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बीएचयू के वैज्ञानिकों ने हासिल की एक और बड़ी उपलब्धि, फंगस के एक नए वंश की खोज...

बीएचयू के वैज्ञानिकों ने हासिल की एक और बड़ी उपलब्धि, फंगस के एक नए वंश  की खोज...
Jul 11, 2026, 06:27 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : बीएचयू के वैज्ञानिकों के नाम एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. इस बार विश्‍वविद्यालय के बॉटनी विभाग के शोधकर्ताओं ने पौधों में बीमारी फैलाने वाले फंगस (फाइटोपैथोजेनिक फंगस) के एक नए वंश‘हायलोकमलोमाइसीज़' की खोज की है. यह खोज फंगस के वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में एक महत्वपूर्ण योगदान है और भारत की समृद्ध, लेकिन अभी भी काफी हद तक अनखोजी फंगल जैव-विविधता को उजागर करती है.

इस शोध का नेतृत्व बीएचयू के बॉटनी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र सिंह ने किया. उनकी टीम में सौम्यदीप राजवार, संजय यादव, संजीत कुमार वर्मा और अर्चना सिंह शामिल थे.

इस संयुक्त अध्ययन में नेशनल फंगल कल्चर कलेक्शन ऑफ इंडिया, आगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे के वैज्ञानिक डॉ. पारस नाथ सिंह; चीन के प्रोफेसर सामंथा; दीनदयाल उपाध्‍याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी की डॉ. गार्गी सिंह और केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. शंभू कुमार भी शामिल थे.


ऐसे हुई नई प्रजाति की पहचान


नई पहचानी गई फंगस की खोज उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित चंद्रप्रभा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में 'कैसिया फिस्टुला' (जिसे आमतौर पर अमलतास या गोल्डन शावर ट्री कहा जाता है) को प्रभावित करने वाली पत्तियों पर धब्बे (लीफ स्पॉट) की एक उभरती हुई बीमारी के साथ की गई थी. इस प्रजाति की पहचान मॉर्फोलॉजिकल (संरचनात्मक) और कल्चरल अध्ययन, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और मल्टीजीन मॉलिक्यूलर फाइलोजेनेटिक विश्लेषण जैसे व्यापक तरीकों से की गई. फाइलोजेनेटिक नतीजों से पता चला कि यह फंगस एक अलग विकासवादी वंश (इवोल्यूशनरी लीनिएज) बनाता है, जो पहले से ज्ञात वंशजों से बिल्कुल अलग है, इसलिए इसे एक नए जीनस के रूप में मान्यता देना सही है. ‘हायलोकमलोमाइसीज़' नाम में ग्रीक उपसर्ग "Hyalo-" (हयालो-) का इस्तेमाल किया गया है, जिसका अर्थ है "कांच" या "पारदर्शी" (यह फंगस की पारदर्शी संरचनाओं को दर्शाता है). इसके साथ "-kamalomyces" (-कमलोमाइसीज़) जोड़ा गया है, जो गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कमल के सम्मान में चुना गया है. वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले माइकोलॉजिस्ट (कवक विशेषज्ञ) हैं, जिन्होंने भारत की फंगल जैव-विविधता, खासकर 'सर्कोस्पोरोइड' (Cercosporoid) फंगस पर अग्रणी काम किया है और शोधकर्ताओं की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है. यह खोज 10 जुलाई, 2026 को प्रतिष्ठित Q1 अंतरराष्ट्रीय जर्नल "माइकोलॉजिकल प्रोग्रेस" (Mycological Progress) में प्रकाशित हुई है. यह जर्नल जर्मनी में 'जर्मन माइकोलॉजिकल सोसाइटी' के तहत प्रकाशित होता है.


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खोज के व्‍यापक महत्‍व


लंबे समय तक संरक्षण और भविष्य के शोध को सुनिश्चित करने के लिए, इस फंगस के जीवित कल्चर को नेशनल फंगल कल्चर कलेक्शन ऑफ इंडिया (NFCCI), पुणे में संरक्षित किया गया है. डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि कैसिया फिस्टुला, जिसे आम तौर पर अमलतास के नाम से जाना जाता है, आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसे परंपरागत रूप से "अरगवधा" कहा जाता है, जिसका अर्थ है "रोगनाशक".

