अनुसंधान नैतिकता पर सख्त हुआ बीएचयू, निगरानी तंत्र विकसित करने के लिए गठित की उच्चस्तरीय समिति

वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने अनुसंधान नैतिकता को मजबूत करने और शोध कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने अनुसंधान नैतिकता की निगरानी और उसे प्रोत्साहित करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति विश्वविद्यालय में प्रभावी संस्थागत तंत्र विकसित करने के लिए अपनी सिफारिशें देगी।
समिति को उन मामलों की भी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनमें विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों द्वारा लिखित या सह-लेखित शोध-पत्र अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं द्वारा वापस (रिट्रैक्ट) लिए गए हैं। बीएचयू प्रशासन ने ऐसे मामलों में संबंधित संकाय सदस्यों से विस्तृत जानकारी मांगी है। समिति तथ्यों की जांच कर आवश्यक सुझाव भी प्रस्तुत करेगी।
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसा तंत्र विकसित करना चाहता है, जो केवल अनुसंधान नैतिकता को बढ़ावा ही न दे, बल्कि उसे संस्थागत रूप से मजबूत भी बनाए। उन्होंने कहा कि शोध कार्यों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता की नियमित निगरानी आवश्यक है तथा प्रत्येक विभाग को अपने शिक्षकों और शोधार्थियों के प्रकाशित शोध की गुणवत्ता का संरक्षक बनना चाहिए।
समिति की अध्यक्षता जन्तु विज्ञान विभाग के विशिष्ट आचार्य प्रो. राजीव रमण करेंगे। समिति में वनस्पति विज्ञान विभाग की पूर्व आचार्य प्रो. मधूलिका अग्रवाल, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की पूर्व आचार्या प्रो. विभा त्रिपाठी, चिकित्सा विज्ञान संस्थान के डीन रिसर्च प्रो. मनोज पाण्डेय तथा विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चयन प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. भास्कर भट्टाचार्य सदस्य सचिव के रूप में शामिल किए गए हैं।
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विश्वविद्यालय का मानना है कि इस पहल से अनुसंधान में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता को बढ़ावा मिलेगा तथा भविष्य में शोध कार्यों की विश्वसनीयता और अधिक सुदृढ़ होगी।



