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बिहार में एनडीए का दबदबा, कांग्रेस का पुनर्जन्म?

बिहार में एनडीए का दबदबा, कांग्रेस का पुनर्जन्म?
Nov 16, 2025, 09:33 AM
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Posted By Gaandiv

बिहार में एनडीए का दबदबा, कांग्रेस का पुनर्जन्म?

202 सीटें जीतकर एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने बिहार में सरकार बनाने का स्पष्ट जनादेश हासिल कर लिया. भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) की जोड़ी ने अपेक्षित से अधिक प्रदर्शन करते हुए सत्ता पर पुनः कब्ज़ा किया है. एनडीए की इस ‘सुनामी’ में विपक्षी महागठबंधन बुरी तरह पिछड़ गया. भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, जबकि नीतीश कुमार की जेडीयू को 85 सीटें मिलीं.

Narendra Modi


वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन को भारी पराजय झेलनी पड़ी. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी अपने व्यापक अभियान के बावजूद कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाई और खाता तक नहीं खोल सकी.


बिहार चुनाव 2025 सीटों का पूरा लेखा-जोखा

पार्टीजीती सीटें


भारतीय जनता पार्टी (BJP)89
जनता दल (यूनाइटेड) – JD(U)85
राष्ट्रीय जनता दल (RJD)25
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) – LJPRV19
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)6


कांग्रेस का प्रदर्शन: संघर्ष जारी पर उम्मीद बरकरार

कांग्रेस इस बार 60 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 6 पर जीत दर्ज कर सकी. उसका कुल वोट शेयर 8.71 प्रतिशत रहा, जो 2020 के 9.6 प्रतिशत से थोड़ा कम है. पिछली बार पार्टी ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 19 सीटें जीती थीं.

बिहार में लंबे समय से कांग्रेस सत्ता से दूर रही है. 2015 में 27 सीटें जीतने वाली पार्टी 2010 में केवल 4 सीटों पर सिमट गई थी. इस बार का प्रदर्शन निश्चित रूप से अपेक्षा से कमजोर रहा, लेकिन विशेषज्ञ इसे बिहार की जटिल सामाजिक संरचना और संगठनात्मक कमज़ोरी से जोड़कर देख रहे हैं.

Congress

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विश्लेषकों की राय और नेताओं की प्रतिक्रियाएं

परिणामों के बाद कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए. प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, “यह चुनाव बिहार की जनता बनाम चुनाव आयोग था.” वहीं, दिग्विजय सिंह ने फ़र्ज़ी मतदाता सूचियों और ईवीएम को लेकर शंका जताई. भूपिंदर हुड्डा ने भी माना कि रैलियों की भीड़ कुछ और संकेत दे रही थी, लेकिन नतीजे अप्रत्याशित निकले.


राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन संगठनात्मक ढांचे की कमी, सीमित सामाजिक आधार और गठबंधन में तालमेल की कमजोरी की वजह से हुआ.


काँग्रेस से चूक कहाँ हुई?

राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा के बाद उम्मीद थी कि कांग्रेस इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगी. राहुल गांधी की जनसंवाद यात्राओं ने जनता में उनकी छवि को मज़बूत किया, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का ज़मीनी संपर्क कमजोर रहा. अधिकांश वरिष्ठ नेता चार्टर्ड विमानों से सभाएं करने आए और वापस लौट गए, जिससे स्थानीय नेतृत्व और जनता के बीच ठोस जुड़ाव नहीं बन पाया.

Vote Adhikar Yatra


कांग्रेस एक वैचारिक पार्टी है, पर बिहार की राजनीति सामाजिक और जातिगत समीकरणों पर अधिक निर्भर है. राहुल और प्रियंका गांधी के अलावा पार्टी में ऐसा कोई नेता नहीं दिखता जो बिहार में व्यापक जनाधार पैदा कर सके.


वहीं दूसरी तरफ़ एनडीए गठबंधन ने चुनाव की शुरुआत के दिनों से ही बिहार में लालू यादव के शासनकाल के दौरान रहे कथित ‘जंगलराज’ को अपने नैरेटिव का आधार बनाए रखा.