पौधे के विभिन्न भागों - जिनमें जड़ें, छाल, पत्तियां, फूल और फल का गूदा शामिल हैं - का उपयोग लंबे समय से रेचक, सूजनरोधी, एंटीऑक्सीडेंट, रोगाणुरोधी, यकृत-सुरक्षात्मक और श्वसन स्वास्थ्य लाभों के लिए किया जाता रहा है. इस खोज के व्यापक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. सिंह ने जोर दिया कि भारत अपने विविध पारिस्थितिक तंत्रों के कारण विश्व के प्रमुख जैव विविधता केंद्रों में से एक और कवक विविधता का वैश्विक केंद्र है. ये आवास हजारों कवक प्रजातियों का समर्थन करते हैं जो पोषक तत्व चक्रण, पारिस्थितिक तंत्र स्थिरता, कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और नए जैवसक्रिय यौगिकों की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
नशामुक्त भारत के संदेश के साथ BHU में निकली ‘संडे ऑन साइकिल’ रैली.
वाराणसी: नशामुक्त भारत अभियान के तहत रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में ‘संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के जरिए युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त भारत का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।मालवीय भवन प्रांगण से कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल रैली को रवाना किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, NSS स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा न केवल स्वयं नशे से बचें, बल्कि अपने आसपास के लोगों और समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।also read: विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलकसाइकिल रैली में शामिल प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत का संदेश लोगों तक पहुंचाया और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। रैली के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम का समन्वयन काशी हिंदू विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीना ने किया। आयोजन में विश्वविद्यालय परिवार के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
विश्व आदिवासी दिवस पर बरेका में निकली भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
वाराणसी: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आदिवासी परिवार, बरेका के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता की आकर्षक झलक देखने को मिली।शाम चार बजे बरेका सेंट जॉन स्कूल, गेट संख्या-2 से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कुंदन तिराहा और सूर्य सरोवर मार्ग होते हुए इंटर कॉलेज चौराहे पहुंची। यहां भगवान गौतम बुद्ध, जननायक बिरसा मुंडा और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद शोभायात्रा पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी पहुंचकर संपन्न हुई।शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए। रंग-बिरंगे परिधानों के साथ पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। रास्ते में स्थानीय लोगों ने भी शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।पश्चिमी संस्थान, जलालीपट्टी में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में आदिवासी समाज की विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वक्ताओं ने आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपराओं और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।also read: श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपीलकार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजन में बरेका के अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिजन, आदिवासी महिला समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।इस अवसर पर सहायक कार्मिक अधिकारी (कर्मशाला) पीयूष मिंज, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार, आरपीएफ इंस्पेक्टर प्रमोद लकड़ा, पूर्व संयुक्त सचिव बरेका अमर सिंह, कालू मांझी सहित आदिवासी परिवार बरेका के सुदर्शन उरांव, दिलीप तिर्की, सुचित कुजूर, अजय कुमार तिर्की, संजीवन तिर्की और अजय तिग्गा मौजूद रहे। वहीं आदिवासी महिला समिति की सपना टोप्पो, तारा मैरी मिंज, प्रेमा लिली टोप्पो, अनुपमा और बंदना बारला सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
श्रावण में भास्करा पोखरा पर पुलिस अलर्ट, गहरे पानी में जाने से बचने की अपील
वाराणसी: श्रावण माह में रोहनिया क्षेत्र स्थित भास्करा पोखरा में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए पुलिस की ओर से लगातार जागरूक किया जा रहा है।एसीपी रोहनिया अवधेश विश्वकर्मा ने भास्करा पोखरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे निर्धारित और सुरक्षित स्थान पर ही स्नान करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु किसी भी स्थिति में गहरे पानी में न जाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी न करें।also read: आँसुओं, आक्रोश के बाद खुले आसमान के नीचे दालमंडीएसीपी ने खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें और स्नान के दौरान उन पर लगातार नजर बनाए रखें। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।पुलिस प्रशासन की ओर से श्रावण माह के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें और धार्मिक आस्था के साथ अपनी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक सहयोग और सतर्कता से ही श्रावण माह के आयोजनों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।