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वाराणसी के बौलिया तिराहे पर 100 मकानों पर बुल्‍डोजर कार्रवाई, सामने आई यह वजह

वाराणसी के बौलिया तिराहे पर 100 मकानों पर बुल्‍डोजर कार्रवाई, सामने आई यह वजह
Apr 16, 2026, 09:01 AM
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Posted By Preeti Kumari

Bulldozer action on 100 houses at Bauliya Tiraha in Varanasi, this reason came to light


वाराणसी: लहरतारा-बौलिया तिराहे पर गुरुवार की सुबह पीडब्‍लूडी ने ध्वस्तीकरण अभियान चलाकर करीब 100 मकानों को गिराना शुरू कर दिया. इस बुल्‍डोजर कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया. ये कार्रवाई 6 लेन सड़क निर्माण परियोजना के लिए की जा रही है. प्रशासन के अनुसार भवन स्वामियों को करीब एक साल पहले ही मकान खाली करने का नोटिस दिया गया था. पीडब्‍लूडी अधिकारियों का कहना है कि जिन जमीनों पर मकान बने थे, वे वन एवं सरकारी भूमि की श्रेणी में आती हैं. पहले मकानों पर लाल निशान लगाकर अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी गई थी. समय सीमा पूरी होने के बाद विभाग ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की.


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सड़क परियोजना का हिस्सा


प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह अभियान मोहनसराय बाईपास से मुगलसराय तक प्रस्तावित 31 किलोमीटर लंबी 6 लेन सड़क परियोजना का हिस्सा है. मोहनसराय से बौलिया तक सड़क निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि आगे का काम आबादी क्षेत्र में अटका था. इस परियोजना के लिए करीब 197.40 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं.


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बौलिया तिराहे के आगे घनी आबादी के कारण जनवरी 2025 से निर्माण कार्य रुका था. सर्वे के बाद करीब 100 मकानों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए गए थे. जुलाई 2025 से लगातार सार्वजनिक घोषणाएं भी कराई जा रही थीं. ध्वस्तीकरण को लेकर 29 जुलाई 2025 को सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सीएम योगी आदित्‍य नाथ को पत्र लिखकर कार्रवाई रोकने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने तय कार्यक्रम के तहत अभियान शुरू कर दिया. अचानक हुई कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी मच गई. कई परिवारों को जल्दबाजी में घर खाली करना पड़ा, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा.


