BHU में सर्वाइकल कैंसर पर CME कार्यशाला, शीघ्र पहचान और विशेषज्ञ कोल्पोस्कोपी पर जोर.

वाराणसी. काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आयोजित सीएमई-सह-कार्यशाला ‘द शार्प आई’ में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए समय रहते स्क्रीनिंग, शीघ्र पहचान और विशेषज्ञ कोल्पोस्कोपी की जरूरत पर जोर दिया। 9 अगस्त को के.एन. उडुपा सभागार में आयोजित कार्यशाला में देशभर से आए स्त्री रोग विशेषज्ञों और ऑन्कोलॉजिस्ट ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा की।
कार्यशाला का आयोजन आईएमएस, बीएचयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया (AGOI) के सहयोग से किया। इसका उद्देश्य महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ चिकित्सकों को इसकी स्क्रीनिंग और उपचार की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन आईएमएस, बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन सांखवार ने किया। उन्होंने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में एचपीवी टीकाकरण और जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने महिलाओं तक स्क्रीनिंग और रोकथाम संबंधी जानकारी पहुंचाने के लिए विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
आयोजन अध्यक्ष एवं प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता राय ने एचपीवी संक्रमण और सर्वाइकल कैंसर के शरीर पर प्रभाव से संबंधित जानकारी साझा की। वहीं केजीएमयू लखनऊ की प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट प्रो. निशा सिंह और एमएलएनसी प्रयागराज की प्रो. अमृता चौरसिया ने कैंसर-पूर्व घावों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न शल्य प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया।
ALSO READ : दिवंगत रेलकर्मी के परिवार को मिला एक करोड़ रुपये का बीमा लाभ, डीआरएम ने पत्नी को सौंपा चेक.
मुंबई की स्त्री-रोग ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रिया गणेश ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और शुरुआती स्क्रीनिंग की विधियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कार्यशाला में कोल्पोस्कोपी का लाइव प्रदर्शन भी किया।
कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण कोल्पोस्कोपी का व्यावहारिक प्रशिक्षण और थर्मल एब्लेशन, क्रायोएब्लेशन तथा एलईईपी जैसी विभिन्न एब्लेटिव तकनीकों का लाइव ऑपरेशन थिएटर प्रसारण रहा। इससे प्रतिभागियों को कैंसर-पूर्व घावों की पहचान और उपचार की व्यावहारिक जानकारी मिली।
कार्यक्रम में एसजीपीजीआई लखनऊ के डॉ. अमृत गुप्ता, एसएनएमसी आगरा की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह, आईएमएस बीएचयू की प्रो. अंजलि रानी और प्रो. ममता समेत देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। वाराणसी के स्त्री रोग विशेषज्ञों, ऑन्कोलॉजिस्टों, वरिष्ठ रेजिडेंट्स, स्नातकोत्तर और स्नातक विद्यार्थियों ने भी कार्यशाला में सहभागिता की।
विशेषज्ञों ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर एक रोकथाम योग्य कैंसर है, लेकिन इसके लिए समय पर स्क्रीनिंग और कैंसर-पूर्व अवस्था में बीमारी की पहचान बेहद जरूरी है। कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग और समय पर उपचार सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक लक्ष्य की दिशा में काम करने का संकल्प भी लिया गया, जिसके तहत 90 प्रतिशत लड़कियों का एचपीवी टीकाकरण, 70 प्रतिशत महिलाओं की स्क्रीनिंग और 90 प्रतिशत मरीजों का उपचार सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यशाला का संदेश स्पष्ट रहा—समय पर जांच, सही पहचान और उचित उपचार से सर्वाइकल कैंसर से होने वाली बीमारी और मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है। विशेषज्ञों ने सामूहिक प्रयासों के जरिए भारत को ‘सर्वाइकल कैंसर-मुक्त भारत’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।



