in) ने ड्रोन एवं रोबोटिक्स के उपयोग तथा युवाओं के लिए कृषि-तकनीक में करियर संभावनाओं पर जोर दिया. वैद्य एस. मिश्रा, आरोग्यवर्धक औषधालय ने कृषि और आयुर्वेद के परस्पर संबंध तथा गुणवत्ता आधारित उत्पादन के लिए किसान–वैद्य सहयोग की आवश्यकता बताई. प्रकाश झा ने समावेशी, टिकाऊ एवं भविष्य उन्मुख तकनीकी समाधानों के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया.


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कार्यक्रम के दौरान प्रो. यू.पी. सिंह, निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान, ने अपने संबोधन में बीएचयू की शैक्षणिक उपलब्धियों तथा कृषि तकनीकों के प्रसार के माध्यम से किसानों की उत्पादकता और आय वृद्धि में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने कृषि उत्पादों के अपव्यय और विपणन की चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उत्पादन से लेकर वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग तक सुदृढ़ बिजनेस मॉडल अपनाने का सुझाव दिया. प्रो. वी.के. चंदोला, वरिष्ठ प्रोफेसर, कृषि अभियांत्रिकी विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान के ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी समन्वय को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं. उन्होंने आईआईटी (बीएचयू) एवं बीएचयू के सहयोग से प्रस्तावित एग्री-बिजनेस पार्क की अवधारणा को “लाइटहाउस” बताते हुए कहा कि यह किसानों को प्रशिक्षण, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और नवाचार के माध्यम से नई दिशा प्रदान करेगा. प्रो. वीरेंद्र कमलवंशी, विभागाध्यक्ष, कृषि अर्थशास्त्र विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान, ने धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित करते हुए कहा कि यह मंच स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स, निवेशकों, विद्यार्थियों एवं किसानों को जोड़कर विचार-विनिमय और नवाचार को बढ़ावा देगा. उन्होंने किसानों को उद्यमिता से जोड़ने तथा उनकी आय वृद्धि के लिए ऐसे प्रयासों को आवश्यक बताया.


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इस कॉन्क्लेव के माध्यम से कृषि क्षेत्र में एग्री-स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करने, फंडिंग एवं निवेश के अवसरों को सुगम बनाने, छात्र उद्यमिता और इन्क्यूबेशन को प्रोत्साहित करने, उद्योग–शैक्षणिक–नीति समन्वय को मजबूत करने तथा कृषि में अत्याधुनिक तकनीकों के प्रदर्शन के साथ प्रिसिजन एग्रीकल्चर एवं एआई, एग्री सप्लाई चेन और मार्केट लिंकज, क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर, एग्री-फिनटेक एवं डिजिटल एग्रीकल्चर, फूड प्रोसेसिंग एवं वैल्यू एडिशन तथा ग्रामीण उद्यमिता एवं एफपीओ(FPOs) जैसे विषयों को गहन चर्चा होगी, जिससे किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का मार्ग प्रश्स्त किया जा सके.