काँग्रेस के पास से बिहार के मुद्दे गायब थे, उनके ज्यादातर मुद्दे ‘वोट चोरी, धर्म और अंबानी/अदानी से जुड़े हुए थे’. ऐसे में जनता का उनसे कनेक्ट कर पाना बेहद मुश्किल था, जिसे हम एक कारण मान सकते है.

Rahul Gandhi


चुनावी रणनीति में एनडीए की बढ़त

एनडीए ने चुनाव प्रचार में लालू यादव के शासनकाल के दौरान रहे कथित ‘जंगलराज’ को अपने नैरेटिव का केंद्र बनाया. उसने अपने शासन की खामियों को चर्चा से दूर रखकर विरोधियों को रक्षात्मक स्थिति में रखा. वहीं, महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी और आपसी अविश्वास स्थिति को और बिगाड़ता गया.


एनडीए गठबंधन की सबसे कामयाब रणनीति यह रही कि उन्होंने अपने शासनकाल की कमियों की तरफ़ ध्यान ही नहीं जाने दिया ना ही उसे चर्चा में आने दिया बल्कि कभी लालू के ज़माने को सुर्ख़ियों में रखा और चर्चा भी इसके ही इर्द-गिर्द रही.

बिहार चुनाव में एक तरफ़ एनडीए नए दलों को जोड़कर मज़बूत हो रहा था तो दूसरी तरफ़ महागठबंधन की प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल में तालमेल और विश्वास की कमी दिखने लगी थी.


कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत वाली प्रमुख सीटें

कांग्रेस के छह विजयी उम्मीदवारों ने स्थानीय स्तर पर मुकाबला जीतने में सफलता पाई.

  1. अभिषेक रंजन (चनपटिया) – भाजपा के उमाकांत सिंह को 602 वोटों से हराया.
  2. मनोज बिश्वास (फ़ोर्ब्सगंज) – विद्यासागर केशरी को 221 वोटों से हराया.
  3. मोहम्मद कमरुल (किशनगंज) – स्वीटी सिंह को 12,794 वोटों से पराजित किया.
  4. सुरेंद्र प्रसाद (वाल्मीकि नगर) – अपनी सीट सुरक्षित रखी.
  5. आबिदुर रहमान (अररिया) – फिर से जीत दर्ज की.
  6. मनोहर प्रसाद सिंह – शंभू कुमार सुमन को 15,000 से अधिक मतों से पराजित किया.


Election

संघर्ष से पुनर्जागरण की ओर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भले ही कांग्रेस को सीमित सफलता मिली हो, लेकिन इस चुनाव ने उसकी वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक पुनर्गठन की दिशा को स्पष्ट किया है. सीमित संसाधनों और कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी कांग्रेस ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. राहुल गांधी और पार्टी कार्यकर्ताओं का संघर्ष यह संकेत देता है कि यह केवल हार नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए पुनर्जागरण की शुरुआत है.


