बीएचयू में प्रमोशन सवालों के घेरे में, एचसी के फैसले से किसे नफा और नुकसान

वाराणसी- बीएचयू में पूर्व कुलपति के कार्यकाल में निए गए निर्णय सवालों के घेरे में आ गए हैं. इसकी बानगी उस समय देखने को मिली जब भारतनाट्यम एक्सपर्ट द्वारा कथक नृत्यांगना का इंटरव्यू लेकर प्रमोशन देने के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. उनके चयनकर्ताओं में तीनों सदस्यों को क्वालिफिकेशन के मामले में उपयुक्त नहीं माना है. एग्जीक्यूटिव काउंसिल के फैसले को भी निरस्त कर दिया गया है. अब बीएचयू के पास दो ही रास्ते बचे हैं.

पहला बीएचयू की ओर से सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती दी जाए या फिर आगामी एग्जीक्यूटिव काउंसिल में प्रोफेसर के प्रमोशन को रद्द किया जा सकता है. सुविधाएं और लाभ खत्म कर दिए जाएंगे. हाइकोर्ट ने बीएचयू को दो महीने का समय दिया है. वहीं, ये भी सवाल यह उठ रहा है कि पिछले साल हुई ईसी ने ही चयन समिति के फैसले को वैधता दे दी गई थी. इस फैसले के बाद बीएचयू के छात्रों और शोधार्थियों ने सवाल उठाते हुए कहा है कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं.
नहीं हो पाया ईसी
पूर्व कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन के कार्यकाल के दौरान लंबे समय तक विश्वविद्यालय में कार्यकारी परिषद (ईसी) का गठन नहीं हो पाया था. इस शून्यता के बीच, कुलपति ने बीएचयू अधिनियम की धारा 7 सी (5) के तहत अपनी 'आपातकालीन शक्तियों' का प्रयोग करते हुए कई अहम निर्णय लिए. करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत 450 से अधिक एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों पर प्रमोशन दिए गए. विभिन्न संस्थानों के निदेशकों की नियुक्ति और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने का कार्य भी इसी शक्ति के माध्यम से किया गया. कई विभागों और संकायों में 350 से अधिक नई नियुक्तियां और जिम्मेदारी का हस्तांतरण बिना ईसी की पूर्व मंजूरी के हुआ.

हैरानी की बात यह है कि जब बाद में नई कार्यकारी परिषद का गठन हुआ, तो उसने पूर्व कुलपति द्वारा आपात शक्तियों के तहत लिए गए अधिकांश फैसलों पर अपनी मुहर लगा दी. चयन समितियों में केवल 'संबंधित विषय' के ही विशेषज्ञों को रखना अनिवार्य होगा. जेनेरिक विशेषज्ञों (जैसे संगीत के बदले किसी अन्य कला के विशेषज्ञ) के माध्यम से की गई नियुक्तियां अब खारिज की जा सकती हैं. हालांकि, जिन शिक्षकों की पदोन्नति निरस्त होगी, वे अपने पक्ष में कानूनी राहत या यथास्थिति बनाए रखने की अपील कर सकते हैं. इसके अलावा यूजीसी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए आपात शक्तियों के उपयोग पर नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी कर सकता है.