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बीएचयू में प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर  कार्यशाला आरंभ, छात्र टकसाल तकनीक से होंगे रूबरू
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वाराणसी : बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में गुरुवार को "भारतीय ज्ञान परम्परा (IKS) के परिप्रेक्ष्य में प्राचीन भारतीय मुद्राएँः स्रोत, लिपि एवं टकसाल तकनीक" विषय पर आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया. कला संकाय के प्रेमचंद सभागार में यह कार्यशाला महान इतिहासकार एवं मुद्राविद् स्वर्गीय. ए. के. नारायण की जन्मशती के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है.कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत दीप प्रज्वलन एवं महामना पं. मदन मोहन मालवीय तथा प्रो. ए. के. नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ. प्रदर्शन कला संकाय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कुलगीत ने कार्यक्रम को गरिमामय वातावरण प्रदान किया.इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. एम. पी. अहीरवार ने स्वागत भाषण देते हुए भारतीय इतिहास के आर्थिक एवं सांस्कृतिक पुनर्निर्माण में मुद्राशास्त्र के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला जन्मशती वर्ष के अंतर्गत आयोजित होने वाला सातवाँ शैक्षणिक आयोजन है. तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों का विभागीय शिक्षकों द्वारा सम्मान किया गया. कार्यशाला की संयोजिका प्रो. मीनाक्षी सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्यों एवं रूपरेखा पर प्रकाश डाला. अमितेश्वर झा, पूर्व निदेशक, आईआईआरएनएस, नासिक ने भारत में मुद्राशास्त्र के विकास एवं प्रगति पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिक तकनीकों एवं अंतःविषयक दृष्टिकोण के बढ़ते उपयोग को रेखांकित किया.मनीष वर्मा, क्यूरेटर, हिंदुजा फाउंडेशन ने हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा 34,000 से अधिक सिक्कों के संग्रह के संरक्षण एवं संकलन कार्य की जानकारी दी. भारतीय मुद्रा परिषद् के अध्यक्ष प्रो. पी. एन. सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने संबोधन में विभाग सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों को समाज द्वारा प्रदान किए जा रहे सहयोग, शोध गतिविधियों एवं शैक्षिक कार्यक्रमों की चर्चा की. मुख्य अतिथि प्रो. कमल शील, पूर्व रेक्टरकाशी हिन्दू विश्वविद्यालयने अपने उद्बोधन में अपने पिता के एक मुद्राविद् के रूप में विद्वतापूर्ण जीवन-यात्रा का उल्लेख करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया तथा ऐसे आयोजनों की शैक्षणिक महत्ता पर बल दिया.कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने की. अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने वर्तमान समय में निम्न मूल्यवर्ग की मुद्रा के अवमूल्यन की समस्या पर विचार व्यक्त करते हुए छात्रों को मुद्रा इतिहास के प्रति गंभीर अध्ययन हेतु प्रेरित किया. कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रियंका सिंह द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ. तत्पश्चात उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी का उ‌द्घाटन किया गया, जिसमें पुरातात्विक एवं मुद्राशास्त्रीय धरोहर से संबंधित चित्रात्मक पैनलों का प्रदर्शन किया गया.also read:वाराणसी में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍टेडियम के लिए चौड़ी होंगी सडकें, भूमि अधिग्रहण शुरूइस अवसर पर विभाग के शिक्षकगण- प्रो. पी. के. श्रीवास्तव, प्रो. अर्चना शर्मा, प्रो. सुजाता गौतम, प्रो. अर्पिता चटर्जी, डॉ. विकास कुमार सिंह, डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. उमेश कुमार सिंह, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. उपेंद्र कुमार एवं डॉ. विराग गोपाल सोंटक्के सहित अन्य उपस्थित रहे.दोपहर पश्चात कार्यशाला का द्वितीय सत्र आरंभ हुआ, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठतम मुद्राविद् प्रो. ओ. एन. सिंह ने की. इस सत्र में श्री अमितेश्वर झा ने व्याख्यान प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को मुद्राशास्त्र के विविध आयामों से अवगत कराया. यह कार्यशाला देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ 22 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जाएगी, जिसमें व्याख्यान, व्यावहारिक सत्र एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्मिलित हैं.