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वाराणसी के घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा की पत्नी का पिंडदान, छोटे बेटे ने निभाई धार्मिक रस्म
वाराणसी के घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा की पत्नी का पिंडदान, छोटे बेटे ने निभाई धार्मिक रस्म
वाराणसी : पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा की पत्नी चेनम्मा देवेगौड़ा के निधन के बाद बुधवार को वाराणसी में उनके छोटे बेटे एच. डी. रमेश गौड़ा ने गंगा घाट पर विधि-विधान से पिंडदान किया. चेनम्मा देवेगौड़ा का 18 जुलाई को बेंगलुरु में निधन हुआ था.मां की आत्मा की शांति के लिए एच. डी. रमेश गौड़ा ने वाराणसी के पवित्र घाट पर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए. इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान और अन्य धार्मिक रस्में पूरी की गईं.चेनम्मा देवेगौड़ा के बड़े बेटे एच. डी. कुमारस्वामी वर्तमान में केंद्र सरकार में भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री हैं. हालांकि, पिंडदान के लिए वाराणसी में उनके छोटे बेटे एच. डी. रमेश गौड़ा पहुंचे और उन्होंने ही धार्मिक रस्में पूरी कीं.इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर के पूर्व राजनीतिक सचिव रहे एच. एन. शर्मा भी मौजूद रहे। पिंडदान की रस्म पूरी होने के बाद एच. डी. रमेश गौड़ा और उनके साथ आए लोगों ने काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया.उन्होंने बाबा विश्वनाथ से दिवंगत चेनम्मा देवेगौड़ा की आत्मा की शांति तथा परिवार के सुख-शांति की कामना की। वाराणसी के घाट पर संपन्न हुए इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान परिवार की आस्था और परंपराओं के प्रति समर्पण देखने को मिला.पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा की पत्नी चेनम्मा देवेगौड़ा के निधन के बाद बुधवार को वाराणसी में उनके छोटे बेटे एच. डी. रमेश गौड़ा ने गंगा घाट पर विधि-विधान से पिंडदान किया। चेनम्मा देवेगौड़ा का 18 जुलाई को बेंगलुरु में निधन हुआ था.मां की आत्मा की शांति के लिए एच. डी. रमेश गौड़ा ने वाराणसी के पवित्र घाट पर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान और अन्य धार्मिक रस्में पूरी की गईं.चेनम्मा देवेगौड़ा के बड़े बेटे एच. डी. कुमारस्वामी वर्तमान में केंद्र सरकार में भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री हैं। हालांकि, पिंडदान के लिए वाराणसी में उनके छोटे बेटे एच. डी. रमेश गौड़ा पहुंचे और उन्होंने ही धार्मिक रस्में पूरी की.ALSO READ :राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान, राष्ट्र प्रेम एवं देशभक्ति की बुनियाद को मजबूत करें युवा : प्रो. बिहारी लाल शर्माइस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर के पूर्व राजनीतिक सचिव रहे एच. एन. शर्मा भी मौजूद रहे। पिंडदान की रस्म पूरी होने के बाद एच. डी. रमेश गौड़ा और उनके साथ आए लोगों ने काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया .उन्होंने बाबा विश्वनाथ से दिवंगत चेनम्मा देवेगौड़ा की आत्मा की शांति तथा परिवार के सुख-शांति की कामना की। वाराणसी के घाट पर संपन्न हुए इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान परिवार की आस्था और परंपराओं के प्रति समर्पण देखने को मिला.
राष्ट्रीय ध्वज  के प्रति सम्मान, राष्ट्र प्रेम  एवं देशभक्ति की बुनियाद को मजबूत करें युवा : प्रो. बिहारी लाल शर्मा