तुलसी घाट पर पर्यावरण कार्यशाला: महिलाओं ने सीखा कार्बन फुटप्रिंट कम करने का हुनर...
तुलसी घाट पर पर्यावरण कार्यशाला: महिलाओं ने सीखा कार्बन फुटप्रिंट कम करने का हुनर...
वाराणसी: स्थानीय तुलसी घाट पर मंगलवार को संकट मोचन फाउंडेशन और ‘मदर्स फॉर मदर’ के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस जागरूकता कार्यक्रम में शहर के विभिन्न विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी करीब 50 महिलाओं ने भाग लिया.कार्यशाला को संबोधित करते हुए ‘मदर्स फॉर मदर’ की अध्यक्षा आभा मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाया जाए तो संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी. उन्होंने महिलाओं से दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया.कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने एक विशेष प्रश्नावली के माध्यम से अपने व्यक्तिगत कार्बन फुटप्रिंट का आकलन किया. विशेषज्ञों ने उन्हें ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक के कम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने जैसे उपायों की जानकारी दी. साथ ही कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए व्यावहारिक कार्ययोजना भी तैयार कराई गई.ALSO READ:गंज शहीदा मस्जिद पर नया ट्विस्ट लगी नई नोटिस, फिर रेलवे ने हटाई बढ़ा संशय...कार्यशाला में यह भी बताया गया कि ‘मदर्स फॉर मदर’ संस्था तकनीक और कौशल विकास के माध्यम से महिलाओं को हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है. संस्था के प्रयासों से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक बन रही हैं.इस अवसर पर अशोक पांडेय, गोपाल पांडेय, विकल्प दुबे सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने स्तर पर पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने की प्रतिबद्धता जताई.
 गंज शहीदा मस्जिद पर नया ट्विस्ट लगी नई नोटिस, फिर रेलवे ने हटाई बढ़ा संशय...
गंज शहीदा मस्जिद पर नया ट्विस्ट लगी नई नोटिस, फिर रेलवे ने हटाई बढ़ा संशय...
वाराणसी:काशी रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित गंज शहीदा मस्जिद को लेकर मंगलवार को एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया. मस्जिद के मुख्य द्वार पर अचानक एक नई नोटिस चस्पा कर दी गई. नोटिस में 13 जून को रेलवे प्रशासन की ओर से जारी नोटिस को प्रशासनिक कारणों से तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की बात लिखी गई थी.नोटिस लगते ही इलाके में चर्चा तेज हो गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग व मस्जिद कमेटी के सदस्य मौके पर पहुंचने लगे. स्थानीय लोगों के मुताबिक मंगलवार दोपहर एक रेलकर्मी मस्जिद के गेट पर नई नोटिस लगाकर चला गया.नई नोटिस में कहा गया था कि काशी रेलवे स्टेशन के प्रथम प्रवेश द्वार के पास स्थित मस्जिद के संबंध में 13 जून को जारी नोटिस को रेलवे प्रशासन रद्द करता है. नोटिस पर उत्तर रेलवे वाराणसी का उल्लेख भी किया गया था.जैसे ही इसकी जानकारी फैली मस्जिद के बाहर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई. दोपहर से शाम तक स्थानीय नागरिक, मस्जिद कमेटी के सदस्य और आसपास के लोग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रहे. सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि आखिर रेलवे प्रशासन ने अपना पुराना फैसला वापस क्यों लिया.हालांकि शाम करीब 5:50 बजे मामले ने नया मोड़ ले लिया. रेलवे अधिकारी आरपीएफ जवानों के साथ मौके पर पहुंचे और मस्जिद के गेट पर लगी नई नोटिस को हटवा दिया.मौके पर मौजूद रेलवे के आईडब्ल्यू काशी विनय सिंह ने बताया कि यह नई नोटिस रेलवे प्रशासन की ओर से जारी नहीं की गई थी. किसने इसे चस्पा किया इसकी जानकारी नहीं है. जानकारी मिलते ही आरपीएफ की मौजूदगी में उसे फाड़ दिया गया. उन्होंने साफ कहा कि रेलवे की ओर से पहले जारी नोटिस ही मान्य है.वहीं इस पूरे घटनाक्रम में नया दावा तब सामने आया जब नोटिस चस्पा करने वाले रेलकर्मी सुनील ने बताया कि उसने यह नई नोटिस रेलवे अधिकारियों के कहने पर लगाई थी. बाद में उन्हीं के निर्देश पर उसे फाड़कर हटा दिया गया.अब इस पूरे मामले में सवाल और संशय दोनों गहराते जा रहे हैं. आखिर नई नोटिस किसने जारी की किसके आदेश पर लगाई गई और फिर क्यों हटाई गई. देर शाम तक रेलवे प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था. जिससे पूरे घटनाक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही.
 री-नीट फर्जी परीक्षा देते हुए, बीएचयू की नर्सिंग छात्रा गिरफ्तार...
री-नीट फर्जी परीक्षा देते हुए, बीएचयू की नर्सिंग छात्रा गिरफ्तार...
वाराणसी : आईएमएस-बीएचयू (IMS BHU) की बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा पूनम कुमारी को बिहार के लखीसराय जिले में री-नीट परीक्षा में दूसरी अभ्यर्थी की जगह फर्जी परीक्षा देते हुए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया हैयह मामला बड़े सॉल्वर गिरोह का हिस्सा है, जिसमें कुल 30 लोगों को पकड़ा गया है.गिरोह में मेडिकल-नर्सिंग के 12 छात्र-छात्राएं शामिल है.पुलिस के अनुसार पूनम कुमारी झारखंड के गिरिडीह जिले के बरमसिया गांव की निवासी है. वह 2025 बैच की बीएससी नर्सिंग छात्रा है.लखीसराय के एक परीक्षा केंद्र पर मूल अभ्यर्थी मधु प्रिया की जगह फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर वह परीक्षा देने बैठी थी.गिरोह ने इस फर्जीवाड़े के लिए पूनम से 10 लाख रुपये की डील की थी, जिसमें 50 हजार रुपये एडवांस में दिए जा चुके थे. बाकी रकम रिजल्ट और कॉलेज एलॉटमेंट के बाद देने की बात हुई था. गिरोह में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के छात्र-छात्राएं शामिल हैं, जिनमें एम्स के छात्र भी बताए जा रहे हैं।इस घटना से बीएचयू परिसर में हड़कंप मच गया है. आईएमएस-बीएचयू के निदेशक ब्रिगेडियर एसएन संखवार ने कहा, “अभी हमें पूरी जानकारी नहीं मिली है.लखीसराय पुलिस से संपर्क नहीं हुआ है. यदि हमारी छात्रा इसमें शामिल पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.छात्रा पर पहले भी था केसजानकारी के अनुसार पूनम कुमारी पर यह पहला मामला नहीं है. वर्ष 2021 में भी बीएचयू के दंत संकाय (Dental Faculty) की एक छात्रा को नीट परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोप में सारनाथ के सेंट फ्रांसिस जेवियर स्कूल से गिरफ्तार किया गया था.उस समय भी अभ्यर्थी की मां को भी पकड़ा गया था.ALSO READ : लखनऊ अग्निकांड के बाद वीडीए का एक्शन, नियमों के उल्लंघन पर कई कोचिंग सेंटर सील...पुलिस जांच में जुटीलखीसराय पुलिस की टीम सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है. प्रेरणा कुमार (पुलिस अधिकारी) ने कहा, “हम पूरे गिरोह की जांच कर रहे हैं. बायोमेट्रिक कर्मियों की मिली भगत की भी छानबीन की जा रही है.