वाराणसी में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍टेडियम के लिए चौड़ी होंगी सडकें, भूमि अधिग्रहण शुरू
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Roads to be widened for international stadium in Varanasi, land acquisition beginsवाराणसी: गंजारी में रिंग रोड के किनारे अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण तेजी से चल रहा है. इस वर्ष के अंत तक स्टेडियम तैयार होने की उम्‍मीद है. उसके बाद अगले वर्ष के प्रारंभ में कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच भी हो सकता है. मैच के दौरान क्रिकेट प्रेमियों की भारी भीड़ आएगी तब यातायात का काफी दबाव होगा. इसे देखते हुए सरकार स्टेडियम की तरफ जाने वाली सड़कें चौड़ी कर रही है. इस क्रम में दो सड़कों के चौड़ीकरण के लिए भूमि अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.डीएम सत्येंद्र कुमार का बड़ा आदेशजिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के आदेश पर भूमि अर्जन पुनर्वासन व पुनर्व्यस्थापन प्राधिकरण ने पारदर्शिता के साथ उचित प्रतिकर देने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ेगा. इसका अध्ययन किया जाएगा. इसमें पहली सड़क हरसोस-सूईचक-गंगापुर मार्ग के चैनेज 3.030 का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाना है. इसके लिए राजातालाब तहसील के प्रस्तावित ग्रामसभा हरसोस, गंजारी, सूईचक व टेकीकहार से 3.0154 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी. दूसरी सड़क लहरतारा-कोटवा-कोरउत-परमपुर-अकेलवा मार्ग है.Also read: धुरंधर 2 का हमजा अली मजारी निकला "शिवभक्त", रणवीर सिंह का खुला सीक्रेटइसके लिए चैनेज 12.00 से 14.500 तक चौड़ीकरण होना है. इसके लिए .5232 हेक्टेयर भूमि का ग्राम रामरायपुर, दयापुर, चकदीहराम, टेकीकहार एवं सुईचक से भूमि अर्जन होगा. इसके लिए भूमि का चयन कर लिया गया है. सभी भूमि सहमति और समझौते के आधार पर अर्जित की जाएगी. इसके लिए रांची की संस्था एटलस मैनेजमेंट कंसल्टिंग सर्विस प्राइवेट लिमिटेड सामाजिक प्रभाव का अध्ययन करेगी. निश्चित रूप से इन सड़कों के भविष्य में बन जाने के साथ आवागमन सुविधाजनक होगा. शहर की आवास योजनाओं के विकास व विस्तार के नए द्वार खुलेंगे.https://www.youtube.com/watch?v=cM88diRYbDs
धुरंधर 2 का हमजा अली मजारी निकला "शिवभक्त", रणवीर सिंह का खुला सीक्रेट
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Ranveer Singh's secret revealed: Hamza Ali Mazari from Dhurandhar 2 turns out to be a "Shiv bhakt"बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह इस वक्त अपनी फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' की जबरदस्त कामयाबी का लुत्फ उठा रहे हैं, जिसने हिंदी नेट बॉक्स ऑफिस पर 1000 करोड़ का क्लब बनाकर इतिहास रच दिया है. इस अनसुनी सफलता का पूरा क्रेडिट उनकी परफॉर्मेंस को दिया जा रहा है, जहां हमजा-जसकीरत की जोड़ी ने पूरे देश का दिल जीत लिया है. रणवीर अपने किरदारों में पूरी तरह डूब जाने के लिए मशहूर हैं और किसी रोल में खुद को ढालने के लिए अक्सर अपने खास तरीके और रूटीन अपनाते हैं. 'धुरंधर' के सेट पर उनकी तैयारी में आध्यात्मिकता और मेडिटेशन का मेल साफ तौर पर, जिसका खुलासा हाल ही में एक इंटरव्यू के माध्यम से किया गया है.'ओम' के जाप से करते दिन की शुरुआत इस इंटरव्यूं में बताया गया कि, 'वह सबसे पहले खुद को शांत और फोकस्ड करते थे. वह शिवजी के बड़े भक्त हैं, इसलिए अपने दिन की शुरुआत 'ओम' के जाप से करते थे. वह वर्कआउट के बाद आते थे और 'ओम' सुनते थे. जब भी हम एक घंटे का लंबा मेकअप करते थे, तो वह मेडिटेट करने की कोशिश करते थे.' ​कैमरे का सामना करने से पहले, यह आध्यात्मिक शांति धीरे-धीरे एक अलग तरह की एनर्जी में बदल जाती थी. जिन्होंने फिल्म में प्रोस्थेटिक आर्टिस्ट के तौर पर काम किया है, 'धुरंधर' के मेकअप सेशन के दौरान रणवीर के काफी करीब रहे. उनका कहना है कि मेकअप की कुर्सी पर बिताए गए वो लंबे घंटे सिर्फ लुक बदलने के लिए नहीं थे, बल्कि मानसिक रूप से 'हमजा अली मजारी' के किरदार में उतरने का भी जरिया थे.हमजा का शिवजी कनेक्शन​यही बात एक बार फिर यह दिखाती है कि अभिनेता रणवीर सिंह अपने रोल की तैयारी के लिए किस हद तक जाते हैं. आध्यात्मिक जुड़ाव से लेकर सोच-समझकर चुने गए म्यूजिक तक, रणवीर का यह तरीका अनुशासन और उनके टैलेंट का मेल है, जो उन्हें 'धुरंधर' फिल्मों में हमजा के किरदार के लिए जरूरी पावर लाने में मदद करता है.https://www.youtube.com/watch?v=IItsP4NzG8A&t=1s