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वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में बुधवार को तिरंगा यात्रा निकाली गई. जिसका उदेश्य समाज में देशभक्ति की बुनियाद मजबूत होगी, यह भाव लेकर सभी लोग एक साथ जागरूकता के साथ इस पहल में भाग लिए, कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के नेतृत्व में आज अपराह्न 1:00बजे ऐतिहासिक मुख्य भवन से एक बड़े जुलूस के साथ प्रत्येक हाथ में तिरंगा झंडा लेकर "हर घर तिरंगा" यात्रा अभियान लहुराबीर चौराहे पर स्थापित महान क्रांतिकारी अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भारत माता की जय उद्घोष के साथ विश्वविद्यालय परिसर मुख्य भवन के समक्ष सम्पन्न हो गयी.प्रो. शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता का 79 वां वर्ष पूर्ण होने तथा 80 वां वर्ष प्रारम्भ होने पर (स्वतंत्रता दिवस) राष्ट्रीय पर्व अत्यन्त गौरव के साथ मनाये जाने का अवसर है. राष्ट्र गौरव के प्रतीक तिरंगा को लगाकर बहुत धूमधाम से इस महापर्व का अभिनंदन करें. "हर घर तिरंगा" अभियान की अपील आज से प्रारम्भ है, सभी आवासों, इमारतों एवं देवालयों पर भी राष्ट्र के गौरव के प्रतीक तिरंगा को लगाकर बहुत धूमधाम से इस महापर्व का स्वागत करें.नवीन पीढ़ी के अन्दर त्याग, समर्पण और श्रद्धा का अलख जगाएं और आने वाली पीढ़ियों को तिरंगे के महत्व और प्रभाव के बारे में विस्तार से बताएं, इससे उनमें आत्मविश्वास, त्याग, समर्पण और श्रद्धा की भावना जागृत होगी। राष्ट्र भाव और आदर का प्रस्फुटन होगा. आगे वही बच्चे राष्ट्र के भविष्य हैं.राष्ट्रीय ध्वज गौरव और समृद्धि एवं सम्पूर्ण प्रभुसत्ता सम्पन्न राष्ट्र होने का सन्देश देता है. हम विश्वविद्यालय परिवार, संस्कृत समाज एवं देश के सभी जिम्मेदार नागरिकों से अपील करते हैं कि आज से हम "हर घर तिरंगा" अभियान चलाकर आत्मिक भाव से अपने- अपने घरों में तिरंगा फहराकर, अपने देश के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण व राष्ट्रवाद का भाव जागृत करें.ALSO READ : शिकागो में तैयार होगा भारत काे एआई लीडर बनाने का रोडमैप, आईआईटी बीएचयू के पूर्व छात्र एक मंच पर होंगेउक्त यात्रा के दौरान विश्वविद्यालय परिवार के सभी सम्मानित प्रो जितेन्द्र कुमार,प्रो सुधाकर मिश्र,प्रो हीरक कान्ति चक्रवर्ती, प्रो विधु द्विवेदी, प्रो शैलेष कुमार मिश्र, प्रो महेन्द्र पाण्डेय, ,प्रो अमित कुमार शुक्ल, प्रो दिनेश कुमार गर्ग, प्रो विजय कुमार पाण्डेय समेत छात्र एवं कर्मचारी उपस्थित थे.
वाराणसी में चलती बाइक में लगी आग, सड़क पर लगा लंबा जाम
वाराणसी में चलती बाइक में लगी आग, सड़क पर लगा लंबा जाम
वाराणसी : कैंट थाना क्षेत्र के अर्दली बाजार इलाके में बुधवार दोपहर एक चलती बाइक में अचानक आग लगने से अफरा तफरी मच गई. देखते ही देखते पूरी बाइक जलकर राख हो गई. इस घटना के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया, हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई. फायर संयंत्र की सहायता से आग पर काबू पाया गया. आग बुझने तक बाइक पूरी तरह जल चुकी थी. इसके बाद पुलिस ने जाम खुलवाकर यातायात सुचारू कराया.नारायणपुर पुराना भट्ठा सिंधोरा रोड, शिवपुर के निवासी रवि प्रजापति ने बताया कि वे मकानों में खिड़की-दरवाजे लगाने का काम करते हैं. बुधवार को वे काम के सिलसिले में महावीर मंदिर की ओर जा रहे थे. इसी बीच दोपहर लगभग 1 बजे उनकी बाइक अचानक गर्म होकर बंद हो गई.रवि प्रजापति ने जब बाइक को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की, तो उसमें अचानक आग लग गई. आग तेजी से फैली और पूरी बाइक को अपनी चपेट में ले लिया. उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी और आसपास के लोगों से मदद मांगी. इलाकाई लोगों ने बाल्टी के पानी, बालू और दुकान में रखे फायर संयंत्र की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग और भयावह होती गई.ALSO READ : शिकागो में तैयार होगा भारत काे एआई लीडर बनाने का रोडमैप, आईआईटी बीएचयू के पूर्व छात्र एक मंच पर होंगेबीच सड़क पर बाइक में आग लगने से दोनों तरफ लंबा जाम लग गया. सूचना के बाद कैंट थाने की महिला सब इंस्पेक्टर आरती गौड़ मौके पर पहुंचीं. उन्होंने तत्काल फायर सर्विस टीम को सूचित किया और इलाकाई लोगों के साथ मिलकर फायर संयंत्र की सहायता से आग पर काबू पाया. इसके बाद पुलिस ने जाम खुलवाकर यातायात सामान्य कराया. इस दौरान मौके पर अफरा तफरी की स्थिति बनी रही.